आधे अधूरे ईसाई अंतिम संस्कार को फिर बने हिंदू

ईसाईयत अपनाने वाले परिवार को महिला का श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने से रोका, ‘घर वापसी’ पर बनी सहमति

सहारनपुर में ईसाई बनने वाले एक परिवार की महिला का अंतिम संस्कार ग्रामीणों ने रोक दिया। पंचायत में 13 में से 11 परिवारों ने पुलिस की मौजूदगी में हिंदू धर्म में वापसी की घोषणा की।

सहारनपुर के पीकी गांव में पंचायत के बाद सहमति पत्र दिखाते ग्रामीण।

13 परिवारों ने पांच साल पहले अपना लिया था ईसाई धर्म।

पंचायत में 11 परिवारों ने हिंदू धर्म अपनाया।

पुलिस की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार।

सड़क दूधली (सहारनपुर) 27 फरवरी 2026 । ईसाई धर्म अपनाने वाले एक परिवार की महिला की मृत्यु के बाद ग्रामीणों और कुनबे के लोगों ने उसका अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। पंचायत में ईसाई बने परिवारों ने दोबारा हिंदू धर्म में वापसी की घोषणा की, जिसके बाद महिला का अंतिम संस्कार संभव हो सका।

13 में से 11 परिवारों ने पुलिस की मौजूदगी में शपथ पत्र लिखकर दिया, तब जाकर समाज ने उन्हें अपनाया। साथ ही तय हुआ कि बाद में हवन कराकर पूरी प्रक्रिया के साथ घर वापसी कराई जाएगी।

गुरुवार रात गांव पीकी निवासी राम सिंह की पत्नी मामचंदी का निधन हो गया था। ग्रामीणों के अनुसार अनुसूचित जाति के राम सिंह के परिवार सहित गांव के सुनीत कुमार, सुरेन्द्र, विक्रांत, शीला और मोहित सहित 13 परिवारों के लगभग 65 लोगों ने पांच साल पहले ईसाई धर्म अपना लिया था। इस कारण समाज और परिवार के लोगों ने उनका बहिष्कार कर दिया था।

वे मामचंदी की मृत्यु के बाद उनके घर भी नहीं गए। स्वजन मामचंदी का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में करना चाहते थे, लेकिन समाज के लोगों ने इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि अंतिम संस्कार ईसाई धर्म के अनुसार ही होना चाहिए। पुलिस भी गांव पहुंची थी।

शुक्रवार को समाज के लोगों की गांव के रविदास मंदिर में पंचायत हुई जहां 13 परिवारों में से 11 परिवारों ने हिंदू धर्म में लौटने की घोषणा की। पंचायत में यह निर्णय लिया गया कि महिला का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में किया जाएगा। मृतका के पुत्र सुरेंद्र ने बताया कि गांव के जिम्मेदार और बिरादरी के लोगों द्वारा पंचायत में आपसी सहमति बन गई।

विरोध के कारण नहीं बना था चर्च
ग्रामीणों ने पांच साल पहले हिंदू धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म अपनाना शुरू किया था। एक के बाद एक परिवार ईसाई धर्म को अपनाते गए। गांव में चर्च भी बनाने का प्रयास किया गया था। इसके लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी।

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ईसाई बुजुर्ग के शव का श्मशान में अंतिम संस्कार पर बवाल, गांववालों ने रोका, बोले- बदल चुके हैं धर्म

गांववालों का आरोप था कि बुजुर्ग के परिवार ने ईसाई धर्म अपना लिया है, वो कैसे श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के पिंकी गांव में दलित वृद्धा के अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. यहां गांव की वृद्धा मामचंदी का अचानक निधन हो गया. शुक्रवार सुबह उनके परिजन शव गांव के श्मशान घाट ले जाकर अंतिम संस्कार की तैयारी में थे. तभी रास्ते में ही गांव के दलित समाज के कुछ लोगों ने आपत्ति जता शव यात्रा रोक दी.

आपत्तिकर्ताओं का कहना था कि मृतका का परिवार उन में शामिल है, जो कुछ समय पहले ईसाई हो गये थे. उनका तर्क था कि गांव की परंपरानुसार जो परिवार ईसाई बन चुके हैं, उन्हें हिंदू रीति-रिवाजों से गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार का अधिकार नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे परिवारों का पहले ही बिरादरी से बहिष्कार हो चुका है, इसलिए उन्हें सामुदायिक श्मशान भूमि का उपयोग नहीं करने दिया जा सकता.

गांव में तनाव यथावत
घटना के बाद गांव में तनाव बढ़ने लगा और वातावरण संभालने को गांव के मंदिर परिसर में पंचायत हुई. पंचायत में बिरादरी के प्रमुख लोगों और अलग-अलग परिवारों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. चर्चा में यह  भी सामने आया कि गांव के कुल 13 परिवार पहले ही ईसाई बन चुके हैं, जिससे पारंपरिक व्यवस्था बिगड़ी है.

लंबी बातचीत और विचार-विमर्श बाद पंचायत ने सामूहिक निर्णय लिया कि जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कोई भी व्यक्ति मृतका की अंतिम यात्रा में नहीं जायेगा. हालांकि, चर्चा में ही कुछ परिवारों ने मूल धर्म में वापसी की बात कही. पंचायत में मौजूद 13 में से 11 परिवारों ने दोबारा हिंदू धर्म अपनाने पर सहमति जताई, तो बातचीत में नरमी आने लगी.

स्थिति की संवेदनशीलता देख गांव के जिम्मेदार लोगों ने परिजनों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया. फिर पंचायत और बिरादरी बीच सहमति बनी कि मृतका मामचंदी का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में ही हिंदू रीति-रिवाजों से होगा. इसके बाद अंतिम यात्रा आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई और गांव में तनाव घटा.

मृतका के बड़े बेटे ने बताया…
मृतका के बड़े बेटे सुरेंद्र ने बताया कि गांव के जिम्मेदार लोगों और बिरादरी में आपसी समझ बन जाने से उनकी मां का अंतिम संस्कार अब गांव के श्मशान घाट पर ही होगा. विवाद समाप्त हो गया और परिवार को अंतिम संस्कार करने की अनुमति मिल गई .

हालांकि, गांव में अभी भी दो ऐसे परिवार हैं जिन्होंने ईसाईयत छोड़ने से मना किया है. गांव के कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें भी समझा-बुझाकर वापसी को तैयार करने की कोशिश होगी, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद की स्थिति न बने.

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