‘गोली चलानी ही पड़ती..’: CJP प्रोटेस्ट हिंसा पर दिल्ली पुलिस महासंघ,अधिकारी निर्णायक कि क्या करें

Delhi Police Mahasangh On Cjp Protest If Protesters Had Stormed Parliament Firing Inevitable
‘गोली चलानी ही पड़ती..’: CJP प्रोटेस्ट में हिंसा पर दिल्ली पुलिस महासंघ का बड़ा बयान- न गवर्नर, न होम मिनिस्टर
दिल्ली पुलिस महासंघ ने प्रेस कांफ्रेंस करके बताया है कि 20 जुलाई को अगर प्रदर्शनकारियों को नहीं रोका जाता तो संसद में क्या हो सकता था।

नई दिल्ली 31 जुलाई 2026 : दिल्ली में सीजेपी के ‘संसद चलो’ मार्च में हुई हिंसा को रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई के बचाव में दिल्ली पुलिस महासंघ भी सामने आया है। महासंघ की ओर से पूर्व एसीपी केपी कुकरेती ने कहा है कि अगर पुलिस नहीं रोकती तो प्रदर्शनकारी संसद में घुस जाते, जो कि और भी खराब स्थिति हो सकती थी।
Delhi Police Mahasangh on CJP protest
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर बोला दिल्ली पुलिस महासंघ

‘गोली चलानी ही पड़ती, यह कानून में है’
जंतर-मंतर से संसद तक मार्च में 20 जुलाई को उपद्रवियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और आरएएफ कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस महासंघ की ओर से पूर्व एसीपी केपी कुकरेती ने कहा, कि ‘बहुत ही विकट परिस्थिति में अगर पुलिस अफसर की जान को खतरा है, अगर वास्तविक जोखिम है तो वह मौके पर कोई भी उचित एक्शन लेगा।’

पुलिस के पास क्या साधन है…या तो उन्हें पार्लियामेंट में घुसने देते…तो इससे बड़ी घटना घटती। गोली चलानी ही पड़ती और यह कानून में लिखा हुआ है।
केपी कुकरेती, पूर्व एसीपी

  ‘संसद में घुसने से बड़ी अराजकता क्या होती’
दिल्ली पुलिस महासंघ ने कहा गया कि ‘वहां पर न गवर्नर साहब, न सीएम, न होम मिनिस्टर। मौके पर सीनियर अफसर या मौके का अफसर डिसाइड करेगा कि मुझे अपनी जान या पब्लिक की जान या जो पब्लिक प्रॉपर्टी है, चाहे वह पार्लियामेंट है या पार्लियामेंटिरयन हैं, को कैसे बचाना है?’

इससे बड़ी अराजकता क्या होती, अगर लोग पार्लियामेंट में घुस जाते। हमारे लिए एक अंतरराष्ट्रीय शर्म की बात होती,लोग यह समझने लगते कि भारत की पुलिस अपनी संसद की रक्षा करने में भी सक्षम नहीं है।
केपी कुकरेती, पूर्व एसीपी

20 जुलाई को किन हालातों में हुई पुलिस कार्रवाई?
पूर्व पुलिस अधिकारी के अनुसार जब कोई भीड़ बेकाबू हो जाती है और गैर-कानूनी जमावड़े से हालात बिगड़ जाते हैं तो उसमें शामिल हर सदस्य कानूनी तौर पर जिम्मेदार होता है।
कानून के शब्दों में गैर-कानूनी जमावड़े में शामिल हर सदस्य एक आरोपित है।
उनका कहना है ‘भीड़ हिंसक हो चुकी थी, लाठी, पत्थर मार रही थी, बैरिकेड तोड़ जा रहे थे, सेक्शन 163 की चेतावनी नजरअंदाज कर दी गई थी। फिर पुलिस के पास क्या विकल्प बच जाते हैं।’
दिल्ली पुलिस महासंघ के अनुसार इस प्रदर्शन में शामिल बच्चे भी उनके बच्चे हैं।
उनके बच्चे भी ऐसे ही उम्र के हैं, उनका नजरिया भले ही अलग हो सकता है।
पुलिस महासंघ ने यह भी सवाल उठाया है कि ‘पुलिस वालों पर हमला करने वाले कौन थे?’
128 पुलिस जन किसने घायल किये?’
‘अगर पुलिस पर उन पर कार्रवाई के आरोप लग रहे हैं तो हम पर किसने हमले किए? और हमें इन सवालों का जवाब चाहिए। इस कारण सरकार जैसे काम कर रही है, उससे हम संतुष्ट हैं।’

‘भीड़ ने मेरे पिता को मार ही डाला था’: CJP प्रदर्शन में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने मीडिया को बताया दर्द, कहा- वर्दी के पीछे भी होता है एक परिवार
दिल्ली पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP प्रोटेस्ट में घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का छलका दर्द
राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में घायल जवानों के परिजनों ने उस दिन की घटनायें याद करते हुए अपना दर्द साझा किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के बाद केवल एक पक्ष की कहानी सामने आई, जबकि ड्यूटी निभाते घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की पीड़ा को पर्याप्त महत्व नहीं मिला। परिजनों ने पुलिसकर्मियों के अधिकारों और उनके साथ हुई हिंसा पर संसद व न्यायपालिका से ध्यान देने की अपील भी की।

परिजनों ने सुनाई उस दिन की दर्दनाक कहानी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई परिवार भावुक हो गए। एक घायल पुलिसकर्मी के परिजन ने रोते हुए कहा,कि “जब मेरे पिता उस दिन ड्यूटी के बाद घर लौटे, तो उनकी खाकी वर्दी खून से पूरी तरह लाल थी। उनके सिर और हाथों पर गंभीर चोटें थीं।”

