TCS जिहाद: कर्मचारी को जबरन टोपी पहनाने का वीडियो, निदा की गर्भवती होने की दुहाई

TCS जिहाद: कर्मचारी को जबरन टोपी पहनाने का वीडियो हुआ वायरल, जांच हुई तेज

टीसीएस की नासिक बीपीओ इकाई में कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धार्मिक दबाव के मामले में नया मोड़ आया है। एक ताजा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुरुष कर्मचारी को कथित तौर पर ईद के मौके पर धार्मिक टोपी (स्कल कैप) पहनाई जा रही है और नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

TCS कर्मचारी को जबरन टोपी पहनाने का वीडियो हुआ वायरल (फोटो- वीडियो ग्रैब)

वीडियो में आरोपी तौसीफ अत्तार कर्मचारी को टोपी पहनाते दिख रहा है।

निदा खान परिवार के मुताबिक गर्भवती हैं और मुंबई में हैं।

नई दिल्ली। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की नासिक बीपीओ इकाई में कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धार्मिक दबाव के मामले में नया मोड़ आया है।

एक ताजा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुरुष कर्मचारी को कथित तौर पर ईद के मौके पर धार्मिक टोपी (स्कल कैप) पहनाई जा रही है और नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

वीडियो में आरोपित तौसीफ अत्तार हिंदू कर्मचारी को टोपी पहनाते दिख रहा है। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि टीम लीडर्स ने उसे जबरन कालमा पढ़वाया, नमाज अदा करवाई और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए दबाव डाला।

इस मामले में मुख्य आरोपित मानी जा रही निदा खान सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करने वाली हैं। उनके वकील बाबा सैयद ने एक चैनल को बताया कि यह अर्जी कुछ दिनों में दायर की जाएगी। निदा खान परिवार के मुताबिक गर्भवती हैं और फिलहाल मुंबई में हैं।

परिवार का दावा है कि वह भागी नहीं हैं, बल्कि परिवार के साथ हैं और मामले से कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस ने उन्हें मुख्य षड्यंत्रकारी बताया है, जबकि सूत्रों के अनुसार निदा खान एचआर हेड नहीं, बल्कि टेलीकॉलर के पद पर काम करती थीं।

टीसीएस नासिक केस में बड़ा ट्विस्ट, बदल गई शुरुआती एफआईआर, पुलिस ने जोड़ दी नई धाराएं
TCS Nashik Case : नासिक टीसीएस मामले में नामजद आरोपियों में से निदा खान को छोड़कर सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है. उधर निदा खान के वकील जल्द ही उनके लिए अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करने की तैयारी में हैं. उन्होंने बताया कि निदा गर्भवती हैं और इस कारण परिवार उनकी सेहत को लेकर चिंतित है.

महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुलिस की जांच लगातार गहराती जा रही है.यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों के तहत दर्ज पहली एफआईआर में पुलिस ने नई धाराएं जोड़ दी हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 26 मार्च को दर्ज एफआईआर नंबर 156 में अब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धाराएं भी शामिल कर ली गई हैं. पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता महिला अनुसूचित जाति की सदस्य हैं, इसलिए यह धारा जोड़ी गई है.

नासिक टीसीएस मामले में नामजद आरोपियों में से निदा खान को छोड़कर सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए मामले को गंभीर बताया. उन्होंने कहा, ‘नासिक टीसीएस की घटना बहुत गंभीर है. यह एक मॉड्यूल लग रहा है, जिसकी गहरी जड़ों तक जांच चल रही है. जहां जरूरी लग रही है, वहां केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है. टीसीएस ने इस घटना की गंभीरता को समझा है और इसे निंदनीय बताया है. कंपनी पूरी तरह सहयोग कर रही है और जरूरी कदम उठा रही है.’
अब तक कौन-कौन गिरफ्तार, कौन फरार?
पुलिस के अनुसार, सभी आरोपियों में से केवल टीसीएस कर्मचारी निदा खान ही अभी गिरफ्तार नहीं हुई है. उसके वकील बाबा सय्यद ने कहा कि वे जल्द ही उसकी ओर से अग्रिम जमानत (anticipatory bail) की अर्जी दाखिल करेंगे. वकील ने दावा किया कि निदा खान ‘मीडिया ट्रायल’ की शिकार है. उन्होंने बताया कि निदा खान गर्भवती है, इसलिए परिवार उसके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है.

निदा खान के वकील जल्द ही उनके लिए अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करने की तैयारी में हैं.

