अंकिता भंडारी केस: सीबीआई का उर्मिला सनावर को नार्को टेस्ट का नोटिस

अंकिता भंडारी मर्डर केस: उर्मिला सनावर को सीबीआई ने थमाया नोटिस, जल्द होगा नार्को टेस्ट

अंकिता भंडारी मर्डर केस में तेजी से जांच कर रही सीबीआई, उर्मिला की पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की प्रक्रिया तेज, सीबीआई ने दिया नोटिस
URMILA SANAWAR NARCO TEST
दिवंगत अंकिता भंडारी/उर्मिला सनावर (फोटो सोर्स-
देहरादून: बहुचर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है. इसी कड़ी में सीबीआई की टीम अभिनेत्री उर्मिला सनावर के सहारनपुर स्थिति आवास पहुंची. जहां कोर्ट में पेश होने के लिए उर्मिला को नोटिस दिया थमाया. जिसके बाद अब उर्मिला की पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है.

23 अक्टूबर को देहरादून सीबीआई कोर्ट में होगी पेशी: जानकारी के मुताबिक, सीबीआई यानी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की टीम तीसरी बार उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित उर्मिला सनावर के आवास पर पहुंची. जहां सीबीआई ने उर्मिला को अदालत में पेश होने के लिए आधिकारिक रूप से नोटिस सौंपा. नोटिस की मानें तो उर्मिला सनावर को आगामी 23 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे देहरादून स्थित सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा गया है.

अभिनेत्री उर्मिला सनावर
देहरादून के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह भंडारी की तरफ से यह नोटिस 21 अक्टूबर को जारी किया गया है. अदालत में मुख्य रूप से यह स्पष्ट किया जाएगा कि उर्मिला सनावर पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट के लिए अपनी इच्छा से सहमति दे रही हैं या नहीं. कोर्ट ये भी सुनिश्चित करेगा कि उनकी तरफ से भरी जाने वाली हामी किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी, लालच या अनुचित प्रभाव में न दी गई हो.

बता दें कि सीबीआई की दिल्ली स्थित विशेष जांच शाखा 2 की ओर से मामले की जांच की जा रही है. इस कानूनी प्रक्रिया में भारतीय न्याय संहिता 2023 की कई अहम धाराओं का जिक्र किया गया है. जिसके आधार पर जांच की दिशा तय करने के साथ ही आगे बढ़ाई जा रही है.

गौर हो कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर तमाम सवाल उठते आ रहे हैं. उर्मिला सनावर से जुड़े कुछ कथित ऑडियो और वीडियो क्लिप सामने आने के बाद इस प्रकरण ने फिर से तूल पकड़ा था. पूरे प्रदेशभर में एकाएक प्रदर्शन शुरू हो गया था. इतना ही नहीं सीएम आवास तक कूच किया गया. आखिरकार 9 जुलाई 2026 को सीएम धामी ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति दे डाली. जिसके बाद से ही सीबीआई मामले की जांच कर रही है.
सहमति बिना संभव नही

नार्को टेस्ट (Narco Analysis Test) के लिए व्यक्ति की सहमति अनिवार्य है। बिना सहमति के किसी भी व्यक्ति पर जबरन यह परीक्षण नहीं कराया जा सकता।
भारतीय कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों में इसके मुख्य कानूनी पहलू:
* सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (Selvi v. State of Karnataka, 2010): सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की बेंच ने स्पष्ट रूप से व्यवस्था दी थी कि किसी भी आरोपी या गवाह पर जबरन नार्को एनालिसिस, पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) या ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराना असंवैधानिक और अवैध है।
* अनुच्छेद 20(3) का उल्लंघन: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 20(3) किसी भी व्यक्ति को खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य किए जाने से सुरक्षा प्रदान करता है (Right against self-incrimination)। जबरन नार्को टेस्ट इस अधिकार का उल्लंघन माना गया है।
* अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता): जबरन रसायनों के माध्यम से किसी व्यक्ति के अवचेतन मन से जानकारी निकालना उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानसिक निजता के अधिकार का हनन है।
* सहमति की प्रक्रिया:
* व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाता है, जहाँ उसे परीक्षण के स्वास्थ्य, मानसिक और कानूनी प्रभावों के बारे में बताया जाता है।
* सहमति पूरी तरह स्वैच्छिक होनी चाहिए और मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज होनी चाहिए।
* इस प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति को कानूनी सहायता (वकील रखने) का अधिकार होता है।
* अदालत में स्वीकार्यता (Admissibility in Court): नार्को टेस्ट के दौरान दिए गए बयानों को सीधे अदालत में प्राथमिक साक्ष्य (Confession) के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता। हाँ, यदि उस बयान के आधार पर कोई वास्तविक सबूत या वस्तु (जैसे हथियार, दस्तावेज आदि) बरामद होती है, तो उस बरामदगी को साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत मान्य माना जा सकता है।

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