सर्वदलीय बैठक से भी कांग्रेस गायब,बसपा के दो दिनी अधिवेशन पर सवाल

गैरसैंण सत्र से पहले सियासी घमासान, सर्वदलीय बैठक से कांग्रेस गायब, बसपा ने भी उठाए सवाल

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा- जनप्रतिनिधि को बैठक में आने को बाध्य नहीं किया जा सकता.
GAIRSAIN ASSEMBLY SESSION देहरादून में सर्वदलीय बैठक
देहरादून 24 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड विधानसभा के 27 अक्टूबर से गैरसैंण के भराड़ीसैंण में शुरू होने वाले सत्र से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. आज विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी की अध्यक्षता में यमुना कॉलोनी स्थित उनके सरकारी आवास पर कार्यमंत्रणा समिति और सर्वदलीय बैठक आयोजित हुई. दोनों ही बैठकों में कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ. इसको लेकर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खण्डूडी और संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने अपनी बात रखी. बसपा विधायक शहजाद अली ने सत्रावधि पर सवाल खड़े किये. उन्होंने सरकार पर जनता के विषयों से बचने का आरोप लगाया.

कांग्रेस की अनुपस्थिति पर सवाल: बैठक बाद विधानसभाध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने कहा कि विधानसभा सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक और कार्यमंत्रणा समिति की बैठक स्थापित संसदीय परंपरा है. सभी संबंधित सदस्यों को विधानसभा सचिवालय से लिखित पत्र भेजे जाते हैं और फोन से भी सूचना दी जाती है. इसके बावजूद कोई सदस्य बैठक में नहीं आता, तो यह उसका अपना निर्णय है.

देहरादून में सर्वदलीय बैठक
उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को बैठक में आने को बाध्य नहीं किया जा सकता.विधानसभाध्यक्ष ने सभी दलों से संसदीय परंपराओं और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की.उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल राजनीतिक बयानबाजी का मंच नहीं है,बल्कि जनता की समस्यायें उठाने और सरकार से जवाब मांगने का महत्वपूर्ण स्थान है.प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विषय सदन में रखने चाहिए.

उन्होंने सभी विधायकों से अपील की कि गैरसैंण सत्र को शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से चलाने में सहयोग करें. पूरे देश और दुनिया की नजर उत्तराखंड पर रहती है. इसलिए जनप्रतिनिधियों का आचरण भी जिम्मेदारी भरा होना चाहिए.

दो दिवसीय सत्र में बजट और विधायी कार्य: संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि कार्यमंत्रणा समिति बैठक में सत्र के कामकाज पर चर्चा हुई. 27 अक्टूबर से सत्र में पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी. फिर मुख्यमंत्री सदन में अंतरिम बजट रखेंगें. सरकार के जरूरी विधायी कार्य भी रखे जाएंगे. दूसरे दिन प्रश्नकाल, बजट पारित कराने और अन्य विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने की योजना है.

कांग्रेस नेताओं की अनुपस्थिति पर संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उनकी वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह से फोन पर बातचीत हुई. प्रीतम सिंह ने उन्हें अपने पहले से तय राजनीतिक कार्यक्रमों के चलते त्यूणी क्षेत्र में व्यस्त होने की जानकारी दी. कांग्रेस नेता यशपाल आर्य से संपर्क का प्रयास किया गया,लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई.मंत्री उनियाल ने कहा कि विपक्ष की भागीदारी से सदन चलाना सरकार की प्राथमिकता है. सभी दलों को इसमें सहयोग करना चाहिए.

बसपा विधायक शहजाद बोले: बैठक में बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद ने सत्रावधि को लेकर सरकार पर निशाना साधा.उन्होंने कहा कि दो दिवसीय सत्र में जनता के गंभीर वीषयों पर पर्याप्त चर्चा मुश्किल है. पहले दिन का बड़ा हिस्सा दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने में निकलेगा.दूसरे दिन ही विधायकों के पास अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाने और सरकार से सवाल पूछने का समय बचेगा.

मोहम्मद शहजाद ने कहा कि विधानसभा में 70 विधायक हैं.इनमें से बड़ी संख्या में विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाना चाहें,तो एक दिन में सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा आसान नहीं होगी. उन्होंने सवाल किया कि महंगाई,बेरोजगारी,पलायन,आपदा और बुनियादी सुविधाओं जैसी समस्याओं पर सरकार से जवाब मांगने को इतना कम समय कैसे पर्याप्त हो सकता है?

बसपा विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार अल्पावधि सत्र बुलाकर केवल औपचारिकता पूरी कर जनता के सवालों पर गंभीर चर्चा से बचना चाहती है.

 देहरादून में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक, प्रीतम सिंह ने उठाये सवाल

गैरसैंण में 27 और 28 अक्टूबर को विधानसभा सत्र आहूत हो रहा है. सत्र की कार्रवाई निश्चित करने को विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति बैठक  आज देहरादून में  थी. उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति अध्यक्ष और विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति के सदस्य प्रीतम सिंह ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की. प्रीतम सिंह ने इसे सरकार की कथनी और करनी में अंतर का जीता जागता उदाहरण बताया.

प्रीतम सिंह ने कहा कि एक तरफ राज्य सरकार ने उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजन की घोषणा की है. वहीं दूसरी तरफ सत्र की कार्रवाई और कार्य सूची निर्धारित करने वाली महत्वपूर्ण कार्य मंत्रणा समिति की बैठक देहरादून में बुलाई . उन्होंने इसे विरोधाभासी और औचित्यहीन बताया है.

प्रीतम सिंह ने कहा कि विधानसभा का सत्र भराड़ीसैंण में आहूत होना है, तो उससे संबंधित कार्य मंत्रणा समिति की दलीय बैठक भी वहीं आयोजित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजन मात्र औपचारिकता है. राज्य सरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित करने के प्रति गंभीर नहीं है.

प्रीतम सिंह का कहना था कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार एक तरफ गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का श्रेय लेती है दूसरी तरफ वहां नियमित  विधानसभा सत्र आयोजन और राजधानी के अनुसार व्यवस्थाएं विकसित करने के प्रति उदासीन बनी है. सरकार का यह दोहरा चरित्र प्रदेश की जनता के सामने उजागर हो चुका है.

उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र मात्र दो दिन को आहूत किया जाना भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है. प्रीतम सिंह ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था महिलाओं की सुरक्षा, पलायन, आपदा प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं पर सदन में व्यापक चर्चा की जरूरत है. ऐसे में मात्र दो दिनों के सत्र में प्रदेश की गंभीर समस्याओं पर सार्थक और विस्तृत चर्चा कैसे संभव हो पाएगी , यह भी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए.

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