महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरा, देशभर में विरोध प्रदर्शन करेगी भाजपा,NDA
Womens Reservation Bill Defeated In Lok Sabha Bjp To Stage Nationwide Protests Nda Allies To Join In
महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरा, देशभर में विरोध प्रदर्शन करेगी भाजपा; NDA के दल भी होंगे शामिल
लोकसभा में शुक्रवार को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। विधेयक के गिरने के बाद विपक्ष ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है तो वहीं भाजपा ने शनिवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
नई दिल्ली 17 अप्रैल 2026। लोकसभा में शुक्रवार को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। मतदान में बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। 21 घंटे चर्चा बाद इस पर वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने को दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। विधेयक के गिरने के बाद विपक्ष ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है तो वहीं भाजपा ने शनिवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
भाजपा शनिवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन करेगी।
कांग्रेस, टीएमसी पर साधा निशाना
इस विरोध प्रदर्शन में एनडीए के बाकी दल भी हिस्सा लेंगे। अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल गिरने के लिए कांग्रेस, टीएमसी पर निशाना साधा। अमित शाह ने X पर लिखा, आज लोकसभा में बहुत अजीब दृश्य दिखा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया। महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है।
लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं का अधिकार नहीं मिलाः शाह
अमित शाह ने कहा कि अब देश की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण, जो उनका अधिकार था, वह नहीं मिल पाएगा। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने यह पहली बार नहीं किया, बल्कि बार-बार किया है। उनकी यह सोच न महिलाओं के हित में है और न देश के। उन्होंने कहा, मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि नारी शक्ति के अपमान की यह बात यहां नहीं रुकेगी, दूर तक जाएगी। विपक्ष को ‘महिलाओं का आक्रोश’ न सिर्फ 2029 लोकसभा चुनाव में, बल्कि हर स्तर, हर चुनाव और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया। महिलाओं को तैंतीस फीसदी आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है।
अमित

मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाने की कोशिश कीः खरगे
वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पोस्ट में लिखा, “मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर डिलिमिटेशन करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान और संघवाद को चोट पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किया। उनकी ये चालबाजी एकजुट विपक्ष, ‘इंडिया’ ने भांप ली और संविधान संशोधन बिल गिर गया। हम सभी विपक्षी दलों के नेताओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।”
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक्स पोस्ट में लिखा, “संसद में डिलिमिटेशन बिल फेल हुआ। मोदी जी के अहंकार की हार हुई। मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू।”
तो क्या महिलाओं को नहीं मिलेगा संसद में आरक्षण, जानें-आज के बिल के पारित न होने का क्या मतलब है![]()
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा बिल पास नहीं हो सका. संविधान संशोधन होने के कारण इस बिल को पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी. बिल के पक्ष के 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 230 वोट. इस बिल के लिए कुल 528 सांसदों ने वोट डाले, जिसका दो-तिहाई 352 होता है. लेकिन इस बिल के पक्ष में 298 वोट ही पड़े, ऐसे में यह बिल 54 वोट से गिर गया।
तो क्या महिलाओं को नहीं मिलेगा संसद में आरक्षण, जानें-आज के बिल के पारित न होने का क्या मतलब है
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा पास नहीं हो सका.
फटाफट पढ़ेंखबर का सार AI ने दिया. न्यूज टीम ने रिव्यू किया.
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पास नहीं हो सका.इस संशोधन के तहत संसद की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था, लेकिन यह पास नहीं हुआ.विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े, जबकि दो तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी.
17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण पारित नहीं हो सका. यह संविधान संशोधन महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित था. इस संशोधन के जरिए संसद की 543 सीटों से बढ़ाकर 850 सीटें करने का प्रावधान था. गुरुवार से शुरू हुए संसद के विशेष सत्र में 21 घंटे की चर्चा के बाद इस पर वोटिंग हुई. लोकसभा में 528 सांसदों ने वोट डाले. इस बिल के पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े.
राहुल बोले- यह महिला आरक्षण नहीं राजनीतिक सरंचना बदलने का तरीका था
बिल को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी. 528 का दो तिहाई 352 होता है. इस तरह ये बिल पास 54 वोट से गिर गया. लोकसभा में मौजूदा सांसदों की संख्या 540 है, तीन सीटें खाली हैं. लोकसभा में इस बिल के गिरने के बाद राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है. हमने साफ तौर पर कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है.
महिलाओं को आरक्षण मिलेगा या नहीं?
लेकिन सबसे अहम सवाल यह है कि इस बिल के पास नहीं होने से क्या संसद में महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलेगा या नहीं. इसका सीधा जवाब है- महिलाओं को आरक्षण मिलता रहेगा. क्योंकि संसद में महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा पुराना कानून सुरक्षित है.
2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (106वां संविधान संशोधन) पहले से ही कानून बन चुका है और वह 16 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो गया है.
बिल गिरने का कारण
सरकार ने हाल ही में नया विधेयक (131वां संशोधन) इसलिए पेश किया था ताकि जनगणना और परिसीमन (delimitation) की लंबी प्रक्रिया के बिना ही 2029 के चुनावों में आरक्षण को तेज़ी से लागू किया जा सके. यह नया प्रयास बहुमत न मिलने के कारण सफल नहीं हो पाया.
आरक्षण कब मिलेगा?
अब आरक्षण की प्रक्रिया मूल 2023 के कानून से चलेगी. इसके अनुसार, 33% आरक्षण तभी लागू होगा जब अगली जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. वर्तमान अनुमानों के अनुसार, यह आरक्षण 2034 या उसके बाद के चुनावों में ही पूरी तरह से लागू हो पाएगा.
कहने का अर्थ है कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने का मूल कानून (2023 वाला) अभी भी लागू है, लेकिन उसे जल्द लागू करने (2029 तक) का सरकार का नया प्रस्ताव संसद में विफल हो गया है. अब आरक्षण के लिए लंबी संवैधानिक प्रक्रिया (जनगणना और परिसीमन) का इंतजार करना होगा.

