मानहानि मामला: ‘अनुत्तरदायी बयान देने पर’,सावरकर पर टिप्पणी को लेकर SC की राहुल को चेतावनी

Will not allow you to speak anything about our freedom fighters: SC to Rahul Gandhi on Veer Savarkar row
मानहानि मामला: ‘अनुत्तरदायी बयान देने से बचें’, सावरकर पर टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की राहुल को चेतावनी
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को गैर-जिम्मेदार बयान देने से बचने की चेतावनी दी। स्वाधीनता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर कथित टिप्पणी को लेकर कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह के बयान का कोर्ट स्वत: संज्ञान लेगी। पढ़िए रिपोर्ट-

Will not allow you to speak anything about our freedom fighters: SC to Rahul Gandhi on Veer Savarkar row
राहुल गांधी, सुप्रीम कोर्ट –
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर उनकी कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर फटकार लगाई। नवंबर 2022 में राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान महाराष्ट्र के अकोला में एक रैली में सावरकर के बारे में कथित रूप से मानहानिकारक टिप्पणी की ।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने राहुल गांधी से ‘गैर-जिम्मेदार बयान’ देने से बचने को कहा और यह भी कहा कि वह स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ कुछ भी न बोलें। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा, क्या महात्मा गांधी भी वायसराय को संबोधित करते समय ‘आपका आज्ञाकारी सेवक’ लिखते थे? इससे कोई सेवक नहीं बन जाता। अगली बार कोई कहेगा कि महात्मा गांधी ब्रिटिश के सेवक थे।

जस्टिस दत्ता की अगुवाई वाली बेंच ने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस नेता भविष्य में ऐसी कोई टिप्पणी करते हैं, तो उनके खिलाफ ‘स्वतः संज्ञान’ कार्रवाई शुरू करेगी। शीर्ष कोर्ट ने कहा, यह स्पष्ट कर दें, अगली बार ऐसा बयान आया तो हम स्वतः संज्ञान लेंगे। हम आपको हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में कुछ भी कहने की अनुमति नहीं देंगे। उन्होंने हमें आजादी दिलाई है और हम उनके साथ ऐसा व्यवहार करते हैं? यह टिप्पणी कोर्ट ने उस समय की, जब वह राहुल गांधी की 2022 के मानहानि मामले को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया कि कांग्रेस नेता भविष्य में ऐसी टिप्पणियों से बचेंगे। इसके बाद जस्टिस दत्ता की बेंच ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153-ए और 505 के तहत मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया गया था।

इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के पक्ष में अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करने से इनकार कर दिया था। राहुल गांधी ने पूरे मामले को रद्द करने की मांग की थी। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने चार अप्रैल को दिए अपने आदेश में कहा कि राहुल गांधी के पास निचली अदालत के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का वैधानिक विकल्प मौजूद है।

हाईकोर्ट ने कहा याचिकाकर्ता के पास दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 397/399 में पुनर्विचार का वैधानिक उपाय उपलब्ध है, इसलिए यह अदालत धारा 482 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करने के लिए इसे उपयुक्त मामला नहीं मानती। भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत धारा 153-ए का संबंध धर्म, जाति आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाने से है, जबकि धारा 505 ‘सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयानों’ से जुड़ी है।

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