तीर्थ रक्षा महत्वपूर्ण, गिरनार पर्वत 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ की मोक्षस्थली: आचार्य सौरभ सागर महामुनिराज
देहरादून 15जुलाई 2025। पूज्य संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणा स्रोत उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर महामुनिराज के मंगल सानिध्य में गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला में 23वे तीर्थंकर चिंतामणि भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की। विधान के पुण्यार्जक देव जैन प्रिया जैन भिंड एव मुदित जैन शशि जैन सहस्रधारा रोड रहे।
*भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति आराधना के चौथे दिन 108पूज्य आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा कि प्रत्येक मानव को अपनी संस्कृति की रक्षा करने का अधिकार है परंतु *हमारी संस्कृति तभी बचेगी जब हमारे तीर्थ बचेंगें। इसलिए तीर्थ रक्षा बहुत महत्वपूर्ण है और यह हमारी आस्था का प्रतीक है । गिरनार पर्वत प्राचीन काल से ही 22वे तीर्थंकर भगवान् नेमिनाथ की मोक्षस्थली के रूप में जाना जाता है। अतः उस पर किसी भी प्रकार के पूजा अथवा निर्माण लाडू चढ़ाने से वंचित रखना, हमारे अधिकारों का हनन है इसलिए हमें इसकी रक्षा को सतत प्रयास करना चाहिए*।
गिरनार तीर्थ क्षेत्र की रक्षा एवं 2 जुलाई को भगवान् नेमिनाथ के निर्वांण कल्याणक पर्व पर गुजरात प्रशासन ने जैन यात्रियों से अभद्र व्यवहार किया । उसके विरोध प्रदर्शन में भारतीय जैन मिलन ने जिलाधिकारी के माध्यम से गुजरात सरकार को ज्ञापन भेजा गया।
इस अवसर पर भारतीय जैन मिलन के मुख्य राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नरेश चंद जैन ने कहा कि भारत गणराज्य का संविधान सभी नागरिकों को उनके धर्म के पालन की स्वतंत्रता देता है, इसमें किसी को भी रोकने का अधिकार नहीं है।
लेकिन 2 जुलाई 2025 को गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर, जिस स्थान से जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ मोक्ष गए,देश भर से आए हजारों जैन धर्मावलंबियों को उनके पूजा के अधिकार से वंचित रखा गया । न ही भगवान का जयकारा बोलने दिया, न ही कोई द्रव्य आदि चढ़ाने दिया गया, न ही निर्वाण लड्डू चढ़ाने दिया गया।यहां तक कि पुलिस ने 10 से अधिक स्थानों पर चेकिंग की । चढ़ाने हेतु कोई भी द्रव्य सामग्री ले जाने नही दी गई बल्कि छीन ली गई। महिलाओं से भी अभद्रता की गई। जबकि, भारत सरकार के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) तथा गुजरात राज्य गजेटियर, दोनों ने स्पष्ट रूप से प्रमाणित किया है कि गिरनार की पंचम टोंक मूलतः जैन तीर्थ है।
यह केवल धार्मिक या ऐतिहासिक अपमान नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है। गुजरात उच्च न्यायालय ने 2005 में स्पष्ट आदेश दिया था कि पंचम टोंक पर कोई भी नया निर्माण न किया जाए।
हमारी आप से मांग है कि- ASI और राज्य सरकार गजेटियर के आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए और *अवैध दत्तात्रेय की मूर्ति हटायी जाए*। गिरनार की पांचवीं टोंक को संरक्षित जैन राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए।
इस अवसर पर महामंत्री राजेश जैन, और *केंद्रीय महिला संयोजिका मधु जैन* ने कहा कि हम अल्पसंख्यक जैन समाज आपसे आशा रखते हैं कि आप अवश्य ही जैन मतावलंबियों की धार्मिक भावनाओं का आदर करते हुए गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर जैनों को पूजा का अधिकार संरक्षित करेंगें*।

