अंत्यपरीक्षण: फेफड़ों में खून के थक्के से प्रतीक यादव का हृदय और सांस हुई एकाएक बंद

छह चोट, इनमें से तीन 5 से 7 द‍िन पुरानी! प्रतीक यादव की अंत्यपरीक्षण र‍पट का ‘परीक्षण ‘

लखनऊ 13 मई 2026। सपा नेता स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की अंत्यपरीक्षण र‍पट से कई बातें ऐसी न‍िकल रही हैं जो चौंका रही हैं. डॉक्‍टरों ने साफ-साफ लिखा है क‍ि मौत कार्डियोरेस्पिरेटरी फेल्योर से हुई है. लेकिन 6 घावों का भी उल्लेख है. इनका विवरण भी दिया है.

प्रतीक यादव की अंत्यपरीक्षण रपट आ गई है. शरीर पर कई नई- पुरानी चोटों के निशान अंकित किए गए हैं, जबकि मौत का कारण पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म यानी फेफड़ों में बड़े खून के थक्के के चलते कार्डियोरेस्पिरेटरी फेल्योर बताया गया है. रपट के अनुसार सभी चोटें मृत्यु पूर्व की हैं. लेकिन तीन चोटें ऐसी भी हैं, जो 5-7 द‍िन पुरानी हैं.

डॉक्‍टरों की र‍पट के एक-एक शब्‍द का मतलब 
र‍िपोर्ट में ल‍िखा है क‍ि तीन डॉक्‍टरों की टीम ने प्रतीक यादव का अंत्यपरीक्षण क‍िया इसमें एक प्रोफेसर,एक सीनियर रेज‍िडेंट डॉक्‍टर और एक जून‍ियर रेज‍िडेंट डॉक्‍टर थे.तीनों ने उनके शरीर के एक-एक ह‍िस्‍सा जांचा और म‍िलकर यह रपट तैयार की है. र‍पट में 6 घावों का उल्लेख है. यह मारपीट वाले घाव नहीं है. डॉक्‍टर अंत्यपरीक्षण र‍पट में घाव को इंजरी ही ल‍िखते हैं. यह घाव खून का थक्‍का बनने से भी हो सकता है. नसें फटने से भी हो सकता है.
जान‍िए अंत्यपरीक्षण र‍िपोर्ट में क्‍या-क्‍या ल‍िखा…

Injury No. 1
छाती के सामने 14×7 सेमी का नीला/लाल-भूरा दाग
मतलब:
शरीर के सीने के सामने हिस्से पर बड़ा नीला-सा चोट का निशान है, जिसके किनारों पर पीला-हरा रंग भी दिख रहा है.
परिणाम = अंदरूनी खून जमने से बना नीला-पीला निशान, इसे bruise कहा गया है.

Injury No. 2
19×12 सेमी का घाव
दाईं बांह (right arm) पर, बगल (armpit) के नीचे पीछे की तरफ
मतलब:
दाहिनी बांह के ऊपरी हिस्से में बड़ा चोट का निशान है, जो अंदरूनी ब्लीडिंग से बना है.
Injury No. 3
24×8 सेमी का निशान
दाहिने हाथ के forearm (कोहनी से कलाई तक) पर
मतलब:
कोहनी से कलाई तक बड़ा लंबा नीला निशान है.
Injury No. 4
6×4 सेंटीमीटर की चोट
दाहिने forearm के अंदरूनी हिस्से में
मतलब:
बांह के अंदर छोटे आकार की चोट है, कोहनी से लगभग 15 सेमी नीचे.
Injury No. 5
12×6 सेमी चोट
दाहिनी कोहनी के पीछे/बगल हिस्से में
मतलब:
कोहनी के आसपास एक और चोट का निशान है।
Injury No. 6
3×2 सेमी चोट
बाएं हाथ की कलाई के ऊपर
मतलब:
बाएं हाथ की कलाई पर छोटा सा चोट का निशान है.
Opinion यानी डॉक्‍टरों की एकमत राय- यानी मौत का कारण
इसमें लिखा है:
Cardiorespiratory collapse due to massive pulmonary thromboembolism
इसका मतलब है क‍ि मौत का कारण फेफड़ों की नस में बड़ा खून का थक्का (clot) जमना था. जिससे दिल और सांस लेने की प्रक्रिया अचानक बंद हो गई. यह स्थिति मेडिकल में बहुत गंभीर होती है और अचानक मौत का कारण बन सकती है.
व‍िसरा प्र‍िजर्व
इसमें एक पैरे में ये भी ल‍िखा है क‍ि प्रतीक यादव के अंगों का व‍िसरा सुरक्षित कर ल‍िया गया है.
मतलब:
शरीर के अंदरूनी अंग यानी दिल, फेफड़े आदि को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है
ताकि जरूरत पड़ने पर histopathology यानी फॉरेंसिक जांच हो सके.
Ante-mortem injuries
मतलब:
जितनी भी चोटें हैं, वे मौत से पहले लगी थीं
यानी यह चोटें मौत के बाद नहीं बनीं
Probable time यानी चोट और मौत का समय
चोटें:
Injury 1,2,3 → लगभग 5 से 7 दिन पुरानी
Injury 4,5,6 → लगभग 1 दिन पुरानी
मौत और अंत्यपरीक्षण:
मौत और अंत्यपरीक्षण के बीच समय-लगभग आधा दिन

