तो उप्र में निर्दलीय राजनीति करेंगी IAS छोड़ बैठी दिव्या मित्तल,वीडियो में बताया

उत्तर प्रदेश में राजनीति करेंगी IAS छोड़ने वाली दिव्या मित्तल, Video से खत्म किया सस्पेंस
पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने बताया है कि वह अब क्या करेंगी.सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उन्होंने कहा कि वह राजनीति में कदम रखेंगी,लेकिन किसी राजनीतिक दल से नहीं. उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति सामान्य लोगों के विषयों और उनकी आवाज सामने लाने को होगी. उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए उन्होंने यहीं से नई राजनीतिक पारी शुरू करने की बात कही.

IAS दिव्या मित्तल अब राजनीति करेंगी, लोगों की आवाज उठाएंगी (Photo-x/@divyamittal_IAS)

लखनऊ,29 सितंबर 2026,उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद अपने अगले कदम को लेकर संदेह दूर कर दिया है. उन्होंने कहा कि अब वह राजनीति में आएंगी,लेकिन किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जुड़ेंगी.उनका कहना है कि वह आम लोगों के साथ मिलकर एक ऐसा राजनीतिक मंच खड़ा करना चाहती हैं,जिसका आधार जनता के सवाल और समस्याएं हों.
दिव्या मित्तल ने कहा कि कुछ दिन पहले आईएएस से त्यागपत्र के बाद उनके सामने कई सवाल थे.लोग जानना चाहते थे कि आगे क्या करेंगी,किसके साथ जाएंगी और कहां से शुरुआत करेंगी.उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब देने में उन्हें कुछ समय लगा,क्योंकि वह खुद भी इस नए रास्ते की तैयारी कर रही थीं. दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को 13 साल की प्रशासनिक सेवा बाद त्यागपत्र की घोषणा की थी. तब उन्होंने अपने फैसले के पीछे निजी और पारिवारिक कारणों का उल्लेख किया था. उनका त्यागपत्र 15 सितंबर से प्रभावी हुआ.

उत्तर प्रदेश से शुरू होगी नई पारी

दिव्या मित्तल ने कहा कि उत्तर प्रदेश उनके लिए सिर्फ एक कार्यस्थल नहीं रहा,बल्कि यहां के लोगों ने उन्हें परिवार का हिस्सा माना.वह एक अधिकारी बन उत्तर प्रदेश आई थीं, लेकिन यहां के लोगों ने उन्हें बेटी की तरह अपनाया. इसी से वह अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी उत्तर प्रदेश से चाहती हैं.उन्होंने उत्तर प्रदेश के इतिहास और सामाजिक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रदेश ने कई मौकों पर देश को दिशा दी है.उन्होंने लोगों से कहा कि वे किसी एक व्यक्ति को मसीहा मानकर इंतजार न करें.उनके अनुसार, बदलाव की शुरुआत लोगों को खुद करनी होगी.

मुझे आवाज बनना है

दिव्या मित्तल ने कहा कि उनके लिए राजनीति किसी पद तक पहुंचने का माध्यम नहीं होगी. वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं,जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती और पहुंचने पर भी कई बार सुनी नहीं जाती.उन्होंने कहा कि देश की आजादी के इतने वर्षों बाद भी कई मौलिक समस्याएं मौजूद हैं और वह इन समस्याओं का जवाब चाहती हैं. इसी संदर्भ में उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के कई अनुभवों का उल्लेख किया. सबसे पहले उन्होंने मिर्जापुर के लहुरियादह क्षेत्र की एक महिला से भेंट याद की. उनके अनुसार, वह पहाड़ी क्षेत्र में पानी पहुंचाने के काम का निरीक्षण कर रही थीं. तभी एक महिला उनके पास आई और उसने अपनी समस्या बताई. दिव्या मित्तल के अनुसार, उन्हें लगा कि महिला पेंशन,आवास या पानी जैसी कोई सुविधा मांगेंगी,लेकिन महिला ने गांव में स्कूल की अगली कक्षा शुरू कराने की मांग की.महिला ने बताया कि गांव में स्कूल केवल पांचवीं कक्षा तक है और उसके बाद बच्चों की पढ़ाई आगे जारी रखने में बड़ी परेशानी होती है.दिव्या मित्तल ने कहा कि उन्होंने स्कूल से जुड़े नियमों और स्वीकृति की प्रक्रिया देखी. उनके अनुसार,स्कूल स्वीकार भी हुआ,लेकिन तीन साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका. उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियम और स्वीकृति मौजूद थे तो काम क्यों नहीं हुआ.उनके शब्दों में,समस्या संसाधनों की नहीं बल्कि इरादे की थी.

सरकारी जमीन और एक पन्नी में रखे कागज की कहानी

दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभव का एक और मामला साझा किया.उन्होंने बताया कि विशेष सचिव राजस्व रहते हुए एक व्यक्ति उनसे मिला था.उसके पास सरकारी जमीन के पट्टे से जुड़े दस्तावेज एक पन्नी में रखे थे.उनके अनुसार,व्यक्ति को जमीन का पट्टा तो मिल गया था,लेकिन वास्तविक कब्जा नहीं मिला.उन्होंने अभिलेखों की जांच कराई तो संबंधित रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आई.दिव्या मित्तल ने कहा कि संबंधित अधिकारी से बात कर रिपोर्ट वापस कराई और रिपोर्ट तैयार करने वाले पर कार्रवाई भी हुई. फिर मामला जमीन पर कब्जा दिलाने का था.उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों से बात करने पर उन्हें जवाब मिला कि ‘ऊपर से मना किया गया है.’ इसी बात को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ‘ऊपर’ कौन है.उन्होंने कहा कि संविधान में जनता सर्वोच्च है,इसलिए किसी व्यक्ति को अपने अधिकार को सिफारिश और फोन का सहारा क्यों लेना पड़े.

सड़क, पुल और गड्ढों का भी उठाया विषय 

दिव्या मित्तल ने ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क और पुल की समस्याओं का भी जिक्र किया.उन्होंने कहा कि देश में ऐसे हजारों गांव हैं जहां अब भी सड़क या पुल जैसी मौलिक सुविधाओं की कमी है.उन्होंने कहा कि बरसात में कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है और लोग वर्षों से इंतजार करते रहते हैं.वहीं जिन जगहों पर सड़कें बनी हैं,वहां गड्ढों से दुर्घटनाएं होती हैं.उन्होंने इस समस्या को केवल सड़क की खराब स्थिति से जोड़कर नहीं देखा,बल्कि जवाबदेही का सवाल उठाया.उनका कहना था कि अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों को कई बार यह पता होता है कि सड़क की स्थिति क्या है और किस जगह समस्या है,लेकिन कार्रवाई में देरी होती है.उन्होंने कहा कि ऐसी मौतों को केवल दुर्घटना मान आगे बढ़ जाना पर्याप्त नहीं है और वह इन मामलों में जवाबदेही चाहती हैं.

पेपर लीक और युवाओं के भविष्य का सवाल

अपने संबोधन में दिव्या मित्तल ने युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विषय भी प्रमुखता से उठाये.उन्होंने कहा कि एक सामान्य परिवार की लड़की के रूप में उन्होंने शिक्षा से आगे बढ़ने का मौका पाया,लेकिन आज के युवाओं के सामने अलग तरह की चुनौतियां हैं.उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र कई वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी से उनकी मेहनत प्रभावित होती है.इसके साथ ही उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के तेजी से बढ़ते प्रयोग पर भी चिंता जताई.उन्होंने कहा कि भविष्य में एआई कई तरह के काम बदल सकता है और इससे युवाओं के रोजगार को लेकर सवाल पैदा हो रहे हैं.दिव्या मित्तल ने कहा कि वह दो बेटियों की मां हैं और इसी से भविष्य को लेकर उनकी चिंता स्वाभाविक है.उनका सवाल है कि जिस भविष्य की ओर आज के बच्चे बढ़ रहे हैं,उस पर सार्वजनिक स्तर पर पर्याप्त चर्चा क्यों नहीं हो रही.

राजनीति बदलनी होगी

दिव्या मित्तल ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी एक राजनेता को बदलना नहीं है,बल्कि राजनीति के काम करने के तरीके में बदलाव लाना है.उन्होंने अपनी राजनीति के लिए चार शब्दों इरादा,न्याय,फिक्र और सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीति ऐसी हो जिसमें लोगों की समस्याओं सुनी जाए और जनता को केवल चुनावी आंकड़े के रूप में न देखा जाए.उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएंगी.उनके अनुसार,जिन राजनीतिक व्यवस्थाओं से सामान्य लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ,उनके भीतर रहकर वही सवाल उठाना उनके लिए सही रास्ता नहीं है.हालांकि,उन्होंने यह भी कहा कि नई राजनीति कैसे बनेगी और उसका ढांचा क्या होगा,यह लोगों से मिलकर तय करेंगी.

