‘वंदे मातरम’ गाने से मना करने वाली कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख की अग्रिम ज़मानत याचिका निरस्त
indore Congress Councilor Fauzia Shaikh Bail Rejected By Inodre Court Who Refused To Sing Vande Mataram
‘वंदे मातरम’ गाने से मना करने वाली कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख को कोर्ट से झटका,जमानत याचिका निरस्त
इंदौर कोर्ट से कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने मामले में पार्षद की जमानत याचिका निरस्त कर दी। फौजिया शेख ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने वंदे मातरम गाने से मना नहीं किया है।
इंदौर: कोर्ट ने इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार करने वाली कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पार्षद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) (विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने वाले कृत्य) का अपराध पहली नजर में बनता दिखता है।
अपर सत्र न्यायाधीश रूपेश नाईक ने स्थानीय पार्षद फौजिया शेख अलीम (50) की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद निरस्त कर दी। फौजिया ने याचिका में दावा किया कि उन्होंने नगर निगम के सदन में ‘वंदे मातरम्’ गाने से कभी मना नहीं किया और उन्हें ‘राजनीतिक द्वेष’ के कारण झूठे मामले में फंसाया गया है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थानीय अदालत ने कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम की गिरफ्तारी पूर्व जमानत (anticipatory bail) याचिका निरस्त कर दी. उन पर आरोप है कि उन्होंने नगर निगम की बैठक में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार कर दिया था.
8 अप्रैल को इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में सामने आया था मामला. (Photo: Screengrab)
इंदौर में ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार करने के आरोपों में घिरी कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख को अदालत से बड़ा झटका लगा है. स्थानीय अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी, जिससे गिरफ्तारी से राहत मिलने की उनकी उम्मीदों को झटका लगा है.
मामला 8 अप्रैल का है, जब इंदौर नगर निगम की बजट बैठक में पार्षद फौजिया शेख पर आरोप लगा कि उन्होंने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार किया. इस घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विवाद खड़ा हो गया था. पुलिस ने मुकदमा लिख लिया. आरोप है कि यह कृत्य विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने से जुड़ा हो सकता है.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रूपेश नायक ने सुनवाई में कहा कि उपलब्ध वीडियो फुटेज, शिकायतकर्ता के बयान और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोपों को पर्याप्त आधार बनता है. इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी.
याचिका में फौजिया शेख ने दावा किया था कि उन्होंने कभी ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार नहीं किया और उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से झूठा फंसाया गया है. साथ ही यह भी कहा गया कि वह जांच में सहयोग कर रही हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. वहीं, दूसरे पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि अगर उन्हें अग्रिम जमानत दी जाती है तो वे जांच को प्रभावित कर सकती हैं, गवाहों को धमका सकती हैं या फरार हो सकती हैं.
शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के बयानों, वीडियो फुटेज और जब्त किए गए डिजिटल मटीरियल की समीक्षा करने के बाद कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी ने अपराध किया है. कोर्ट ने गिरफ्तारी से पहले जमानत की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि यह अपराध गैर-जमानती है और इसमें तीन साल तक की सजा हो सकती है.
हालांकि, कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का कठोरता से पालन करें. दिशा-निर्देशों के अनुसार, सात साल तक की सजा वाले अपराधों को पुलिस को केवल मुकदमा लिखने के आधार पर आरोपित को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए, बल्कि गिरफ्तारी के ठोस कारण भी लिखने चाहिए.
8 अप्रैल को इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में कांग्रेस पार्षद ने इस्लामी मान्यताओं का हवाला देते हुए वंदे मातरम गाने से मना कर दिया था. एक अन्य पार्षद रुबीना इकबाल खान ने भी मना किया था. पुलिस ने 15 अप्रैल को दोनों महिलाओं के खिलाफ मुकदमा लिखा था.
मामले की जांच में कर रहीं सहयोग
उन्होंने यह भी कहा कि वह जांच में सहयोग कर रही हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उधर, अभियोजन पक्ष ने पार्षद की याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अग्रिम जमानत का लाभ दिए जाने पर वह अपने पद का दुरुपयोग कर गवाहों को डरा-धमका सकती हैं और भाग सकती है।
तीन साल तक सजा संभव
अदालत ने एक शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के कथनों, वीडियो फुटेज और जब्त डिजिटल सामग्री के अवलोकन कर कहा कि आवेदनकर्ता/आरोपित ने प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (1) का अपराध किया जाना दिखता है। यह अपराध तीन वर्ष तक की अवधि को दंडनीय होने से गैर जमानती है।
अलग-अलग फैसलों का दिया हवाला
अपर सत्र न्यायाधीश ने अदालतों के अलग-अलग फैसलों का संदर्भ देते हुए पार्षद की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी। अदालत ने हालांकि पुलिस को निर्देश दिया कि वह ‘अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य’ के मुकदमे में उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का ‘अक्षरशः पालन’ सुनिश्चित करे।
कानूनी उपायों पर भी करें विचार
इन दिशा-निर्देशों में शीर्ष अदालत ने कहा था कि सात साल तक की सजा वाले अपराधों में पुलिस केवल मामला दर्ज होने के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी न करे, बल्कि गिरफ्तारी की आवश्यकता के ठोस कारण दर्ज करे और वैकल्पिक कानूनी उपायों पर भी विचार करे।
वंदे मातरम् गाने से किया था इनकार
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान आठ अप्रैल को कांग्रेस की पार्षद फौजिया शेख अलीम ने इस्लामी मान्यताओं का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम्’ गाने से कथित तौर पर इनकार कर दिया था। निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में शामिल होने वाली एक अन्य पार्षद रुबीना इकबाल खान ने भी फौजिया के इस रुख का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय गीत गाने से मना कर दिया था। पुलिस ने दोनों पार्षदों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (1) में 15 अप्रैल को मामला दर्ज किया था।
इंदौर में नगर निगम परिषद के बजट सत्र में वंदे मातरम को लेकर बवाल हो गया. देखते ही देखते सदन में गर्मागर्मी हो गयी. इसमें कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने गुस्से में आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी.
इंदौर नगर निगम परिषद में वंदे मातरम पर बवाल. (Photo: Screengrab)
भाजपा व कांग्रेस पार्षद आमने-सामने आ गए.
जानकारी के अनुसार बजट सत्र के दौरान ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद की शुरुआत हुई. भाजपा पार्षदों ने कांग्रेस की मुस्लिम पार्षदों रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम पर ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप लगाया. आरोप के बाद देखते ही देखते दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई.
तुम्हारे बाप में दम हो तो कहलवाकर बता दो वंदेमातरम: कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान
इसी बीच कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने गुस्से में आपत्तिजनक टिप्पणी की, “तुम्हारे बाप में दम हो तो कहलवाकर बता दो.” इस बयान से विवाद और भड़क उठा.भाजपा पार्षदों ने इस पर कड़ी आपत्ति जता सदन के भीतर ही ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाये. ऐसे में कुछ देर को सदन शोर-शराबे और नारेबाजी से गूंजता रहा. जिसका एक वीडियो भी सामने आया है.
वहीं स्थिति नियंत्रण को सभापति को हस्तक्षेप करना पड़ा. हंगामा और अनुशासनहीनता देख सभापति ने कांग्रेस की पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वर्तमान पार्षद फौजिया शेख को एक दिन को सदन की कार्यवाही से बाहर कर दिया. हालांकि इस एक्शन पर सदन में तनाव हो गया.
भाजपा का कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल
घटना ने नगर निगम के बजट सत्र की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जहां एक ओर शहर के विकास और योजनाओं पर चर्चा होनी थी,वहीं दूसरी ओर राजनीतिक विवाद और बयानबाजी ने पूरा फोकस भटका दिया. भाजपा ने पूरा मामला देशभक्ति से जोड़ते हुए कांग्रेस पार्षदों पर गंभीर आरोप लगाए.वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा पर विषयों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया.