उधर नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कार्निक ने कहा, ‘अभी तक निदा खान की भूमिका किसी अन्य एफआईआर में नहीं उभरी है. वह कंपनी में एचआर में नहीं थी, बल्कि एक एसोसिएट थी. पूरे देश में दर्ज किसी भी मामले में उसका लिंक नहीं मिला है.’ पुलिस ने कुछ आरोपियों के प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े होने के दावों की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों को पत्र लिखा है.

अब तक कितनी एफआईआर?
इस मामले में कुल 9 एफआईआर दर्ज हुई हैं. इनमें से…
8 एफआईआर में यौन उत्पीड़न (Section 75 BNS) के आरोप हैं.
5 एफआईआर में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने (Section 299 BNS) के आरोप हैं.
कम से कम 3 मामलों में शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने पहले कंपनी में शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
इस मामले के आरोपियों में से 5 दानिश शेख, निदा खान, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी और आसिफ अंसारी टीसीएस नासिक ब्रांच के एसोसिएट थे. रजा मेमन और तौसिफ अत्तार को शिकायतकर्ताओं ने टीम लीडर बताया है. वहीं पुणे स्थित ऑपरेशंस मैनेजर अश्विनी चैनानी एकमात्र सीनियर कर्मचारी हैं, जिन पर आरोपियों की मदद करने (abetment) का आरोप है. आरोप है कि शिकायतें मिलने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपी और हिम्मतवर हुए.
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क्या-क्या लगे आरोप?
अन्य FIRs में भी कई चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं, जिनमें महिला कर्मचारियों के साथ छेड़छाड़, अश्लील इशारे करना, आपत्तिजनक टिप्पणियां करना और पुरुष कर्मचारियों पर धार्मिक दबाव बनाना शामिल है. एक शिकायत में आरोप है कि एक कर्मचारी को जबरन नमाज पढ़ने और बीफ खाने के लिए मजबूर किया गया, जबकि वह सख्त शाकाहारी था. कुछ मामलों में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और निजी जीवन से जुड़े अनुचित सवाल पूछने के आरोप भी लगे हैं.
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कई शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने कंपनी के अंदर शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन या तो उन्हें नजरअंदाज किया गया या कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. एक FIR में दावा किया गया है कि ऑपरेशंस हेड ने शिकायत को टालते हुए कहा कि ‘स्पॉटलाइट में क्यों आना चाहती हो, इसे छोड़ दो.’ कुछ मामलों में डर, नौकरी खोने की आशंका और आरोपियों के प्रभाव के कारण भी शिकायत नहीं की गई.

मुख्य आरोपियों की भूमिका
दानिश शेख: पहली एफआईआर (156) में मुख्य आरोपी. महिला से दोस्ती के नाम पर शारीरिक संबंध बनाने और शादी का झांसा देने का आरोप. बाद में उसकी पत्नी ने फोन कर दो बच्चों की जानकारी दी.
तौसीफ अत्तार: 6 एफआईआर में नाम. यौन उत्पीड़न, धार्मिक धमकी, गैर-शाकाहारी खाना जबरन खिलाने और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के आरोप.
रजा मेमन: 5 एफआईआर में नाम. महिला सहकर्मियों के साथ अश्लील व्यवहार, साड़ी का पल्लू खींचना और व्यक्तिगत जीवन में दखल देने के आरोप.
निदा खान: केवल एक एफआईआर में नाम. हिंदू देवता का अपमान करने का आरोप.
टीसीएस के सीईओ ने क्या बताया?
इस बीच, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अपने बयान में कहा है कि कंपनी में POSH कमेटी मौजूद है और इस मामले में पहले कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी. कंपनी ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और इसके लिए के. कृतिवासन के नेतृत्व में बाहरी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है.

टीसीएस के सीईओ और एमडी के. कृष्णिवासन ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि कंपनी ने डेलॉइट और प्रॉमिनेंट लॉ फर्म ट्राइलिगल की सेवाएं ली हैं. आंतरिक जांच की निगरानी के लिए स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री की अध्यक्षता में ओवरसाइट कमिटी बनाई गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि निदा खान एचआर मैनेजर नहीं थी, बल्कि प्रोसेस एसोसिएट थी और भर्ती या नेतृत्व की कोई जिम्मेदारी उसके पास नहीं थी. कंपनी ने यह भी कहा कि नासिक यूनिट पूरी तरह चालू है और बंद होने की खबरें गलत हैं.
यह मामला नासिक पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है. पुलिस अब पूरे मॉड्यूल की गहराई तक जांच कर रही है और केंद्रीय एजेंसियों की मदद ले रही है. टीसीएस भी अपनी आंतरिक जांच तेज कर रही है. मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग बढ़ रही है, खासकर जब इसमें यौन उत्पीड़न, धार्मिक भावनाएं और SC-ST अत्याचार जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.

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