क्या है माडर्न दून लाइब्रेरी,कौन करता है नियंत्रण?
मैंने लैंसडौन चौक, परेड ग्राउंड स्थित Modern Doon Library को ही संदर्भ माना है। यह Dehradun Smart City Limited (DSCL) की परियोजना के रूप में बनी थी; सरकारी/ऑडिट दस्तावेज भी इसे DSCL की परियोजना बताते हैं। �
Sai India +1
लेकिन एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है: मुझे उपलब्ध विश्वसनीय ऑनलाइन स्रोतों में Modern Doon Library के “ट्रस्टीगण” की आधिकारिक सूची नहीं मिली। इसलिए नाम अनुमान से देना उचित नहीं होगा।
Doon Library and Research Centre के नाम से जो ऑनलाइन प्रविष्टि है, वह इसी लैंसडौन चौक वाले स्थान को दिखाती है। �
Padhain
मैंने इस बार लैंसडौन चौक वाली Modern Doon Library के आधिकारिक और सरकारी रिकॉर्ड को अलग-अलग मिलाकर देखा है।
एक महत्वपूर्ण सुधार भी है: Modern Doon Library और Doon Library & Research Centre को पूरी तरह अलग संस्थान मानना सही नहीं है। लैंसडौन चौक की नई चार-मंजिला लाइब्रेरी उसी Doon Library & Research Centre से जुड़ी है। स्वयं संस्था की वेबसाइट पर पता Lansdowne Chowk, Dehradun दिया गया है। �
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उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में Governing Body
Doon Library & Research Centre की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान में Governing Body के ये सदस्य दर्ज हैं: �
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अध्यक्ष — डॉ. बी.के. जोशी
Principal Secretary/Secretary, Finance, Uttarakhand — पदेन सदस्य
Principal Secretary/Secretary, School Education, Uttarakhand — पदेन सदस्य
Vice Chancellor, Doon University — पदेन सदस्य
श्री योगेंद्र सिंह
श्री डी.के. पांडे
श्री आई.के. पांडे, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड
श्री एन.एस. नपलच्याल, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड
श्री I.A. Sealy
प्रो. अरविंद के. मेहरोत्रा
डॉ. इंदु सिंह
डॉ. (श्रीमती) लोवेलेना मोदी
श्री एम.पी. सक्सेना — कोषाध्यक्ष
श्री एन. रवि शंकर, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड — निदेशक एवं सदस्य-सचिव। �
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संस्था स्वयं बताती है कि वह 16 मार्च 2006 को Society Registration Act के तहत पंजीकृत हुई थी और इसका संचालन एक Governing Body करती है। �
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लेकिन एक अहम प्रश्न अभी बाकी है
सरकारी Smart City रिकॉर्ड के अनुसार Modern Doon Library का निर्माण Dehradun Smart City Limited (DSCL) के प्रोजेक्ट के रूप में हुआ था। सितंबर 2019 में DSCL ने इसके निर्माण और उपकरणों के लिए ₹13.25 करोड़ का MoU किया था। � सरकारी दस्तावेज इसे Parade Ground की Modern Doon Library के रूप में स्पष्ट रूप से पहचानता है। �
Sai India
UK Tenders
इसलिए यदि आपका सवाल “इस भवन/परियोजना का ट्रस्टी कौन है?” है, तो केवल ऊपर की Governing Body को “ट्रस्टी” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। संस्था Society है, Trust नहीं। �
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यदि आप चाहें तो मैं अगला कदम लेकर �Society का मूल registration record/constitution, �Memorandum of Association और �Governing Body की स्थापना के समय के मूल दस्तावेज खोजूँ—इससे यह भी पता चल सकता है कि **किसने इस संस्था को बनाया, मूल संस्थापक/सदस्य कौन थे और सरकार की इसमें वास्तविक भूमिका क्या है।**
अब मूल दस्तावेजों तक पहुँचने पर तस्वीर काफी स्पष्ट होती है।
1. यह संस्था Trust नहीं, Society है
Doon Library & Research Centre 16 मार्च 2006 को Societies Registration Act के अंतर्गत पंजीकृत हुई थी। इसकी संरचना में General Body और Governing Body दोनों हैं। संस्था की अपनी वेबसाइट भी इसे “autonomous institution registered as a Society” बताती है।
इसलिए “ट्रस्टी” कहना बोलचाल में संभव है, लेकिन कानूनी/संस्थागत रूप से सही शब्द Governing Body members / General Body members है।
2. संस्थापक सदस्यों के नाम
संस्था की वर्तमान वेबसाइट पर General Body में जिन लोगों के नाम के आगे स्पष्ट रूप से Founder Member लिखा है, वे हैं:
- श्री एम. रामचंद्रन — पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड
- श्री आई.के. पांडे — पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड
- श्री एस.के. मट्टू — पूर्व प्रमुख सचिव, संस्कृति, उत्तराखंड
- श्री अमरेंद्र सिन्हा — पूर्व सचिव, योजना, उत्तराखंड
- श्री डी.के. कोटिया — पूर्व सचिव, स्कूल शिक्षा, उत्तराखंड
- श्री एस. राजू — पूर्व सचिव, उच्च शिक्षा, उत्तराखंड
- श्री गजेंद्र सिंह — पूर्व कुलपति, दून विश्वविद्यालय
- श्री रस्किन बॉन्ड — लेखक
इनके अतिरिक्त डॉ. एम.पी. जोशी को Honorary Member के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
यह सूची खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वेबसाइट ने इन नामों को सामान्य सदस्य नहीं बल्कि “Founder Member” के रूप में चिह्नित किया है।
3. शुरुआत में सरकार की भूमिका कितनी थी?
2006–07 की पहली Annual Report इससे भी महत्वपूर्ण तथ्य देती है। उसमें साफ लिखा है कि संस्था की स्थापना 16 मार्च 2006 को हुई और उस समय Society का अध्यक्ष उत्तराखंड का Chief Secretary था।
31 मार्च 2007 की पहली Governing Body में थे:
- एस.के. दास, IAS — Chief Secretary एवं Chairman
- आलोक जैन, IAS — Principal Secretary Finance
- एस. राजू, IAS — Secretary Higher Education
- डॉ. एस.एस. संधू, IAS — Secretary Culture
- अमरेंद्र सिन्हा, IAS — Secretary Planning
- डॉ. बी.के. जोशी — पूर्व कुलपति, कुमाऊँ विश्वविद्यालय
- एस.के. माहेश्वरी, IAS — Secretary & Director School Education, Member-Secretary.
यानी शुरुआत से ही इसका ढांचा सरकार + शिक्षाविद्/विशिष्ट व्यक्तियों की मिश्रित संस्था का था।
4. सरकारी आर्थिक सहयोग भी बहुत महत्वपूर्ण था
पहली Annual Report बताती है कि उत्तराखंड सरकार ने संस्था को ₹15 लाख का प्रारंभिक अनुदान और ₹3.20 करोड़ का Corpus Grant दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने Corpus को बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की घोषणा की थी। रिपोर्ट इसे संस्था को मिली सरकार की वित्तीय, प्रशासनिक और नैतिक सहायता बताती है।
और एक दिलचस्प तथ्य: 2006 में पुस्तकालय के लिए Parade Ground में School Education Department की इमारत उपलब्ध कराई गई थी। बाद में यही संस्था लैंसडौन चौक वाले वर्तमान परिसर में पहुँची।
5. वर्तमान स्थिति
आज संस्था की वेबसाइट पर डॉक्टर बी.के. जोशी Chairman के रूप में और श्री एन. रवि शंकर, पूर्व मुख्य सचिव Director & Member-Secretary के रूप में दर्ज हैं। वर्तमान Governing Body में सरकार के Finance, School Education और Doon University के पदेन सदस्य भी हैं।
इसलिए यदि आपका मूल सवाल यह है कि “लैंसडौन चौक की Modern Doon Library के पीछे कौन लोग/संस्था हैं?” तो उत्तर है: यह किसी निजी ट्रस्ट की निजी लाइब्रेरी नहीं, बल्कि 2006 में पंजीकृत एक Society — Doon Library & Research Centre — है, जिसकी स्थापना और वित्तीय आधार में उत्तराखंड सरकार की बड़ी भूमिका रही है।
और मुझे लगता है कि अगला दस्तावेज़ सबसे महत्वपूर्ण होगा: संस्था का मूल Memorandum of Association & Rules। उसकी वेबसाइट पर स्वयं “Memorandum of Association Rules” उपलब्ध कराया गया है।
यदि आप चाहें तो मैं उसी **, , और ।**
जी। मैंने Doon Library & Research Centre की वेबसाइट पर उपलब्ध मूल “Memorandum of Association Rules” को खोज लिया है। संस्था ने इसे अपनी वेबसाइट पर बाकायदा उपलब्ध कराया है। �
Doon Library +1
लेकिन यहाँ एक तकनीकी अड़चन है: वेबसाइट पर अभी जो पेज खुल रहा है, उसमें Memorandum की स्कैन/इमेज दिखाई देती है, पर उसका वास्तविक पाठ वेब-पाठ के रूप में उपलब्ध नहीं है। इसलिए संस्थापक सदस्यों, संपत्ति के स्वामित्व और संस्था के विघटन की स्थिति वाले प्रावधानों को मैं अनुमान से नहीं बताऊँगा। �
Doon Library
अभी तक दस्तावेजों से निश्चित बातें
संस्था का नाम Doon Library and Research Centre है।
यह Societies Registration Act के अंतर्गत पंजीकृत Society है, Trust नहीं।
इसका वर्तमान पता Lansdowne Chowk, Dehradun है। �
Doon Library
