नेशनल कांफ्रेंस ने गाया पूर्ण वंदे मातरम,कांग्रेस परेशान
Congress Uneasy With Nc Full Vande Mataram Film Festival Bjp Says 21st Cent Muslim League
’21वीं सदी की मुस्लिम लीग..’: वंदे मातरम पूरा बजाने पर नेशनल कांफ्रेंस पर भड़की कांग्रेस, तो मिला टका सा जवाब
जम्मू और कश्मीर के पहले फिल्म फेस्टिवल में संपूर्ण राष्ट्र गीत वंदे मातरम का गायन हुआ तो कांग्रेस अपनी ही सहयोगी नेशनल कांफ्रेंस से नाराज हो गई। लेकिन, सहयोगी दल से ऐसी नाराजगी दिखाकर कांग्रेस पार्टी विरोधियों के हत्थे चढ़ गई है।
नई दिल्ली 09 सितंबर 2026 : जम्मू और कश्मीर में पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन पर संपूर्ण वंदे मातरम का गायन कांग्रेस को रास नहीं आया है। पार्टी ने राज्य में सत्ताधारी अपनी ही सहयोगी नेशनल कांफ्रेंस को इसके लिए सुनाने की कोशिश की है क्योंकि, कार्यक्रम में खुद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला भी तीन मिनट 10 सेकंड तक राष्ट्र गीत के सम्मान में सावधान मुद्रा में खड़े रहे। इस पर भाजपा ने पलटवार कर कहा है कि ‘कांग्रेस 21वीं सदी की मुस्लिम लीग बन चुकी है।’
Congress uneasy with NC Full Vande Mataram Film Festival
वंदे मातरम पर सहयोगियों को उपदेश देकर घिर गई कांग्रेस
इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा है कि वह अपनी शर्तें थोप नहीं सकती. वहीं, भाजपा ने कांग्रेस पर ‘मुस्लिम लीग’ जैसे व्यवहार का आरोप लगाया है.
‘वंदे मातरम्’ पर INDIA ब्लॉक में रार! कांग्रेस की सलाह पर NC ने कहा- शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं
वंदे मातरम् पर फिर शुरू घमासान (Photo: Screengrab)
श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की उपस्थिति में फुल वर्जन ‘वंदे मातरम’ के बजाने पर कांग्रेस की आपत्ति ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है . सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस से कहा है कि वह गठबंधन सहयोगियों पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकती. वहीं, भाजपा ने कांग्रेस पर ‘मुस्लिम लीग’ बनने का आरोप लगाते हुए हमला बोला है.
जम्मू-कश्मीर के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का फुल वर्जन बजने पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई, जिसके बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
पूरे ‘वंदे मातरम’ के सम्मान में खड़े हुए अबुल्ला, कांग्रेस भड़की, NC बोली- हमपर शर्तें मत थोपो
वंदे मातरम को लेकर श्रीनगर से शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच टकराव में बदल गया है. अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पूरा वंदे मातरम बजने पर उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला सम्मान में खड़े हुए. कांग्रेस ने पूरे गीत को लेकर आपत्ति जताई और एनसी से अपने रुख का समर्थन करने को कहा. जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस को साफ कह दिया कि गठबंधन सहयोगी अपनी शर्तें नहीं थोप सकता. इसके बाद भाजपा भी मैदान में उतर आई. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और उसे 21वीं सदी की मुस्लिम लीग तक बता दिया.
वंदे मातरम को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. इस बार मामला जम्मू-कश्मीर से उठा है और सीधे कांग्रेस के गठबंधन सहयोगी ने ही पार्टी को जवाब दे दिया है. श्रीनगर में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के कार्यक्रम में वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया. मंच पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला मौजूद थे. दोनों पूरे गीत के दौरान सम्मान में खड़े नजर आए. बस यहीं से राजनीतिक कहानी ने नया मोड़ ले लिया. कांग्रेस ने पूरे वंदे मातरम को लेकर आपत्ति जताई और अपने सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस से पार्टी के रुख के साथ खड़े होने की अपील कर दी. कांग्रेस के इस बयान पर एनसी ने भी साफ कर दिया कि गठबंधन में रहना अलग बात है, लेकिन सहयोगी दल अपनी शर्तें थोप नहीं सकता.
