नोएडा हिंसा को महीनों की तैयारी,अब फंडिंग स्रोत की ढूंढ
नोएडा हिंसा: आंदोलन की आड़ में माहौल बिगाड़ने की प्लानिंग, सामने आया खौफनाक साजिश का ‘ब्लूप्रिंट’
नोएडा में मजदूरों के आंदोलन में हुई हिंसा की पुलिस विवेचना में पता चला है कि कई महीनों से इसकी तैयारी हो रही थी. आंदोलन की आड़ में हिंसा भड़काने उद्देश्य था.
एडा में 13 अप्रैल को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे
नोएडा में फैक्ट्री मजदूरों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की साजिश कई महीनों पहले रची गई थी
मुख्य संदिग्ध आदित्य आनंद को तमिलनाडु से पकडा गया जो नोएडा में रहकर हिंसा की योजना बनाता था
आदित्य आनंद का नोएडा में किराए पर फ्लैट,हिंसा की योजना और रणनीति तैयार की थी
नई दिल्ली/ नोएडा 20 अप्रैल 2026। नोएडा में हाल ही में फैक्ट्री मजदूरों ने जो आंदोलन किया था और उसमें जो हिंसा भड़की थी, उसके पीछे की साजिश का खुलासा अब होने लगा है. इस हिंसा की जांच में खुलासा हुआ है कि पूरी साजिश की स्क्रिप्ट कई महीनों पहले लिखी गई थी, जिसमें अलग-अलग संगठनों के जरिए लोगों को जोड़कर एक संगठिक आंदोलन की आड़ में हालात बिगाड़ने की तैयारी थी.नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन में हिंसा मामले में पुलिस ने हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा को भीड़ को भड़काने और हिंसा फैलाने में पकड़ा था. जांच में ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ संगठन का नाम आया जिससे मुख्य आरोपित आदित्य आनंद ने हिंसा भड़काई थी. 13 अप्रैल के प्रदर्शन में आगजनी और पथराव हुआ था
इस हिंसा में पुलिस ने मुख्य संदिग्ध आदित्य आनंद तमिलनाडु से पकड़ा है. वह जून 2025 से नोएडा में रहता था,उससे पहले वह गुरुग्राम में रहता था. नोएडा में उसने फ्लैट किराये पर ले यही इस हिंसा की पूरी साजिश रची .
अब तक की जांच में यह भी पता चला है कि मजदूरों के आंदोलन की आड़ में हिंसा भड़काने की तैयारी थी. प्रशासनिक कामकाज ठप करना था. अब इस सिलसिले में और भी लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
आदित्य आनंद के बारे में क्या पता चला?
आदित्य आनंद पहले गुरुग्राम में रहता था और फिर नोएडा आ गया. यहां उसने एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल के घर में तीन कमरों का फ्लैट किराये पर लिया था. इस घर को नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम हिंसा का सेंटर पॉइंट बनाया गया था. वह खुद को एक आईटी कंपनी जेनपैक्ट से जुड़ा बताता था.
आदित्य ने लेबर स्टडी में MA किया है. वह हंसराज कॉलेज से भी स्टडी कर चुका है. फिलहाल पीएचडी की तैयारी कर रहा था. आदित्य 2022 में कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान ही 1 लाख कमाता था इसलिए वह हिंसा के लिए पैसे भी खर्च कर रहा था.
जांच में यह भी सामने आया है कि साल 2022 में वह एक कैंपस इंटरव्यू के जरिए चयनित हुआ था और उसी दौरान उसकी कुछ अल्ट्रा लेफ्टिस्ट एक्टिविस्ट ग्रुप्स से नजदीकियां बढ़ीं.
किन संगठनों का आया नाम?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कई संगठनों और फ्रंट के बीच गहरा कनेक्शन सामने आया है, जिन्होंने मिलकर नोएडा हिंसा की प्लानिंग रची थी. इनमें 4 संगठनों का नाम अब तक सामने आया हैः-
RWPI (राजनीतिक फ्रंट)
मजदूर बिगुल दस्ता
नौजवान भारत सभा
दिशा ऑर्गनाइजेशन
रच रहे थे खौफनाक साजिश?
