बी सुदर्शन के फैसले करेंगें विपक्ष को परेशान…उपराष्ट्रपति चुनाव में NDA बनायेगा हथियार

Vice Presidential Election Decisions Of B Sudarshan That Will Trouble Opposition Nda Is Making It A Weapon
बी सुदर्शन के वो बड़े फैसले जो विपक्ष को करेगा परेशान…उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए बना रहा हथियार
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी सुदर्शन रेड्डी को उतारा है। उनके कुछ पुराने निर्णयों को लेकर भाजपा आक्रामक है। भोपाल गैस त्रासदी में उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
नई दिल्ली 20 अगस्त 2025 । : विपक्ष ने उपराष्ट्रपति चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को प्रत्याशी बनाया है। सर्वोच्च अदालत में रहते  उनके कार्यकाल में उनकी अदालत ने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए। अब सत्तापक्ष उन्हीं में से कुछ निर्णयों को  विपक्ष के खिलाफ हथियार बनाने में जुट गया है। जस्टिस रेड्डी का मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए प्रत्याशी महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से हो रहा है। इस चुनाव का समीकरण यूं भी सत्तापक्ष की तरफ है, लेकिन विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज को उतारकर इसे दिलचस्प बनाने की कोशिश की है।
जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी, उपराष्ट्रपति उम्मीदवार

भोपाल गैस केस खोलने से इनकार
मई 2012 की बात है। इस त्रासदी के आरोपित के खिलाफ आरोपों को हल्का करने के एक पुराने अदालती निर्णय के खिलाफ सीबीआई ने क्यूरेटिव पिटीशन दायर की थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने वह याचिका निरस्त कर दी। निर्णय सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच का था, जिसमें जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी भी  थे। इसी को लेकर भाजपा नेता तेजिंदर बग्गा ने एक्स पर एक अखबार की रिपोर्ट शेयर करते हुए लिखा है, ‘एंडरसन ने भोपाल गैस त्रासदी में 25,000 भारतीयों की हत्या की। राजीव गांधी ने उसे भारत से भागने में मदद की। जब सीबीआई ने केस खोलने की अपील की तो जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी ने मना कर दिया। अब वे सोनिया गांधी के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार हैं।’

सलवा जुडूम को बंद करने का फैसला
जस्टिस सुदर्शन रेड्डी ने आदिवासी युवाओं को स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (SPOs) के तौर पर नियुक्त करने के छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले को अवैधानिक और असंवैधानिक बताया था। असल में इन युवाओं को सलवा जुडूम या कोया कमांडो के तौर पर माओवाद से निपटने को तैयार किया जा रहा था। लेकिन, जस्टिस रेड्डी और जस्टिस एसएस निज्जर की बेंच ने 5 जुलाई, 2011 को इसे संवैधानिक सिंद्धांतों के विरुद्ध और मानवाधिकार विरोधी बताते हुए इस पर रोक लगा दी थी। भाजपा ने उनकी उम्मीदवारी घोषित होते ही यह कहकर उन पर हमला किया कि वे नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर करने को जाने जाते हैं। भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि यह निर्णय न सिर्फ उग्रवाद-विरोधी अभियान को झटका था, बल्कि माओवाद से जुड़े लोगों पर न्यायिक सहानुभूति का भी उदाहरण है। खास बात है कि सलवा जुडूम अभियान के खिलाफ याचिकाकर्ताओं में नंदिनी सुंदर, रामचंद्र गुहा और ईएएस सरमा जैसे ऐक्टिविस्ट शामिल थे।

आर्मी मेडिकल कॉलेज पर फैसला
जस्टिस रेड्डी ने आर्मी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज की सभी सीटें सैन्यकर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षित करने की नीति पर रोक लगाते हुए इसे आर्टिकल 14 के अनुसार असंवैधानिक बताया था। अपने निर्णय में जस्टिस रेड्डी ने कहा था कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को उच्च शिक्षा से रोकना देश को खतरनाक हो सकता है। जस्टिस रेड्डी ने यह फैसला भी 2011 में सुनाया था।

ब्लैक मनी की जांच पर एसआईटी
रिटायरमेंट से कुछ समय पहले जस्टिस रेड्डी ने राम जेठमलानी और अन्य की ओर से दायर ब्लैक मनी से जुड़े मामलों की जांच में ढिलाई को केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी। उन्होंने इसकी जांच को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस बीपी जीवन रेड्डी के नेतृत्व में विदेशी बैंकों में जमा काले धन की जांच का आदेश दिया था। सुदर्शन रेड्डी के कार्यकाल में यह कुछ महत्वपूर्ण निर्णय हुए थे, जिनमें से पहले दो को भाजपा ने उनके खिलाफ मामला बनाने की कोशिश की है।

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