त्यागपत्र बाद अफवाहों का भी उल्लेख 

दिव्या मित्तल ने अपने त्यागपत्र के बाद सोशल मीडिया पर हुई चर्चाओं का भी जिक्र किया.उन्होंने कहा कि उनके त्यागपत्र के कुछ घंटों के भीतर एक राजनीतिक दल के प्रदेश प्रवक्ता की ओर से उनके बारे में एक ऐसी मुलाकात का दावा किया गया,जो हुई ही नहीं थी.उन्होंने इसे राजनीति में महिलाओं को डराने की कोशिश के तौर पर देखा और कहा कि वह इससे डरने वाली नहीं हैं.उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग या व्यक्तिगत आरोपों से लोगों को सार्वजनिक जीवन से दूर रखने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.

पैसा और बाहुबल नहीं, लोगों की ताकत चाहिए

राजनीति में आने को पैसा,बाहुबल और जातीय समीकरण जैसे सवालों पर भी दिव्या मित्तल ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि उनके पास चुनावी राजनीति को बड़ा आर्थिक संसाधन या बाहुबल नहीं है और उन्हे जाति-धर्म के समीकरण के आधार पर राजनीति में विश्वास नहीं है.उन्होंने चुनावों में धन पर सवाल उठाया कि वह पैसा आखिरकार विकास से जुड़े संसाधनों से आता है. उन्हें ऐसा पैसा नहीं चाहिए, बल्कि वह सड़क,पुल और स्कूल जैसी सुविधाओं पर खर्च देखना चाहती हैं.उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक सेवा में उन्होंने किसी व्यक्ति की जाति या धर्म पूछकर निर्णय नहीं लिया और राजनीति में भी वह इसी सिद्धांत पर आगे बढ़ना चाहेंगी.

15 सितंबर से IAS यात्रा समाप्त 

2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र की घोषणा की थी.उन्होंने निजी कारणों,पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का उल्लेख किया था.केंद्र सरकार ने उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया जो 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया. त्यागपत्र बाद दिव्या मित्तल ने कहा था कि IAS की नौकरी उनके जीवन का सिर्फ एक चैप्टर है. उन्होंने परिवार,लेखन,शिक्षण और समाज सेवा में भविष्य के विकल्पों के संकेत भी दिए थे.

द‍िव्‍या मित्‍तल ने अपनी इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट में बताया क‍ि ”कुछ दिन पहले IAS से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे. अपनी बात इस वीडियो में कह दी है. अगर आपको लगे कि ये आपकी भी बात है, तो इस पोस्ट पर कमेंट करिए, या 9198956957 पर whatsapp मैसेज करिए.

Divya Mittal

 

https://www.instagram.com/reel/Dd2rgL5Sl3q/?stkn=MWMwcHRmZXdjZHgxbg==
द‍िव्‍या म‍ित्‍तल की उत्‍तर प्रदेश व‍िधानसभा चुनाव 2027 में एंट्री
लोगों की आवाज बनना चाहती हूं- द‍िव्‍या
द‍िव्‍या म‍ित्‍तल ने कहा क‍ि लोगों ने मुझसे से कहा क‍ि वे सबकुछ तो बन गई अब और क्‍या बनना चाहती हैं? इस पर उनका जवाब है क‍ि वे राजनीत‍ि में आकर लोगों की आवाज बनना चाहती हैं. उन लोगों की आवाज ज‍िनकी आवाज क‍िसी ऑफिस तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती. उन लोगों की तरफ से मुझे अपने देश की आजादी के 80 सालों का जवाब चाह‍िए.

दिव्या मित्तल ने कहा क‍ि ‘अभी कुछ दिन पहले मैंने आईएस से त्यागपत्र दिया और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए. कुछ दिनों तक जवाब नहीं दिया क्योंकि काम बड़ा था और मैं हौसला जुटा रही थी. पर आज उन सवालों के जवाब देने आई हूं. आगे क्या? किसके साथ और कहां से?