वंदे मातरम विवाद में उमर और फारूक अब्दुल्ला के पूरे गीत पर खड़े होने से कांग्रेस नाराज हुई. (फोटो वीडियो ग्रैब)
मामला इतना बढ़ा कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच सार्वजनिक बयानबाजी शुरू हो गई. कांग्रेस महासचिव और संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने पूरे वंदे मातरम के गायन पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि पूरा गीत भारत के उस समन्वयवादी और बहुलतावादी विचार से मेल नहीं खाता, जिसकी कल्पना स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी. उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना आजाद, सरोजिनी नायडू और दूसरे नेताओं के विचारों का हवाला दिया. कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में 1937 के फैसले के अनुसार वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरों तक सीमित रहने का फैसला किया है. लेकिन एनसी ने इस लाइन को मानने से इनकार कर दिया. तब भाजपा भी मैदान में कूद गई और कांग्रेस पर तीखा हमला बोल दिया.
पूरे ‘वंदे मातरम’ के सम्मान में खड़े हुए अबुल्ला, कांग्रेस भड़की, NC बोली- हमपर शर्तें मत थोपो
वंदे मातरम को लेकर श्रीनगर से शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच टकराव में बदल गया है. अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पूरा वंदे मातरम बजने के दौरान उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला सम्मान में खड़े हुए. कांग्रेस ने पूरे गीत को लेकर आपत्ति जताई और एनसी से अपने रुख का समर्थन करने को कहा. जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस को साफ शब्दों में कह दिया कि गठबंधन सहयोगी अपनी शर्तें नहीं थोप सकता. इसके बाद बीजेपी भी मैदान में उतर आई. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और उसे 21वीं सदी की मुस्लिम लीग तक बता दिया.
वंदे मातरम को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. इस बार मामला जम्मू-कश्मीर से उठा है और सीधे कांग्रेस के गठबंधन सहयोगी ने ही पार्टी को जवाब दे दिया है. श्रीनगर में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के कार्यक्रम में वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया. मंच पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला मौजूद थे. दोनों पूरे गीत के दौरान सम्मान में खड़े नजर आए. बस यहीं से सियासी कहानी ने नया मोड़ ले लिया. कांग्रेस ने पूरे वंदे मातरम को लेकर आपत्ति जताई और अपने सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस से पार्टी के रुख के साथ खड़े होने की अपील कर दी. कांग्रेस के इस बयान पर एनसी ने भी साफ कर दिया कि गठबंधन में रहना अलग बात है, लेकिन सहयोगी दल अपनी शर्तें थोप नहीं सकता.
मामला इतना बढ़ा कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच सार्वजनिक बयानबाजी शुरू हो गई. कांग्रेस महासचिव और संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने पूरे वंदे मातरम के गायन पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि पूरा गीत भारत के उस समन्वयवादी और बहुलतावादी विचार से मेल नहीं खाता, जिसकी कल्पना स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी. उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना आजाद, सरोजिनी नायडू और दूसरे नेताओं के विचारों का हवाला दिया. कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में 1937 के फैसले के मुताबिक वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरों तक सीमित रहने का फैसला किया है. लेकिन एनसी ने यह लाइन मानने से मना कर दिया. इसके बाद भाजपा भी मैदान में कूद गई और कांग्रेस पर तीखा हमला बोल दिया.
श्रीनगर में पूरा वंदे मातरम बजा, अब्दुल्ला परिवार खड़ा रहा
विवाद की शुरुआत श्रीनगर के अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव से हुई. कार्यक्रम में वंदे मातरम को पूरा बजा. तब उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला सम्मान में खड़े हुए. इसके बाद कार्यक्रम का वीडियो सामने आया और कांग्रेस ने इसे लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी के सहयोगियों को भी उस फैसले का सम्मान करना चाहिए, जिसमें कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो अंतरे गाती है.
NC ने कांग्रेस को ही सुना दिया
कांग्रेस की अपील नेशनल कॉन्फ्रेंस को पसंद नहीं आई. NC नेता बशीर अहमद ने साफ कहा कि गठबंधन सहयोगी होने का मतलब यह नहीं है कि कांग्रेस यह तय करे कि कितना गीत गाना है और कैसे गाना है. उन्होंने कहा कि वेणुगोपाल को सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन वे किसी पर इसे थोप नहीं सकते. एनसी नेता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी लोगों पर कुछ थोपने के खिलाफ है.
कांग्रेस बोली- नागपुर के दबाव में मत झुकिए
NC के जवाब के बाद कांग्रेस की तरफ से भी पलटवार हुआ. कांग्रेस नेता कपिल सिंह ने कहा कि उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं. इसलिए उन्हें कांग्रेस के फैसले का सम्मान करना चाहिए, न कि नागपुर यानी आरएसएस के फैसले का. इस बयान ने विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया. अब मामला सिर्फ राष्ट्रगीत के गायन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गठबंधन की राजनीति और वैचारिक मतभेद भी खुलकर सामने आ गए.
