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‘शर्म आ रही है’…चुनाव डेटा हेराफेरी में फंसा सीएसडीएस…शिकंजा कसने की तैयारी में आईसीएसएसआर

सीएसडीएस महाराष्ट्र चुनाव के वोटर लिस्ट डेटा में हेराफेरी के आरोपों के चलते विवादों में है। इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च ने भ्रामक डेटा देने और अनुदान नियमों का उल्लंघन करने पर उसे कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही है।

नई दिल्ली: महाराष्ट्र चुनाव के वोटर लिस्ट से जुड़े आंकड़ों की हेराफेरी की वजह से सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) विवादों के घेरे में है। इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) ने भ्रामक डेटा देकर अनुदान नियमों के उल्लंघन को लेकर इसके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही है। मंगलवार को काउंसिल की ओर से कहा गया, ‘आईसीएसएसआर की जानकारी में आया है कि सीएसडीएस में जिम्मेदार पद पर मौजूद एक व्यक्ति, जो कि आईसीएसएसआर के फंड पर चलने वाली रिसर्च संस्थान है, महाराष्ट्र चुनावों से जुड़े डेटा विश्लेषण में गड़बड़ियों का हवाला देते हुए मीडिया में बयान दिए थे, जिन्हें बाद में वापस लेना पड़ा।’

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विवादों के घेरे में सीएसडीएस

महाराष्ट्र वोटर लिस्ट के डेटा में हेराफेरी

दरअसल, सारा विवाद सीएसडीएस में एक सीनियर चुनाव विश्लेषक के रूप में काम करने वाले संजय कुमार के एक एक्स पोस्ट पर हो रहा है। उन्होंने अपने एक एक्स पोस्ट में महाराष्ट्र में 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों को लेकर कुछ सीटों पर मतदाताओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि और कमी का दावा किया था। आगे चलकर उनका यह एक्स पोस्ट विपक्ष की ओर से वोटर लिस्ट में धांधली के आरोपों का आधार बना और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए एक मुहिम ही छेड़ दी। लेकिन, अब संजय कुमार ने अपना वह पोस्ट डिलीट कर दिया है और माफी मांग रहे हैं।

‘गलती हुई है..सचमुच थोड़ी शर्म आ रही’

संजय कुमार ने अपने उन आंकड़ों को गलत मानते हुए माफी मांगने के साथ ही, सफाई में कहा है कि उनकी टीम ने भूल से गलत डेटा जुटा लिए। अपने एक्स पोस्ट पर माफीनामे के बाद उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा है, ‘बहुत सोच समझ रहा हूं इसपे..गलती हुई है और सचमुच थोड़ी सी शर्म आ रही है…बहुत शर्मिंदा महूसस कर रहा हूं…क्योंकि जिस तरह से चरित्र चित्रण किया जा रहा है तो इसकी आदत नहीं है हमें…तो क्या कहूं थोड़ा विचलित भी हूं…’

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‘अनुदान सहायता नियमों का घोर उल्लंघन’

इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) ने एक्स पर अपने बयान में आगे कहा है, ‘..इसके अलावा इंस्टीट्यूट ने भारत के इलेक्शन कमीशन की एसआईआर प्रक्रिया की पक्षपातपूर्ण व्याख्या के आधार पर मीडिया स्टोरीज प्रकाशित की हैं।’ काउंसिल का कहना है कि वह भारत के संविधान को सर्वोच्च सम्मान देता है। इसके अनुसार चुनाव बहुत उच्च संवैधानिक संस्थान है, जो दशकों से दुनिया की सबसे विशाल लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवा रहा है। आईसीएसएसआर के मुताबिक, ‘आईसीएसएसआर, सीएसडीएस की ओर से डेटा में हेरफेर और इलेक्शन कमीशन की पवित्रता को कमजोर करने के मकसद से एक नैरेटिव गढ़ने के उसके प्रयास को गंभीरता से लेता है। यह आईसीएसएसआर की ओर से दी जाने वाली अनुदान सहायता के नियमों का घोर उल्लंघन है…।’

सरकार से होती है सीएसडीएस को फंडिंग

1963 में स्थापित सीएसडीएस एक स्वायत्त संस्थान है। लेकिन, इसकी ज्यादातर फंडिंग आईसीएसएसआर के माध्यम से सरकार ही करती है। संसद में पेश किए गए एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक साल 2023-24 की पहली तिमाही तक ही सीएसडीएस को 98 लाख रुपये बतौर अनुदान मिले थे। जबकि, 2022-23 में 394 करोड़ रुपये दिए गए थे। यह रकम 2020-21 में 470 करोड़ और 2021-22 में 430.50 करोड़ रुपये था। वैसे जहां तक ‘वोट चोरी‘ के राहुल गांधी के आरोपों का सवाल है तो चुनाव आयोग ने उसे पहले ही निराधार बताते हुए उनसे हलफनामा देकर सबूत मांगा है या फिर एक हफ्ते के अंदर माफी मांगने को कहा है।

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