उत्‍तर प्रदेश व‍िधानसभा चुनाव 2027 में दिव्‍या म‍ित्‍तल कौन सी पार्टी से लड़ेगीं चुनाव?
द‍िव्‍या मित्‍तल ने कहा क‍ि ” आज हमारी राजनीति में सब कुछ है. सत्ता है, शिलान्यास है, शोर है पर सोच नहीं है. मुझे उस ना सोचने का हिसाब चाहिए. उद्देश्य केवल एक राजनेता बदलने का नहीं है. राजनीति बदलनी होगी. इरादे की राजनीति, न्याय की राजनीति, फिक्र की राजनीति और सोच की राजनीति. वो राजनीति नहीं जो लोगों को सिर्फ गिनती है. सीढ़ी बनाकर सत्ता तक पहुंचना चाहती है. वो राजनीति जो लोगों को सुनती है और वहीं पर रुक जाती है क्योंकि लोग ही तो मंजिल है. और यहीं पर दूसरे सवाल का जवाब आता है. जब मंजिल आप हैं तो मंजिल तक पहुंचने वाला रास्ता भी केवल आप ही से होकर गुजरेगा. किसी झंडे के नीचे नहीं. जिन झंडों के नीचे 80 सालों में हिसाब नहीं बदला उन झंडों के नीचे खड़े होकर हिसाब नहीं मांगा जा सकता. जो हिस्सा बन जाए वो हिसाब नहीं मांग सकता. इसलिए मैं राजनीति करूंगी किसी दल के साथ नहीं केवल आपके साथ, केवल लोगों के साथ. पर होगा कैसे? राजनीति तो शरीफ लोगों के लिए है ही नहीं. और इसका जवाब मुझे अपने इस्तीफे के चंद घंटों में मिल गया. जहां बहुत सारे आम लोगों ने मेरा समर्थन किया.”

द‍िव्‍या म‍ित्‍तल उत्‍तर प्रदेश व‍िधानसभा चुनाव 2027
द‍िव्‍या मित्‍तल ने कहा क‍ि ”एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने लिखा कि मैं रात के अंधेरे में एक दूसरे बड़ी पार्टी के बड़े नेता से मिली थी. वह मुलाकात कभी नहीं हुई थी. यह बात लिखने वाले को भी पता थी. परंतु उद्देश्य सच लिखना नहीं था. उद्देश्य था कि एक औरत जो सवाल पूछने निकली है उसको पहले ही दिन डरा दो. यही तो यह लोग करते हैं. किसी को एफआईआर करके डरा दो. किसी को ट्रोल करके बैठा दो ताकि आम आदमी अच्छे लोग राजनीति में ना आए और इनका ऐसे ही राजनीति चलती रहे. और हमें इसी को बदलना है. इसलिए मैं डरूंगी नहीं. मैं सवाल ही पूछूंगी ताकि इस देश की हर छोटी बच्ची अपने मन की बात कह सके और उसे रात के अंधेरे का डर ना दिखाया जा सके. जिन लोगों ने उस दिन मेरा समर्थन किया था उन्हीं लोगों के साथ एक ऐसा मंच बनाएंगे जो इनसे डरेगा नहीं. डरेगा तो केवल इस देश के भविष्य के लिए. पर सवाल यह भी है कि डर नहीं है. ठीक है. पर पैसा भी तो नहीं है. बाहुबल भी तो नहीं है. जाति धर्म का समीकरण भी तो नहीं है. तीनों बातें सही हैं. पर अब यह बताइए जो पैसा चुनाव में बहाया जाता है वो कहां से आता है? वो हमारी सड़क से आता है. हमारे पुल से आता है. हमारे स्कूल से आता है. मुझे वो पैसा नहीं बहाना. मुझे वो सड़क ही चाहिए. यह बाहुबल जो जनता के ऊपर दिखाया जाता है. मुझे वो बाहुबल नहीं चाहिए. कि मुझे लोगों से बनी हुई वो शक्ति चाहिए जो लोगों के लिए हो और लोगों की ही हो. जाति धर्म का समीकरण इसलिए नहीं है क्योंकि मैंने कभी बैठाया नहीं. जब मैं अधिकारी थी तो न्याय करने से पहले मैंने कभी किसी का नाम नहीं पूछा. राजनीति में भी नहीं पूछूंगी. 80 सालों तक इन्होंने समीकरण ही तो बैठाए और साथ में देश भी बैठा रह गया. इस तरह की राजनीति कैसे शुरू होगी, कैसे खड़ी होगी और कैसे चलेगी? यह हम लोग साथ मिलकर तय करेंगे.”