प्रतीक यादव की कहानी, जो कभी चर्चाओं में नहीं आना चाहते थे

वजन घटाने का चैलेंज और करोड़ों का व्यवसाय:
प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे थे, जिन्होंने राजनीति के बजाय बिजनेस और फिटनेस अपनी पहचान बनायी. लंदन से एमबीए कर उन्होंने रीयल एस्टेट में नाम कमाया. वे अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल और बॉडी बिल्डिंग प्रेमी थे. फिटनेस के प्रति उनकी दीवानगी ऐसी थी कि उन्होंने अपना 36 किलो वजन घटाकर सबको चौंका दिया था. 38 साल की उम्र में पल्मोनरी एम्बोलिज्म से उनका असामयिक निधन सपा परिवार और समर्थकों को गहरा धक्का है. पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में खून का थक्का जमना) जैसी गंभीर बीमारी ने एक ऐसा व्यक्ति  छीन लिया, जो राजनीति के पावर सेंटर में पैदा हुआ लेकिन हमेशा चकाचौंध से दूर रहा. प्रतीक की पहचान सिर्फ एक ‘यादव’ होने तक सीमित नहीं थी, वे एक सफल बिजनेसमैन, बॉडी बिल्डिंग के शौकीन और एक ऐसे व्यक्ति थे, जिनकी जिंदगी के पन्ने उतार-चढ़ाव और संघर्षों से भरे रहे.
मौत का कारण: लखनऊ के सिविल अस्पताल लाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया था.
अस्पताल से बिना अनुमति घर आना पड़ा भारी?
बताया जा रहा है कि प्रतीक पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. मौत से ठीक 13 दिन पहले, यानी 30 अप्रैल को भी उनकी तबीयत बिगड़ी. उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल ले जाया गया था, 3 दिन इलाज चला. डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी थी, लेकिन प्रतीक बिना अनुमति घर चले आए थे. शायद यही लापरवाही उन पर भारी पड़ गई.
बचपन का संघर्ष और मुलायम का साथ
प्रतीक का जन्म 7 जुलाई 1987 को फर्रुखाबाद के व्यवसायी चंद्रप्रकाश गुप्ता के घर हुआ था. उनकी मां साधना गुप्ता नर्स थीं. प्रतीक जब मात्र एक साल के थे, तभी उनके पिता ने साथ छोड़ दिया और तीन साल की उम्र में माता-पिता का तलाक हो गया. प्रतीक की जिंदगी में मोड़ तब आया जब उनकी मां साधना गुप्ता ने मुलायम सिंह यादव की मां मूर्ति देवी की जान बचाई. अस्पताल में गलत इंजेक्शन लगने से रोक साधना ने मूर्ति देवी को बचाया था, जिससे मुलायम काफी प्रभावित हुए. साल 2007 में मुलायम ने साधना गुप्ता से शादी की और सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दे सार्वजनिक घोषणा की कि ‘साधना मेरी पत्नी और प्रतीक मेरा बेटा है.’
लंदन से MBA, लेकिन राजनीति को कहा ‘ना’
मुलायम सिंह यादव चाहते थे कि प्रतीक भी परिवार की तरह राजनीति में आएं. प्रतीक ने लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल और लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद ब्रिटेन की लीड्स यूनिवर्सिटी से MBA किया. वे भारत लौटे, तो उनके पास सत्ता के गलियारों में बैठने का पूरा मौका था, लेकिन उन्होंने रीयल एस्टेट बिजनेस चुना. वे मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर ही रहना पसंद करते थे.
जब पिता के चैलेंज पर घटाया 36 किलो वजन
प्रतीक यादव को लग्जरी कारों और फिटनेस का जबरदस्त शौक था. उनका वजन 103 किलो तक पहुंच गया था. तब मुलायम सिंह यादव ने उनसे कहा था कि अगर वजन घटाओगे तो बड़ा इनाम मिलेगा. प्रतीक ने चैलेंज गंभीरता से लिया और जिम में पसीना बहाकर 36 किलो वजन घटाया. इसके बाद उन्होंने लखनऊ में अपना खुद का जिम खोल बॉडी बिल्डिंग को अपना पैशन बना लिया. वे अक्सर अपनी करोड़ों की लैंबोर्गिनी कार को लेकर चर्चा में रहते थे.
अपर्णा के साथ लव स्टोरी और तलाक का ऐलान
प्रतीक और अपर्णा बिष्ट की प्रेम कहानी किसी फिल्म से कम नहीं थी. दोनों स्कूल के दिनों से दोस्त थे. एक जन्मदिन की पार्टी में ईमेल आईडी एक्सचेंज करने से शुरू हुई यह दोस्ती 2011 में शाही शादी में बदली. हालांकि, उनकी शादीशुदा जिंदगी में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव देखे गए. इसी साल जनवरी में प्रतीक ने सोशल मीडिया पर तलाक की बात कहकर सबको चौंका दिया था, लेकिन मात्र 9 दिन बाद ही दोनों में सुलह हो गई और उन्होंने अपनी तस्वीर साझा करते हुए खुद को ‘चैंपियंस का परिवार’ बताया.
पत्नी अपर्णा यादव: परिवार की पहली ‘भाजपा’ सदस्य
अपर्णा ने राजनीति में कदम रखा और 2017 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं. 2022 में उन्होंने सबको तब हैरान कर दिया जब वे सपा छोड़कर भाजपा में चली गईं. वे मुलायम परिवार की पहली सदस्य थीं जिन्होंने भाजपा का दामन थामा. अभी वे उत्तर प्रदेश महिला आयोग उपाध्यक्ष हैं.
बिजनेस पार्टनर से विवाद और कानूनी उलझनें
प्रतीक का कारोबार मुख्य रूप से उनके साले चंद्रशेखर सिंह बिष्ट (अमन बिष्ट) के माध्यम से चलता था. साल 2012 में सपा सरकार बनने के बाद चंद्रशेखर ने कई कंपनियां रजिस्टर कराई थीं. पिछले साल प्रतीक तब चर्चा में आए जब उन्होंने अपने पूर्व पार्टनर कृष्णानंद पांडेय के खिलाफ 5 करोड़ की रंगदारी मांगने की FIR दर्ज कराई थी.
एक अधूरा सफर…
प्रतीक यादव भले ही मीडिया से दूर रहते थे, लेकिन वे ‘जीव आश्रय फाउंडेशन’ से बेघर जानवरों और गरीबों की मदद करते थे. 38 साल की उम्र, अपनी छोटी बेटियों का चेहरा और अपनी शर्तों पर जीने वाला वो व्यक्ति अब बस यादों में रह गया है.

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