हॉकी इंडिया के जर्सी का रंग नीले से केसरिया होने पर भड़का इंडी गठबंधन
पहले जर्सी के रंग बदलने की बताई वजह, अब खुद उठाए सवाल, 24 घंटे के भीतर कैसे बदले दिलीप टिर्की के सुर
सूत्रों के अनुसार आज हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने एक पत्र लिखकर महासंघ के पदाधिकारियों से जर्सी के रंग बदलने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है.
भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग बदलने पर विवाद बढ रहा है. गुरुवार को जहां हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने इस फैसले के पीछे तर्क दे रहे थे, लेकिन शुक्रवार को वह महासंघ के पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगते नजर आए. पूर्व भारतीय कप्तान ने शुक्रवार को महासंघ के पदाधिकारियों से सफाई मांगी की उनकी और कार्यकारी बोर्ड की जानकारी या सहमति के बिना यह बड़ा फैसला कैसे लिया गया, जबकि महासचिव भोलानाथ सिंह ने कहा कि सभी अधिकारियों को इस बदलाव की जानकारी थी.
24 घंटे पहले किया था समर्थन
गुरुवार को भारतीय टीम की जर्सी का रंग बदलने पर हॉकी इंडिया के प्रेसिडेंट ने कहा था कि खिलाड़ियों और कोचों को लगा कि नीले टर्फ पर नीली जर्सी पहनने से मैच के दौरान देखने में दिक्कत होती है. उन्होंने कहा,”उनका सुझाव था कि मैदान पर हॉकी टर्फ नीला है और खिलाड़ियों की किट भी नीली है. इसलिए, इस ओवरलैप की वजह से खेलते समय देखने में दिक्कत हो रही थी. उन्हें कहीं न कहीं यह समस्या महसूस हो रही थी.”
टिर्की ने बताया कि टीम ने दो रंगों के विकल्प सुझाए थे – पीला और नारंगी – और आखिर में नारंगी रंग चुना गया क्योंकि यह भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में भी शामिल है. उन्होंने कहा,”उन्होंने दो रंगों के विकल्प सुझाए, पीला और नारंगी. इस बात पर ध्यान दिया गया कि नारंगी रंग भारतीय ध्वज के हमारे राष्ट्रीय रंगों में से एक है. इसलिए नारंगी रंग चुना गया और उसी के अनुसार डिज़ाइन तैयार किया गया. अगर टूर्नामेंट के बाद या भविष्य में खिलाड़ियों को कुछ और लगता है, तो हम किट के रंग को बेहतर बनाने पर फिर से काम कर सकते हैं.”
बढ़ा विवाद तो बदले सुर
नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले भारतीय टीमों की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया गया जिसे लेकर वीरेन रासकिन्हा, परगट सिंह, वी भास्करन, धनराज पिल्लै जैसे पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाये हैं.
सूत्रों ने बताया कि विवाद बढ़ने के बाद टिर्की ने सुबह कार्यकारी बोर्ड को ईमेल भेजा और लिखा,”जर्सी का रंग बदलने का फैसला कार्यकारी बोर्ड के समक्ष रखने या मेरी पूर्व जानकारी के बिना लिया गया.”
इस पत्र में आगे लिखा गया,”मैं हॉकी इंडिया पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण चाहता हूं कि मुझे तुरंत लिखित में बताया जाये कि इस फैसले का आधार क्या था, किस प्रक्रिया का पालन किया गया और किन हालात में इस फैसले को मंजूरी दी गई और लागू किया गया.” उन्होंने आगे लिखा,”ओडिशा सरकार ने मुझसे इस मसले पर स्पष्टीकरण मांगा है लिहाजा मुझे सही जवाब देने के लिये आपसे स्पष्टीकरण चाहिए.”
अचानक क्या हुआ
हॉकी इंडिया के सूत्रों ने बताया कि जर्सी विवाद पर जब नवीन पटनायक का ट्वीट आया उसके बाद से ही दिलीप टिर्की के बयान बदल गए. ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा,”मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का मशहूर रंग बदलकर केसरिया कर दिया गया है. भारतीय हॉकी टीम का नीला रंग सिर्फ एक रंग नहीं है, यह देश की खेल विरासत से जुड़ी एक भावना है. दशकों से, इस रंग ने हमें उम्मीद, जीत, हार और खेल में बेहतरीन प्रदर्शन की कोशिश में एक साथ जोड़े रखा है.”
नवीन पटनायक ने आगे लिखा,”जब राष्ट्रीय हॉकी टीमें प्रायोजकों के लिए संघर्ष कर रही थीं, तब ओडिशा ने हमारी राष्ट्रीय टीमों और हमारे प्रिय खेल का समर्थन करने वाला पहला और एकमात्र राज्य बनकर इतिहास रचा. दुनियाभर के हर ओडिया को राष्ट्रीय हॉकी के लिए राज्य के इस उपहार पर गर्व था. 41 वर्षों के बाद, हमारी पुरुष टीम ने ओलंपिक मेडल जीता. सिर्फ इसलिए कि ओडिशा में सरकार बदल गई, हमारी राष्ट्रीय टीम के रंग नहीं बदले जाने चाहिए.” उन्होंने कहा,”इस रंग में कोई भी बदलाव हमारी अनमोल खेल विरासत को मिटाने की एक भद्दी कोशिश है. राष्ट्रीय प्रतीक हमें जोड़ने के लिए होते हैं, न कि बांटने के लिए.”
सूत्रों की मानें तो जब जर्सी के रंग को लेकर बवाल हुआ,उसके बाद ओडिशा सरकार को इस बाबत सूचना दी गई.ओडिशा सरकार को 30 जुलाई को जर्सी का रंग बदले जाने के संदर्भ में ईमेल भेजा गया है,जबकि जर्सी 28 जुलाई को लांच की गई थी.कार्यकारी बोर्ड के एक सदस्य ने बताया कि ओडिशा सरकार को जर्सी का रंग बदले जाने की कोई जानकारी नहीं थी और न ही उनसे राय ली गई बल्कि लांच के बाद ही उन्हें पता चला.
इंडियन हॉकी टीम की जर्सी के भगवा रंग पर सियासी बवाल, प्रियंका बोलीं- इतिहास बदलने की कोशिश
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने को लेकर सियासी बवाल मच गया है. प्रियंका गांधी सहित कई नेताओं ने इसे भगवाकरण से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं. दूसरी ओर हॉकी इंडिया ने रंग बदलने का कारण बताया है.
हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने पर प्रियंका गांधी सहित कई नेताओं ने सवाल उठाए
भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी के रंग पर सियासी बवाल मचा है. हॉकी इंडिया ने भारतीय टीम की जर्सी के रंग को बदल दिया है. ‘मैन इन ब्लू’ कही जाने वाली टीम अब सैफ्रन रंग की जर्सी में दिखेगी. हॉकी इंडिया द्वारा नई जर्सी जारी किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, सुखदेव भगत, राजद सांसद सुधाकर सिंह, समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह सहित कई नेताओं ने सवाल उठाए हैं. संसद भवन के बाहर प्रियंका गांधी ने जर्सी बदलने को इतिहास बदलने की कोशिश बताया. उन्होंने यह भी कहा कि देश के युवाओं ने अपनी राय दे दी है.
प्रियंका गांधी ने कहा- इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश
प्रियंका गांधी ने कहा- “चाहे वे यूनिफॉर्म बदलें या शिक्षा नीति के जरिए इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश करें, वे कुछ भी करें, इस देश के युवाओं ने अपनी राय साफ कर दी है. आपने देखा कि जंतर-मंतर पर जमा युवा क्या कह रहे थे? वही देश की आवाज है. भारत की आजादी की लड़ाई अहिंसा और सच्चाई पर आधारित थी, और इसमें RSS की कोई भूमिका नहीं थी. पूरा देश यह सच्चाई जानता है, और जो लोग नहीं जानते थे, वे भी अब उनके इरादों को समझने लगे हैं. कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में उस आंदोलन का संचालन किया था, और इस देश की आत्मा अहिंसा, सच्चाई और भाईचारे में बसी है…”
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान ने कहा- यह शर्मनाक
हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने को भारत के पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने शर्मनाक बताया है. उन्होंने X पर लिखा, ” हॉकी इंडिया ने कई अच्छे काम किए हैं… लेकिन यह शर्मनाक है. भारतीय टीम की पहचान और विरासत हमेशा से नीला रंग रही है. मैंने कई सालों तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी है. फैंस हमारी भारतीय टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं. नारंगी रंग का क्या लॉजिक है?”
सपा नेता बोले- पुरानी जर्सी से भावनात्मक लगाव
भारत के पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा के बयान पर समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने कहा- जिस जर्सी को पहनकर भारतीय टीम इतने सालों तक खेलती रही है, उससे भावनात्मक लगाव होना स्वाभाविक है. हालांकि, हॉकी इंडिया फेडरेशन इस बदलाव के पीछे की वजह बता सकता है….”
कांग्रेस सांसद बोले- खेल को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए
वहीं कांग्रेस सासंद सुखदेव भगत ने कहा कि खेल को ऐसी राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए. इनको खेल से मतलब नहीं है. वे हर जगह भगवाकरण करना चाहते हैं. खेल और राजनीति दोनों अलग चीजें हैं.
राजद सांसद बोले- ये लोग पेड़ को भी भगवे रंग में रगेंगे
वहीं राजद सांसद सुधाकर सिंह ने तंज हॉकी इंडिया के फैसले पर तंज कसते हुए कहा- ये लोग मानसिक रूप से दिवालिया हैं. ये लोग पेड़ों को भी हरे रंग से भगवे रंग में रगेंगे.
केसरिया भारत की पहचान का हिस्सा, आपत्ति क्योंः संजय निषाद
हॉकी खिलाड़ियों की जर्सी का रंग केसरिया किए जाने पर मचे सियासी बवाल यूपी के मंत्री संजय निषाद ने कहा, “भारत क्रांतिकारियों की धरती है… केसरिया रंग भारत की पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए…”
हॉकी इंडिया ने जर्सी का रंग बदलने पर क्या दी सफाई
इधर हॉकी जर्सी के भगवाकरण पर मचे बवाल के बीच हॉकी इंडिया ने सफाई दी है. हॉकी इंडिया ने कहा- यूनिफॉर्म का रंग बदलने का फैसला सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों की सलाह और उनसे विस्तार से बातचीत के आधार पर लिया गया था. मुख्य वजह तकनीकी थी. देखा गया कि नीली प्लेइंग यूनिफॉर्म, नीली सिंथेटिक प्लेइंग सतह के साथ घुल-मिल जाती थी, जो अब इंटरनेशनल हॉकी पिचों का स्टैंडर्ड रंग है. इस एक जैसे दिखने की वजह से खिलाड़ियों को मैदान पर साफ-साफ देखने में दिक्कत होती थी.
हॉकी इंडिया ने कहा कि इसे देखते हुए कोच और खिलाड़ियों ने पीले या केसरिया जैसे दूसरे रंगों का सुझाव दिया. अच्छी तरह सोचने-विचारने के बाद, केसरिया रंग को फाइनल किया गया. तकनीकी जरूरत पूरी करने के अलावा केसरिया रंग का गहरा महत्व भी है क्योंकि यह हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में से एक है, जो साहस, त्याग और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है.
हॉकी इंडिया ने यह भी कहा कि जर्सी का रंग बदलना कोई नई बात नहीं है. समय-समय पर जरूरत के हिसाब से राष्ट्रीय टीम की प्लेइंग किट का रंग बदला जाता रहा है. उदाहरण के लिए, 2014 FIH हॉकी वर्ल्ड कप के दौरान टीम की जर्सी का रंग पीला कर दिया गया था और 2018 FIH हॉकी वर्ल्ड कप के दौरान रंग को बिल्कुल अलग डिज़ाइन के साथ आसमानी नीला कर दिया गया था.