संस्था की वेबसाइट पर Memorandum of Association Rules अलग दस्तावेज के रूप में उपलब्ध है। �
Doon Library
इसलिए असली “ट्रस्टी” खोजने के बजाय Memorandum में दर्ज Founder Members, Governing Body और संपत्ति संबंधी धाराएँ देखना अधिक सही कानूनी तरीका है।
�मैं अगला काम इसी मूल दस्तावेज की स्कैन कॉपी/इमेज पढ़कर कर सकता हूँ और आपको विशेष रूप से ये चार चीजें निकालकर दे सकता हूँ:
�सभी मूल Founder Members के नाम
�पहली Governing Body की पूरी सूची
�लाइब्रेरी की जमीन/भवन और संपत्ति पर कानूनी अधिकार किसका है
�Society बंद/भंग होने पर संपत्ति किसे मिलेगी
यही चार बिंदु यह समझने के लिए निर्णायक होंगे कि **लैंसडौन चौक की Modern Doon Library वास्तव में किसकी संस्था/संपत्ति है और उस पर किसका नियंत्रण है।**
बहुत-बहुत धन्यवाद जी। 🙏
मैंने आधिकारिक स्रोत भी दोबारा जाँच लिया है। Doon Library & Research Centre स्वयं इसे 16 मार्च 2006 को पंजीकृत Society और Governing Body द्वारा संचालित स्वायत्त संस्था बताती है; वर्तमान वेबसाइट पर लैंसडौन चौक का पता भी यही दिया गया है। �
Doon Library +1
आगे यदि हम मूल Memorandum of Association की धाराओं तक पहुँचते हैं, तो उसी आधार पर संस्था की संपत्ति, संस्थापक सदस्य और सरकारी नियंत्रण का कानूनी ढाँचा और स्पष्ट किया जा सकेगा। �
Doon Library
आपके इस शोध को मैं यहीं से आगे बढ़ा सकता हूँ।
जी, और अब एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट हुई है। मैंने संस्था की वेबसाइट के मूल दस्तावेज वाले पेज को फिर से जाँचा। वहाँ “Memorandum of Association Rules” वास्तव में उपलब्ध कराया गया है, लेकिन वेबसाइट का पेज उस दस्तावेज का केवल इमेज/स्कैन लिंक दिखाता है; उसका पाठ HTML में नहीं है। �
Doon Library +1
इसलिए मैं इसे लेकर अनुमान नहीं लगाऊँगा। अगला सही रास्ता उस मूल स्कैन को निकालकर पढ़ना है। इससे हम खास तौर पर यह स्थापित कर सकेंगे:
मूल Founder Members कौन थे;
Society का मूल Memorandum/Objects क्या था;
Governing Body के अधिकार क्या हैं;
चल-अचल संपत्ति के संबंध में नियम क्या हैं;
Society के विघटन पर संपत्ति का क्या होगा;
और सबसे महत्वपूर्ण—लैंसडौन चौक के वर्तमान भवन/परिसर पर DSCL, राज्य सरकार या Doon Library Society में से किसका कानूनी अधिकार/स्वामित्व है।
एक और रोचक स्वतंत्र स्रोत भी मिला है। लेखिका मृणाल पांडे ने 2023 में लिखा कि डॉ. बी.के. जोशी का यह पुस्तकालय-प्रयास 1998 से चल रहा था और बाद में इसे संस्थागत रूप दिया गया। � यह मूल दस्तावेजों से संस्थान की वास्तविक उत्पत्ति समझने में उपयोगी हो सकता है।
The Wire
मैं इसे अब “कौन ट्रस्टी है?” से आगे बढ़ाकर “Modern Doon Library की स्थापना, नियंत्रण और संपत्ति का पूरा कानूनी इतिहास” के रूप में देखूँगा। इससे शायद वह तथ्य भी सामने आए जो सामान्य वेबसाइटों पर नहीं मिलता।
जी। 👍 आगे इसी दिशा में दस्तावेज़ी पड़ताल करेंगे। अभी की जाँच से एक महत्वपूर्ण कानूनी तथ्य भी पुष्ट हुआ है—आयकर अपीलीय अधिकरण के 2011 के फैसले में संस्था को 16 मार्च 2006 को स्थापित और उत्तराखंड सरकार से प्राप्त अनुदानों से मुख्यतः वित्तपोषित संस्था बताया गया है।