दिल्ली पुलिस के एक ACP की पत्नी अवनीत कौर ने भी उस रात को याद करते हुए कहा, कि “20 जुलाई रात जब मेरे पति घायल हो घर पहुंचे, तो उनकी हालत देखकर मेरी आत्मा कांप गई। वह दृश्य मेरे और हमारी 2 साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक और ट्रॉमेटिक था। मेरी मासूम बेटी अपने पिता को उस हालत में देखकर सहम गई थी।”

उन्होंने आगे कहा, “लोग यह भूल जाते हैं कि एक पुलिस अधिकारी सिर्फ एक अकेला इंसान या वर्दी नहीं होता। उसके पीछे उसका एक परिवार होता है-उसकी पत्नी, छोटे बच्चे और बूढ़े माता-पिता, जो हर पल घर पर उसके सुरक्षित लौटने का इंतजार करते हैं।”

‘मेरे पिता को लगभग मार ही डाला गया था’ : बेटी ने बयां किया दर्द
घायल सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने अपने पिता की सेवा और उस दिन हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा, “पुलिस में शामिल होने से पहले, मेरे पिता इंडियन नेवी में मरीन कमांडो थे। उन्होंने अपनी जिंदगी के 15 साल इंडियन नेवी को दिए। उस दिन मेरे पिता बैरिकेड्स पर तैनात थे, जहाँ बहुत भारी भीड़ मौजूद थी। पापा अक्सर घर बताते थे कि अब यह सिर्फ छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है, इसमें कुछ असामाजिक तत्व घुस चुके हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “25 तारीख को प्रदर्शन की भीड़ ने मेरे पिता को जबरन खींच लिया और उन पर जानलेवा हमला कर दिया। उन्हें लगभग मार ही डाला था। हमले के बाद वे 4 घंटे से भी ज्यादा समय तक मौके पर बेहोश पड़े रहे। बाद में जब उनकी टीम के लोग उन्हें किसी तरह बचाकर घर लाए, तो उनकी पूरी वर्दी खून से लथपथ थी। एक तरफ मेरे पिता अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर मेरे पिता को ही एक अपराधी और विलेन की तरह पेश किया जा रहा था।”

उन्होंने यह भी कहा, “ठीक अगले दिन, मुझे पता चला कि जिन लोगों ने मेरे पिता पर हमला किया था, वे अपना जुर्म  छिपाने को सुप्रीम कोर्ट जा रहे थे और उनके और सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज करा रहे थे। मुझे बहुत दुख हुआ और मैंने तय किया कि मुझे भी अपने पिता के लिए न्याय माँगना चाहिए। मुझे पुलिस के अन्य परिवारों का समर्थन मिला और हम सुप्रीम कोर्ट गए। हमने एक वकील से सुप्रीम कोर्ट के सामने हमारा पक्ष रखने का अनुरोध किया। वकील ने हमें भरोसा दिलाया कि इस देश के नागरिक के तौर पर हमारे भी समान अधिकार हैं और हमें भी न्याय मिलेगा।”

एक अन्य पुलिसकर्मी की बेटी गुंजन ने कहा,कि “मेरे पिता घर आते थे, तो कहते थे कि अब ये स्टूडेंट प्रोटेस्ट नहीं रहा, इसमें गलत लोग जुड़ गए हैं। 20 जुलाई को मेरे पिता के साथी उन्हें रात 10 बजे घर लेकर आए। उनके सिर पर 5 टाँके थे। उनकी यूनिफॉर्म खून से लथपथ थी, फिर भी सोशल मीडिया पर उन्हें ही क्रिमिनल बताया गया।”

परिजनों ने संसद और न्यायपालिका से लगाई गुहार
प्रेस कॉन्फ्रेंस में घायल ASI की पत्नी सीमा ने बताया, “मैंने 20 जुलाई शाम 7 बजे पति को कॉल किया, तो वो हॉस्पिटल में थे। इलाज करा रहे थे। भीड़ में शरारती तत्व एक्टिव हो गए थे। उन्होंने पत्थर और हथियारों से पुलिस के जवानों को घायल कर दिया था। फिर उनका फोन बंद हो गया।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे डर लग रहा था। 11 बजे वो घर आए, उन्होंने बताया कि संसद की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की गई थी, उसे तोड़ा और पुलिस फोर्स पर हमला किया। ड्यूटी के दौरान मिला हेलमेट पूरी तरह टूट गया था। इससे मेरी रूह कांप गई थी।”

सीमा ने संसद से अपील की कि, “मैं संसद में बैठे प्रतिनिधियों से अपील करना चाहती हूँ कि जो हमारे पुलिसकर्मी और परिवार हैं, उसके अधिकारों और हमलों के बारे में संसद में सवाल करें। 20 तारीख के बाद यही नेरेटिव चलाया जा रहा है कि छात्रों को पुलिस ने पीटा, लेकिन प्रोटेस्ट का दूसरा हिस्सा कुछ ओर ही है।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिजनों ने बताया कि प्रदर्शन और ‘संसद चलो’ मार्च में 148 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जिनमें कई गंभीर रूप से जख्मी हैं। उन्होंने कहा कि कुछ घायल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों ने न्याय की माँग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है।

परिवारों का कहना है कि ड्यूटी में घायल जवानों की पीड़ा और उनके अधिकारों पर भी समान रूप से चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि वर्दी के पीछे भी एक परिवार हर दिन उनकी सुरक्षित वापसी का इंतजार करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *