रसोई गैस का विकल्प
What Is Dme India Focusing On Increasing Production Amid Lpg Shortage
LPG vs DME: एलपीजी का देसी जुगाड़, भारत ने लगा दिया है बड़ा दांव, क्या है डीएमई?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव से एलपीजी सप्लाई बाधित हुई है। इसे देख भारत अन्य विकल्पों की तलाश में जुटा है। उसके हाथ डाइमिथाइल ईथर यानी डीएमई इसका शानदार ऑप्शन है। भारतीय वैज्ञानिकों ने इसका उत्पादन बढ़ाने पर काम शुरू कर दिया है। इसमें एलपीजी जैसी ही बातें होती हैं। इसके लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव की भी जरूरत नहीं होगी।
नई दिल्ली 14 मार्च 2026 : मिडिल ईस्ट में टेंशन बना हुआ है। यह ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावट डाल रहा है। भारत इसका विकल्प तलाशने में जुटा है। वह डाइमिथाइल ईथर (डीएमई) के उत्पादन को बढ़ाने के तरीकों की खोज में लग गया है। यह स्वच्छ वैकल्पिक ईंधन है। इससे लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की सप्लाई पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
DME Vs LPG
CSIR–नेशनल केमिकल लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने इस ईंधन के उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने पर काम शुरू कर दिया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का एक स्वदेशी विकल्प बन सकता है। लेबोरेटरी ने हाल ही में DME के लिए एक पायलट प्लांट स्थापित किया है। अब उत्पादन बढ़ाने के लिए इस सुविधा का विस्तार करने की योजना बना रही है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब ग्लोबल एलपीजी मार्केट पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई में रुकावटों का सामना कर रहे हैं। इससे ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं। इसने भविष्य में इसकी उपलब्धता को लेकर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
DME क्या है?
डाइमिथाइल ईथर को आमतौर पर DME के नाम से जाना जाता है। यह एक गैस है जिसे मेथनॉल से आर्टिफिशियल रूप से बनाया जाता है। मेथनॉल खुद कई स्रोतों से हासिल की जा सकती है। इनमें बायोमास, कोयला या यहां तक कि कैप्चर्ड कार्बन डाइऑक्साइड भी शामिल है।
डीएमई में एलपीजी जैसी की बातें होती हैं। यह इसे खाना पकाने और अन्य एनर्जी एप्लीकेशन में इस्तेमाल के लिए उपयुक्त बनाता है। इन समानताओं के कारण डीएमई को एलपीजी के साथ अलग-अलग अनुपात में मिलाया भी जा सकता है।
मौलिक तंत्र में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं
डीएमई का एक मुख्य लाभ यह है कि इसे भारत की मौजूदा खाना पकाने की ईंधन प्रणाली में मिनिमम एडजस्टमेंट के साथ इंटीग्रेट किया जा सकता है।
आशीष लेले के अनुसार, एलपीजी को डीएमई से बदलने के लिए मौजूदा उपकरणों में किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं होगी। सिलेंडर, रेगुलेटर, होज, बर्नर और एलपीजी प्रणालियों में पहले से इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य कम्पोनेंट सामान्य रूप से काम करते रह सकते हैं।
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए एलपीजी के साथ डीएमई को मिलाने के लिए तकनीकी मानक पहले ही स्थापित कर दिए हैं।
डीएमई क्यों खोज रहा है भारत?
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इससे देश ग्लोबल सप्लाई में रुकावटों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। मौजूदा ऊर्जा संकट ने इस तरह की निर्भरता से जुड़े जोखिमों को उजागर किया है।
डीएमई के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर नीति निर्माताओं को उम्मीद है कि वे एक ऐसा स्थानीय रूप से उत्पादित विकल्प विकसित कर पाएंगे जो आयातित एलपीजी की आंशिक रूप से जगह ले सके। साथ ही दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में सुधार भी करे।
अगर इसे सफलतापूर्वक बड़े पैमाने पर लागू किया जाता है तो डीएमई भारत की उस रणनीति का महत्वपूर्ण घटक बन सकता है जिसका उद्देश्य खाना पकाने के ईंधन के स्रोतों में विविधता लाना और अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर निर्भरता कम करना है।