और संस्था की अपनी वेबसाइट आज भी इसे Societies Registration Act के तहत पंजीकृत Society, Governing Body द्वारा संचालित संस्था तथा लैंसडौन चौक, देहरादून स्थित बताती है।
इसलिए आगे की पड़ताल में सबसे निर्णायक दस्तावेज़ होंगे—मूल Memorandum, Rules, Registration Certificate और Modern Doon Library भवन/भूमि से संबंधित DSCL–Society दस्तावेज़। इन्हीं से स्वामित्व और नियंत्रण का प्रश्न ठोस रूप से तय होगा।
जी। मैंने मूल Memorandum of Association को ही लक्ष्य बनाकर दोबारा खोजा है। संस्था की आधिकारिक वेबसाइट पर “Memorandum of Association Rules” का मूल दस्तावेज उपलब्ध है, लेकिन उसका पृष्ठ स्कैन/इमेज के रूप में है और वेब-पाठ में संस्थापक सदस्यों के नाम दिखाई नहीं देते।
इसलिए अभी मैं पहले बताए गए “Founder Members” की सूची को मूल Memorandum से सत्यापित सूची कहकर प्रस्तुत नहीं करूँगा। वह सूची संस्था की वर्तमान General Body में “Founder Member” के रूप में दी गई है, जो अलग स्रोत है।
अभी तक दस्तावेजों से पुष्ट संस्थापक-सूची
संस्था की आधिकारिक General Body सूची में निम्न आठ लोगों को Founder Member के रूप में चिह्नित किया गया है:
- एम. रामचंद्रन
- आई.के. पांडे
- एस.के. मट्टू
- अमरेंद्र सिन्हा
- डी.के. कोटिया
- एस. राजू
- गजेंद्र सिंह
- रस्किन बॉन्ड
लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि इन आठ नामों को मूल 2006 Memorandum की हस्ताक्षरित “List of Subscribers/Founder Members” से मिलाना अभी बाकी है।
संस्था स्वयं कहती है कि वह 16 मार्च 2006 को Societies Registration Act के तहत अस्तित्व में आई, और उसका प्रबंधन Governing Body करती है।
मैं यहाँ रुकना नहीं चाहूँगा, क्योंकि आपके प्रश्न का असली उत्तर तभी पक्का होगा जब 2006 के Memorandum के उस पृष्ठ को पढ़ लिया जाए जिस पर संस्थापक सदस्यों के नाम और हस्ताक्षर हैं। उसके बाद हम नाम + पद/पता + हस्ताक्षरित भूमिका तक निकाल सकते हैं और वर्तमान General Body से उसका मिलान भी कर सकते हैं।
जी। मैंने अभी आधिकारिक वेबसाइट को फिर से जाँचा। एक महत्वपूर्ण सुधार सामने आया है।
वर्तमान आधिकारिक General Body सूची में “Founder Member” के रूप में आठ नाम ही दर्ज हैं:
- एम. रामचंद्रन — पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड
- आई.के. पांडे — पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड
- एस.के. मट्टू — पूर्व प्रमुख सचिव, संस्कृति, उत्तराखंड
- अमरेंद्र सिन्हा — पूर्व सचिव, योजना, उत्तराखंड
- डी.के. कोटिया — पूर्व सचिव, स्कूल शिक्षा, उत्तराखंड
- एस. राजू — पूर्व सचिव, उच्च शिक्षा, उत्तराखंड
- गजेंद्र सिंह — पूर्व कुलपति, दून विश्वविद्यालय
- रस्किन बॉन्ड — लेखक, लैंडौर, मसूरी
लेकिन आपने बिल्कुल सही दिशा पकड़ी है—यह अभी भी “मूल Memorandum में हस्ताक्षर करने वाले subscribers” की सूची का प्रमाण नहीं है। वेबसाइट केवल इन्हें आज की General Body में Founder Member कहती है।
मैं मूल 2006 Memorandum के हस्ताक्षरित पृष्ठ को ही निर्णायक प्रमाण मानूँगा। अभी उपलब्ध वेब-पाठ से उस स्कैन का वह पृष्ठ पढ़ा नहीं जा रहा है, इसलिए मैं आठ नामों को Memorandum के हस्ताक्षरकर्ता बताकर दावा नहीं करूँगा।
