“छात्रों की गूंज”वाले राहुल अब चंदन सिंह जीना कांड के बाद करेंगें क्या?

Paper Leak Politics: राहुल गांधी के अभियान को बड़ा झटका, घर के चिराग से लगा दाग, ‘छात्रों की गूंज’ में अब क्या देंगे जवाब?

रविशंकर सिंह

Rahul Gandhi Paper Leak Politics Exposed: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पेपरलीक वाले मुहिम को बड़ा झटका लगा है. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ओएसडी चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी औऱ 1.28 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्ती के बाद कांग्रेस बैकफुट पर है. ईडी ने हरीश रावत के सीएम रहते साल 2016 में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती धांधली से जुड़े मामले में कार्रवाई की है. अब सवाल यह उठता है कि राहुल गांधी जिस पेपरलीक को उत्तराखंड से लेकर यूपी तक मुद्दा बना रहे थे, क्या इस प्रकरण के बाद उस मुहिम को झटका लगा है? क्या राहुल गांधी के मुहिम को उनके घर के चिराग में लगी दाग से बड़ा झटका लगा है? झारखंड पेपरलीक मामले का ठीकरा तो सीएम हेमंत सोरेन पर फोड़ दिया था, अब उत्तराखंड मामले पर क्या जवाब देंगे?

उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों भूचाल आया हुआ है, जिसने देहरादून से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस नेताओं की नींद उड़ा दी है. उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मुश्किल में घिर गए हैं. उन पर अपने ही पूर्व सहयोगी चंदन सिंह जीना की वजह से दाग लगा है. इस घटना से सिर्फ हरीश रावत ही नहीं, बल्कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को भी बड़ा झटका लगा है.  दरअसल, हरीश रावत के पूर्व निजी सचिव चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारा, जिसमें करोड़ों रुपये के हीरे-जवाहरात और नकदी बरामद हुई है. इस रेड के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस संगठन के सभी पदों से इस्तीफे की पेशकश की है. उन्होंने कहा है कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से राहुल गांधी के भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामले में चल रहे अभियान पर कोई आंच आए. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे थे, क्या इस घटना से उसे झटका लगा है? राहुल गांधी ने झारखंड में पेपर लीक मामले का ठीकरा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर फोड़ा था, लेकिन अब इस मामले पर वह क्या करेंगे?

राहुल गांधी को पेपरलीक मामले पर लगा बड़ा झटका.

चंदन सिंह जीना पिछले करीब 40 वर्षों से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ जुड़े रहे हैं. अब ईडी की रेड के बाद हरीश रावत पर भ्रष्टाचार और भर्ती घोटाले के गंभीर छींटे पड़े हैं. 2016 के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय इस कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी से इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. लेकिन यह कदम तब उठाया गया जब ईडी ने हरीश रावत के पूर्व ओएसडी और वर्तमान में पीए चंदन सिंह जीना के देहरादून स्थित आवास पर छापेमारी कर करोड़ों रुपये की अघोषित संपत्ति और गहने जब्त किए.

राहुल गांधी का पेपरलीक मामले पर अब क्या रहेगा रुख?
हरीश रावत के पीए के यहां ईडी की रेड और कांग्रेस में बेचैनी
ईडी के अनुसार, चंदन सिंह जीना के ठिकाने से 32 लाख रुपये की अघोषित नकदी, लगभग 200.5 ग्राम वजन के सोने के सिक्के व सोने की चेन और 12 महंगी लग्जरी कलाई घड़ियां बरामद की गईं. जब्त और फ्रीज की गई कुल संपत्ति का मूल्य लगभग 1.28 करोड़ रुपये है. ईडी की जांच में सामने आया है कि UKSSSC की सुरक्षित कस्टडी से अभ्यर्थियों की ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं को गायब किया गया. बिचौलियों से अवैध वसूली कर अधूरी भरी ओएमआर शीटों में फेरबदल करने के लिए उन्हें एक निजी कंप्यूटर एजेंसी को सौंपा गया और फिर दोबारा सील किया गया.

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश भर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम और युवाओं के मुद्दों को लेकर केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारों को घेर रहे हैं. हाल ही में झारखंड में पेपर लीक के मामले पर घिरी उनकी सरकार के बाद, अब उत्तराखंड में खुद कांग्रेस के सबसे बड़े नेता के बेहद करीबी और 40 सालों से साथ काम कर रहे सहयोगी पर यूकेएसएसएससी पेपर लीक और ओएमआर सीट धांधली का शिकंजा कसा है. ऐसे में राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए इस मुद्दे पर अब रक्षात्मक रुख अपनाना मजबूरी बन गया है.

हरीश रावत की सफाई और संगठन पद से छोडने से चल जाएगा काम?
हालांकि, शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हरीश रावत ने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ‘यह सच है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और मैंने पार्टी या सरकार में जो भी जिम्मेदारियां निभाई हैं, उन्होंने महत्वपूर्ण काम संभाले हैं. अगर ग्राम सेवकों की भर्ती में OMR शीट के साथ कोई छेड़छाड़ हुई है और उनकी तरफ से ऐसी गलती का कोई सबूत है, तो मैं उनके इस दुस्साहस से शर्मिंदा हूं. हालांकि, मुझे इस आरोप पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है.’

2027 चुनाव से पहले ‘नैरेटिव’ बनाने का षड्यंत्र या सच?
हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई कमजोर पड़े. हरीश रावत ने इस पूरी कार्रवाई को 2027 में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ सीधे कुछ न मिलने पर उनके सहयोगियों को निशाना बनाकर एक राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने अपने तीन साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल का बचाव करते हुए कहा कि उनके समय में यूकेएसएसएससी की स्थापना राज्य के युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से की गई थी और 42,000 से अधिक सरकारी भर्तियां की गई थीं.

हरीश रावत प्रकरण के बाद कांग्रेस बैकफुट पर आ गई है औऱ भाजपा को बोलने का मौका मिल गया है. राहुल गांधी बीते कुछ महीनों से पूरे देश में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से इस विषय को हवा दे रहे थे. लेकिन ईडी की कार्रवाई बाद उनके पेपरलीक वाले अभियान की हवा निकल गई है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड चुनाव 2027 से ठीक पहले हरीश रावत के पूर्व ओएसडी का नाम सीधे तौर पर पेपर लीक घोटाले में आने से न केवल हरीश रावत की साख पर बट्टा लगा, बल्कि बैकफुट पर आई कांग्रेस के लिए राज्य में वापसी की राह बेहद कठिन दिख रही है. ऐसे में राहुल गांधी के अभियान पर घर के चिराग पर लगे दाग से बड़ा झटका लगा है. अब देखना है कि भविष्य में राहुल गांधी हरीश रावत पर एक्शन लेते हैं, या फिर उसका बचाव करते हैं.

हरीश रावत के पूर्व पीए चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी में क्या मिला?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी में चंदन सिंह जीना के ठिकानों से 32 लाख रुपये की अघोषित नकदी, 200.5 ग्राम वजन के सोने के सिक्के व सोने की चेन और 12 महंगी लग्जरी कलाई घड़ियां बरामद की गईं। ईडी के अनुसार, जब्त और फ्रीज की कुल संपत्ति का मूल्य 1.28 करोड़ रुपये है। घडियों और अननुपातिक खरीद,जिसके पीछे ईडी लगी,की कीमत अलग है। ये,दोनों में करोड़ो में है।

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