राज्यसभा चुनाव:NDA को 10 सीटों का लाभ,विपक्ष को 10 सीटों की हानि

राज्यसभा चुनाव का फाइनल स्कोर कार्ड… NDA- 22, कांग्रेस- 6, जानिए किसे कितना लाभ-कितनी हानि
देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव के अंतिम परिणाम आ गए हैं. भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए ने विपक्ष को तगड़ा झटका दिया है.भाजपा से लेकर कांग्रेस तक को राज्यसभा चुनाव में लाभ है तो किस पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा ?

राज्यसभा चुनाव में एनडीए को 10 सीट का लाभ और विपक्ष को 10 सीटों की हानि
नई दिल्ली,17 मार्च 2026,बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को चुनाव में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के आगे विपक्षी की सारी कोशिश निष्फल सिद्ध हुईं. भाजपा ने ऐसी रणनीति बनाई कि बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ हाथ मिलाना भी काम नहीं आ सका तो ओडिशा में कांग्रेस और बीजेडी जोड़ी भी कोई कमाल नहीं कर सकी.

तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों में से एनडीए 9 सीटों पर जीती है जबकि विपक्ष को सिर्फ दो राज्यसभा सीटें ही मिल सकी है.भाजपा ने 5 सीटें जीती हैं और उसके सहयोगियों को 4 सीट मिली है. कांग्रेस और बीजेडी एक-एक राज्यसभा सीटें जीत सकती है. राज्यसभा के ये नतीजे सोमवार को हुए चुनाव के है, लेकिन फाइनल आंकड़ा अलग है.

देश के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, जिसमें सात राज्यों के 26 राज्यसभा सदस्य पहले ही निर्विरोध निर्वाचित चुन लिए गए थे. तीन राज्यों की 11 सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए । इस तरह 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव के अंतिम परिणाम देखें तो भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं.

37 राज्यसभा सीटों का अंतिम परिणाम 
अप्रैल-2026 में खाली हो रही 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव हो गए हैं और अब अंतिम परिणाम भी आ गए. 37 राज्यसभा सीटों में 26 सीटें पर पहले ही निर्विरोध सदस्यों का चुन लिया गया था, जिसमें एनडीए और विपक्ष को 13-13 सीटें मिली थी. अब सोमवार को हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए, जिसमें एनडीए 9 और विपक्ष दो सीटें जीती है. इस तरह से चुनाव का फाइनल स्कोर देखें तो एनडीए को 22 सीटें मिली है जबकि विपक्ष के हिस्से 15 सीट ही आ सकी हैं.

राज्यसभा चुनाव में एनडीए को मिली 22 सीटों में देखें तो 13 सीटें भाजपा ने जीती हैं जबकि 9 सीटें उसके सहयोगी ने जीती हैं. जेडीयू ने 2, शिंद की शिवसेना एक, अजित पवार की एनसीपी एक, पीएमके एक, AIADMK एक, यूपीपीएल एक, आरएलएसएम एक और एक सीट पर भाजपा समर्थित निर्दलीय ने जीती है.

वहीं, विपक्ष को मिली 15 राज्यसभा सीटों के पार्टी की दृष्टि से  देखें तो कांग्रेस को 6 सीटें, टीएमसी को 4 सीटें, डीएमके को 3 सीटें, शरद पवार की एनसीपी को एक सीटें और एक सीट बीजेडी को मिली है.

राज्यसभा में किसे हानि और किसे लाभ

राज्यसभा चुनाव पहले और नतीजे आने के बाद देखें तो एनडीए को 10 सीटों का लाभ हुआ और विपक्ष को 10 सीटों की हानि. चुनाव से पहले एनडीए के पास 12 राज्यसभा सीटें थी, जो बढ़कर 22 हो गई हैं जबकि विपक्ष के पास 25 राज्यसभा सीटें थी, जो अब घटकर 15 रह गई हैं.

देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के आंकड़े देखें तो भाजपा के पास 9 सीटें थी, जो अब बढ़कर 13 हो गई हैं. जेडीयू ने अपनी दोनो सीटें बनाए रखी है. इसके अलावा AIADMK, ने अपनी एक सीट, पीएमके ने भी अपनी एक सीट तो आरएलएसएम ने अपनी-अपनी एक-एक सीट बचाए रखी है.

वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो 18 राज्यसभा सीटें उसके अधिकार में थी, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास थी, जो बढ़कर अब 6 हो गई हैं. इस तरह कांग्रेस को दो सीटों का लाभ मिला है. टीएमसी ने अपनी 4 सीटें बनाये रखी हैं. डीएमके 4 सीटों से घटकर 3 पर आ गई है.

आरजेडी के पास 2 सीटें थी, जो अब घटकर शून्य हो गई है. एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास थी, लेकिन उन्हें एक सीट भी नहीं मिली.  चार सीटें अन्य दलों के पास थी, जिसमें दो सीटें बीजेडी के पास थी, उसमें से एक सीट ही उसे मिल सकी. बीआरएस ने अपनी एकलौती सीट भी गंवा दी.

राज्यवार राज्यसभा चुनाव के परिणाम क्या रहे?

महाराष्ट्र से 7 राज्यसभा सीटों में भाजपा को चार, एनसीपी और शिवसेना को एक-एक सीट मिली है. इसके अलावा एक सीट पर विपक्ष से शरद पवार चुने गए हैं. भाजपा को दो सीट का फायदा तो कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार की एनसीपी को एक सीट का घाटा हुआ. अजित पवार और शिंदे को एक-एक सीट का लाभ मिला.

तमिलनाडु की छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव में डीएमके को एक सीट का नुकसान तो कांग्रेस को एक सीट का लाभ मिला है. AIADMK और पीएमके ने अपनी एक-एक सीट बचा ली. पश्चिम बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों में टीएमसी अपनी चार सीटें बचाए रखा तो भाजपा को एक सीट का लाभ और लेफ्ट को नुकसान हुआ.

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों में जेडीयू ने अपनी दोनों सीटें बचाए रखी तो आरजेडी को 2 सीट का नुकसान. भाजपा को दो सीट का लाभ हुआ तो उपेंद्र कुशवाहा अपनी सीट बचा गये. ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में भाजपा अपनी दोनों सीटें बचा ले गई तो बीजेडी को एक सीट का नुकसान हुआ है. इसके अलावा एक सीट भाजपा ने अपने समर्थन से निर्दलीय को जिता लिया. असम की तीन राज्यसभा सीटों में भाजपा ने अपनी दोनों सीटें बचा ली है तो असम गढ़ परिषद को एक सीट की हानि हुई.

छत्तीसगढ़ में भाजपा को एक सीट का लाभ तो कांग्रेस को एक सीट की हानि हुई. तेलंगाना की दोनों सीटें कांग्रेस ने जीत ली है, उसे एक सीट का लाभ मिला है तो बीआरएस को एक सीट की हानि. हरियाणा की दो सीटों में भाजपा और कांग्रेस एक सीट जीती हैं, लेकिन भाजपा को एक सीट की हानि हुई है. हिमाचल में कांग्रेस को एक सीट का लाभ मिला तो भाजपा को नुकसान.

राज्यसभा चुनाव परिणामों ने बदली देश की राजनीति, BJP की जीत का क्या होगा असर?

राज्यसभा चुनाव में भाजपा नीत एनडीए ने बड़ी जीत पाई है. चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि राजनीति में सिर्फ आंकड़े ही नहीं, बल्कि रणनीति, अनुशासन और सही समय पर लिए फैसले जिताते हैं. चुनाव परिणाम का देश की राजनीति का क्या असर पड़ेगा? राज्यसभा की 37 सीटों  चुनाव परिणामों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया.राज्यसभा चुनाव में बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में राजनीतिक समीकरण अचानक करवट लेते दिखे. तीनों राज्यों में अचानक बदले राजनीतिक समीकरण, क्रॉस वोटिंग और विपक्ष की अंदरूनी कमजोरियों ने एनडीए को बड़ा लाभ पहुंचाया. भाजपा के साथ-साथ जेडीयू जैसे एनडीए के घटक दलों ने इस राज्यसभा चुनाव परिणाम उच्च सदन में अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली.

राज्यसभा चुनाव में सांसद चुनाव सीधे जनता नहीं, बल्कि विधायकों के वोट से होता है. हर सीट को एक तय कोटा होता है, जिसे पाना होता है.संख्या का तय फॉर्मूला है, जिसके अनुसार, राज्य के कुल विधायकों की संख्या को खाली हुई राज्यसभा सीटों में एक जोड़कर भाग दिया जाता है और फिर उसमें एक जोड़ दिया जाता है यानी (कुल विधायक/राज्यसभा की खाली सीटें+1)+1… इस हिसाब से बिहार जैसे राज्य में यह आंकड़ा जहां 41 वोट था,वहीं 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में यह संख्या 31 पर बैठती थी. हालांकि इस बार यही गणित कई जगह उलटता नजर आया, क्योंकि संख्या होने के बावजूद विपक्ष अपने विधायक एकजुट नहीं रख सका.

