प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते मोदी ? विदेश मंत्रालय से पत्रकार के सवाल का दो टूक जवाब
Why Does Not Pm Modi Hold Press Conference Response By Ministry Of External Affairs Says Prefers Direct Communication With Public
प्रधानमंत्री मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते? विदेश मंत्रालय ने पत्रकार के सवाल का दिया दो टूक जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते? न्यूजीलैंड दौरे में उठे इसी सवाल पर विदेश मंत्रालय ने दो टूक जवाब दिया है। मंत्रालय ने कहा कि मोदी एक ऐसे भारतीय नेता हैं, जो मीडिया के बजाय सीधे जनता से संवाद को प्राथमिकता देते हैं।
नई दिल्ली 11 जुलाई 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं में प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने को लेकर फिर विदेशी मीडिया ने सवाल खड़े किए हैं। न्यूजीलैंड प्रवास में उठे इस सवालों पर अब विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुदेंद्र टंडन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक विशिष्ट भारतीय राजनेता हैं, जो जनता से सीधे संवाद करने में विश्वास रखते हैं, न कि किसी मीडिएटर के जरिए।
rudrendra tandon
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया तब सामने आई है, जब न्यूजीलैंड में मीडिया ब्रीफिंग में एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी आधिकारिक यात्रा में प्रेस कॉन्फ्रेंस या पत्रकारों से बातचीत क्यों नहीं की। जवाब देते हुए रुदेंद्र टंडन ने कहा कि सिविल सर्वेंट के तौर पर प्रधानमंत्री की राजनीतिक कार्यशैली पर टिप्पणी करना उनके लिए उचित नहीं होगा।
‘मतदाताओं से सीधे संपर्क को प्राथमिकता देते हैं प्रधानमंत्री मोदी’
उन्होंने कहा, कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक विशिष्ट भारतीय राजनेता हैं। भारत के अधिकांश नेता अपने मतदाताओं से सीधे संपर्क को प्राथमिकता देते हैं। भारत की बड़ी आबादी ग्रामीण है और लोग अपने नेताओं से सीधा संवाद पसंद करते हैं। वे किसी मध्यस्थ के जरिए संबोधन पसंद नहीं करते।’
टंडन ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से सीधे जुड़ने की कला में महारत पाई है और यही उनकी राजनीतिक सफलता का एक बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि उनका यह तरीका प्रभावी रहा है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक सर्वोत्तम भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, लोगों के साथ सीधे संवाद करना पसंद करते हैं और मध्यस्थों के माध्यम से बात किए जाने को पसंद नहीं करते हैं।
विदेश मंत्रालय के अधिकारी रुद्रेंद्र टंडन।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड के दौरे पर पहुंचे हैं।
न्यूजीलैंड में मीडिया ब्रीफिंग में भारतीय विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन से पूछा गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा में कोई प्रेस कॉफ्रेंस क्यों नहीं की या पत्रकारों से बातचीत क्यों नहीं की।
टंडन ने नार्वे यात्रा में पूछा सवाल किया याद
टंडन ने कहा कि यह सवाल उन्हें इस साल शुरु में प्रधानमंत्री की नॉर्वे यात्रा में पूछे गए एक ऐसा ही सवाल याद दिलाता है। उन्होंने कहा, कि “तो आप जानते हैं, आपके सवाल में वही जानी-पहचानी सी अनुभूति है, क्योंकि देखिए, एक सिविल सेवक होने के नाते मेरे लिए मोदी की राजनीतिक पद्धति पर सवाल उठाना उचित नहीं है, वे एक बहुत ही सफल राजनीतिज्ञ हैं।”
उन्होंने कहा, कि “प्रधानमंत्री मोदी एक आदर्श भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। कुल मिलाकर, भारतीय राजनीतिज्ञ अपने मतदाताओं से सीधा संपर्क रखना पसंद करते हैं। “आपको यह याद रखना चाहिए कि भारतीय मतदाता मुख्य रूप से ग्रामीण हैं। वे सीधा संपर्क चाहते हैं। उन्हें नीचा दिखाया जाना पसंद नहीं है, उन्हें बिचौलियों के माध्यम से बात करना पसंद नहीं है।”
प्रधानमंत्री मोदी जनता से जुड़ने में कुशल- टंडन
टंडन ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने जनता से जुड़ने के इस तरीके का कौशल पाया है । मोदी अपने मतदाताओं से सीधे संपर्क की कला में सिद्धहस्त हैं और लगता है कि वह इसमें काफी अच्छा काम कर रहे हैं, क्योंकि जैसा कि आप जानते हैं, वह अब अपने निर्वाचन के तीसरे कार्यकाल में हैं, वह हमारे देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक हैं।”
प्रधानमंत्री की यात्रा के उद्देश्य पर बात करते हुए टंडन ने कहा कि एक मुख्य प्राथमिकता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियमाधारित व्यवस्था मजबूत करना है।
