सरकार विरोधी रिपोर्टिंग पर विज्ञापन बंद नही कर सकती सरकार:पीसीआई

देहरादून 27 अगस्त 2026। सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट कर चुका है कि सरकारें विज्ञापन वीतरण नीति स्वतंत्र प्रेस को नियंत्रित करने का साधन नही बना सकती। इसका अर्थ है कि सरकारों को विज्ञापन बिना किसी भेदभाव पात्र समाचार पत्रों और अन्य समाचार माध्यमों को देना होगा। इसका उल्लंघन होने पर भारतीय प्रेस काऊंसिल संबंधित सरकारों को दिशा-निर्देश करता है। काऊंसिल ने माॅडल विज्ञापन नियमावली भी जारी की है । जिन प्रदेशों की विज्ञापन नियमावली इसके अनुरूप नही है,उन्हे अपनी विज्ञापन नियमावली में छूटे बिंदुओं का समावेशन करना होगा।

यह विचार ऑल इंडिया स्माॅल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री तथा भारतीय प्रेस परिषद के पूर्व सदस्य और भारतीय प्रेस परिषद की विज्ञापन संबंधी मामलों की उपसमिति के निजी सचिव अशोक नवरत्न ने उत्तराखंड सूचना एवं लोकसंपर्क के उस व्यवहृत दृष्टिकोण के संदर्भ में व्यक्त किये कि हर अर्ह मीडिया हाउस को नियमित विज्ञापन देने को सरकार बाध्य नही है और यह पूर्णत: अधिकारियों के विवेकाधीन है।

बैठक में स्थानीय पत्रकारों ने शिकायत की कि उत्तराखण्ड सूचना तथा लोकसंपर्क विभाग आधार कार्ड आधारित आवश्यक सत्यापन में असावधान है जिससे विशेषकर प्रदेश के पत्रकारों और मीडिया हाउसेज के भाग्यविधाता राज्य से बाहर के  तत्व और निहित स्वार्थ बने हुए हैं। इससे भ्रष्टाचार का मार्ग खुल रहा है।

इसके पूर्व बीजापुर गेस्टहाउस में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन इंडिया से संबद्ध ऑल मीडिया जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (अमजा) उत्तराखंड की ओर से महामंत्री रवींद्र नाथ कौशिक) ने देहरादून आगमन पर ऑल इंडिया स्माॅल न्यूजपेपर्स एसोसिएशन के 95+ वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर त्रिपाठी, भारतीय प्रेस परिषद की सदस्य आरती त्रिपाठी तथा अरुण त्रिपाठी जी का अभिनंदन किया। साथ में हैं अमजा उत्तराखंड के कोषाध्यक्ष तथा अखिल भारतीय समाचार पत्र एसोसिएशन उत्तराखंड के महामंत्री राजकमल गोयल, ऑल इंडिया स्माॅल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री तथा भारतीय प्रेस परिषद के पूर्व सदस्य और उपसमिति के निजी सचिव अशोक नवरत्न, उत्तराखंड अध्यक्ष राजकुमार छाबड़ा, महामंत्री सोमपाल सिंह, दिल्ली के पत्रकार सौरभ वार्ष्णेय आदि।
सभी अतिथि पत्रकार टीम भारतीय प्रेस परिषद की विज्ञापन संबंधी मामलों की उपसमिति के सदस्य के रुप में संयोजक सरदार गुरिंदर सिंह के नेतृत्व में प्रकाशकों की समस्याओं का अध्ययन तथा विमर्श को 4 दिवसीय प्रवास(23 से 26 अगस्त 2026 ) पर आये थे। अमजा प्रतिनिधियों की विषय पर प्रेस परिषद उपसमिति से अलग से वार्ता संभव हो पाई और हम अपने बिंदू तसल्ली से उसके सामने रख पाये।
संयोजक सरदार श्री गुरिंदर सिंह की दिल्ली वापसी आज प्रात: ही हो गई थी तो उनसे हमारी भेंट नही हो पाई।

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