20 हजार करोड़ नही,₹3,992 करोड़ क्लेम से ₹620 करोड़ सेटल हो चुके, लेनदारों को ₹1,063 करोड़ भुगतान का दे रखा है ऑफर:सुभाष चंद्रा
NCLT मामले में डॉक्टर सुभाष चंद्रा का बयान: ‘₹22,000 Cr के लोन गारंटी की बात गलत, लेनदारों से एक रुपया भी कर्ज नहीं लिया’
NCLT मामले पर डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने स्थिति साफ करते हुए ₹22,000 करोड़ के दावे को भ्रामक बताया. जानिए क्यों कंपनियों की तरफ से ₹43,000 करोड़ चुकाए जाने के बाद अब सिर्फ ₹3,992 करोड़ का क्लेम बाकी है और NCLT का अगला कदम क्या होगा.
NCLT मामले में डॉक्टर सुभाष चंद्रा का बयान: ‘₹22,000 Cr के लोन गारंटी की बात गलत, लेनदारों से एक रुपया भी कर्ज नहीं लिया’
NCLT मामले पर डॉक्टर सुभाष चंद्रा ने स्थिति साफ करते हुए ₹22,000 करोड़ के दावे को भ्रामक बताया. (फाइल फोटो)
Dr. Subhash Chandra on NCLT Case: डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने खिलाफ चल रही व्यक्तिगत दिवालिया कार्यवाही को लेकर सामने आ रही मीडिया रिपोर्टों पर बयान जारी किया है. 27 अगस्त 2026 को उनके कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म मामले से जुड़े आंकड़ों को सही संदर्भ के बिना पेश कर रहे हैं.
डॉक्टर चंद्रा ने सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से अपील की है कि NCLT के आदेश और मामले से जुड़े दस्तावेजों को पूरा पढ़कर ही खबर प्रकाशित की जाए. उनका कहना है कि ₹22,000 करोड़ को उनका व्यक्तिगत कर्ज बताना पूरी तरह गलत है. डॉ. चंद्रा के मुताबिक उन्होंने किसी भी लेनदार से व्यक्तिगत तौर पर कोई कर्ज नहीं लिया. वह केवल पर्सनल गारंटर रहे हैं.
₹22,000 करोड़ का आंकड़ा किसका है?
प्रेस रिलीज के मुताबिक, करीब ₹22,000 करोड़ की राशि अलग-अलग कंपनियों के कर्ज के लिए दी गई पर्सनल गारंटी से जुड़ी है. बयान में कहा गया है कि मामले में कुल दाखिल दावे ₹22,006 करोड़ के थे, जबकि ₹21,696 करोड़ के दावे स्वीकार किए गए. डॉक्टर चंद्रा के कार्यालय की तरफ से साफ किया गया है कि इन आंकड़ों को उनका व्यक्तिगत कर्ज बताना सही नहीं है. यानी जिस रकम को कुछ रिपोर्टों में सीधे डॉ. चंद्रा की देनदारी के तौर पर पेश किया गया, उसका संदर्भ कंपनियों की तरफ से लिए गए कर्ज और उनके लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है.
डॉक्टर चंद्रा पर व्यक्तिगत गारंटी का क्लेम कितना है?
प्रेस रिलीज में बताया गया है कि रिपेमेंट प्लान का विरोध करने वाले लेनदारों की तरफ से डॉक्टर चंद्रा के खिलाफ कुल ₹3,992 करोड़ का क्लेम किया गया है.इसमें से ₹620 करोड़ का क्लेम पहले ही सेटल हो चुका है.इसके अलावा लेनदारों को करीब ₹1,063 करोड़ का और सेटलमेंट ऑफर दिया जा चुका है. डॉक्टर चंद्रा के कार्यालय का कहना है कि इसलिए ₹22,000 करोड़ के आंकड़े को सीधे उनके व्यक्तिगत क्लेम के तौर पर पेश करना मामले की पूरी तस्वीर नहीं बताता.
2019 में कंपनियों पर ₹45,000 करोड़ का बकाया था
प्रेस रिलीज में 24 जनवरी 2019 की स्थिति का भी जिक्र किया गया है. इसके मुताबिक, उस समय संबंधित कंपनियों पर कुल बकाया करीब ₹45,000 करोड़ था. बयान में कहा गया है कि इसके बाद संबंधित उधार लेने वाली कंपनियों ने अब तक करीब ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर दिया है. यानी डॉक्टर चंद्रा के कार्यालय के मुताबिक, पिछले साल में बड़ी राशि का भुगतान किया जा चुका है. साथ ही उधार लेने वाली कंपनियों ने बाकी बची रकम को भी सेटल करने का भरोसा दिया है.
पर्सनल गारंटी और व्यक्तिगत कर्ज में क्या फर्क है?
डॉक्टर चंद्रा के कार्यालय की ओर से जारी सफाई का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है. बयान के मुताबिक, डॉक्टर चंद्रा ने खुद किसी लेनदार से पैसा उधार नहीं लिया था. उन्होंने अलग-अलग कंपनियों के कर्ज को व्यक्तिगत गारंटी दी थी. यानी कंपनियां मूल उधार लेने वाली इकाइयां थीं. प्रेस रिलीज में यह भी कहा गया है कि 24 जनवरी 2019 बाद डॉक्टर चंद्रा की कई व्यक्तिगत गारंटी पर भी सवाल उठे हैं. उनके अनुसार तब कई लेनदारों ने कंपनियों के कर्मचारियों के हित में उनसे व्यक्तिगत गारंटी देने का आग्रह किया था.
80.814% लेनदारों ने रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी
प्रेस रिलीज में यह भी बताया गया है कि रिपेमेंट प्लान को 80.814% लेनदारों का समर्थन मिला था. बयान के मुताबिक, जब रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने प्लान को वोटिंग के लिए रखा तो इतनी हिस्सेदारी वाले लेनदारों ने इसे मंजूरी दी. बाकी लेनदारों में से कुछ ने योजना पर आपत्ति जताई और मामला आगे बढ़ा. डॉक्टर चंद्रा के कार्यालय का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को देखते समय केवल कुल दावों का आंकड़ा दिखाना पर्याप्त नहीं है. योजना को मिले समर्थन और अलग-अलग लेनदारों की स्थिति को भी सामने रखना जरूरी है.
₹45,888 करोड़ की नेटवर्थ के दावे पर भी सवाल
प्रेस रिलीज में डॉक्टर चंद्रा की नेटवर्थ को लेकर सामने आए एक आंकड़े पर भी सफाई दी गई है. बयान के मुताबिक एक लेनदार की तरफ से यह दावा किया गया कि 2017 में डॉक्टर चंद्रा की नेटवर्थ ₹45,888 करोड़ थी. डॉक्टर चंद्रा के कार्यालय ने इसे गलत बताया है. बयान में कहा गया है कि यह आंकड़ा Essel Group की अलग-अलग कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन को डॉक्टर चंद्रा की व्यक्तिगत नेटवर्थ मानकर निकाला गया.
प्रेस रिलीज के मुताबिक डॉक्टर चंद्रा ने 2016 में संसद में अपनी कुल संपत्ति ₹39.08 करोड़ घोषित की थी. बयान में कहा गया है कि यह सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा है. सवाल उठाया गया है कि अगर 2016 में संसद में घोषित व्यक्तिगत संपत्ति ₹39.08 करोड़ थी तो 2017 में ₹45,888 करोड़ की व्यक्तिगत नेटवर्थ का दावा कैसे किया जा सकता है.
2024 में व्यक्तिगत नेटवर्थ ₹31.79 करोड़ बताई गई
प्रेस रिलीज के मुताबिक, मामले में रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को दाखिल जानकारी में डॉक्टर चंद्रा की व्यक्तिगत नेटवर्थ ₹31.79 करोड़ बताई गई. बयान में कहा गया है कि इसमें करीब ₹25 करोड़ का एक आवासीय मकान भी शामिल है. प्रेस रिलीज के मुताबिक डॉक्टर चंद्रा ने कुछ मौकों पर अपनी व्यक्तिगत रकम से कर्मचारियों की सैलरी भुगतान भी किया,जब संबंधित कंपनियां वेतन देने की स्थिति में नहीं थीं.इसी से,बयान के अनुसार,उनकी व्यक्तिगत संपत्ति 2016 में घोषित ₹39.08 करोड़ से घटकर 2024 में ₹31.79 करोड़ रह गई.
₹6.5 करोड़ का रिपेमेंट प्लान क्यों?
प्रेस रिलीज में कहा गया है कि डॉक्टर चंद्रा के पास मौजूद व्यक्तिगत संपत्ति को देखते हुए ₹6.5 करोड़ का रिपेमेंट प्लान तैयार किया गया है. बयान के मुताबिक उनकी व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर ही यह योजना बनाई गई है. इसलिए कार्यालय का कहना है कि इसे कंपनियों की कुल देनदारी या कुल गारंटी राशि के बराबर समझना सही नहीं होगा.
डॉक्टर चंद्रा ने मीडिया से क्या अपील की?
डॉक्टर चंद्रा ने कहा है कि पिछले दो दिनों में सामने आई कुछ रिपोर्टों में मामले के चुनिंदा हिस्सों को लेकर तस्वीर पेश की गई है. उनका कहना है कि कुल दावे, स्वीकार किए गए दावे, व्यक्तिगत गारंटी, सेटल हो चुके क्लेम और कंपनियों की तरफ से किए गए भुगतान- इन सभी को अलग-अलग समझना जरूरी है. उन्होंने मीडिया प्लेटफॉर्म से आग्रह किया है कि कोर्ट के आदेश को पूरी तरह पढ़ें और उसके बाद ही खबर प्रकाशित करें. उनके कार्यालय के मुताबिक मामले में कई आंकड़े क्लेम दाखिल किए जाने के समय के हैं, इसलिए उन्हें मौजूदा स्थिति बताने वाले आंकड़ों की तरह पेश करना सही नहीं है.


