रिस्पना पुल से आराघर तक चार लेन एलिवेटेड रोड की बन रही योजना

देहरादून के सबसे बिजी ट्रैफिक कॉरिडोर पर बनेगा फाेरलेन एलिवेटेड रोड, लागत 183.97 करोड़

देहरादून में 183.97 करोड़ रुपये की लागत से रिस्पना से आराघर तक फोर लेन एलिवेटेड रोड बनेगा। यह परियोजना शहर के सबसे व्यस्त कॉरिडोर पर यातायात जाम को कम कर, यात्रा को सुगम बनाएगी।

देहरादून 03 जून 2026 । देहरादून की सड़कों पर लगातार बढ़ता वाहनों का दबाव शहर की रफ्तार को थाम रहा है।

आराघर, धर्मपुर और रिस्पना क्षेत्र में लगने वाले लंबे जाम से निपटने के लिए उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग राजधानी के सबसे व्यस्त यातायात गलियारे में फोर लेन एलिवेटेड रोड बनाने जा रहा है।

शहरी यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव
योजना के तहत रिस्पना पुल (चंचल डेरी क्षेत्र) से आराघर चौक तक फोर लेन एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। करीब 183.97 करोड़ लागत की यह परियोजना देहरादून की शहरी यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगी।

प्रस्तावित एलिवेटेड रोड रिस्पना पुल से शुरू होकर धरमपुर चौक होते हुए आराघर चौक आएगा। यह पूरा मार्ग स्टेट हाइवे-85 का हिस्सा है, जो राजपुर रोड, सहारनपुर रोड, आइएसबीटी और मसूरी जाने वाले यातायात को जोड़ता है।

प्रतिदिन करीब 62,733 कार गुजरतीं हैं
वर्तमान में यह कॉरिडोर अपनी क्षमता से अधिक दबाव झेल रहा है। पीक आवर में आराघर चौक पर लगभग 4,125 पैसेंजर कार यूनिट का दबाव दर्ज किया गया है, जबकि प्रतिदिन करीब 62,733 पैसेंजर कार यूनिट इस मार्ग से गुजरती हैं। एलिवेटेड रोड परियोजना के तहत केवल फ्लाईओवर का निर्माण ही नहीं होगा, बल्कि इसके साथ पूरे यातायात ढांचे को आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा।

शिफ्ट की जाएगीं यूटिलिटी सेवाएं
परियोजना में चार लेन एलिवेटेड रोड, सर्विस रोड, रिटेनिंग वाल, वाटर ड्रेनेज सिस्टम, बिजली-पानी समेत विभिन्न यूटिलिटी सेवाओं का स्थानांतरण, सुरक्षा प्रबंधन तथा गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके अतिरिक्त आवश्यक भूमि अधिग्रहण और प्रभावित लोगों को क्षतिपूर्ति की व्यवस्था भी की जाएगी।

जाम, प्रदूषण और समय नष्ट होने से मिलेगी राहत
परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य इस मार्ग को सिग्नल-फ्री बनाना है। एलिवेटेड रोड बनने के बाद धर्मपुर और आराघर जैसे व्यस्त चौराहों पर वाहनों को बार-बार रुकना नहीं पड़ेगा।

इससे यात्रा के समय में काफी कमी होगी। वाहन कम रुकेंगे तो ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। इसके साथ ही सिग्नल और क्रास ट्रैफिक कम होने से दुर्घटनाओं की संभावना भी घटेगी।

‘परियोजना को लेकर ट्रैफिक सर्वे, फिजिबिलिटी स्टडी और प्रारंभिक डिजाइन का कार्य पूरा किया जा चुका है। लागत का आकलन तैयार कर लिया गया है। भूमि की आवश्यकता और संभावित अधिग्रहण क्षेत्रों की पहचान की जा चुकी है। प्रस्तावित मेट्रो परियोजना के साथ संभावित ओवरलैप वाले हिस्सों का भी अध्ययन कर लिया गया है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए। अब विस्तृत इंजीनियरिंग डिजाइन, भूमि के अधिग्रहण और निर्माण प्रक्रिया की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी की जा रही है।’ – राजेश शर्मा, चीफ इंजीनियर, लोक निर्माण विभाग

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