भारत में चीनी उत्पादन जितनी ही खपत, त्यौहारों में 10साल बाद आयात
चीनी क्यों हुई महंगी? जितना उत्पादन, उतनी ही खपत… फिर क्या ये खेल!
दुनिया में भारत चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन एक दिक्कत ये है कि भारत में ही लगभग सभी उत्पादन की चीनी खपत हो जाती है. वहीं अब एक छोटी मात्रा इथेनॉल में भी यूज की जा रही है.
इथेनॉल ने बढ़ाए चीनी के दाम?
नई दिल्ली,21 अगस्त 2026,केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है और 31 अक्टूबर 2026 तक बिना किसी ड्यूटी के 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी दी है. चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए त्योहारी सीजन से पहले ये कदम उठाया गया है. जबकि आलोचकों का कहना है कि इथेनॉल बनाने के कारण चीनी की कमी हुई है, जिस कारण चीनी की कीमतें बढ़ी हैं और अब आयात किया जा रहा है.
चीनी को लेकर राजनीति जोड़ पकड़ने के कारण ज्यादातर लोग ये जानना चाहते हैं कि भारत आखिरी चीनी का उत्पादन कितना करता है, आयात कितना होता है और भारत में इसकी खपत कितनी है । यहां एक एक करके सभी आंकड़े पेश किए गए हैं.
भारत में चीनी का बड़ा उत्पादक
भारत में चीनी का बड़े लेवल पर उत्पादन होता है. यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है. महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश तक बड़ी मात्रा में शुगर का उत्पादन करते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल एवरेज 300 से 350 लाख मीट्रिक टन (300 से 350 लाख टन) कुल चीनी उत्पादन होता है.
भारत में हर साल चीनी का उत्पादन और इथेनॉल में यूज
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2023-240 में 340 लाख टन चीनी आयात हुआ था, जिसमें से 22 लाख टन इथेनॉल को यूज किया गया था.
इसी तरह, साल 2024-25 में 297 लाख टन चीनी उत्पादन किया गया था, 17 लाख टन इथेनॉल में डॉयवर्ट किया गया था. वहीं साल 2025-26 में अभी तक 324 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है और 31 लाख टन तक इथेनॉल में यूज किया गया है. ऐसे में देखा जाए तो चीनी उत्पादन का बहुत कम हिस्सा इथेनॉल में यूज किया जा रहा है.
कितना होता है खपत?
भारत एक बड़े लेवल पर चीनी का उत्पादन करता है, लेकिन लगभग उतना ही खपत भी खुद ही कर लेता है. जिस कारण कई बार चीनी का उत्पादन कम होने से उसे दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है. भारत में हर साल चीनी की घरेलू खपत लगभग 280 से 285 लाख टन है. वर्तमान सीजन (2025-26) में शुद्ध उत्पादन (279 लाख टन) खपत से मामूली रूप से कम रहने से ही सरकार को आपातकालीन आयात का फैसला लेना पड़ा है.
गन्ना क्षेत्रफल कितना ?
चालू सीजन में भारत लगभग 57.4 लाख हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती की है. जिसमें से सबसे ज्यादा गन्ने की खेती उत्तर प्रदेश में हुई है . इसके बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रदेश आते हैं. इन तीनों जगहों को मिला दिया जाए तो भारत का 80 प्रतिशत चीनी का उत्पादन यहीं से होता है.
पिछले 10 साल नहीं हुआ चीनी का आयात
भारत दूसरे देश से चीनी आयात करने पर 100 फीसदी की ड्यूटी लगाता है, जिस कारण में चीनी आयात ‘शून्य’ हो जाता है. पिछले 10 सालों से भारत ने चीनी का आयात नहीं किया था. उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, आखिरी बार साल 2016-17 में चीनी की कीमतों में तेजी के कारण आयात करना पड़ा था, क्योंकि उस साल देश में सूखा पड़ा था और गन्ने का उत्पादन बहुत कम हो गया था.
कितनी चीनी निर्यात करता है भारत?
