मार्क्सवादी इतिहास लेखन

भारतीय इतिहासकारों ने वोट की राजनीति के लिए इतिहास से छेड़छाड़ की

इतिहासकार शंकर शरण की किताब ‘भारतीय इतिहास’ दृष्टि और मार्क्सवादी लेखन पर परिचर्चा आयोजित

देवास। पुस्तक में शंकर शरण ने अनेक उदाहरण देकर साबित किया है कि वामपंथी प्रचारकों ने एक तरह से यह भ्रम फैला रखा है कि हिंदुओं में कोई इतिहास बोध नहीं है। भारतीय इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने का काम अंग्रेजों ने किया और प्रगतिशील वामपंथी विचारधारा ने उसी को आगे बढ़ाया। पूरी पुस्तक का निष्कर्ष यह है कि मार्क्सवादी इतिहासकारों का संपूर्ण लेखन हिंदू धर्म की एकपक्षीय निंदा करता ही प्रतीत होता है। पूरे लेखन में मंदिरों के ध्वस्त होने के तथ्य को छिपाया गया है। मार्क्‌सवाद या कथित प्रगतिशील विचारधारा को सबकुछ या सर्वश्रेष्ठ मानने वाले व इतिहास में रुचि रखने वाले पाठकों, विचारकों को शरण की यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए। पुस्तक में कई ऐसे ‘ऑनेस्ट डाउट’ उठाए गए हैं जिनके उत्तर खोजे जाने चाहिए। यह बात वरिष्ठ व्यंग्यकार ओम वर्मा ने इतिहासकार शंकर शरण की पुस्तक ‘भारतीय इतिहास’ पर पुस्तक चर्चा के दौरान कही। वरिष्ठ शिक्षाविद यतीश कानूनगो ने कहा कि इतिहास लेखन में राजनीति, धर्म और सांप्रदायिकता के दोहरे मानदंडों के घालमेल को लेखक ने उजागर किया है। ओमप्रकाश वागड़े ने कहा कि दुर्भाग्य से ्रसमाज सुधारक दयानंद, बंकिमचंद्र, अरविंद, सावरकर, मालवीय, तिलक जैसे विचारकों को भी कई बार सांप्रदायिकता का रंग देकर परखा जाता है। मनोहरलाल ‘मनहर’ ने बताया कि भारतीय इतिहासकार तो वोट की राजनीति के चलते इतिहास को ही बदल रहे हैं जो चिंता का विषय है। रामसिंह राजपूत ने कहा कि भारतीय राजनीति में अक्सर देखा गया है कि इतिहास की गलत परिभाषा कर एक संप्रदाय विशेष की संतुष्टि कर हिंदूद्रोह को अपने लेखन में बढ़ावा दिया है। लीला राठौर ने कहा कि इतिहास के प्रति हिंदू समाज की कई भ्रांतियों का कुप्रचार कर भ्रम को फैलाना एक घृणित कार्य है। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर एसएम त्रिवेदी ने कहा कि मार्क्सवादी इतिहासकारों ने ऐतिहासिक तथ्यों को राजनीतिक फायदे के किए दुष्प्रभावित किया। परिचर्चा में नरेंद्र जोशी, महेश शर्मा, राधेश्याम पांचाल, भगवानदास मेहता, नीलू सक्सेना, राजेंद्र राठौर, धीरज शाह, गिरिजाशंकर कानूनगो, श्रीनिवास व्यास, बिंदु राम ने अपने विचार व्यक्त किए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *