पाक,कतर,तुर्की

Nupur Sharma Prophet Row Qatar Pakistan Turkey Nexus Targeting Saudi Arabia Via India Pm Modi And Bjp
पैगंबर व‍िवाद: भारत के ‘दुश्‍मनों’ के साथ गठजोड़ में कतर,तुर्की-पाकिस्‍तान संग मिलकर फैलाया जहर
नूपुर शर्मा विवाद बाद भारत विरोधी जहरीले बयान दे कतर भारत के दुश्‍मनों पाकिस्‍तान और तुर्की से गठजोड़ में है। कतर की सऊदी अरब के साथ दुश्‍मनी है और भारत-सऊदी अरब का दोस्‍त है। वहीं तुर्की और पाकिस्‍तान के बीच पहले से ही सैन्‍य गठजोड़ है।
पैगंबर मोहम्‍मद को लेकर भारतीय जनता पार्टी नेता नूपुर शर्मा की टिप्‍पणी पर खाड़ी देशों में कतर से सबसे तीखी प्रतिक्रिया आई। उसने न केवल भारतीय राजदूत बुलाया बल्कि भारत सरकार से माफी मांगने को भी कहा। इस्‍लामिक देशों की नेतागिरी की कोशिश में कतर ने कहा कि यह पूरी दुनिया के मुसलमानों का अपमान है। कतर में भारतीय सामानों का बहिष्‍कार हुआ। विश्‍लेषक बताते हैं कि पिछले 11 सालों से कतर का पाकिस्‍तान और तुर्की से रक्षा, राजनीति और अर्थव्‍यवस्‍था में गठजोड़ है। निशाने पर भारत-सऊदी अरब की दोस्‍ती रही। इसी से भारत से कतर की दूरी बढ़ती गई। कतर भारत विरोधी जहर फैलाने में पाकिस्‍तान और तुर्की की मदद कर रहा है। समझें किस तरह से कतर, पाकिस्‍तान और तुर्की की जोड़ी भारत के लिए संकट बन रही है…

पैगंबर विवाद के बाद कतर, पाकिस्‍तान और तुर्की का गठजोड़ फिर तब चर्चा में आया जब तीनों देश खाड़ी देशों और दक्षिण एशिया में भूराजनीतिक स्थिति में आए बदलाव में गठजोड़ बनाते दिखे। एक दशक में भूराजनीतिक परिस्थितियां काफी बदली है । पुराने गठबंधन कमजोर हुए और तुर्की, कतर और पाकिस्‍तान एक साथ आ गए। ये तीनों ही देश अब विभिन्‍न क्षेत्रीय मुद्दों पर राजनीतिक, कूटनीतिक और सुरक्षा में परस्पर सहयोग में हैं। तीनों ही देश कई भूराजनीतिक विषय पर एक राय रखते हैं। कतर और तुर्की की सऊदी अरब और यूएई से नहीं पटती। भारत, सऊदी अरब और यूएई में रिश्‍ते बहुत अच्‍छे हैं। इसी से कतर, तुर्की अब पाकिस्‍तान से दोस्‍ती मजबूत कर चुके हैं।

सऊदी अरब, यूएई को पछाडने में जुटे कतर और तुर्की
दरअसल, अरब देशों में कुछ साल पहले हुई क्रांति पूरे खाड़ी को निर्णायक थी। इसका असर खाड़ी देशों के बाहर तक दिखा था। कतर के टीवी चैनल अलजजीरा पर इसे भड़काने का आरोप था। कतर और तुर्की दोनों ही मुस्लिम देशों का खलीफा बनना चाहते हैं लेकिन सऊदी अरब और ईरान उनके कड़े प्रतिद्वंद्वी हैं। साल 2017 में कतर और उसके खाड़ी के पड़ोसी देशों सऊदी अरब, बहरीन और यूएई में तनाव हुआ था। तब तुर्की ने अपनी सेना कतर भेजी थी ताकि विरोधियों का कोई भी हमला रोका जा सके। इससे कतर और तुर्की में दोस्‍ती और  मजबूत हुई। इस दोस्‍ती से खाड़ी के अन्‍य देश भड़क गए थे। अब कतर और तुर्की दोनों ही लगभग सभी क्षेत्रीय मुद्दों पर एक-दूसरे की मदद करते हैं।

तुर्की और सऊदी दोनों साधने की कोशिश में पाकिस्‍तान
वहीं पाकिस्‍तान का खाड़ी के सभी देशों से अच्‍छा रिश्‍ता है। पाकिस्‍तान तुर्की को अपना बेहद करीबी दोस्‍त बताता है। तुर्की राष्‍ट्रपति एर्दोगन और पाकिस्‍तानी नेताओं में दोस्‍ती जगजाहिर है। तुर्की और पाकिस्‍तान शीत युद्ध में अमेरिकी खेमे में थे। पाकिस्‍तान और तुर्की एक-दूसरे का साइप्रस और कश्‍मीर विषयों पर समर्थन करते हैं। एर्दोगान ने शासन में आकर पाकिस्‍तान से दोस्‍ती नई ऊंचाई पर पहुंचा दी है। एर्दोगान मुस्लिम जगत का खलीफा बनना चाहते हैं और इसी से वह पाकिस्‍तान में तुर्की के नाटक और कार्यक्रम दिखाकर साफ्ट पावर बढ़ा रहे हैं। वहीं सऊदी और ईरान इसके विपरीत पाकिस्‍तानी नेताओं से दोस्‍ती पर जोर देते हैं। तुर्की पाकिस्‍तान को घातक बायरकतार टीबी 2 ड्रोन देता है।

