देहरादून में ‘जिहादी ड्रग’ की हाईटेक लैब,रोज 50 हजार कमा रहा था मालिक, 227KG कैप्टागॉन मिला

Captagon Drug: NCB ने ऑपरेशन RAZEPIL में देश के पहले और सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कैप्टागन ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड किया है. दिल्ली में 227.2 किलो ‘जिहादी ड्रग’ मिलने के बाद देहरादून की एक सीक्रेट हाईटेक लैब सील कर उसका मालिक पकड़ा  गया है. इस मामले में कई बड़े अनावरण हुए हैं.

Drug Cartel Busted: Inside Uttarakhand’s High-Tech Lab Manufacturing ‘Jihadi Drug’ Captagon.
‘ऑपरेशन RAGEPILL’ में NCB ने दिल्ली से 227.2 किलो कैप्टागॉन टैबलेट और पाउडर यानी ‘जिहादी ड्रग’ पकड़ा. यह ‘जिहादी ड्रग’ देहरादून की एक ग्रीन हर्बल हाईटेक फैक्ट्री में साल 2025 में तैयार हुआ था. फैक्ट्री में ड्रग तैयार करने को उसका मालिक हर दिन 50 हजार रुपये वसूल रहा था. आरोपित फैक्ट्री मालिक का नाम इससे पहले भी ड्रग से जुड़े मामलों में आ चुका है. पकड़ा  ड्रग अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई की तैयारी थी.

दरअसल, NCB (Narcotics Control Bureau) ने दिल्ली के नेब सराय इलाके से 227.2 किलो कैप्टागन (जिसे ‘जिहादी ड्रग’ कहा जाता है) की बड़ी खेप पकड़ी. इसमें पकड़े  गए सीरियाई नागरिक ने पूछताछ में बड़े भेद बताये. उसने बताया- मिला कैप्टागॉन टैबलेट्स नवंबर 2025 में देहरादून की “एम/एस ग्रीन हर्बल”  फैक्ट्री में तैयार हुई थीं. उसने अपने एक अन्य सीरियाई साथी के साथ मिलकर फैक्ट्री में कैप्टागॉन ड्रग बनाया ।

कैप्टागॉन बनाने को हाईटेक फैक्ट्री
इस अनावरण  बाद NCB टीम ने 16 मई 2026 रात देहरादून, उत्तराखंड स्थित फैक्ट्री परिसर में छापा मारा. जांच में एजेंसी अधिकारियों को फैक्ट्री में हाईटेक मशीनरी मिली. फैक्ट्री में टैबलेट बनाने की मशीनें, ग्रेनुलेशन यूनिट, कैप्सूल फिलिंग मशीन, कोटिंग मशीन, सीलिंग और ब्लिस्टर पैकेजिंग मशीनें थीं. इसके अलावा बड़ी मात्रा में केमिकल, कच्चा माल, कैप्सूल और पैकेजिंग सामग्री भी मिली. जांच एजेंसियों का मानना है कि फैक्ट्री का अवैध ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की तरह  दुरुपयोग हो रहा था.

हर दिन 50 हजार वसूलता था फैक्ट्री मालिक
जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री मालिक कथित तौर पर हर दिन 50 हजार रुपये लेकर कैप्टागॉन बनाने को अपनी फैक्ट्री उपलब्ध कराता था. एजेंसी के अनुसार, फैक्ट्री मालिक का नाम पहले भी ड्रग्स से जुड़े 2 मामलों में आया है. इनमें से एक मामला देहरादून पुलिस और दूसरा NCB दिल्ली जोनल यूनिट का है, जो ट्रामाडोल और अन्य NRx दवाओं की सप्लाई से जुड़े हैं.

किन-किन देशों में भेजा जाना था कैप्टागॉन?
NCB ने फैक्ट्री मालिक समेत दो आरोपित पकडे जा चुके हैं. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के तार किन-किन देशों और भारत के किन राज्यों से जुड़े हुए हैं. यह भी जांच हो रही है कि पकड़ा गया कैप्टागॉन किन देशों में भेजा जाना था, इसके पीछे कौन सा अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट सक्रिय है.

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