श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी से RSS,BJP चौकन्नी,डैमेज कंट्रोल की बन रही रणनीति
Ayodhya Ram Mandir Theft Up Elections Biggest Concern Bjp Rss Found Political Solution
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का दाग कैसे धुलेगा,उत्तर प्रदेश चुनाव है सबसे बड़ी चिंता, BJP-RSS ने निकाल लिया तोड़
बीजेपी और आरएसएस ने अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के खिलाफ विपक्ष के आक्रामक अभियान की काट की तैयारी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले दोनों ने एक पूरी रणनीति तैयार की है।
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सिर पर है और बीजेपी और इसके वैचारिक अगुआ संगठन आरएसएस के सिर पर अयोध्या में राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी की चिंता सवार है। राम मंदिर ऐसा मसला है, जो यूपी से लेकर दिल्ली की तख्त तक बिठाने में बीजेपी के लिए सबसे बड़ा किरदार रहा है। आज उसी राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के गले की हड्डी बन चुकी है। लेकिन, दोनों ही संगठनों ने बहुत जल्दी इससे उबरने का रास्ता भी खोज लिया है और उसके लिए प्रयास भी शुरू कर दिए हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर बड़ी राजनीतिक लड़ाई की तैयारी
अयोध्या के राम मंदिर का मुद्दा चुनावों में विपक्षी दलों के लिए हमेशा बीजेपी के मुकाबले सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ है। लेकिन, आज चंदा चोरी के मुद्दे में उसे पार्टी की डबल इंजन सरकार के खिलाफ यूपी चुनाव से पहले यही सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार मिल गया है।
विपक्ष के दावों का जवाब देने की तैयारी
चढ़ावा चोरी पर बीजेपी और आरएसएस ने विपक्ष के आक्रामक नैरेटिव की काट के लिए अपनी-अपनी योजनाएं तैयार करनी शुरू कर दी हैं। दोनों की कोशिश इस विवाद से पैदा हुए जनता के गुस्से को शांत करना और विपक्ष के आरोपों का माकूल जवाब देना है। इसके लिए दोनों ही संगठन जल्द ही जन-संपर्क अभियान शुरू करने की तैयारी में हैं। एचटी की एक रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस के एक पदाधिकारी ने कहा कि उसके स्वयंसेवक घर-घर जाएंगे और लोगों को भरोसा दिलाएंगे कि ज्यादातर दान, विशेष रूप से बड़ी रकम के साथ हेराफेरी नहीं हुई है।
सरकार की कार्रवाई के बारे में जानकारी देंगे
इन बातों की जानकारी रखने वाले बीजेपी नेताओं का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश इकाइयों, खासकर उत्तर प्रदेश के नेताओं से कहा है कि ये बात लोगों तक पहुंचाएं कि केंद्र और राज्य सरकार ने कैसे इस मामले में त्वरित कार्रवाई की है।
चढ़ावा चोरी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
बीजेपी यह भी बताएगी कि कैसे विपक्ष इस मामले पर राजनीति कर रहा है।
विपक्ष इसे एक चुनावी मुद्दा बनाना चाहता है। वे बीजेपी सरकार को प्रशासनिक मुद्दे पर घेरने में सफल नहीं हैं, इसलिए वे राजनतिक विवाद खड़ा करना चाहते हैं और दुर्भाग्य से कुछ ऐसी चीजें हुई हैं, जो कि लोगों की भावनाओं और आस्था से जुड़ी हुई है।
एक वरिष्ठ बीजेपी नेता, दिल्ली
आरोपियों पर तुरंत और निर्णायक कार्रवाई की मांग
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे बीजेपी के एक और पदाधिकारी ने कहा कि राम मंदिर का जो राजनीतिक महत्त्व है, खासकर उत्तर प्रदेश में और आरोपों से चुनावों पर जो असर पड़ने की आशंका है, उसको देखते हुए पार्टी आरोपियों के खिलाफ ‘तुरंत और निर्णायक’ कार्रवाई चाहती है।
दानदाताओं से भी संपर्क की तैयारी में संघ
इसी तरह से आरएसएस के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘हम लोग ऐसे लोगों से मिलने के लिए स्वयंसेवकों को भेजने की संभावना पर विचार कर रहे हैं, जिन्होंने एक निश्चित सीमा से अधिक दान दिए हैं।’
हालांकि हमारा मानना है कि एक-एक पैसे का हिसाब होना चाहिए, इस योजना पर भी काम चल रहा है कि जिन दानदाताओं के पास रसीदें हैं, वे आएं और खुद ही आकर चीजों की छानबीन कर लें…।
आरएसएस पदाधिकारी
‘संदेह और चिंताओं को दूर करने के निर्देश’
वैसे यूपी बीजेपी के नेता मानते हैं कि इस विवाद की वजह से सरकार के कामकाज को लेकर दावों को नुकसान हुआ है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘डबल इंजन सरकार की परफॉर्मेंस पर सवालिया निशान है। आरोपों के सामने आने के तुरंत बाद ही श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में मामूली कमी देखी गई, इसलिए हमने संदेह और चिंताओं को दूर करने के निर्देश दिए हैं।’
विपक्षी कैंपेन की वजह से सक्रिय हुई बीजेपी
भाजपा पदाधिकारी ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और आरएसएस के स्वयंसेवकों से शुरू में कहा गया था कि इस विवाद से दूर रहें और एसआईटी को जांच करने दें।
लेकिन, जिस तरह से विपक्ष ने अभियान तेज किया है और कुछ दानदाता बेशकीमती चीजों को लेकर सामने आ रहे हैं, उसके बाद उसका जवाब देने के लिए अभियान शुरू करना ‘अनिवार्य’ हो गया है।
