ज्ञान: कैसे अपने जाल में फंसाते हैं साइबर अपराधी, सतर्क रहें तो बच सकते हैं फ्रॉड से
ज्ञान:इन तरीकों से अपने जाल में फंसाते हैं साइबर अपराधी, सतर्क रहकर बचा जा सकता है फ्रॉड से
किसी की शादी हो या कोई त्योहार, साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए लुभावने मैसेज के साथ फिशिंग लिंक्स भेजने का मौका देखते रहते हैं। आइए जानते हैं किस तरह के तरीके अपनाते हैं ये साइबर अपराधी और इस तरह की धोखाधड़ी से कैसे बचा जाए-
साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) डिजिटल माध्यमों जैसे इंटरनेट, मोबाइल फोन, ईमेल या सोशल मीडिया का उपयोग करके की जाने वाली वित्तीय या व्यक्तिगत धोखाधड़ी है।
प्रमुख प्रकार
फ़िशिंग (Phishing): बैंक, सरकारी एजेंसी या किसी कंपनी के नाम पर फर्जी लिंक या ईमेल भेजकर पासवर्ड और कार्ड विवरण चुराना।
OTP / KYC फ्रॉड: बैंक अधिकारी बनकर फोन करना और KYC अपडेट या सिम ब्लॉक होने का डर दिखाकर OTP या गुप्त जानकारी मांगना।
डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): पुलिस, CBI या कस्टम अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करना और गैर-कानूनी पार्सल या मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप में डराकर पैसे ऐंठना।
पार्ट-टाइम जॉब / टास्क फ्रॉड: टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर यूट्यूब वीडियो लाइक करने या रिव्यू देने के बदले आसान कमाई का लालच देकर निवेश कराना।
रिमोट एक्सेस फ्रॉड: मदद के बहाने AnyDesk, TeamViewer या QuickSupport जैसे रिमोट कंट्रोल ऐप डाउनलोड करवाकर फोन/कंप्यूटर का पूरा नियंत्रण हासिल करना।
लोन ऐप फ्रॉड: बिना दस्तावेज़ों के तुरंत लोन देने वाले अनाधिकृत ऐप्स, जो बाद में कॉन्टैक्ट लिस्ट चुराकर ब्लैकमेल करते हैं।
बचाव के मुख्य नियम
गोपनीयता: अपना OTP, UPI PIN, CVV या पासवर्ड कभी किसी के साथ साझा न करें। याद रखें कि पैसे प्राप्त करने के लिए PIN दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती।
लिंक सत्यापन: किसी अनजान नंबर या ईमेल से आए संदिग्ध लिंक (खासकर .apk फाइल्स या छोटे URL) पर क्लिक न करें।
अनाधिकृत ऐप्स से दूरी: स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स या अनवेरिफाइड लोन ऐप्स किसी के कहने पर इंस्टॉल न करें।
पहचान की पुष्टि: यदि कोई पुलिस या बैंक अधिकारी बनकर धमकाए, तो तुरंत कॉल काटें और आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें।
शिकायत कहाँ करें?
राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन: तुरंत 1930 पर कॉल करें (गोल्डन ऑवर में सूचना देने पर फंड ट्रांसफर रोका जा सकता है)।
आधिकारिक पोर्टल: cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
बैंक को सूचना: तुरंत अपने संबंधित बैंक को कॉल कर कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग ब्लॉक करवाएं।
किसी की शादी हो या कोई त्योहार या फिर चुनाव, साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने को लुभावने मैसेज के साथ फिशिंग लिंक्स भेजने का मौका देखते रहते हैं। इनकी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की योजना में लखपति बनने के चक्कर में कई लोग अपना बैंक बैलेंस जीरो करा चुके हैं। भारत में फिशिंग अटैक के मामलों में बढ़ोतरी इनकी गंभीरता की ओर इशारा करते हैं।
आरबीआई (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय यूजर्स इंटरनेट पर औसतन एक दिन में पौने सात घंटे यानी 6.45 घंटे बिताते हैं। इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में डेटा चोरी के मामले बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में इनमें से सबसे ज्यादा 22 प्रतिशत मामले फिशिंग अटैक के हैं।
फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने 2023 में इंटरनेट क्राइम रिपोर्ट जारी की थी। इसके मुताबिक, पिछले पांच साल में आईसी3 को इंटरनेट स्कैम की हर साल औसतन सात लाख 58 हजार शिकायतें मिली हैं। ये शिकायतें पूरी दुनिया के लोगों से संबंधित हैं। 2023 में पर्सनल डेटा ब्रीच की शिकायतों की संख्या 55851 है। अगर फिशिंग की बात करें तो 2023 में करीब तीन लाख शिकायतें मिली हैं। पांच साल पहले यानी 2019 में यह संख्या 1 लाख 14 हजार 702 थी।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में पूरे देश में साइबर क्राइम के 65893 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2020 और 2021 में यह संख्या 50035 और 52974 थी। मतलब हर साल इस तरह के मामले बढ़े हैं। 2022 में डेटा चोरी के मामलों में दर्ज केस की बात करें तो इनकी संख्या 97 है।
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की 24 जुलाई 2024 को जारी की गई प्रेस रिलीज में लिखा है कि एनसीआरबी की 2022 की रिपोर्ट में दिया गया है कि 2022 में साइबर क्राइम के तहत किए गए फ्रॉड के 17470 केस दर्ज किए गए, जो 2020 में 10395 और 2021 में 14007 थे। एनसीआरबी पर फेक वेबसाइट के जरिए होने वाली धोखाधड़ी जैसी घटनाओं का अलग से डेटा नहीं होता है।
क्या है फिशिंग अटैक?
यूके सरकार की नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, फिशिंग तब होती है, जब अपराधी स्कैम ईमेल (या टेक्स्ट मैसेज) भेजते हैं, जिसमें फेक वेबसाइट के लिंक होते हैं। वेबसाइट में मैलवेयर (जैसे रैनसमवेयर) हो सकता है, जो सिस्टम और संस्थानों को नुकसान पहुंचा सकता है। या इनको यूजर को संवेदनशील जानकारी (जैसे पासवर्ड) बताने या पैसे ट्रांसफर करने के लिए धोखा देने के लिए डिजाइन किया जा सकता है।
हमने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान फिशिंग लिंक्स से संबंधित 53 स्टोरी फाइल की थी। आइए एक नजर डालते हैं कुछ लुभावने तरीकों पर-
– मुकेश अंबानी या रतन टाटा के जन्मदिन की खुशी में फ्री रिचार्ज
– होली, दिवाली या नए साल पर फ्री रिचार्ज
– सरकारी योजनाओं के नाम पर रुपये देने का झांसा। जैसे- प्रधानमंत्री जन धन योजना, बेरोजगारी भत्ता योजना, फ्री सिलाई मशीन योजना के नाम से रुपये मिलने का झांसा।
– टीम इंडिया के मैच जीतने के खुशी में फ्री रिचार्ज
– किसी प्रसिद्ध कंपनी की सालगिरह के नाम का मैसेज। जैसे- कतर एयरवेज या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के नाम से गिफ्ट।
– चुनाव के दौरान फ्री रिचार्ज। जैसे- भाजपा या कांग्रेस दे रही फ्री रिचार्ज
– नौकरी के नाम से। जैसे- अयोध्या एयरपोर्ट पर नौकरी।
– कैशबैक के नाम से।
– केबीसी में लॉटरी का झांसा।
कहां करें शिकायत?
पीआईबी की प्रेस रिलीज के अनुसार, गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि साइबर क्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पर आम लोग सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सकते हैं। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है। संदिग्ध वेबसाइट URL का उपयोग करके साइबर अपराध करने के प्रयासों की त्वरित रिपोर्टिंग के लिए नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 31 जनवरी 2024 से ‘Report Suspect’ की सुविधा जोड़ी गई है। अब तक 5252 संदिग्ध URL की रिपोर्ट की गई है।
कैसे करें जांच?