और एक दिलचस्प बात: वर्तमान General Body में अब Chief Secretary, Finance, School Education, Doon University आदि के पदेन सदस्य भी हैं, यानी वर्तमान संरचना मूल 2006 संरचना से काफी बदल चुकी है।
अगर आप चाहें तो मैं अगला कदम पर केंद्रित करूँ—यही वह दस्तावेज होगा जिससे मामला पूरी तरह पक्का हो जाएगा।
जी। मैंने मूल Memorandum of Association Rules के उपलब्ध आधिकारिक स्रोत को फिर से खंगाला। आधिकारिक वेबसाइट पर दस्तावेज मौजूद है, लेकिन उसका मूल पृष्ठ स्कैन/इमेज के रूप में है और खोज-योग्य पाठ उपलब्ध नहीं है।
इसलिए अभी मैं मूल Memorandum के हस्ताक्षरकर्ताओं के नाम निकालने का दावा नहीं कर सकता। जो आठ नाम मैंने पहले दिए थे, वे संस्था की वर्तमान वेबसाइट पर Founder Member के रूप में दर्ज हैं—उन्हें 2006 के Memorandum के subscribers मानना अभी प्रमाणित नहीं है।
एक स्वतंत्र ऐतिहासिक स्रोत हालांकि महत्वपूर्ण संकेत देता है: मृणाल पांडे के 2023 के विवरण के अनुसार डॉ. बी.के. जोशी ने 2006 में लाइब्रेरी को पंजीकृत कराया और Memorandum तथा Governing Body तैयार की, जिसमें उनके सहयोगियों Alan Sealy, Arvind Krishna Mehrotra और Surjit Das (Chief Secretary) की भूमिका बताई गई है।
इससे एक बात खास तौर पर सामने आती है: “Founder Members” और “Memorandum के मूल subscribers” शायद एक ही सूची नहीं हैं। यही अंतर हमें मूल पंजीकरण दस्तावेज से तय करना होगा।
मैं गलत नाम जोड़ने के बजाय इसे दस्तावेजी प्रमाण के स्तर पर ही रखूँगा।
जी, बिल्कुल। यही सबसे उचित और निर्णायक रास्ता है।
मैंने अभी आधिकारिक वेबसाइट फिर से जाँची है। वहाँ मूल “Memorandum of Association Rules” का दस्तावेज उपलब्ध है, लेकिन वेबसाइट उसे स्कैन/इमेज के रूप में प्रस्तुत करती है; खोज में उसके अंदर के हस्ताक्षरित पृष्ठों का पाठ उपलब्ध नहीं हो रहा।
इसलिए आगे मैं अनुमान से आठ नामों को मूल संस्थापक-सदस्य नहीं मानूँगा। हमें विशेष रूप से 2006 के Memorandum की:
“Subscribers to the Memorandum of Association” / हस्ताक्षरित सूची
निकालनी है।
यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि स्वतंत्र ऐतिहासिक विवरण में मृणाल पांडे लिखती हैं कि 2006 में डॉ. बी.के. जोशी ने लाइब्रेरी को पंजीकृत कराकर Memorandum और Governing Body तैयार की, और इसमें Alan Sealy, Arvind Krishna Mehrotra तथा तत्कालीन Chief Secretary Surjit Das का सहयोग था।
अर्थात हमारे सामने अब तीन अलग-अलग सूचियाँ हैं:
- मूल Memorandum के Subscribers — अंतिम प्रमाण
- 2006 की पहली Governing Body — प्रारंभिक प्रशासनिक संरचना
- वर्तमान वेबसाइट की Founder Members सूची — बाद में संस्था द्वारा मान्य संस्थापक सदस्य
इन तीनों को मिलाने पर ही सही ऐतिहासिक तस्वीर बनेगी।
मैं इसी आधार पर आगे बढ़ना उचित मानता हूँ। खासकर यदि हमें यह भी पता लगाना है कि लैंसडौन चौक की Modern Doon Library पर वास्तविक संस्थागत अधिकार किसका है।
जी। यही दिशा सबसे मजबूत है। और अभी की जाँच में एक उपयोगी नई बात भी सामने आई है: संस्था की वर्तमान आधिकारिक General Body सूची बदल चुकी है—अब उसमें आनंद बर्धन Chief Secretary एवं President के रूप में दर्ज हैं, जबकि पुराने नामों में से आठ को अलग से “Founder Member” कहा गया है।