दिव्‍या म‍ित्‍तल मिर्जापुर से चुनाव मैदान में उतरेंगी?
द‍िव्‍या मित्‍तल ने कहा क‍ि ” अब तीसरा सवाल कहां से? मैं यहां अफसर बन के आई थी. पर यहां के लोगों ने मुझे अपनी बेटी बना लिया. सर पर हाथ रखा, घर का खाना खिलाया. जब थकी तो संभाला. गुरु वो होता है जो हमें हमसे मिलवा दे. यहां की मिट्टी ने मुझे सिखाया कि मैं कौन हूं और किसके लिए हूं. उत्तर प्रदेश की मिट्टी ही मेरी कर्मभूमि है और इसीलिए शुरुआत यहीं से उत्तर प्रदेश से. मैं जानती हूं कि हमें क्या बताया गया है कि इस देश में कुछ नहीं बदलता और खासतौर पर उत्तर प्रदेश में तो बिल्कुल नहीं. लेकिन मैं उस देश को नहीं जानती. मैं उस देश को जानती हूं जिसे कहा गया था कि आजादी के बाद टुकड़ों में बट जाएगा और मेरा देश आज भी खड़ा है. जिसे कहा गया था कि वह भूखा मरेगा और हमने उगा के दिखाया. जिसे कहा गया था कि इतने गरीब देश में लोकतंत्र कैसे चलेगा और एक अरब लोगों के देश में लोकतंत्र आज भी चल रहा है. मैं उस देश को जानती हूं और उत्तर प्रदेश ने तो हमेशा राह दिखाई है. आजादी की चिंगारी सबसे पहली बार उत्तर प्रदेश से ही शुरू हुई और आज भी जनपद दर जनपद मैंने देखा कि लोग सही के साथ जुड़ते हैं और जो काम अफसर भी नहीं कर पाते वह लोग करके दिखाते हैं.

देवरिया में ऑपरेशन कब्जा मुक्ति में लोगों ने खुद सरकारी जमीनों से अपने कब्जे छोड़े. लोगों ने खुद और आज मैं उन्हीं लोगों से कहती हूं कि हम 80 सालों से किसी नेता किसी मसीहा का इंतजार कर रहे हैं और कोई नहीं आया क्योंकि जिसका हमें इंतजार था वो हम खुद हैं. इसलिए मैं आपको कह रही हूं कि मुझ पर भरोसा मत करिए अपने आप पर करिए. मैं आपको बुला रही हूं. शिक्षक को, डॉक्टर को, किसान को, मजदूर को, वकील को, छात्र को, उस मां को जिसको अपने बच्चे के सुनहरे कल की चिंता है. नई राजनीति कोई एक आदमी नहीं बना सकता. उसमें तो सबका साथ लगेगा. उनका भी जो बात को आगे बता सके. उनका भी जो अपने गांव कस्बे में इसको खड़ा कर सके और उनका भी जो लोगों के सामने खुद आत्मविश्वास से खड़े हो सके. तो आज सिर्फ इतना करें कि इस पोस्ट के नीचे कमेंट करें या मेरे WhatsApp नंबर 9198956957 दोबारा 9198956957 पर WhatsApp मैसेज करके मेरे साथ जुड़े. और एक दिन ऐसा आएगा जब कोई आदमी अपने कागज एक पन्नी में लपेटे किसी सरकारी दफ्तर जाएगा तो बिना किसी सिफारिश और बिना किसी फोन के उसकी सुनवाई होगी और घर आकर वो अपने बेटे से कहेगा कि बेटे आज मेरे साथ न्याय हुआ और बेटा कहेगा तो पापा इसमें नया क्या है तो उसे याद होगा कि उसके पन्नी का हिसाब किस दिन मांगा गया था. चलिए हिसाब मांगते हैं.”

दिव्या मित्तल कौन हैं?
23 नवंबर 1983 को जन्मीं दिव्या मित्तल दिल्ली की रहने वाली हैं. ये दो बार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास कर चुकी हैं. यूपीएससी 2011 में ऑल इंडिया लेवल पर 134वीं रैंक हासिल करके आईपीएस बनीं और यूपीएससी 2012 में 68वीं रैंक पाई. इनको बतौर आईएएस उत्तर प्रदेश कैडर मिला. दिव्या मित्तल के पति गगनदीप सिंह 2011 बैच के इंडियन ट्रेड सर्विस के अधिकारी रहे हैं. साल 2022 में गगनदीप सिंह ढिल्लों ने भी इस्तीफा दे दिया था. सिविल सेवा जॉइन करने से पहले दोनों ने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई की.

