ध्रुव राठी पर 24 घंटे में मानहानि के दो केस, 2018 के केस में समन

Dhruv Rathee Faces Two Defamation Cases Over Ram Sita Video Fresh Summons 2018 Defamation Case
‘क्या हिंदू बीफ खा सकते हैं?, ध्रुव राठी पर 24 घंटे में मानहानि के दो केस, 2018 के केस में समन
सीजेपी के हाल के प्रोटेस्ट को लेकर ध्रुव राठी भारत में है। इस बीच उसके खिलाफ मानहानि से जुड़े दो केस दर्ज किए गए हैं। ‘क्या हिंदू बीफ खा सकते हैं और भाजपा आईटी सेल भाग 2’ पर वह केस का सामना करेगा।

नई दिल्ली 15 अक्टूबर 2026 : यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ 24 घंटे के भीतर मानहानि के दो केस दर्ज किए गए हैं। उन्हें दिल्ली में दो अलग-अलग कानूनी मामलों का सामना करना पड़ रहा है। साकेत कोर्ट में उनके खिलाफ मानहानि का एक नया मुकदमा दायर किया गया है। यह मामला ऐसे वीडियो से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि भगवान राम और माता सीता ने अपने वनवास के दौरान मांस और शराब का सेवन किया था। इसके अलावा, ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट 2’ शीर्षक वाले एक वीडियो को लेकर भी उनकी मुश्किलें बढ़ी हैं। भाजपा आईटी सेल के सदस्य विकास पांडे के 2018 में कराये आपराधिक मानहानि के मामले में भी ध्रुव राठी को नया समन भेजा गया है।
Dhruv Rathee defamation case
ध्रुव राठी पर मानहानि का केस

राम-सीता के वीडियो को लेकर नया केस
सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अमिता सचदेवा और अन्य याचिकाकर्ताओं ने ध्रुव राठी से जुड़े वीडियो को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अमिता सचदेवा ने बताया कि ‘क्या हिंदू बीफ खा सकते हैं?’ शीर्षक वीडियो पर उन्होंने अदालत का रुख किया है। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि ध्रुव राठी को इस तरह का कंटेंट बनाने, अपलोड करने या पब्लिश करने से रोकने को अंतरिम आदेश जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले, ध्रुव राठी ने एक वीडियो पब्लिश किया था, जिसमें भगवान राम और माता सीता को लेकर कुछ दावे किए गए। हमने इस वीडियो से जुड़ा मामला दिल्ली हाई कोर्ट में उठाया, जिसके बाद हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि इस वीडियो को हटवाया जाए।

ध्रुव राठी की बढ़ेंगी मुश्किलें?
एडवोकेट अमिता सचदेवा ने आगे बताया कि 15 जुलाई 2026 को भारत सरकार ने यूट्यूब को वीडियो हटाने का निर्देश दिया, जिसके बाद वह याचिका निस्तारित हो गई। याचिका के निस्तारण के बाद, किसी ने उस 21 मिनट के वीडियो से 3 मिनट का हिस्सा निकालकर उसे फिर से अपलोड कर दिया। अमिता सचदेवा के अनुसार, याचिकाकर्ता फिर से दिल्ली हाई कोर्ट गए, जहां उन्हें ध्रुव राठी के खिलाफ नई कानूनी कार्यवाही शुरू करने की छूट मिल गई। उन्होंने कहा कि हम फिर से दिल्ली हाई कोर्ट गए। कोर्ट ने हमें ध्रुव राठी के खिलाफ नई याचिका या मुकदमा दायर करने और उचित राहत मांगने की छूट दी। इसी छूट के आधार पर, हमने आज साकेत कोर्ट में जिला न्यायाधीश के समक्ष एक मुकदमा दायर किया है।