उन्होंने कहा, कि “इस यात्रा का उद्देश्य नियमाधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था मजबूत करना है। हम दुनिया के इस हिस्से में न्यूजीलैंड को महत्वपूर्ण साझेदार इसलिए देखते हैं क्योंकि इंडो-पैसिफिक में नियमों पर आधारित व्यवस्था मजबूत करने की हमारी कोशिशें एक जैसी हैं। हिंद महासागर से जुड़े देश भारत के लिए यह बहुत जरूरी है।” विदेश मंत्रालय ने कहा कि नियमाधारित इंडो-पैसिफिक को बढ़ावा देने को न्यूजीलैंड के साथ सहयोग इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में भारतीय समुदाय के कार्यक्रम को संबोधित किया। प्रधानमंत्रित्व मोदी ने कहा कि वह अपने साथ 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लाए हैं और यह उनके लिए बहुत सौभाग्य की बात है कि वह 40 वर्षों में न्यूजीलैंड आने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने हैं।
नॉर्वे यात्रा में भी उठा था यही सवाल
इससे पहले मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा में नॉर्वे की पत्रकार ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर सवाल खड़े किए थे। तब विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों और मीडिया व्यवस्था पर बातचीत करते हुए कहा था कि भारत दुनिया की एक-छठी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन दुनिया की एक-छठी समस्याओं का नहीं।
न्यूजीलैंड के दौरे पर क्या बोला विदेश मंत्रालय
प्रधानमंत्री मोदी के न्यूजीलैंड दौरे को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा, कि ‘भारत हिंद महासागर का देश है। हम आसपास के समुद्री क्षेत्रों की गतिविधियों पर पूरी तरह सतर्क रहते हैं। प्रशांत महासागर हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है और हमने हमेशा न्यूजीलैंड को इस क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण तथा समान सोच वाली शक्ति के रूप में देखा है।’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में नई ऊर्जा भरने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इसी का परिणाम है कि दोनों देशों के रिश्ते अब रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच चुके हैं।
टंडन ने कहा, ‘हिंद महासागर और प्रशांत महासागर क्षेत्र के देशों के रूप में हमारे बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंध होना आवश्यक है। यही इस साझेदारी की मूल सोच और आधार है।’
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते
नई दिल्ली 17 मई 2024,
अनुजा झा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने कभी भी साक्षात्कार देने से इनकार नहीं किया है, साथ ही उन्होंने मीडिया की भूमिका में आए बदलाव और जनता तक पहुंचने को संचार के अनेक माध्यमों की उपलब्धता पर भी जोर दिया। इंडिया टुडे को दिए एक विशेष साक्षात्कार में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का मीडिया पहले जैसा नहीं रहा।
जब उनसे पूछा गया कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए वे जितनी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते थे और जितने साक्षात्कार देते थे, अब उसकी तुलना में वे कम क्यों देते हैं, तो प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मीडिया का एक खास तरीके से इस्तेमाल किया गया है, और वे उस रास्ते पर नहीं जाना चाहते।
उन्होने कहा कि “मुझे कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। मैं गरीब लोगों के घरों में जाना चाहता हूं। मैं विज्ञान भवन में रिबन काटकर अपनी तस्वीर भी खिंचवा सकता हूं। लेकिन मैं ऐसा नहीं करता। मैं झारखंड के एक छोटे से जिले में जाता हूं और एक छोटी सी योजना पर काम करता हूं,” ।
उन्होंने कहा कि वह एक नई कार्य संस्कृति लेकर आए हैं, “अगर वह संस्कृति सही लगती है, तो मीडिया इसे सही तरीके से प्रस्तुत करे; अगर नहीं, तो नहीं करे।”
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज मीडिया एक अलग इकाई नहीं रह गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा, कि “पहले मैं आज तक से बात करता था, लेकिन अब दर्शक जानते हैं कि मैं किससे बात कर रहा हूं (एंकरों का नाम लेते हुए)। आज मीडिया कोई अलग इकाई नहीं रह गई है। कई अन्य लोगों की तरह, आप (एंकरों) भी अपने विचार लोगों के सामने रखते हैं। और एंकरों के बारे में भी जनता की तय धारणा है ”
कुछ ही सेकंड बाद,उन्होंने मजाक में कहा,कि “अगर इस चुनाव में ज्यादा से ज्यादा लोग मुझे देखेंगे,तो वे मुझे आज तक पर देखेंगे।”
उन्होंने बताया कि पहले मीडिया ही संचार का एकमात्र स्रोत था,लेकिन अब संचार के नए माध्यम उपलब्ध हैं।
“आज, अगर आप जनता से बात करना चाहते हैं, तो संवाद दोतरफा होता है। आज जनता मीडिया के बिना भी अपनी बात रख सकती है। यहां तक कि जिसे जवाब देना है, वह भी मीडिया के बिना अपने विचार अच्छे से व्यक्त कर सकता है,” ।
https://www.indiatoday.in/elections/video/pm-modi-reveals-why-he-doesnt-hold-press-conferences-2540134-2024-05-17