कश्‍मीर पर सऊदी ने पाकिस्‍तान को दिया था झटका
पाकिस्‍तान का कतर से भी घनिष्ठ संबंध है। कतर में बड़ी संख्‍या में पाकिस्‍तानी कार्यरत हैं। पाकिस्‍तान, तुर्की और कतर में यह नजदीकी साल 2013 में नवाज शरीफ के पीएम बनने से शुरू हुई थी। इससे पहले नवाज शरीफ सऊदी अरब के करीबी थे। पाकिस्‍तान के कतर और तुर्की से रिश्‍ते बढ़ाने से सऊदी अरब से रिश्‍ते खराब हो गए। पाकिस्‍तान ने यमन में सऊदी सेना का साथ नहीं दिया। पाकिस्‍तान ने साल 2017 में कतर और सऊदी विवाद में रियाद का पक्ष नहीं लिया। हालांकि इमरान खान और अब नवाज के भाई शहबाज शरीफ के सत्‍ता में आते ही ये रिश्‍ते फिर सुधरे हैं। पाकिस्‍तान कतर और सऊदी दोनों ही खेमों में संतुलन बनाने की कोशिश में है। शहबाज शरीफ भी पहले सऊदी अरब गए और फिर तुर्की गए। पाकिस्‍तान दोनों ही खेमों से कश्‍मीर पर मदद चाहता है। हालांकि कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 समाप्ति पर पाकिस्‍तान को सऊदी ने झटका दिया। तुर्की एकमात्र बड़ा देश था जिसने खुलकर कश्‍मीर विषय पर भारत का विरोध किया।

पाकिस्‍तान को तुर्की-कतर दे रहे हथियार
पाकिस्‍तान नहीं चाहता था कि अफगानिस्‍तान में भारत समर्थक  सरकार हो। कतर ने पाकिस्‍तान के इस मंसूबे में मदद की। कतर ने तालिबान और अमेरिका में डील कराया। ये तीनों देशों का आपस में रक्षा क्षेत्र में भी काफी मजबूत संबंध हैं। पाकिस्‍तान और कतर दोनों ही तुर्की से घातक हथियार खरीद रहे हैं। तुर्की दोनों का ही विश्‍वसनीय दोस्‍त है। कतर और तुर्की में रक्षा संबंध बहुत अच्‍छे हैं। सऊदी गठबंधन से कतर को बचाने को अभी भी तुर्की ने अपने 3 हजार सैनिक कतर में रखे हैं। कतर को तुर्की टैंक, हथियारबंद वाहन, तोपें और ड्रोन विमान देता है। वहीं कतर ने पाकिस्‍तानी सेना को सी किंग हेलिकॉप्‍टर दान दिए हैं। तुर्की पाकिस्‍तान के सैन्‍य अधिकारियों को ट्रेनिंग देता है। तुर्की की मदद से ही पाकिस्‍तान अपने अमेरिकी एफ-16 फाइटर जेट और अगस्‍ता सबमरीन लगातार अपग्रेड कर रहा है। तुर्की अब पाकिस्‍तान को अत्‍याधुनिक युद्धपोत और ड्रोन दे रहा है। तुर्की के पास रूस का एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम है जिसे भारत भी खरीद रहा है। अब तुर्की पाकिस्‍तान को एस-400 की जानकारी दे रहा है।

तुर्की, पाकिस्‍तान, कतर का भारत विरोधी अभियान
साल 2021 में भी खाड़ी देशों में भारतीय सामानों का बहिष्‍कार अभियान चला था । डिस इन्‍फो लैब ने  अनावरण किया है कि यह अभियान कतर, पाकिस्‍तान और तुर्की से मिलकर अरबी में ट्विटर पर चला था। यह भारत विरोधी अभियान मुस्लिम ब्रदरहुड के मिस्र में बैठे नेताओं का काम था जिसे कतर, तुर्की और पाकिस्‍तानी ट्रोल आर्मी ने भड़काया। नूपुर शर्मा विवाद भी पाकिस्‍तानी ट्रोल ने सोशल मीडिया में जमकर भड़काया। ये असम में एक मुस्लिम युवक की गोलीबारी में मौत विषय को सुलगाना चाहते थे। इसको फर्जी वीडियो और हैशटैग शेयर हुए। कतर-तुर्की-पाकिस्‍तान का यह नापाक गठजोड़ भारत से सऊदी अरब को निशाना बनाना चाहता था जिसके नई दिल्‍ली से बहुत अच्‍छे संबंध है। सऊदी अरब कमजोर हो तो ही ये देश इस्‍लामिक दुनिया नियंत्र‍ित कर पाएंगे।

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