बिहार में कैसे बदला खेल?
बिहार में मुकाबला बेहद रोचक था, जहां 202 विधायकों वाली एनडीए चार सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में था, वहीं पांचवीं सीट को उसे 3 अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी. दूसरी ओर महागठबंधन छोटे दलों के सहारे अपनी स्थिति बचाने की कोशिश में था. लेकिन मतदान के दिन विपक्ष को बड़ा झटका लगा, जब उसके चार विधायक वोटिंग में शामिल ही नहीं हुए. इस अनुपस्थिति ने पूरा समीकरण बिगाड़ दिया और एनडीए को सीधा फायदा मिला.

इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग सबसे बड़ा गेमचेंजर बनी. बिहार,हरियाणा और ओडिशा तीनों राज्यों में विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर वोट डाला,जिससे परिणाम अप्रत्याशित आए. कुछ जगह विपक्षी विधायकों ने दूसरी पार्टी के पक्ष में मतदान किया,तो कहीं गैरहाजिरी ने गणित बिगाड़ा. ओडिशा में भी इसी तरह 11 विधायकों की क्रॉस वोटिंग ने भाजपा को चार में से 3 सीटें दिला दी. हरियाणा में भी इसी तरह खूब क्रॉस वोटिंग देखी गई, लेकिन वहां कांग्रेस दो में एक राज्यसभा सीट जीतने में सफल रही.

सत्ता पक्ष और विपक्ष को क्या संदेश?
इस चुनाव ने विपक्ष की कई बड़ी कमजोरियां सार्वजनिक कर दी. विधायकों में एकजुटता की कमी साफ दिखी,जबकि रणनीतिक स्तर पर भी गंभीर चूक हुई. संख्या होने के बावजूद विपक्ष अपना वोट प्रबंधन नहीं कर पाया और अनुशासनहीनता से उसे हानि उठानी पड़ी. क्रॉस वोटिंग और गैरहाजिरी ने विपक्ष की स्थिति और कमजोर कर दी.

दूसरी ओर, सत्ताधारी एनडीए ने चुनाव में बेहतर रणनीति और सटीक वोट मैनेजमेंट प्रदर्शित किया. गठबंधन ने अपने वोट पूरी तरह सुरक्षित रखे और सहयोगी दलों से तालमेल बनाए रखा. साथ ही, विपक्ष की कमजोरियों का भरपूर लाभ उठा अतिरिक्त सीटें अपने खाते में जोड़ लीं.

इस परिणाम से कुछ बदलेगा?
इन परिणामों से राज्यसभा में एनडीए की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा दृढ हो गई. ताजा आंकड़ों के अनुसार, उच्च सदन में एनडीए के पास 140 सीटें हैं, जो बहुमत के आंकड़े से 17 अधिक हैं. इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी भाजपा (106 सीटें) की है. इसके अलावा एआईएडीएमके,जेडीयू,एनसीपी,टीडीपी और शिवसेना जैसे सहयोगी दल इस शक्ति को और दृढ़ कर रहै हैं.

बढ़त का सीधा असर सरकारी कामकाज पर पड़ेगा. अब राज्यसभा में विधेयक पास कराना पहले से आसान हो सकता है, क्योंकि सरकार की विपक्ष पर निर्भरता घटेगी. इससे विधि निर्माण प्रक्रिया में तेजी की संभावना है और कई महत्वपूर्ण सुधार आगे बढ़ाने में सुविधा संभव है. वहीं, संख्या घटने से विपक्षी भूमिका घट सकती है, हालांकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहस और दबाव की उसकी भूमिका पूरी तरह समाप्त नहीं होगी.

कुल मिलाकर, राज्यसभा चुनाव 2026 ने साफ कर दिया है कि राजनीति में सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि रणनीति, अनुशासन और समय पर लिए फैसले ही जिताते हैं. एनडीए की मजबूत स्थिति जहां सरकार को विधायी मोर्चे पर बढ़त देगी, वहीं विपक्ष को यह एक स्पष्ट संकेत है कि उसे रणनीति और संगठन दोनों मजबूत करने की जरूरत है.

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