दिव्या मित्तल व गगनदीप सिंह की दो बेटियां
मीडिया की खबरों के अनुसार, कुछ साल पहले गगनदीप सिंह ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया था कि उन्होंने 2005 में दिव्या मित्तल को प्रपोज किया था. उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद दोनों ने लंदन में साथ में जॉब की और भारत लौटकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की. इनकी दो बेटियां हैं.

दिव्या मित्तल का सर्विस रिकॉर्ड
आईएएस बनने के बाद दिव्या मित्तल ने 2 सितंबर 2013 को उत्तर प्रदेश कैडर में भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी के रूप में सिविल सेवा जॉइन की थी. ट्रेनिंग के बाद 27 नवंबर 2015 को मेरठ में जॉइंट मजिस्ट्रेट के पद पर पहली पोस्टिंग मिली.

दिव्या मित्तल मेरठ के बाद साल 2017 से 2018 तक गोंडा में मुख्य विकास अधिकारी, 2018 से 2019 तक जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर UPSIDC कानपुर नगर रहीं. 2019 से 2020 तक बरेली विकास प्राधिकरण में रहीं. 2020 में पहली बार संत कबीरनगर की डीएम बनीं.

संत कबीरनगर के बाद दिव्या मित्तल साल 2022 में मिर्जापुर और साल 2024 में देवरिया की डीएम रहीं. यहां से 5 मई 2026 को उनका तबादला विशेष सचिव, राजस्व विभाग, लखनऊ पद पर कर दिया गया था. यह उनकी आखिरी पोस्टिंग थी.

दिव्या मित्तल ने आईएएस की नौकरी कब छोड़ी?
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव पद से त्यागपत्र दिया है. 30 अगस्त 2026 को दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने त्यागपत्र की जानकारी शेयर की. दिव्या मित्तल ने लिखा कि, “आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए आईएएस से त्यागपत्र दे दिया है.” उन्होंने अपनी इस पोस्ट में कई बातों का जिक्र किया. अपने मिर्जापुर डीएम कार्यकाल को भी याद किया.

आईएएस से त्यागपत्र के बाद दिव्या मित्तल ने क्या किया?
30 अगस्त 2026 को त्यागपत्र के बाद से दिव्या मित्तल ने इसकी वजह नहीं बताई. ऐसे में उनके उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 लड़ने के भी कयास लगाए गए. त्यागपत्र के बाद 12 सितंबर को दिव्या मित्तल ने एक वीडियो शेयर करके अपनी मां वैष्णो देवी की यात्रा की जानकारी शेयर की.

वीडियो के कैप्शन में लिखा था-

मां, बिन मांगे तूने सब दिया,
मैं तेरे चरणों में चढ़ाऊं क्या?
बस अपना आभार चढ़ाती हूं,
भर आई आंखों की अश्रुधार चढ़ाती हूं.
पर आगे राह कठिन है.

मेरा IAS से त्यागपत्र स्वीकार हो गया : दिव्या मित्तल
मां वैष्णो देवी की यात्रा के दो दिन बाद, 14 सितंबर 2026 को दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि उनका इस्तीफा मंजूर हो गया. इसके बाद 27 सितंबर 2026 को दिव्या मित्तल ने एक और पोस्ट की और लिखा कि

लंदन की नौकरी छोड़ बनी थीं IAS

दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की, लेकिन बाद में भारत लौटकर UPSC की तैयारी की और IAS बनीं.उनका प्रशासनिक करियर 13 साल का है. मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते उन्हें एक गांव में पाइप से पानी पहुंचाने की पहल को लेकर भी चर्चा मिली थी. उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं.

त्यागपत्र पर विपक्ष के नेताओं ने दी थी प्रतिक्रिया
दिव्या मित्तल के त्यागपत्र पर कांग्रेस नेता अजय राय ने कहा था कि दिव्या मित्तल चुनाव लड़ना चाहती हैं तो पार्टी उनके नाम पर विचार कर सकती है.समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी उनके त्यागपत्र पर उत्तर प्रदेश में अधिकारियों पर दबाव बताया था। दिव्या मित्तल ने अपने त्यागपत्र के बारे में कहा था कि सोच-समझकर फैसला लिया है.

https://x.com/divyamittal_IAS/status/2104769086446280938

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