NCRP पर ‘Suspect Data’ श्रेणी के तहत किसी भी वेबसाइट की प्रामाणिकता की जांच करने के लिए आम जनता के लिए सुविधा जोड़ी गई है। ‘डॉट इन’ डोमेन के दुरुपयोग को रोकने के लिए नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) के साथ सहयोग किया गया है। अक्टूबर 2023 से मई 2024 के बीच 310 ‘फिशिंग’ डोमेन को निष्क्रिय कर दिया गया है। इसके अलावा 91 फिशिंग/नकली वेबसाइटों को निष्क्रिय किया गया है।
टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930
वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और धोखेबाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System) शुरू की गई है। अब तक 7.6 लाख से अधिक शिकायतों में 2400 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गई है। ऑनलाइन साइबर शिकायत दर्ज कराने में सहायता प्रदान करने के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ को चालू किया गया है।
ऐसे रखें ईमेल को सुरक्षित
NCRP पोर्टल पर अपलोड बुकलेट के अनुसार, साइबर अपराधी विश्वसनीय ईमेल जैसी दिखने वाली फर्जी ईमेल भेजकर आपकी जानकारी चुराने की कोशिश करते हैं। इसका शीर्षक काफी लुभावना हो सकता है। इसके जरिए मैलवेयर भी भेजा जा सकता है।
– ईमेल सुरक्षा को उसका जटिल पासवर्ड होना चाहिए और समय-समय पर इसे बदलते रहना चाहिए।
– टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन का प्रयोग करें।
– अपरिचित से प्राप्त लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक न करें।
– अगर किसी दूसरे के सिस्टम से मेल लॉगइन कर रहे हैं तो पासवर्ड सेव के ऑप्शन पर क्लिक मत करें।
– ईमेल हैक हो जाने पर जानकारों को इस बारे में जानकारी दे दें।
– अज्ञात सोर्स से प्राप्त ऐप, मैसेज में दिए लिंक पर क्लिक मत करें।
– लॉटरी जीतने जैसे ईमेल या मैसेज पर प्रतिक्रिया न दें।
– किसी परिचित के ईमेल से रुपये मांगने का कोई संदेश आए तो उससे फोन पर कन्फर्म करें।
एक्सपर्ट की राय
इस बारे में हमने साइबर एक्सपर्ट एवं दिल्ली व उत्तर प्रदेश पुलिस से जुड़े किसलय चौधरी से संपर्क किया। वह दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस से भी जुड़े हुए हैं। उनका कहना है, “सोशल मीडिया पर अक्सर फिशिंग लिंक शेयर किए जाते हैं। ये मैसेज से भी होते हैं। इन पर क्लिक करते ही फोन हैक हो जाता है। पुलिस के पास इस तरह के कई केस आते हैं।”
वहीं, साइबर एक्सपर्ट एवं सेंटर फॉर रिसर्च ऑन साइबर क्राइम एंड साइबर लॉ के चेयरमैन अनुज अग्रवाल का कहना है, “इस तरह के मैसेज या ईमेल से सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए।”
साइबर सुरक्षित: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और साइबर ठगी
जानिए! सीजेपी के नाम पर हो रहे डिजिटल फ्रॉड से खुद को बचाने के तरीकों के बारे में।
सावधान! अब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के नाम पर डिजिटल फ्रॉड शुरू हो गया है, जिसमें जालसाज लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना रहे हैं। आज हम आपको इस रिपोर्ट में बताने जा रहे हैं कि आखिर कैसे साइबर अपराधी सीजेपी के नाम पर लोगों तक पहुंच रहे हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में..
क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) एक व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान है। CJI सूर्यकांत ने कथित तौर पर युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। इस तुलना के बाद सोशल मीडिया पर सीजेपी की शुरुआत हुई।
सीजेपी के नाम पर ठगी के तरीके?
मेम्बरशिप और ‘गोल्डन बैज’ के नाम पर पैसे मांगे जा रहे हैं। जालसाज CJP के नाम पर डोनेशन मांग रहे हैं।
भारत में नहीं चल रही CJP की वेबसाइट
CJP की वेबसाइट को भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। इसके नाम पर कई फेक वेबसाइट बन चुकी हैं।
सीजेपी के नाम पर ठगी के मामले
सीजेपी के नाम पर मुरादाबाद में और मध्य प्रदेश में ठगी की गई। कॉकरोच जनता पार्टी ज्वाइन करने के नाम पर एक लिंक भेज कर आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। तो चलिए, जानते हैं ऐसी ही कुछ घटनाओं के बारे में।
क्या हैं फिशिंग लिंक स्कैम?
यूजर्स को बैंक, सरकारी विभाग या नामी कंपनियों के नाम पर बिल्कुल असली दिखने वाली फेक वेबसाइट का लिंक भेजा जाता है।
क्या हैं APK फाइल्स स्कैम?
यूजर्स को वॉट्सएप या मैसेज पर लॉटरी, बिजली बिल या कूरियर के बहाने अनजान लिंक भेजा जाता है।
कैसे करें बचाव?
सीजेपी कोई सदस्यता शुल्क नहीं मांग रही है और गोल्डन बैज भी नहीं दे रही है। अज्ञात नंबर से भेजे गए लिंक पर न तो क्लिक करें और न ही किसी ऐप को इंस्टॉल करें। संदिग्ध नंबर की रिपोर्ट करें और उसे ब्लॉक करें।
क्या कहते हैं आंकड़े?
साल दर साल देश में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले बढ रहे हैं। ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में ऑनलाइन फ्रॉड के कुल 29,758 केस अंकित हुए।
गृह मंत्रालय (MHA) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के आंकड़ों के अनुसार, दो वर्षों (2024 और 2025) में साइबर फ्रॉड के मामलों में तेज़ी देखी गई है:

सबसे ज्यादा नुकसान वाले प्रमुख फ्रॉड ट्रेंड्स
इन्वेस्टमेंट व ट्रेडिंग स्कैम (75% से अधिक नुकसान) : फर्जी स्टॉक मार्केट ऐप्स, पोंजी स्कीम्स और क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर भारी रिटर्न का झांसा देकर ठगी।
डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest – ~9% नुकसान): पुलिस, CBI या ED अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर डराना और कथित मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध पार्सल के आरोप में पैसे ट्रांसफर करवाना।
सेक्सटॉर्शन और ब्लैकमेलिंग (~4% नुकसान): फर्जी वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर सामाजिक बदनामी का डर दिखाकर वसूली।
टास्क व पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड: टेलीग्राम/व्हाट्सएप से यूट्यूब वीडियो लाइक करने या रिव्यू देने के बदले कमीशन का लालच।
म्यूल बैंक अकाउंट्स (Mule Accounts): ठगी की रकम तेजी से कई खातों में ट्रांसफर करने को किराए या खरीदे गए बैंक खातों का व्यापक इस्तेमाल।
प्रशासनिक व तकनीकी कार्रवाई
रकम की रिकवरी/फ्रीजिंग: ‘सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (CFCFRMS) और 1930 हेल्पलाइन से ₹8,000 करोड़ से अधिक की फ्रॉड ट्रांजेक्शन रोकी/ब्लॉक की गईं।
सिम और डिवाइस ब्लॉकिंग: पुलिस और I4C चिन्हित 10 लाख से अधिक संदिग्ध सिम कार्ड और 2.5 लाख से अधिक मोबाइल IMEI नंबर ब्लॉक किए गए।
सस्पेक्ट रजिस्ट्री (Suspect Registry): बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिलकर 30 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं और म्यूल खाते रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम में शामिल किये गये।
phishing attack, national crime records bureau, federal bureau of investigation, RBI, Reserve Bank of India,


