झूठा था चंपावत बालिका गैंगरेप मामला, पुलिस ने बताया कमल रावत का बदलापुर, परत दर परत षड्यंत्र 

झूठा निकला चंपावत बालिका गैंगरेप मामला, पुलिस ने बताई चौंकाने वाली बातें, परत दर परत खोला षड्यंत्र
चंपावत नाबालिग से गैंगरेप मामले पर पुलिस ने अनावरण किया. पूरे मामले को पुलिस ने षडयंत्र बताया है.
CHAMPAWAT झूठा निकला नाबालिग गैंगरेप मामला

चंपावत 07 मई 2026 । चंपावत में 16 वर्षीय बालिका से गैंगरेप के सनसनीखेज मामले ने नया मोड़ ले लिया है.मामले में चंपावत पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने घटना का अनावरण कर गैंगरेप को झूठा बताया है.जांच में शामिल मुख्य चिकित्साधिकारी ने भी बालिका से दुष्कर्म का खंडन किया है.पुलिस ने पूरा मामला षड्यंत्र बताया है.षड्यंत्रकारी मास्टरमाइंड कमल रावत निकला.

बदले को बालिका को बहला-फुसलाकर रचा गया पूरा घटनाक्रम: चंपावत में चर्चित बालिका दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस जांच में बड़ा अनावरण हुआ. पुलिस के अनुसार. वैज्ञानिक और तकनीकी जांच में मामला सुनियोजित षड्यंत्र निकला है. बदले की भावना से बालिका को बहला-फुसलाकर पूरा घटनाक्रम रचा गया. मामला गंभीर देखते हुए विशेष अनुसंधान दल ने जांच की, जिसमें सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए.

चंपावत पुलिस अधीक्षक रेखा यादव का बयान (वीडियो सोर्स- Champawat Police)
चंपावत पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने मामले का अनावरण करते हुए बताया कि 6 मई 2026 को बालिका के पिता ने कोतवाली चंपावत में लिखित शिकायत दी कि उसकी 16 वर्षीय बेटी से 3 लोगों ने दुष्कर्म किया है. शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्परतापूर्वक पॉक्सो एक्ट में मुकदमा लिखा और मामला गंभीर पा पुलिस अधीक्षक चंपावत के निर्देश पर पुलिस क्षेत्राधिकारी चंपावत की निगरानी में 10 सदस्यीय विशेष अनुसंधान दल गठित किया गया.

पुलिस अधीक्षक ने खुद घटनास्थल का निरीक्षण कर पीड़िता और स्थानीय लोगों से बातचीत की. साथ ही आरएफएसएल (Regional Forensic Science Laboratory) उधम सिंह नगर की टीम बुलाकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए गए. पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, सीडब्ल्यूसी के समक्ष काउंसिलिंग और न्यायालय में बयान भी कराए गए.

जांच में पुलिस को कई महत्वपूर्ण प्रमाण मिले. जांच में सामने आया कि पीड़िता घटना वाले दिन स्वेच्छा से एक गांव में अपनी सहेलीं के विवाह समारोह में अपने पुरुष मित्र के साथ गई थी. सीसीटीवी फुटेज और सीडीआर से उसके विभिन्न स्थानों पर आवागमन की पुष्टि हुई. पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में किसी प्रकार की बाहरी या अंदरूनी चोट और जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं मिले.

कमल रावत निकला मास्टरमाइंड: पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच में मिले प्रमाणों और शिकायत में भिन्नता का पुलिस ने विश्लेषण किया तो सामने आया कि पूरा मामला षड्यंत्रपूर्वक पुलिस के सामने लाया गया.  पीड़िता से पुन: पूछताछ हुई तो पीड़िता ने पुलिस और कोर्ट से समक्ष माना कि दुष्कर्म नहीं हुआ. पीड़िता ने माना कि पूरा षड्यंत्र कमल रावत और उसकी महिला मित्र व अन्य लोगों ने रचा था.

पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बताया कि कमल रावत रेप प्रकरण में आरोपित रहा है. उस मामले में अब षड्यंत्र में फंसाए लोगों ने उसके खिलाफ पैरवी की थी. ऐसे में कमल रावत ने बदले को तीनों को फंसाने को षड्यंत्र रचा और बालिका को उसके पिता का इलाज कराने और रुपयों का प्रलोभन देकर उसका यूज किया. इसको कमल रावत ने पीड़िता के दोस्त की शादी समारोह वाला दिन घटना को चुना.

इसी कड़ी में 5 मई को पीड़िता अपने पुरुष मित्र के साथ अपनी सहेली की शादी समारोह में शामिल होने गई. षड्यंत्र में योजना थी कि पीड़िता के पुरुष मित्र के घर जाएंगे और घटना संपादित करेंगें, लेकिन पीड़िता का पुरुष मित्र पहले ही घटनास्थल से चला गया. योजना फेल होने से बचाने को कमल रावत ने योजना संपादन को पीड़िता के पुरुष मित्र के किसी परिचित का घर चुना.

इसके बाद उन्होंने पूरी घटना योजनाबद्ध दर्शाते हुए रची. इस तरह पूरा मामला सत्य घटना दर्शाने की कोशिश हुई. जबकि पुलिस जांच में लिखित शिकायत में नामांकित तीनों आरोपितों की घटनास्थल पर होने की पुष्टि नहीं हुई .

अभी,डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच जारी है और संबंधित लोगों से पूछताछ हो रही है. पुलिस अधीक्षक चंपावत रेखा यादव ने कहा कि महिला और बाल अपराधों में उत्तराखंड पुलिस ‘जीरो टॉलरेंस’ पर कार्य करती है.साथ ही झूठे और भ्रामक आरोप भी गंभीरता लेंगें । तथ्याधारित विधिक कार्रवाई सुनिश्चित होगी.

16 वर्षीय नाबालिग संग सल्ली में सामूहिक दुष्कर्म षड्यंत्र मामले का मास्टर माइंड पूर्व मंडल अध्यक्ष और उसकी महिला मित्र संग पुलिस पूछताछ कर रही है। दो आरोपितों के अलावा तीन और अज्ञात है। पूर्व में पंजीकृत प्राथमिकी में संशोधन कर नाम बढ़ेंगे।
पुलिस आरोपितों को आज कोर्ट ले जायेगी।

बुधवार मध्य रात्रि चंपावत जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर गांव में एक 10वीं की छात्रा से तीन लोगों के सामूहिक दुष्कर्म की लिखित शिकायत पर पुलिस ने सल्ली जी वासी विनोद रावत,नवीन रावत और पूर्व प्रधान तथा पूर्व भाजपा मंडल उपाध्यक्ष पूरन रावत के विरूद्ध पोक्सो सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी पंजीकृत की। एसआईटी जांच गठित कर मामले की जांच हुई, तो मामला आपसी पुराने वैर का निकला।

कमल रावत निकला मास्टर माइंड
मामले में पूर्व मंडल अध्यक्ष कमल रावत इसमें मास्टर माइंड निकला,जिसने पुराने वैर का बदला लेने को पूरी षडयंत्र रचा,जबकि दुष्कर्म हुआ ही नही। इसे सामूहिक दुष्कर्म का रूप दिया गया। पुलिस ने मुख्य आरोपित कमल रावत और 112 पर पुलिस को सूचना देने वाली उसकी महिला मित्र को गुरुवार को पकड़ पूछताछ कर रही है।

पुलिस के अनुसार आरोपित ने पीड़िता को उसके पिता का इलाज कराने का प्रलोभन दिया। इस घटना में अन्य भी शामिल है,जिसकी जानकारी जुटाई जा रही है,कुछ से पूछताछ भी हो रही है। पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बताया कि पूर्व पंजीकृत मुकदमे में संशोधन होगा। इसी में आरोपितों के नाम बढ़ाए जाएंगे।

Bar Association enraged over removal of youth from court premises in student gang raped case
छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म मामला: कोर्ट परिसर से युवक ले जाने से भड़का बार संघ,पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

चंपावत में सामूहिक दुष्कर्म मामले में पीड़िता के पैरवीकर्ता कमल रावत को न्यायालय परिसर से पकडने पर जिला बार संघ भड़क गया और पुलिस पर मनमानी व उत्पीड़न के आरोप लगाये.

चंपावत में हाईस्कूल छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म मामले में अब पुलिस कार्रवाई पर  विवाद हो गया । पीड़िता के पैरवीकर्ता और मामला सोशल मीडिया पर उठाने वाले कमल रावत को न्यायालय परिसर से पुलिस और SOG टीम के हिरासत में लेने पर जिला बार संघ भड़क उठा। बार संघ ने पुलिस पर मनमानी और अधिवक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगा जिला जज को ज्ञापन सौंपा।

जिला बार संघ पूर्वाध्यक्ष राम सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि बृहस्पतिवार सुबह 11:15 बजे कमल सिंह रावत न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं से सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण पर चर्चारत थे। तभी कोतवाली प्रभारी बीएस बिष्ट और SOG प्रभारी कमलेश भट्ट पुलिस बल ले परिसर पहुंचे और कमल रावत को जबरन साथ ले गए।

बार संघ का आरोप है कि पुलिस अधिवक्ताओं के विरोध के बावजूद बल प्रयोग कर कमल रावत को पुलिस वाहन में बैठा कोतवाली ले गई। पूरी घटना न्यायालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी है।

अधिवक्ता बिष्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई का आधार पूछा गया तो उन्होंने दो घंटे में पूरे अनावरण की बात कही। बार संघ ने कार्रवाई अलोकतांत्रिक बता कड़ी निंदा की है। संघ का आरोप है कि निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास हो रहा है।

पुलिस अपराधियों की संरक्षक: बार संघ 

बार संघ ने आरोप लगाया कि पीड़ित पक्ष का उत्पीड़न और अपराधियों का संरक्षण हो रहा है। बार संघ के अनुसार, कमल सिंह रावत को पहले भी पीड़िता की रिपोर्ट दर्ज कराने में 16 घंटे अवैध रूप से बैठाए रखा गया था और प्राथमिकी में भी टालमटोल हुई। बार संघ ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी गई कि मांगें पूरी नहीं होने पर अधिवक्ता विभिन्न संगठनों से मिल कर उग्र आंदोलन करेंगें।

ज्ञापन सौंपने वालों में अधिवक्ता हेम जोशी, पवन ज्योति मनराल, आकांक्षा, निर्मल तड़ागी, प्रांचल वर्मा, गंगा आर्या और दीपक जोशी समेत कई अधिवक्ता शामिल रहे।

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