2028 तक AI से बाज़ार में बर्बादी? ChatGPT को टक्कर देने वाला Claude क्या है?
ChatGPT को टक्कर देने वाला Claude क्या है?
Anthropic कंपनी ने Claude AI बनाया है। उसका दावा है कि अमेरिकी सरकार AI का ‘दुरुपयोग’ करना चाहती थी। सरकार Claude का इस्तेमाल दो कामों के लिए करना चाहती थी।
मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।
अमेरिका के ऐप स्टोर में उलटफेर हो गया है। Claude पिछले हफ़्ते भर से सबसे ज़्यादा डाउनलोड होने वाला ऐप बन गया। ChatGPT नीचे चला गया। यह उलटफेर कैसे हुआ? इसके पीछे की कहानी समझेंगे हिसाब किताब में।
Anthropic ने सरकार को ‘ना’ कह दिया
Anthropic कंपनी ने Claude AI बनाया है। उसका दावा है कि अमेरिकी सरकार AI का ‘दुरुपयोग’ करना चाहती थी। उसके मुताबिक़ सरकार Claude का इस्तेमाल दो कामों के लिए करना चाहती थी। पहला, अपने ही नागरिकों की निगरानी में। दूसरा, स्वचालित हथियार बनाने में। Anthropic ने साफ़ मना कर दिया। करार टूट गया। सरकार ने OpenAI से नया करार कर लिया। जैसे ही क़रार बनने बिगड़ने की ख़बर बाहर आई, लोगों में ग़ुस्सा फूट पड़ा। OpenAI का ChatGPT अनइंस्टॉल होने लगा, Claude इंस्टॉल होने लगा।
यह टकराव पुराना है
Anthropic और OpenAI की रंजिश नई नहीं है। Claude के संस्थापक डारियो अमोडेई पहले OpenAI में सैम ऑल्टमैन के साथ काम करते थे। 2021 में उन्होंने OpenAI छोड़ा। उनकी चिंता थी कि कंपनी पैसे बनाने की जल्दबाज़ी में AI की सुरक्षा को नज़रअंदाज़ कर रही है। Anthropic की नींव इसी असहमति पर रखी गई है। कंपनी एक लिखित AI संविधान के तहत काम करती है। सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है।
तो Claude है क्या?
इसे ऐसे समझिए.अगर ChatGPT आपका PA है जो ईमेल लिख दे, सवालों के जवाब दे, छोटे-मोटे काम निपटा दे तो Claude एक रिसर्च एनालिस्ट की तरह है। जटिल विश्लेषण, क़ानूनी दस्तावेज़, गहरी रिसर्च कर सकता है। ChatGPT के मुक़ाबले Claude के यूज़र्स बेहद कम हैं। Claude अनुमानित यूज़र्स 2-3 करोड़ है जबकि ChatGPT के 70-80 करोड़ लेकिन रेवेन्यू का फ़ासला उतना नहीं। ChatGPT का अनुमानित रेवेन्यू 25 बिलियन डॉलर है, Claude का 14 बिलियन डॉलर। ChatGPT का फ़ोकस आम उपभोक्ता है, Claude का कंपनियों पर और कंपनियाँ ज़्यादा पैसे देती हैं।
शेयर बाज़ार भी हिला
Claude सिर्फ़ ChatGPT को नहीं, पूरे सेक्टर को चुनौती दे रहा है। Claude का Co Work फ़ीचर उन सॉफ़्टवेयर कंपनियों के लिए ख़तरा बन रहा है जो अब तक कोडिंग का काम इंसानों से करवाती थीं। क़ानूनी काम में भी यह तेज़ी से जगह बना रहा है। इन सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में गिरावट इसी डर की वजह से हुई है। AI की दुनिया में Claude को Apple की तरह देखा जा रहा है। कम यूज़र्स, लेकिन ज़्यादा कमाई। ChatGPT अभी भी दुनिया का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला AI है लेकिन पहली बार कोई उसे सच में टक्कर दे रहा है।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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2028 तक AI से बाज़ार में बर्बादी?
अमेरिका में 100 में से 10 लोग जो white collar jobs करते हैं वो कुल खपत का 50% खर्च करते हैं। उदाहरण दिया गया है कि डेटा सेंटर में काम कर रहे एजेंट काम तो करेंगे लेकिन वो खर्च नहीं करेंगें।
मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक।
जैक डोर्सी, जिन्होंने Twitter बनाया था और आज Block नाम की फिनटेक कंपनी चला रहे हैं, उन्होंने हाल ही में अपनी कंपनी से चार हज़ार कर्मचारियों की छँटनी कर दी, यह कहते हुए कि अब उनका काम एआई कर सकता है जबकि कंपनी मुनाफ़े में है और पिछले सप्ताह तक वहाँ लगभग दस हज़ार लोग काम कर रहे थे, फिर भी इस घोषणा के बाद Block के शेयर 20% तक उछल गए।
जिससे बाज़ार की मानसिकता साफ दिखती है कि कम खर्च में वही काम होना निवेशकों को उत्साहित करता है। इसी संदर्भ में अमेरिकी रिसर्च फर्म Citrini की एक काल्पनिक लेकिन भविष्य-आधारित रिपोर्ट चर्चा में है, जो जून 2028 की अनुमानित स्थिति पर आधारित है और जिसके सार्वजनिक होने के बाद सोमवार को शेयर बाज़ार में गिरावट देखी गई।
रिपोर्ट के अनुसार 2026 के रिकॉर्ड स्तर से S&P 500 38% नीचे होगा, अमेरिका में बेरोज़गारी दर 10% तक पहुँच सकती है और 2027 से अर्थव्यवस्था मंदी में जा सकती है, और इस पूरे संकट की जड़ एआई होगी। रिपोर्ट कहती है कि एआई एजेंट ऑफिस में होने वाली व्हाइट कॉलर नौकरियाँ करने लगेंगे, कंपनियाँ बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को निकालेंगी, बेरोज़गार लोग खर्च घटाएँगे, जिससे सामान और सेवाओं की बिक्री गिरेगी।
अमेरिका में 100 में से 10 व्हाइट कॉलर कर्मचारी कुल खपत का 50% खर्च करते हैं, लेकिन एआई एजेंट काम तो करेंगे पर उपभोग नहीं करेंगे, नतीजा यह कि अर्थव्यवस्था दुश्चक्र में फँस जाएगी। बिक्री घटेगी तो और छँटनी होगी, टैक्स कलेक्शन घटेगा तो सरकारें भी संकट से उबरने में संघर्ष करेंगी। Citrini का अनुमान है कि सॉफ़्टवेयर कंपनियाँ, पेमेंट कंपनियाँ जैसे Visa और Mastercard, डिलीवरी ऐप्स, ट्रैवल बुकिंग प्लेटफॉर्म और भारतीय आईटी कंपनियाँ जैसे TCS, Infosys और Wipro भी प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि Raghuram Rajan इस आकलन को अतिशयोक्ति मानते हैं और ऑटोमेटिक टेलीफोन एक्सचेंज का उदाहरण देते हैं। तकनीक 1920 के आसपास आ गई थी, लेकिन पूरी तरह लागू होने में 50-60 साल लगे। उनके अनुसार एआई बदलाव लाएगा, पर दो साल में व्यापक विनाश की आशंका कम है। फिर भी जब जैक डोर्सी एक झटके में चार हज़ार लोगों को निकाल देते हैं और बाज़ार जश्न मनाता है, तो यह डर पैदा होता है कि कहीं शुरुआती लाभ का उत्साह आगे चलकर व्यापक आर्थिक संकट में न बदल जाए।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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