बताया जा रहा है कि ये सभी संगठन आपस में जुड़े हुए थे और एक साझा एजेंडा पर काम कर रहे थे. इसी एजेंडे पर सभी 2022 से काम कर रहे थे. नोएडा एके अरुण विहार में छापेमारी में कई प्रिंटेड दस्तावेज मिले हैं, जिनमें इस पूरी साजिश का ब्लूप्रिंट है.
इन दस्तावेजों में हर छोटी-छोटी बात का जिक्र है. मसलन, किस फेज में क्या करना है? कब और कहां लोगों को इकट्ठा करना है? किस तरह से प्रदर्शन को आगे बढ़ाना है? जिन कंपनियों में मजदूर काम करते हैं, उन्हीं के नाम पर हिंसा के वॉट्सऐप ग्रुप कब बनाना है? वॉट्सऐप ग्रुप का एडमिन कब बनना है और कब ग्रुप से लेफ्ट होना है?
इन दस्तावेजों में मानेसर से नोएडा तक प्रदर्शन की रणनीति लिखी हुई है. जांच में सामने आया है कि करावल नगर, मानेसर और नोएडा को जोड़ते हुए एक श्रृंखलाबद्ध प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी. फरवरी में ही बड़े स्तर पर लेबर स्ट्राइक की योजना बनाई गई थी. इसके पीछे मकसद सिर्फ मजदूरों के मुद्दे उठाना नहीं, बल्कि सड़कों को जाम कर प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करना था.
क्या था पूरा प्लान?
आंदोलन की आड़ में हालात बिगाड़नाः जांच में पता चला है कि मानेसर से नोएडा तक इनका नेटवर्क फैला था. जांच एजेंसियों को मिले इनपुट और बरामद दस्तावेजों के आधार पर यह सामने आया है कि इस पूरी साजिश की पटकथा कई महीनों पहले लिखी गई थी, जिसमें अलग-अलग संगठनों और फ्रंट के जरिए लोगों को जोड़कर एक संगठित आंदोलन की आड़ में हालात बिगाड़ने की तैयारी थी.
मई तक आंदोलन को जारी रखनाः सामने आया है कि मजदूर आंदोलन की आड़ में हिंसा करने का प्लान था. मार्च के अंत से अप्रैल तक मानेसर में मजदूरों का प्रदर्शन हुआ. 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच बड़ी संख्या में लोग अरुण विहार में जुटे थे. अलग-अलग संगठनों के फ्रंट के जरिए भीड़ को इकट्ठा किया जा रहा था. बरामद दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे आंदोलन को मई 2026 तक जारी रखने की योजना थी, ताकि धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जा सके और व्यापक असर डाला जा सके.
मार्च-अप्रैल में पूरी स्क्रिप्ट तैयारः पुलिस ने दिल्ली के आदर्श नगर और शाहबाद डेयरी इलाके में छापा मारा था, जहां से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, संदिग्ध दस्तावेज, पेम्फलेट और एक अज्ञात डिवाइस बरामद की गई थी. पिछले एक महीने से पेम्फलेट बांटकर लोगों को जोड़ने का काम किया जा रहा था. जांच के मुताबिक, 31 मार्च और 1 अप्रैल के बीच इस पूरी साजिश की फाइनल स्क्रिप्ट तैयार की गई थी, जिसमें कई लोगों की भूमिका चिन्हित की गई है.
पुलिस ढूंढ रही इन सवालों के जवाब
एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क को फंडिंग कहां से मिल रही थी? साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि युवाओं को कैसे इस नेटवर्क में जोड़ा गया और उनकी भर्ती किस तरीके से की गई? पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. फंडिंग, विदेशी लिंक, और अन्य संगठनों के संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है.
