मधुमेह
भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को Diabetes, जानें कौन सा राज्य डायबिटीज का सबसे ज्यादा शिकार
भारत में डायबिटीज महामारी का रूप लेती जा रही है. किस राज्य में डायबिटीज के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है? जानें.
Over 100 million people in India have diabetes; find out which state in the country has the highest number of diabetes patients
भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को Diabetes, जानें देश का कौन सा हिस्सा है डायबिटीज (मधुमेह)के सबसे ज्यादा मरीजों का शिकार
डायबिटीज (मधुमेह) किसी भी उम्र में हो सकती है. आजकल, बिजी लाइफस्टाइल, खराब खान-पान की आदतों और एक्सरसाइज की कमी के कारण, डायबिटीज से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज कंट्रोल करने को सही खान-पान बहुत जरूरी है. कुछ लोग मोटापे, वजन बढ़ने या ज्यादा तनाव जैसे कारणों से इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं. एक बार डायबिटीज हो जाने पर, व्यक्ति को जीवन भर इसके साथ जीना पड़ता है. यह एक जेनेटिक बीमारी है जो समय के साथ और बिगड़ती जाती है.
भारत में, डायबिटीज की समस्या अब एक महामारी का रूप ले चुकी है. भारत को अब अक्सर ‘डायबिटीज कैपिटल ऑफ वर्ल्ड’ कहा जाता है. इसी संबंध में, इस खबर में जानें कि भारत के किस राज्य में डायबिटीज के सबसे ज्यादा मरीज हैं और इसके पीछे क्या कारण हैं…
भारत के किस राज्य में डायबिटीज के सबसे ज्यादा रोगी हैं?
द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी (जून 2023) में प्रकाशित ICMR-INDIAB के एक डिटेल्ड स्टडी के अनुसार, भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, और सबसे ज्यादा डायबिटीज रेट वाला राज्य गोवा है, जहां 26.4 प्रतिशत से ज्यादा आबादी इस बीमारी से प्रभावित है. इसके बाद, ज्यादा दर वाले अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पुडुचेरी, तमिलनाडु, केरल, पंजाब और चंडीगढ़ शामिल हैं. 2025 के एक और विश्लेषण से पता चलता है कि डायबिटीज के लिए सबसे ज्यादा ‘आयु-मानकीकृत प्रसार दर’ (ASPR) तमिलनाडु में है, जिसके बाद गोवा और कर्नाटक का नंबर आता है. नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया 2023–2025 की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे कम डायबिटीज दर वाला राज्य उत्तर प्रदेश (4.8 प्रतिशत) है.
भारत के किस राज्य में डायबिटीज के सबसे ज्यादा मरीज हैं?
भारत में राज्यवार मधुमेह (Diabetes) के आंकड़े मुख्यतः National Family Health Survey (NFHS-5) और Indian Council of Medical Research (ICMR) जैसी रिपोर्टों से मिलते हैं।
नीचे NFHS-5 (2019–21) के आधार पर वयस्कों (15+ वर्ष) में उच्च रक्त शर्करा/मधुमेह (≥140 mg/dl या दवा ले रहे) का राज्यवार सार दिया गया है:
🇮🇳 भारत में राज्यवार मधुमेह (NFHS-5 अनुमान)
🔴 उच्च प्रचलन वाले राज्य (लगभग 10%+ तक)
केरल – ~19% (सबसे अधिक)
गोवा – ~15%
तमिलनाडु – ~13–14%
तेलंगाना – ~12%
पंजाब – ~10–11%
👉 ये राज्य अधिक शहरीकरण, जीवनशैली और मोटापे से जुड़े हैं
🟠 मध्यम प्रचलन (7–10%)
महाराष्ट्र – ~9–10%
कर्नाटक – ~9%
आंध्र प्रदेश – ~8–9%
गुजरात – ~8%
दिल्ली (UT) – ~10% के आसपास
🟡 कम प्रचलन (5–7%)
उत्तराखंड – ~6–7%
हिमाचल प्रदेश – ~6%
पश्चिम बंगाल – ~6–7%
हरियाणा – ~7%
🟢 बहुत कम प्रचलन (5% से नीचे)
उत्तर प्रदेश – ~4–5%
बिहार – ~3–4%
झारखंड – ~3–4%
छत्तीसगढ़ – ~3–5%
असम – ~4–5%
👉 इन राज्यों में अभी कम है, लेकिन pre-diabetes ज्यादा पाया जा रहा है (भविष्य में बढ़ने का खतरा)
📊 राष्ट्रीय स्तर
भारत में कुल मधुमेह प्रचलन ~9–10% (वयस्कों में)
राज्यों के बीच बहुत बड़ा अंतर (3% से ~19%)
📌 मुख्य निष्कर्ष
दक्षिण भारत (केरल, तमिलनाडु) → सबसे ज्यादा
उत्तर/पूर्व भारत (UP, बिहार) → अभी कम लेकिन तेजी से बढ़ रहा
शहरी राज्य → ज्यादा जोखिम
ग्रामीण/कम विकसित राज्य → कम लेकिन तेजी से वृद्धि संभावित
⚠️ कारण
शारीरिक गतिविधि में कमी
जंक फूड/डायट
मोटापा
तनाव और शहरी जीवनशैली
📊 भारत में राज्यवार मधुमेह (NFHS-5: 2019–21)
(15+ आयु वर्ग, % में – Blood sugar high या दवा ले रहे)
राज्य पुरुष (%) महिला (%) कुल (लगभग)
केरल 22 17 ~19
गोवा 17 13 ~15
तमिलनाडु 15 12 ~13–14
तेलंगाना 13 11 ~12
पंजाब 12 9 ~10–11
महाराष्ट्र 11 8 ~9–10
कर्नाटक 10 8 ~9
गुजरात 9 7 ~8
आंध्र प्रदेश 9 8 ~8–9
दिल्ली (UT) 11 9 ~10
हरियाणा 8 6 ~7
पश्चिम बंगाल 7 6 ~6–7
हिमाचल प्रदेश 7 5 ~6
उत्तराखंड 7 6 ~6–7
उत्तर प्रदेश 5 4 ~4–5
बिहार 4 3 ~3–4
झारखंड 4 3 ~3–4
छत्तीसगढ़ 5 4 ~4–5
असम 5 4 ~4–5
🔍 उत्तराखंड का विस्तृत विश्लेषण
📈 वर्तमान स्थिति
कुल मधुमेह प्रचलन: ~6–7%
पुरुषों में थोड़ा अधिक (7%)
महिलाओं में ~6%
👉 यह राष्ट्रीय औसत से थोड़ा कम है, लेकिन तेजी से बढ़ रहा है
⚠️ जोखिम बढ़ने के कारण
शहरीकरण (देहरादून, हरिद्वार)
कम शारीरिक श्रम (पहाड़ी क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन)
पैकेज्ड/जंक फूड का बढ़ता उपयोग
मोटापा और हाई BP का बढ़ना
📊 ग्रामीण vs शहरी अंतर
शहरी क्षेत्र (देहरादून) → ज्यादा केस
पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्र → अभी कम, लेकिन बढ़ोतरी तेज
🚨 भविष्य का खतरा
Pre-diabetes के मामले तेजी से बढ़ रहे
अगले 10–15 साल में यह राज्य भी मध्यम-उच्च श्रेणी में जा सकता है
🧠 महत्वपूर्ण ट्रेंड (पूरे भारत में)
पुरुष > महिला (ज्यादातर राज्यों में)
दक्षिण भारत → सबसे ज्यादा प्रभावित
गरीब राज्यों में अभी कम, पर तेजी से वृद्धि
✅ निष्कर्ष
उत्तराखंड अभी मध्यम स्तर पर है, लेकिन
जीवनशैली बदलने से यह जल्दी बढ़ सकता है
समय रहते रोकथाम जरूरी है
उत्तराखंड में मधुमेह (Diabetes) से बचाव का एक प्रैक्टिकल, रोज़मर्रा का प्लान , जो देहरादून/आसपास की जीवनशैली के हिसाब से उपयोगी है।
🛡️ मधुमेह से बचाव का दैनिक प्लान
🌅 सुबह (6–8 बजे)
30–40 मिनट तेज चलना / पहाड़ी वॉक
खाली पेट:
गुनगुना पानी + 5–6 मेथी दाने (भिगोकर)
अगर संभव हो:
10 मिनट योग (प्राणायाम, कपालभाति)
🍽️ नाश्ता (8–9 बजे)
👉 ये खाएं:
ओट्स / दलिया / मिक्स आटा रोटी
अंडा / दही
मौसमी फल (सेब, पपीता)
👉 ये कम करें:
पराठा + ज्यादा तेल
मैगी, ब्रेड-बटर
🏢 दिनभर (ऑफिस/काम)
हर 1 घंटे में 5 मिनट चलें
8–10 गिलास पानी
चाय में चीनी कम करें
👉 स्नैक्स:
भुना चना / मूंगफली
फल
🍛 दोपहर का भोजन
2 रोटी (मल्टीग्रेन)
दाल + हरी सब्जी
सलाद (खीरा, गाजर)
👉 चावल:
कम मात्रा में (prefer brown rice)
🌇 शाम
20–30 मिनट वॉक
चाय बिना चीनी या बहुत कम
👉 Avoid:
समोसा, पकोड़े (देहरादून में आम आदत 🙂)
🌙 रात का खाना (8 बजे तक)
हल्का भोजन:
1–2 रोटी + सब्जी
सूप
सोने से 2 घंटे पहले खाना खत्म
⚠️ 5 बड़ी गलतियां (जो लोग करते हैं)
1-“मैं दुबला हूँ, मुझे diabetes नहीं होगी” ❌
2-ज्यादा मीठी चाय ☕
3-लगातार बैठना
4-देर रात खाना
5-stress + नींद की कमी
🧪 जरूरी जांच (हर 6–12 महीने)
Fasting Blood Sugar
HbA1c
BP और वजन
📍 खास सलाह (उत्तराखंड के लिए)
पहाड़ी इलाकों में walking सबसे बड़ा इलाज है
देहरादून जैसे शहरों में:
बाहर का खाना कम करें
weekend activity (trekking / cycling) जरूर करें
✅ छोटा मंत्र
👉 “कम खाओ + रोज चलो + तनाव घटाओ”
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7 दिन का पूरा डाइट चार्ट , जो खासतौर पर मधुमेह से बचाव/कंट्रोल को बनाया गया है और उत्तराखंड की सामान्य खान-पान आदतों को ध्यान में रखता है।
🗓️ 7 दिन का डाइट प्लान (Simple + Indian)
🥗 Day 1
सुबह: गुनगुना पानी + मेथी
नाश्ता: ओट्स + दही
लंच: 2 रोटी + लौकी सब्जी + दाल
डिनर: मिक्स वेज सूप + 1 रोटी
🥗 Day 2
सुबह: नींबू पानी (बिना चीनी)
नाश्ता: बेसन चीला + हरी चटनी
लंच: ब्राउन राइस + राजमा + सलाद
डिनर: पनीर भुर्जी + 1–2 रोटी
🥗 Day 3
सुबह: दालचीनी पानी
नाश्ता: दलिया + दूध
लंच: 2 रोटी + भिंडी + दाल
डिनर: वेज सूप + सलाद
🥗 Day 4
सुबह: मेथी पानी
नाश्ता: उबले अंडे / मूंग स्प्राउट्स
लंच: 2 रोटी + मिक्स वेज + दाल
डिनर: खिचड़ी (कम चावल, ज्यादा दाल)
🥗 Day 5
सुबह: ग्रीन टी
नाश्ता: इडली + सांभर
लंच: 2 रोटी + गोभी + दाल
डिनर: पनीर/टोफू + सलाद
🥗 Day 6
सुबह: नींबू पानी
नाश्ता: पोहा (कम तेल)
लंच: ब्राउन राइस + कढ़ी + सलाद
डिनर: सूप + 1 रोटी
🥗 Day 7
सुबह: दालचीनी पानी
नाश्ता: उपमा
लंच: 2 रोटी + चिकन/सोया + सब्जी
डिनर: हल्का खाना (दाल + सलाद)
🍎 बीच-बीच में (Snacks)
सेब / पपीता
भुना चना
मूंगफली (थोड़ी मात्रा)
❌ क्या बिल्कुल कम करें
चीनी, मिठाई 🍬
सफेद ब्रेड, मैदा
ज्यादा चावल
तला हुआ खाना (समोसा, पकोड़ा)
✅ Golden Rules
प्लेट का 50% = सब्जी 🥦
25% = प्रोटीन (दाल, पनीर, अंडा)
25% = कार्ब्स (रोटी/चावल)
⚡ बोनस टिप
👉 रात का खाना हल्का और जल्दी (8 बजे से पहले)
30 दिन का “pre-diabetes reverse” प्रैक्टिकल प्लान । यह प्लान प्री-डायबिटीज को कंट्रोल/रिवर्स करने के लिए बनाया गया है और उत्तराखंड जैसी जीवनशैली (शहर + हल्की एक्टिविटी) को ध्यान में रखता है।
🎯 लक्ष्य (30 दिन में)
फास्टिंग शुगर ↓
वजन 2–4 kg तक कम
HbA1c में सुधार शुरू
🗓️ पूरा 30 दिन का प्लान (4 फेज में)
🔵 Phase 1 (Day 1–7): “शरीर को रीसेट”
👉 फोकस: चीनी और मैदा बंद
🚫 बिल्कुल बंद:
चीनी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक
मैदा (ब्रेड, बिस्कुट)
✅ रोज:
30 मिनट तेज वॉक
8 घंटे नींद
🍽️ डाइट:
नाश्ता: ओट्स / बेसन चीला
लंच: 2 रोटी + दाल + सब्जी
डिनर: हल्का (सूप/सलाद)
🟢 Phase 2 (Day 8–15): “फैट बर्निंग शुरू”
👉 फोकस: मेटाबॉलिज्म तेज करना
🚶♂️ वॉक → 45 मिनट
🏋️♂️ हल्की एक्सरसाइज (स्क्वाट, पुशअप)
🍽️:
कार्ब्स कम (रोटी 2 → 1–2)
प्रोटीन बढ़ाएं (दाल, अंडा, पनीर)
🟡 Phase 3 (Day 16–23): “इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधार”
👉 फोकस: शरीर शुगर को बेहतर उपयोग करे
⏰ Intermittent fasting (12–14 घंटे)
(रात 8 बजे → सुबह 8–10 बजे)
🥗:
50% प्लेट = सब्जी
फल = दिन में 1–2 ही
🧘♂️:
योग + प्राणायाम (15 मिनट)
🔴 Phase 4 (Day 24–30): “स्थायी आदत”
👉 फोकस: इसे लाइफस्टाइल बनाना
🏃♂️:
8–10 हजार कदम रोज
⚖️:
वजन और शुगर चेक
🍽️:
Cheat meal (सप्ताह में 1 बार)
बाकी दिन सख्ती रखें
📊 हर हफ्ते चेक करें
वजन
कमर (waist)
ऊर्जा स्तर
🧪 30 दिन बाद टेस्ट
Fasting sugar
HbA1c
⚠️ जरूरी चेतावनी
अगर शुगर >125 fasting है → डॉक्टर से सलाह
यह प्लान दवा का विकल्प नहीं, बल्कि सपोर्ट है
✅ 3 सबसे जरूरी नियम
रोज चलना (no excuse)
चीनी लगभग बंद
रात का खाना हल्का + जल्दी
💡 रियलिटी चेक
👉 30 दिन में पूरी तरह cure नहीं, लेकिन
✔️ शुगर कंट्रोल
✔️ वजन कम
✔️ दवा की जरूरत टल सकती है
**प्री-डायबिटीज को “रिवर्स” करने का मतलब है: ब्लड शुगर को फिर से नॉर्मल रेंज में लाना और उसे वहीं बनाए रखना। नीचे एक व्यक्तिगत-जैसा, 8–12 हफ्तों का प्रैक्टिकल प्लान है जिसे आप आज से शुरू कर सकते हैं।
🎯 आपका लक्ष्य
Fasting sugar: <100 mg/dL
HbA1c: <5.7%
वजन: 5–7% कम (अगर ओवरवेट हैं)
🧭 रोज़ का रूटीन (Simple & Doable)
🌅 सुबह (खाली पेट)
1 गिलास गुनगुना पानी
10–15 मिनट तेज वॉक/हल्की दौड़
5–10 मिनट प्राणायाम (अनुलोम-विलोम, कपालभाति)
🍽️ नाश्ता (High-protein)
विकल्प:
बेसन चीला + दही
2 अंडे + सब्ज़ी
ओट्स + दूध + बीज (चिया/अलसी)
❌ मीठी चाय/ब्रेड-बटर रोज़ाना नहीं
🏢 दिनभर की आदत
हर 45–60 मिनट में 3–5 मिनट चलना
8–10 गिलास पानी
चाय/कॉफी में चीनी शून्य या बहुत कम
🍛 दोपहर का भोजन (Balanced Plate)
50% सब्ज़ी
25% प्रोटीन (दाल/चना/पनीर/चिकन)
25% कार्ब्स (1–2 रोटी या थोड़ा ब्राउन राइस)
बड़ा सलाद (खीरा, गाजर)
🌇 शाम
20–30 मिनट वॉक / साइक्लिंग
स्नैक: भुना चना / मूंगफली / फल (1 सर्विंग)
🌙 रात का खाना (हल्का, 8 बजे तक)
1–2 रोटी + सब्ज़ी + प्रोटीन
या सूप + सलाद
❌ देर रात खाना नहीं
🏋️♂️ साप्ताहिक एक्सरसाइज प्लान
Cardio (5 दिन/सप्ताह): 30–45 मिनट तेज चलना
Strength (3 दिन/सप्ताह):
स्क्वैट 3×12
पुश-अप 3×8–12
प्लैंक 3×30–45 सेकंड
👉 मसल बढ़ेगी → इंसुलिन बेहतर काम करेगा
⏰ छोटा “फास्टिंग” नियम
रात 8 बजे से सुबह 8–10 बजे तक 12–14 घंटे गैप
बीच में सिर्फ पानी/ब्लैक कॉफी/ग्रीन टी
❌ क्या कम/बंद करें
चीनी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक
मैदा (ब्रेड, बिस्कुट, पेस्ट्री)
डीप-फ्राइड (समोसा, पकोड़ा)
ज्यादा सफेद चावल
🍎 क्या बढ़ाएँ
फाइबर (हरी सब्ज़ियाँ, सलाद)
प्रोटीन (दाल, अंडा, पनीर)
हेल्दी फैट (मूंगफली, बीज)
🧪 मॉनिटरिंग (बहुत जरूरी)
हर 2 हफ्ते: Fasting sugar
3 महीने बाद: HbA1c
साप्ताहिक: वजन + कमर
📉 क्या रिज़ल्ट उम्मीद करें
2–4 हफ्ते: शुगर में गिरावट दिखेगी
6–8 हफ्ते: वजन कम, एनर्जी बेहतर
12 हफ्ते: कई लोगों में नॉर्मल रेंज संभव
⚠️ कब डॉक्टर से मिलें
Fasting ≥126 mg/dL बार-बार आए
चक्कर, बहुत प्यास/बार-बार पेशाब जैसे लक्षण हों
पहले से दवा चल रही हो
🧠 असली मंत्र
“रोज़ चलना + चीनी कम + रात हल्की”
Consistency > Perfection
इस मुद्दे पर डॉक्टर का क्या कहना है?
SPARSH हॉस्पिटल, यशवंतपुर, बैंगलोर के इंटरनल मेडिसिन और डायबेटोलॉजी के कंसल्टेंट डॉक्टर अशोक एम. एन का कहना है कि गोवा में डायबिटीज की दर सबसे ज्यादा बताई गई है, जो लाइफस्टाइल, खान-पान की आदतों और जनसांख्यिकी से जुड़े अलग-अलग फैक्टर्स के मिले-जुले असर को दिखाता है. बहुत ज्यादा शहरी आबादी, आराम पसंद लाइफस्टाइल, और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट, चीनी और शराब वाली डाइट, ये सभी इस बढ़ती समस्या की वजह हैं. इसके अलावा, गोवा में बेहतर स्क्रीनिंग और हेल्थ के बारे में ज्यादा जागरूकता जैसे कारण भी दूसरे इलाकों के मुकाबले डायबिटीज का पता लगाने की ज्यादा दर की वजह हो सकते हैं.
डॉक्टर अशोक एम. एन ने कहा कि केरल, तमिलनाडु, दिल्ली और पंजाब जैसे कुछ राज्यों में भी डायबिटीज की बीमारी में बढ़ोतरी देखी गई है. इन इलाकों में भी शहरीकरण, कम फिजिकल एक्टिविटी और बढ़ता मोटापा जैसे रिस्क फैक्टर्स मौजूद हैं. कई मामलों में, तनाव, सोने-जागने के अनियमित चक्र और आनुवंशिक प्रवृत्तियों के कारण यह खतरा और भी बढ़ जाता है. एक और बड़ी चिंता युवाओं में डायबिटीज के बढ़ते मामले हैं, जिसका मुख्य कारण कम उम्र से ही अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खराब खान-पान की आदतों को अपनाना है. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि डायबिटीज अक्सर शुरुआती फेज में पता नहीं चल पाता, जिससे शरीर के अंदर गंभीर जटिलताएं चुपचाप पनपने लगती हैं. इस समस्या से निपटने के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर जोर देना जरूरी है, जिसमें नियमित जांच, स्वस्थ खान-पान की आदतों के बारे में जागरूकता, अधिक फिजिकल एक्सरसाइज और समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप शामिल है. हालांकि किसी इलाके की ज्योग्राफिकल लोकेशन भी डायबिटीज की मौजूदगी पर असर डाल सकती है, लेकिन जीवनशैली ही सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर बनी हुई है.
National Institutes of Health (.gov) के अनुसार, एक्सपर्ट्स विशेष रूप से गोवा और दक्षिणी राज्यों में डायबिटीज की हाई रेट का श्रेय खराब लाइफस्टाइल, एनवायरमेंटल फैक्टर्स और सोशियो इकोनॉमिक फैक्टर के मेल को जिम्मेदार मानते हैं, जिनमें शामिल
जिन क्षेत्रों में डायबिटीज का प्रसार अधिक है, वहां अक्सर पेट और सामान्य मोटापे की दरें भी अधिक होती हैं.
हाई रेट ऑफ ओबेसिटी: भारत में डायबिटीज का सबसे सामान्य कारण मोटापा है. नेचर जनर्ल में प्रकाशित ICMR-INDIAB के अध्ययन से पता चलता है कि जिन क्षेत्रों में डायबिटीज का प्रसार अधिक है, वहां अक्सर पेट और सामान्य मोटापे की दरें भी अधिक होती हैं. ये ऐसे फैक्टर्स हैं जिनका टाइप 2 डायबिटीज से गहरा संबंध होता है.
लाइफस्टाइल में बदलाव या अर्बनाइजेशन: गोवा और तमिलनाडु जैसे राज्य बहुत ज्यादा शहरीकृत (Highly Urbanized) हैं, इसके कारण लोगों की लाइफस्टाइल में निष्क्रियता बढ़ी है, फिजिकल एक्टिविटी कम हुई है, और हाई कैलोरी वाले, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ा है.
खान-पान की आदतें: खान-पान की आदतों में बदलाव (विशेष रूप से रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और चीनी का अत्यधिक सेवन) ‘मेटाबॉलिक सिंड्रोम’ के बढ़ते मामलों का एक प्रमुख कारण है. दरअसल, यह सिंड्रोम विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का एक ग्रुप है, जो मिलकर टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देता है.
जेनेटिक संवेदनशीलता: कई अध्ययनों से पता चलता है कि अन्य आबादी की तुलना में, भारतीयों में आमतौर पर डायबिटीज होने की जेनेटिक प्रवृत्ति अधिक होती है, साथ ही उनमें ‘इंसुलिन प्रतिरोध’ का लेवल भी अधिक होता है.
आर्थिक रूप से डेवलप राज्यों में, ‘नॉन कम्युनिकल डिजीज’ (NCDs) (जैसे कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर) की रेट लाइफस्टाइल में बदलावों के कारण बढ़ी हुई दिखाई देती हैं. इसी वजह से केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ये आंकड़े विशेष रूप से हाई हैं. इन क्षेत्रों में आमतौर पर बेहतर हेल्थ केयर इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई लेवल ऑफ पब्लिक अवेयरनेस होता है. इसके चलते, कम आय वाले और कम शहरीकृत राज्यों की तुलना में यहां ज्यादा संख्या में मामलों की पहचान की जाती है और उनकी रिपोर्ट की जाती है..
केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ये आंकड़े विशेष रूप से हाई हैं
डायबिटीज के मरीजों को किन चीजों से परहेज करना चाहिए?
डायबिटीज के मरीजों को नमक का सेवन कम करना चाहिए. नॉन-वेज खाना, डेयरी प्रोडक्ट्स, आइसक्रीम, नारियल का तेल और चिकन में फैट ज्यादा होता है. अगर आपको डायबिटीज है, तो आपको फास्ट फूड और तली-भुनी चीजों से दूर रहना चाहिए. आपको नाश्ते में उपमा, बोंडा, वड़ा या पूरी नहीं खानी चाहिए. डॉ. श्रद्धेय कटियार ने अपने ट्विटर (X) हैंडल पर डायबिटीज के मरीजों के लिए 31 सबसे खराब चीजों की एक लिस्ट शेयर की है, जो इस प्रकार है…
आटा या मैदा उबला आलू कम फैट वाली मिठाइयां
बिस्कुट अनानास स्किम्ड दूध
रस्क तरबूज प्रोटीन बार
मैरी बिस्कुट शहद आम
दलियां सूजी इडली/चीला मुरमुरे
साबूदाना बेसन चीला चपाती
ओट्स पास्ता पपीता
ओट्स मिल्क नूडल्स चॉकलेट
ब्रेड (किसी भी तरह की) फ्रेंच फ्राइज फ्लेवर्ड दही
केला आलू के चिप्स केक और कुकीज
अरबी (Taro)
डायबिटीज और ब्लड शुगर के बीच का अंतर समझें
ज्यादातर लोग डायबिटीज और ब्लड शुगर को एक ही चीज मान लेते हैं, लेकिन इन दोनों में काफी अंतर है. ब्लड शुगर का मतलब है खून में ग्लूकोज का लेवल, जो हमारी खाने-पीने की आदतों के हिसाब से बदलता रहता है. दूसरी तरफ, डायबिटीज तब होती है जब शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है या जब इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता. इंसुलिन एक हार्मोन है जो शरीर को ब्लड शुगर (ग्लूकोज) को सेल्स तक पहुंचाने में मदद करता है, जिससे उन्हें एनर्जी मिलती है. जब इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता, तो ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है, जिससे डायबिटीज हो जाती है. डायबिटीज के मामले में, 200 mg/dL से ज्यादा ब्लड शुगर का लेवल गंभीर माना जाता है. 200 mg/dL से ज्यादा का लेवल हाई ब्लड शुगर, या हाइपरग्लाइसेमिया का संकेत देता है.
डायबिटीज और ब्लड शुगर के बीच का अंतर समझें
medlineplus.gov पर दी गई जानकारी के मुताबिक, उम्र के अनुसार नार्मल ब्लड शुगर लेवल को इस चार्ट के माध्यम से जानें.
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि नॉर्मल ब्लड शुगर लेवल किसी व्यक्ति की उम्र और शारीरिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग होता है. इन लेवल को समझने से आपको यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आपका ग्लूकोज लेवल हेल्दी रेंज में है या नहीं. यहां, उम्र के आधार पर नॉर्मल फास्टिंग और रैंडम ब्लड शुगर लेवल के बारे में जानें…
एज ग्रुप फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल (mg/dL) रैंडम ब्लड शुगर लेवल (mg/dL) इम्पोर्टेन्ट नोट्स
शिशु या छोटे बच्चे (0-3 वर्ष) 60-110 60-180 ब्लड शुगर का स्तर ऊपर-नीचे हो सकता है. खाली पेट (Fasting) का स्तर आमतौर पर 60 से 110 mg/dL के बीच होता है. खाना खाने के बाद, रैंडम ब्लड शुगर का स्तर थोड़ा ज्यादा हो सकता है.
बच्चे (3-12 वर्ष) 70-140 70-180 इसका लेवल शिशु या छोटे बच्चे के मुकाबले थोड़ा ज्यादा होता है. इस पर नजर रखना बहुत जरूरी है, खासकर अगर परिवार में किसी को डायबिटीज की हिस्ट्री रही हो
किशोर (13-18 वर्ष) 70-140 70-180 टीनएज के दौरान, हार्मोनल बदलाव ग्लूकोज लेवल पर असर डाल सकते हैं. डेवलपमेंट के दौरान टेम्पररी इंसुलिन रेजिस्टेंस बन सकता है.
एडल्ट (19+ वर्ष) 70-130 70-180 ब्लड शुगर का स्तर अधिक स्थिर रहता है. प्रीडायबिटीज या टाइप 2 डायबिटीज से बचने के लिए, खाली पेट ब्लड शुगर का स्तर 130 mg/dL से अधिक नहीं होना चाहिए.
(डिस्क्लेमर: इस वेबसाइट पर आपको प्रदान की गई सभी स्वास्थ्य जानकारी, चिकित्सा सुझाव केवल आपकी जानकारी के लिए हैं. हम यह जानकारी वैज्ञानिक अनुसंधान, अध्ययन, चिकित्सा और स्वास्थ्य पेशेवर सलाह के आधार पर प्रदान कर रहे हैं, लेकिन बेहतर होगा कि इन पर अमल करने से पहले आप अपने निजी डॉक्टर की सलाह ले लें.)
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