कैसे कोर्ट में पहुंचा मामला
अमिता सचदेवा ने बताया कि इसमें हमने घोषणा, निषेधाज्ञा और मानहानि के लिए हर्जाने की मांग की है। आज इस मामले की सुनवाई होनी थी। अमिता सचदेवा ने बताया कि याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकील मकरंद नटकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण वे अपनी बात पूरी नहीं कर सके। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई 5 नवंबर तक के लिए टाल दी। उन्होंने ये भी बताया कि वरिष्ठ वकील मकरंद नटकर ने अपनी दलीलें पेश कीं। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े थे, लेकिन VC कनेक्शन में कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण वे अपनी बात पूरी नहीं कर सके।

2018 के मानहानि मामले में नया समन
दिल्ली की एक अदालत ने 2018 में भाजपा IT सेल के सदस्य विकास पांडे की ओर से दायर मानहानि के मामले में राठी को नया समन जारी किया है। अदालत ने गौर किया कि ध्रुव राठी को समन स्वीकारने की कोशिशें कई सालों से चल रही थीं। न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन, विकास पांडे की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें नया समन जारी करने की मांग की गई थी। 12 अक्टूबर के अपने आदेश में अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता पिछले कई साल से आरोपित नंबर 1 (ध्रुव राठी) को समन  कराने की कोशिश कर रहे हैं।

विकास पांडे की ओर से पेश वकील समक्ष शर्मा ने बताया कि राठी आमतौर पर ऑस्ट्रिया में रहता है और दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शनों के लिए भारत आया था। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपित तक समन पहुंचाने को त्वरित कदम उठाने को नया समन जारी करना आवश्यक है। अदालत ने हाथों-हाथ तामील से नया समन भेजने की अनुमति दी, जिसमें शिकायतकर्ता को समन तामील कराने वाले अधिकारी के साथ जाने की छूट दी गई।

विकास पांडे ने बताया कि, इसके बाद, गुरुग्राम स्थित उनके आवास पर ध्रुव राठी को समन तामील करा दिया गया। 2019 से ही उन्हें समन तामील कराने की कई कोशिशें नाकाम रही थीं, जिसके कारण यह मामला लंबित पड़ा हुआ था। ध्रुव राठी को भेजे गए नोटिस के बारे में बात करते हुए विकास पांडे ने कहा कि अदालत का समन ध्रुव राठी के घर के बाहर चिपका दिया गया है क्योंकि वह बाहर नहीं आ रहे था।

ध्रुव राठी के वीडियो पर केस
विकास पांडे के अनुसार, यह मामला आठ साल पुराना है, जब ध्रुव राठी ने लगभग तीन वीडियो बनाए थे। उनमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मैंने उनके खिलाफ फर्जी खबरें फैलाने को किसी व्यक्ति को 50 लाख रुपये की पेशकश की थी। उन्होंने आगे कहा कि जब अरविंद केजरीवाल ने इस फर्जी खबर को ट्वीट और रीट्वीट करके और फैलाया, तो मैंने केजरीवाल और ध्रुव राठी दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। अरविंद केजरीवाल ने तो माफी मांग ली, लेकिन ध्रुव राठी कभी अदालत में नहीं आया। इसके बाद, एक नोटिस और समन जारी किया गया, जिसे मेरे वकील ने गुरुग्राम स्थित उनके घर के बाहर चिपका दिया।

केजरीवाल से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की ओर से वीडियो को रीट्वीट करने से जुड़ा यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। फरवरी 2024 में, केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने इसे रीट्वीट करके गलती की थी। ये मामले तब सामने आए हैं, जब 10 अक्टूबर को दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने गुरुग्राम के सेक्टर 56 स्थित घर से ध्रुव राठी को हिरासत में ले लिया था।

ध्रुव राठी जंतर-मंतर पर CJP के एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाला था। उसे 22 घंटे बाद छोड़ दिया गया। यह तब हुआ जब दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इन विरोध प्रदर्शनों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध थे, बैरिकेडिंग लगाई गई थी, ट्रैफिक पर पाबंदियां थीं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।

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