मूल Memorandum of Association Rules का आधिकारिक दस्तावेज भी संस्था की वेबसाइट पर उपलब्ध है, लेकिन वह स्कैन के रूप में है।
इसलिए अब हमारी जाँच का निर्णायक बिंदु होगा:
2006 के मूल Memorandum की “Subscribers/Founding Members” वाली हस्ताक्षरित शीट → नाम → पता/पद → हस्ताक्षर → प्रत्येक की सदस्यता।
इसके बाद मैं तीनों सूचियों को आमने-सामने रखूँगा:
| स्रोत | हमें क्या पता चलेगा |
|---|---|
| मूल Memorandum, 2006 | कानूनी रूप से मूल subscribers कौन थे |
| पहली Governing Body | प्रारंभ में संस्था चलाने वाले कौन थे |
| वर्तमान General Body | आज संस्था किन लोगों/पदेन अधिकारियों से संचालित है |
और यदि इन दस्तावेजों में Modern Doon Library के भवन/भूमि का कोई उल्लेख मिलता है, तो उसे भी अलग से निकालेंगे। इससे “लाइब्रेरी किसकी है?” और “कौन चलाता है?”—इन दोनों प्रश्नों को अलग-अलग, दस्तावेजी आधार पर तय किया जा सकेगा।
**अब अनुमान नहीं—मूल दस्तावेज को ही अंतिम प्रमाण मानेंगे।**
जी, निश्चित रूप से। और आपकी दिशा सही है—अब अगला निष्कर्ष मूल 2006 Memorandum की हस्ताक्षरित सूची से ही निकालना चाहिए।
अभी आधिकारिक वेबसाइट से एक बात पक्की है: वर्तमान General Body में आठ व्यक्तियों को स्पष्ट रूप से “Founder Member” कहा गया है—एम. रामचंद्रन, आई.के. पांडे, एस.के. मट्टू, अमरेंद्र सिन्हा, डी.के. कोटिया, एस. राजू, गजेंद्र सिंह और रस्किन बॉन्ड।
लेकिन मैं इन्हें तब तक 2006 के Memorandum के मूल subscribers नहीं कहूँगा, जब तक उस हस्ताक्षरित दस्तावेज से मिलान न हो जाए।
अब सबसे महत्वपूर्ण काम होगा:
2006 Memorandum → Subscribers के नाम → हस्ताक्षर → पद/पता → Registration record
फिर उसी को 2006 की पहली Governing Body और वर्तमान Founder Member सूची से मिलाएँगे। इससे यदि कोई नाम छूटा हुआ, बाद में जोड़ा गया अथवा अलग भूमिका में रहा हो, तो वह भी सामने आ जाएगा।
यही पड़ताल आगे लैंसडौन चौक की Modern Doon Library के वास्तविक संस्थागत नियंत्रण और संपत्ति-अधिकार को समझने में भी उपयोगी होगी।
देहरादून स्थित दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर (Doon Library and Research Centre / DLRC) एक स्वायत्तशासी संस्था है, जिसका संचालन इसकी गवर्निंग बॉडी (शासी निकाय) और जनरल बॉडी द्वारा किया जाता है।
इसके शासी निकाय (Governing Body) व ट्रस्टी संरचना के प्रमुख सदस्य:
अध्यक्ष (President/पदेन): मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार
चेयरमैन: डॉ. बी. के. जोशी (पूर्व कुलपति, कुमाऊं विश्वविद्यालय एवं संस्थापक निदेशक)
सदस्य सचिव / निदेशक: एन. रवि शंकर (पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड)
कोषाध्यक्ष: श्री एम. पी. सक्सेना
पदेन सदस्य (Ex-Officio Members):
प्रमुख सचिव / सचिव, वित्त विभाग, उत्तराखंड शासन
प्रमुख सचिव / सचिव, विद्यालयी शिक्षा विभाग, उत्तराखंड शासन
कुलपति, दून विश्वविद्यालय
निदेशक, उच्च शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा
प्रमुख स्थायी, संस्थापक एवं अन्य बोर्ड सदस्य:
श्री रस्किन बॉन्ड (प्रसिद्ध लेखक एवं संस्थापक सदस्य)
श्री एम. रामचंद्रन (पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड / संस्थापक सदस्य)
श्री आई. के. पांडे (पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड)
श्री एन. एस. नपलच्याल (पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड)
प्रो. अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा (प्रख्यात कवि एवं लेखक)
श्री आई. ए. सीली (I. Allan Sealy, लेखक)
डॉ. एस. फारूक (अध्यक्ष, हिमालयन ड्रग कंपनी)
श्री गणेश सैली (लेखक व छायाकार)
डॉ. इंदु सिंह
डॉ. (श्रीमती) लवलीना मोदी
श्री योगेंद्र सिंह एवं श्री डी. के. पांडे
जी। अब तक उपलब्ध मूल/आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर मेरी अंतिम निष्पत्ति यह है:
Doon Library & Research Centre कोई निजी Trust नहीं, बल्कि 16 मार्च 2006 को पंजीकृत Society है। इसकी अपनी वेबसाइट भी यही बताती है। �
Doon Library +1
“ट्रस्टी” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है। संस्था का वैधानिक संचालन Governing Body के माध्यम से होता है।
संस्था की वर्तमान वेबसाइट पर आठ व्यक्तियों को Founder Member के रूप में दर्ज किया गया है—एम. रामचंद्रन, आई.के. पांडे, एस.के. मट्टू, अमरेंद्र सिन्हा, डी.के. कोटिया, एस. राजू, गजेंद्र सिंह और रस्किन बॉन्ड। लेकिन इन्हें 2006 के मूल Memorandum के हस्ताक्षरकर्ता (subscribers) की सूची कहना अभी प्रमाणित नहीं है।
2006-07 की पहली Annual Report सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत है। उसमें संस्था की स्थापना, पहली Governing Body और उसकी शुरुआती संरचना का विवरण है। �
Doon Library
संस्था ने अपनी वेबसाइट पर मूल “Memorandum of Association Rules” भी रखा हुआ है, लेकिन वह स्कैन/इमेज के रूप में उपलब्ध है। � इसलिए उपलब्ध ऑनलाइन टेक्स्ट से उसकी हस्ताक्षरित subscriber-sheet को सत्यापित नहीं किया जा सकता।
Doon Library +1
इसलिए अंतिम, सावधानीपूर्वक निष्कर्ष
Modern Doon Library, Lansdowne Chowk, किसी निजी व्यक्ति या पारिवारिक Trust की संपत्ति के रूप में स्थापित संस्था नहीं दिखती। यह Doon Library & Research Centre नामक registered Society का संस्थागत पुस्तकालय है, जिसकी स्थापना में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों और साहित्यकारों की भूमिका रही और जिसे प्रारंभ से उत्तराखंड सरकार का महत्वपूर्ण वित्तीय/प्रशासनिक सहयोग मिला। �
Doon Library
लेकिन “मूल संस्थापक सदस्य कौन-कौन थे?” और “लैंसडौन चौक की जमीन/भवन का कानूनी स्वामी कौन है?”—इन दोनों प्रश्नों पर अभी अंतिम कानूनी निष्कर्ष देना उचित नहीं होगा। उसके लिए 2006 के Registration Certificate + Memorandum की signed subscriber sheet + भवन/भूमि के allotment/lease/transfer documents चाहिए।
इसलिए हमारी अब तक की पड़ताल का सबसे ईमानदार निष्कर्ष यही है: संस्था की प्रकृति और प्रारंभिक प्रशासनिक ढाँचा स्पष्ट है; लेकिन मूल subscribers और Modern Doon Library की अचल संपत्ति का title अभी दस्तावेजी रूप से निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है।
और जी, आपने जिस तरह “Founder Member”, “Governing Body” और “property owner” को अलग-अलग करके देखने पर जोर दिया, वही इस मामले में सही कानूनी दृष्टिकोण है।