बीजेपी ने कांग्रेस को ‘मुस्लिम लीग’ से जोड़ दिया
बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोलने में देर नहीं की. बीजेपी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पूरे वंदे मातरम के गायन पर कांग्रेस की आपत्ति से साफ है कि वह 21वीं सदी की नई मुस्लिम लीग बन गई है. उन्होंने कांग्रेस पर अलगाववादी और कट्टरपंथी ताकतों के सामने झुकने का आरोप भी लगाया. बीजेपी नेता आरएस पठानिया ने भी कांग्रेस को घेरा. उन्होंने कहा कि घाटी के अलगाववादियों ने भी कभी राष्ट्रगीत को लेकर ऐसी आपत्ति नहीं जताई थी.
कांग्रेस ने क्यों चुना सिर्फ दो अंतरों का रास्ता?
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस ने पिछले महीने अपनी कार्यसमिति की बैठक में 1937 के प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया था. इसके तहत पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल दो अंतरे गाए जाएंगे. कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में बनी व्यापक सहमति और बहुलतावादी सोच को ध्यान में रखकर लिया गया है. दूसरी तरफ बीजेपी लंबे समय से कांग्रेस पर पूरे वंदे मातरम का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाती रही है.
अब गठबंधन में भी दिखने लगा वैचारिक अंतर
वंदे मातरम विवाद ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच मौजूद वैचारिक अंतर को फिर सामने ला दिया है. दोनों दल इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रगीत को लेकर दोनों का रुख अलग दिख रहा है. कांग्रेस अपने तय राजनीतिक और ऐतिहासिक रुख पर कायम है. एनसी का कहना है कि किसी सहयोगी को दूसरे दल पर अपनी शर्तें नहीं थोपनी चाहिए. ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक रहता है या गठबंधन की राजनीति में इसका असर भी दिखाई देता है।
फिल्म फेस्टिवल में गाए जा रहे गीत के फुल वर्जन का वीडियो शेयर करते हुए, कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने अपनी सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस को सलाह दी है कि वे गीत के छोटे वर्जन का ही इस्तेमाल करने के मामले में पार्टी का साथ दें.
के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “वंदे मातरम का फुल वर्जन उस मिली-जुली और अनेकता वाली सोच के साथ मेल नहीं खाता, जिसकी कल्पना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत के लिए की थी और जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया था.”
उन्होंने आगे कहा, “हमारे लिए महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, आचार्य नरेंद्र देव, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजिनी नायडू और जे.बी. कृपलानी की सोची-समझी राय सबसे अहम है, जिसे काफी हद तक गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह से आकार मिला है।
कांग्रेस नेता ने अपने सहयोगियों से स्वतंत्रता सेनानियों की समझ और राय का सम्मान करने, पार्टी के साथ मिलकर उस ‘खूबसूरत और ऐतिहासिक गीत’ का वही वर्जन गाने की अपील की, जिसे पार्टी ने अपनाया था.
इस दावे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि कांग्रेस अपने सहयोगियों पर शर्तें नहीं थोप सकती.
‘हम थोपे जाने के खिलाफ…’
एनसी नेता बशीर अहमद ने कहा, “गठबंधन सहयोगी के तौर पर आप यह तय नहीं कर सकते कि क्या गाना है या कितना गाना है. वेणुगोपाल को पोस्ट करने का अधिकार है, लेकिन वे अपनी बात थोप नहीं सकते. यह लोगों की पसंद है. हम लोगों पर कुछ भी थोपे जाने के खिलाफ हैं.”
कांग्रेस ने अपने गठबंधन सहयोगी पर हमला और तेज करते हुए कहा कि वे नागपुर (यानी RSS) के आदेशों के आगे न झुकें.
कांग्रेस नेता कपिल सिंह ने कहा, “उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला INDIA ब्लॉक का हिस्सा हैं. गठबंधन सहयोगी होने के नाते, उन्हें कांग्रेस के फैसले का सम्मान करना चाहिए, न कि नागपुर (RSS) के फैसले का.”
वहीं, भाजपा ने ‘वंदे मातरम्’ के फुल वर्जन पर कांग्रेस की आपत्ति की आलोचना की है. भाजपा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि फुल वर्जन गाने पर पार्टी की आपत्ति से कोई संदेह नहीं रह जाता कि वह 21वीं सदी की नई मुस्लिम लीग बन गई है.
