मसूरी में हटाई अवैध मजार, मुस्लिमों ने लगाया जाम
मसूरी में अवैध मजार पर चला प्रशासन का बुलडोजर, भारी पुलिस बल तैनात,नगर पालिका की निकली जमीन
मसूरी लक्ष्मणपुरी मजार ध्वस्तीकरण से मुस्लिम समुदाय आक्रोशित है.
ACTION AGAINST ILLIGAL MAJAR IN MUSSOORIE
मसूरी 01 अगस्त 2026 : मसूरी के लंढौर क्षेत्र में एक अवैध मजार भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्त कर दी गयी।
प्रशासन ने लंढौर क्षेत्र के अंडाखेत के नीचे मजार भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्त कर दी। इस अवसर पर मुस्लिमों ने विरोध भी किया गया, लेकिन विरोध करने वालों को मजार से बहुत पहले रोक दिया गया ।
इस बाबत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट राहुल आनंद ने बताया कि कब्रिस्तान समिति लंढौर को वैध अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया था लेकिन उन्होने कोई वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए।
उन्होंने बताया कि लंढौर कैंट बोर्ड, वन विभाग तथा वक्फ बोर्ड ने इसका निरीक्षण कर बताया कि यह उनकी संपत्ति नहीं है। संपत्ति नगर पालिका सीमा में स्थित है और यह पालिका/सरकार की संपत्ति है।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा कि पूरे विधिक नियमानुसार ध्वस्तीकरण हुआ है। मुस्लिम समुदाय का दावा है कि 200 सालों से संपत्ति पर उनका कब्जा है, समीप ही कब्रिस्तान है।
लक्ष्मणपुरी क्षेत्र में शनिवार को मजहबी ढांचा हटाने से तनाव हो गया. कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में मुस्लिम सड़क पर उतर आये और राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगा प्रशासनिक कार्रवाई पक्षपातपूर्ण बतायी. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि नगर पालिका परिषद की है. सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर ही अतिक्रमण हटाया गया.
मुस्लिम समुदाय के अनुसार जहां कार्रवाई हुई,वह कोई नवनिर्माण नहीं था,बल्कि वर्षों से उनके मजहबी और सामाजिक उपयोग स्थल है। यहां उनके पूर्वज दफन हैं. प्रशासन जिस संरचना को मस्जिद बता रहा है,वह नियमित नमाज को उपयोग की मस्जिद नहीं,बल्कि एक टीनशेड है. जहां दफन बाद मृतकों की अंतिम नमाज होती है.
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बिना उनकी भावनायें समझे कार्रवाई हुई. यदि यह भूमि वास्तव में सरकारी थी तो इतने वर्षों तक इस पर किसी प्रकार का विवाद या कार्रवाई क्यों नहीं हुई? धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यक मामलों में सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए. बातचीत से समाधान निकालना चाहिए.
कार्रवाई के विरोध में लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया जिससे कुछ समय को यातायात प्रभावित रहा . भारी पुलिस बल लगा रहा.प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर स्थिति नियंत्रण का प्रयास किया.

परगनाधिकारी मसूरी राहुल आनंद ने कहा कि संबंधित भूमि न तो वक्फ बोर्ड की है और न ही किसी निजी व्यक्ति अथवा समुदाय के स्वामित्व में है. संयुक्त जांच में भूमि नगर पालिका परिषद मसूरी की निकली. राजस्व विभाग, नगर पालिका परिषद, छावनी परिषद और वक्फ बोर्ड से जुड़े अभिलेखों की जांच में स्पष्ट हुआ कि संरचना पालिका की भूमि पर बनी थी. अतिक्रमण की श्रेणी में आती थी.
परगनाधिकारी के अनुसार प्रशासन ने मुस्लिम पक्ष को तीन बार नोटिस जारी कर स्वेच्छा से संरचना हटाने के निर्देश दिए थे. नोटिसों का पालन नहीं हुआ तो नियमानुसार पुलिस बल के साथ अतिक्रमण हटाया गया. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया में हुई है.
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