भारत चीनी का निर्यात बहुत कम करता है. भारत सरकार ने 2025-26 मार्केटिंग सीजन के लिए 20 लाख टन (2 मिलियन टन) चीनी के निर्यात की अनुति दी है. यह चीनी प्रमुख तौर पर अफ्रीकी और एशियाई देशों जैसे सोमालिया, सूडान और जिबूती को भेजी जाएगी.
चीनी की कीमत
शुगर की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिली है. 20 अगस्त तक महाराष्ट्र में चीनी की अधिकतम कीमत 4850 / क्विंटल थी. वहीं असम की मंडी में चीनी की कीमत सबसे ज्यादा 5600 रुपये प्रति क्विंटल रही. जयपुर की मंड़ी में चीनी की कीमत 4475 रुपये प्रति क्विंटल रही. ऐसे में देखा जाए तो चीनी की कीमत पिछले एक महीने में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है.
Modi Govt Action: नहीं चलेगी जमाखोरी… चीनी पर सरकार का बड़ा एक्शन, लगा दी स्टॉक लिमिट
केंद्र सरकार ने चीनी कारोबारियों की स्टॉक लिमिट बदली है । इसे 30 दिन से घटाकर अब सिर्फ 15 दिन कर दिया है. चीनी की जमाखोरी रोकने को सरकार ने ये कदम उठाया है.
फेस्टिव सीजन से पहले मोदी सरकार ने चीनी की जमाखोरी पर लगाम लगाने को कमर कस तगड़ा एक्शन ले लिया है. चीनी स्टॉक को लेकर कठोरता से केंद्र ने लिमिट घटा दी है और साफ कहा है कि चीनी का सिर्फ 15 दिन का स्टॉक ही रखा जा सकता है. ये आदेश 1 सितंबर से लागू हो जाएगा. डीलर और कारोबारी महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी व्यापार करते हैं, वे अब नई लिमिट से ज्यादा स्टॉक जमा करके नहीं रख सकेंगें.
गौरतलब है कि सरकार ने पहली अगस्त को चीनी डीलरशिप को 30 दिनों की स्टॉक लिमिट सेट की थी । अब इसे घटा 15 दिन करने की घोषणा की है. त्योहारी सीजन और लगातार बढ़ती चीनी कीमतों को लेकर इसकी जमाखोरी रोकने को केंद्र सरकार एक्शन मोड में आ रही है. थोक खरीदारों की Sugar Stock Limit घटी है.
30 नवंबर तक लागू, असर कहां-कहां?
नई लिमिट के अनुसार, अब महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक व्यापारियों और डीलरशिप 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेंगें. 1 सितंबर से लागू होकर ये नया नियम 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा. इसके दायरे में कन्फेक्शनरी, सॉफ्ट ड्रिंक निर्माता, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, मिठाई विक्रेता शामिल हैं.
सरकार की रहेगी पैनी नजर
चीनी स्टॉक रखने की लिमिट में इस बदलाव के साथ ही सरकार की पैनी नजर व्यापारियों पर रहेगी और इनकी पहचान तमाम मानकों के आधार पर होगी. इनमें पिछले एक साल की औसत मासिक खपत के आधार पर पहचान होगी. तो वहीं चीनी मिलों से Bulk Consumers को सीधे या Dealers से होने वाली बिक्री की निगरानी भी होगी. जीएसटी रिटर्न (GST Returns) और चीनी के HSN Code के आधार पर बिक्री और खपत का वेरिफिकेशन होगा.
चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
त्योहारी सीजन से पहले उठाया गया केंद्र सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि अगस्त-नवंबर में चीनी की डिमांड में तेज वृद्धि होती है । हाल का ही डेटा देखें,तो Sugar Price रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा है.मात्र एक महीने में चीनी की रिटेल कीमत में 13-14 प्रतिशत की तेजी दिखी है.
चीनी स्टॉक की लिमिट को लेकर किए गए इस बदलाव पर सरकार का उद्देश्य चीनी की जमाखोरी रोकना, उपलब्धता बढ़ाना और कीमतें नियंत्रित रखना है. केंद्र और राज्य सरकार,केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूद प्रशासनिक और लोकल संस्थाएं इस आदेश से बाहर रहेंगी.


