फालो अप: हालात सुधरे नही राहुल के रामचेत मोची के
कौन हैं राहुल गांधी के रामचेत? अब मशीन बंद, मोची बिस्तर पर, जानें गुप्तारगंज की हकीकत
बिहार चुनाव में राहुल गांधी ने एक चुनावी रैली में सुल्तानपुर के रामचेत मोची का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी जिंदगी में उन्होंने बड़ा बदलाव किया है. रामचेत अब सिलाई मशीन से 10 लोगों को रोजगार दे रहे हैं. लेकिन जब ताजा हाल जानने हम सुल्तानपुर के गुप्तारगंज पहुंचे, तो तस्वीर कुछ अलग ही निकली.
सुल्तानपुर 06 नवंबर2025 : उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर गुप्तारगंज में रहने वाले रामचेत मोची जूते-चप्पलों की सिलाई का काम करते हैं. उनकी छोटी सी दुकान लकड़ी की गुमटी में बनी है. कुछ साल पहले राहुल गांधी उनके इलाके में पहुंचे थे और गरीब तबके के लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने रामचेत को सिलाई मशीन भेंट की थी.
उस वक्त यह खबर चर्चा में रही और रामचेत का नाम मीडिया में खूब चला गया. बिहार में चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि सिलाई मशीन देने के बाद रामचेत मोची की जिंदगी बदल गई. अब वे न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि 10 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने गरीबों को सशक्त बनाने के लिए योजनाएं चलाईं, और रामचेत इसका उदाहरण हैं.
सच क्या है?
गुप्तारगंज पहुंचकर जब रामचेत मोची की दुकान पर हकीकत जानी गई, तो पता चला कि कहानी कुछ और है. रामचेत की तबीयत पिछले कई महीनों से खराब है और वे बिस्तर पर पड़े हैं. उनकी दुकान अब उनके बेटे राघव चलाते हैं. दुकान पर पहले काम थोड़ा बढ़ा जरूर था, लेकिन अब हालात पहले जैसे ही हैं. राघव बताते हैं कि “राहुल भैया ने मशीन दी थी, काम बढ़ा भी था. कुछ कारीगर आए थे, लेकिन अब पिताजी की तबियत खराब है, इसलिए सब चले गए. अब वही मशीन दुकान में रखी है, इस्तेमाल नहीं होती.”
काम बंद, उम्मीदें जारी
रामचेत बताते हैं कि राहुल गांधी की मदद से कुछ वक्त तक रोजगार बढा जरूर . लेकिन बीमारी और सीमित संसाधनों से काम फिर मंद पड़ गया. उनके बेटे राघव अब दुकान संभाल रहे और घर का खर्च चला रहे हैं. राहुल गांधी का यह दावा कि “रामचेत ने 10 लोगों को रोजगार दिया”, जमीनी सच्चाई में सही नहीं ठहरता.
राहुल गांधी ने सुल्तानपुर में रामचेत से मुलाकात कर उन्हें इलेक्ट्रॉनिक मशीन दी थी. अब कांग्रेस कह रही है कि रामचेत के हालात बदल गए हैं और उन्होंने 10 लोगों को रोजगार दिया है,
कौन हैं रामचेत मोची?
सुल्तानपुर के रहने वाले दलित रामचेत पेशे से मोची हैं. उनकी दुकान अयोध्या-प्रयागराज मार्ग पर गुप्तारगंज के पास हाईवे पर ही है. राहुल गांधी जुलाई 2024 में एक मामले में सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी पर आए थे और दिल्ली लौटते समय अचानक रामचेत मोची की दुकान पर रुक गए थे. रामचेत ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए मदद मांगी थी. राहुल गांधी ने उन्हें एक जूते, बैग आदि सिलने वाली इलेक्ट्रॉनिक मशीन भिजवाई थी, जिसके बाद से रामचेत सुर्खियों में आ गए थे.
बेटे राघव राम ने बताया सच
रामचेत मोची की दुकान पर उनका बेटा राघव राम अपने एक रिश्तेदार के साथ काम कर रहा है. राघव राम ने बताया कि राहुल गांधी ने जो मशीन दी थी, उस पर कई महीनों से काम बंद है. उन्होंने कहा कि उनके पिता रामचेत की तबीयत खराब है, जिससे जो कारीगर आए भी थे, वे काम छोड़कर चले गए. राघव राम ने कहा कि पहले दो कारीगर आते थे, लेकिन आजकल वह अकेले ही काम कर रहे हैं. काम बढ़ा जरूर, लेकिन हालात नहीं बदले.
बिस्तर पर पड़े हैं रामचेत, दावों में कितना दम?
रामचेत मोची महीनों से बीमार हैं. वह अपने घर के बगल छप्पर के नीचे बिस्तर पर पड़े हैं. उनके गर्दन में गांठ निकल आई थी और इलाहाबाद में उनका इलाज भी हुआ. लेकिन अब उनके शरीर में इतनी ताकत नहीं बची कि वह बैठकर किसी से बात कर सकें. वह बिस्तर पर पड़े-पड़े ही अपने हालात बता रहे हैं. मौके पर रामचेत की दुकान पर ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं देता, जिससे लगे कि उनके यहां 10 लोग काम पर लगे हों.
मदद का आभार, पर भाग्य कुछ और
राहुल गांधी बिहार चुनाव प्रचार में भले ही रामचेत के हालात बदलने का दावा कर रहे हों, लेकिन आज भी जमीनी सच अलग है. रामचेत मोची ने बताया कि राहुल गांधी ने उनकी रोजगार बढ़ाने और इलाज में भी मदद की थी. रामचेत मोची राहुल गांधी के आभारी जरूर हैं. लेकिन दुर्भाग्य से आज रामचेत अपना जीवन बिस्तर पर पड़े-पड़े ही गुजार रहे हैं.

एक प्रतीक बन गए रामचेत मोची
रामचेत भले ही आज बिस्तर पर हों, लेकिन वे एक प्रतीक बन चुके हैं, गरीब मेहनतकश व्यक्ति की कहानी, जिसे राजनीति में उदाहरण बनाकर दिखाया जाता है. उनकी कहानी यह बताती है कि सहायता और स्थायी परिवर्तन में कितना बड़ा अंतर होता है.