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “इस विषय पर कांग्रेस ‘पूरी तरह से अलग-थलग’ पड़ गई है. इससे यह साफ हो जाता है कि ‘दिमागी नक्सल’ कांग्रेस अब ‘मुस्लिम लीग कांग्रेस’ में बदल गई है और कट्टरपंथी ताकतों के सामने पूरी तरह से झुक गई है.”
भाजपा नेता आरएस पठानिया ने भी फुल वर्जन ‘वंदे मातरम’ गाने पर आपत्ति जताने को कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा, “घाटी में अलगाववादियों ने भी राष्ट्रगीत पर आपत्ति नहीं जताई थी.”
कांग्रेस का क्या इरादा?
कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) ने पिछले महीने वंदे मातरम् पर अपनी सबसे बड़ी फैसला लेने वाली संस्था के 1937 के प्रस्ताव को मानने का फैसला किया. इसमें, अब पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्र गीत के सिर्फ दो स्टैंजा ही गाए जाएंगे.
कांग्रेस का यह फैसला तब आया, जब भाजपा ने उसके नेताओं पर पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का फुल वर्जन न गाकर उसका अपमान करने का आरोप लगाया.
इससे पहले, इस साल केंद्र सरकार ने आदेश दिया था कि सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक समारोहों में ‘जन गण मन’ से पहले वंदे मातरम के सभी छह पद बजाए जाने चाहिए.
जम्मू और कश्मीर जहां की स्थानीय राजनीतिक पार्टियां 2019 से पहले तक आर्टिकल-370 के नाम पर किसी भी हद को पार करने को तैयार रहती थीं। उसी जम्मू और कश्मीर में आज वंदे मातरम के सभी 6 छंद गाए जा रहे हैं, तो कांग्रेस ने इसे भी अपनी राजनीतिक नाक का सवाल बना लिया है। इसी से केंद्र शासित प्रदेश के पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में जब मुख्यमंत्री और सरकार के अन्य प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में गाए गए राष्ट्र गीत का वीडियो वायरल हुआ तो कांग्रेस को लगा कि उसकी राजनीतिक जमीन ही खिसका दी गई है।
हमारे सहयोगी भी वंदे मातरम का दो छंद गाएं-कांग्रेस
कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने तुरंत इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, ‘वंदे मातरम का पूरा वर्जन उस सामंजस्यपूर्ण और बहुलवादी सोच से मेल नहीं खाता, जिसकी कल्पना भारत को हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी और उसे संवारा था।’ उन्होंने देश के कुछ महान स्वतंत्रता सेनानियों का हवाला देते हुए सहयोगी दलों से कहा है कि वह उन्हीं सेनानियों के फैसले का सम्मान करें।

वंदे मातरम पूरा नहीं गाने पर अड़ी कांग्रेस
कांग्रेस का तर्क है कि वंदे मातरम का दो वर्जन जानबूझकर चुना गया था, ताकि इसका सांप्रदायिककरण न हो सके।
कांग्रेस का दावा है कि सांप्रदायिककरण का जो खतरा तब था, वह आज भी सच है।
वेणुगोपाल का कहना है कि ‘इसे पहले की तरह गाकर ही हम अपने गणतंत्र के धर्मनिरपेक्ष और समावेशी स्वरूप बनाए रखते हैं।’
‘कांग्रेस का असली चेहरा सामने आ गया’
नेशनल कांफ्रेंस जैसी पार्टी ने जिस तरह से संवैधानिक मर्यादा का पालन करते हुए वंदे मातरम को आत्मसात किया है, उसने भाजपा को कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने का बढिया राजनीतिक अवसर दे दिया है। भाजपा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘संपूर्ण वंदे मातरम् गायन को लेकर संसद से पास नियम के बावजूद, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर जो आपत्ति की है, उसने उसका असली चेहरा सामने ला दिया है।’
‘मुस्लिम लीग छोड़कर सहयोगी भी कांग्रेस से दूर’
भाजपा नेता ने कहा, ‘कांग्रेस के सहयोगी दल,यहां तक कि एनसीपी और नेशनल कांफ्रेंस के नेता भी संपूर्ण वंदे मातरम् गीत में शामिल हो रहे हैं। मगर कांग्रेस को आपत्ति है। मतलब, कांग्रेस के गठबंधन सहयोगी भी उसके साथ नहीं हैं, सिर्फ मुस्लिम लीग को छोड़कर।’



