संघ बैठक में डॉ. मुरली मनोहर जोशी की आर्थिक थ्‍योरी में वामपंथी अमर्त्‍य सेन के तर्क

वरिष्ठ भाजपा डाक्टर नेता मुरली मनोहर जोशी ने देश की अर्थव्यवस्था और आर्थिक विषमता पर गहरी चिंता जताई है, और अपने तर्कों में वामपंथी अर्थशास्त्री नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का संदर्भ दिया है. महत्वपूर्ण बात ये है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुरली मनोहर जोशी की बातों को एनडोर्स किया है.

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अमर्त्य सेन के उल्लेख के साथ देश की अर्थव्यवस्था पर डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी के विषय की गंभीरता समझने-समझाने की कोशिश सही बतायी है. (Photo: File/ITG)

नई दिल्ली 04 सितंबर 2025,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अर्थ समूह की बैठक में देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक विमर्श हुआ है. बैठक में लोगों की आय में असमानता, और प्रति व्यक्ति कम जीडीपी पर विशेष चर्चा हुई है – खास बात ये है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने जो दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, उसमें नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का भी संदर्भ दिया है.

अमर्त्य सेन और संघ वैचारिक तौर पर दो ध्रुवों जैसे हैं. और, इसी कारण बैठक में जताई गई चिंता काफी गंभीर लगती है – सवाल है कि क्या संघ को सिर्फ देश की आर्थिक स्थिति की ही चिंता है? या फिर, संघ केंद्र की भाजपा सरकार की आर्थिक नीति को लेकर चिंतित है?

बैठक में हुई बातचीत से ऐसे सारे सवालों का जवाब मिलता है. विषय ये है कि संघ अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित तो है, और शायद इसीलिए मामले की गंभीरता को लेकर अपने स्तर पर प्रयासरत भी है.

बताते हैं, संघ प्रमुख डाॅक्टर मोहन भागवत ने विषय की गंभीरता समझने और समझाने की कोशिश की है, लेकिन अमर्त्य सेन के  उल्लेख और डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी की दी लाइन को RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने भी गंभीरता से लिया है.

ऐसे में ये जानना और समझना काफी महत्वपूर्ण है कि आर्थिक विषमता पर डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी का संघ की बैठक में मोहन भागवत की उपस्थिति में विस्तृत प्रस्तुतीकरण में अमर्त्य सेन का संदर्भ  आखिर क्या संकेत करता है?

संघ की बैठक में जोशी का प्रस्तुतीकरण 

RSS के 100 साल पूरे होने पर, संघ से जुड़े आर्थिक संगठनों के 80 प्रतिनिधियों की एक बंद कमरा बैठक हुई, जिसमें फीजिक्स के प्रोफेसर रहे 91 वर्षीय डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने 70 स्लाइड सै प्रजेंटेशन दिया. 2014 के आम चुनाव के बाद डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी को लालकृष्ण आडवाणी के साथ भाजपा मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया गया था. ये बैठक ऐसे समय हुई है, जब बिहार में चुनावी तैयारियां जोरों पर हैं.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में श्यामलाल यादव की रिपोर्ट के अनुसार, देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर हुई इस बैठक में डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी मुख्य वक्ता थे, जिनका तर्क था आर्थिक वृद्धि किसी देश का अकेला उद्देश्य नहीं हो सकता, और इस क्रम में जोशी ने वामपंथी अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का विशेष उल्लेख किया जिसका विशेष अर्थ है. दिल्ली में सर संघचालक डाॅक्टर मोहन भागवत की व्याख्यान श्रृंखला से हफ्ता भर पहले ये बैठक 19-20 अगस्त को हुई थी, जिसके होस्ट थे भारतीय मजदूर संघ के संगठन मंत्री बी. सुरेंद्रन.

बैठक में डॉक्टर जोशी ने डिग्रोथ (Degrowth) का प्रस्ताव रखा, जिसका मतलब है – सार्वजनिक विमर्श को आर्थिक वृद्धि-केंद्रित दृष्टि से मुक्त करना और वृद्धि को सामाजिक उद्देश्य के रूप में समाप्त करना. ये सब ऐसे समय हो रहा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही भाजपा की केंद्र सरकार भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की कोशिश में है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री जोशी का ये भी कहना है कि पश्चिम का आर्थिक मॉडल फेल हो चुका है… क्योंकि, दुनिया में युद्ध संयुक्त राष्ट्र भी रोक पाने में विफल रहा है. अपनी बात समझाने को डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि 2021 में भारत के 10 प्रतिशत उच्च वर्ग के पास देश की कुल घरेलू संपत्ति का 65 प्रतिशत हिस्सा था… भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी केवल 2,878.5 अमेरिकी डॉलर थी, जबकि जापान की 33,955.7 डॉलर – फिर भी भारत ने जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का लक्ष्य पाया था.

डाॅक्टर जोशी की चेतावनी, भागवत की चिंता

अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का संदर्भ देते हुए पूर्व भाजपा अध्यक्ष  डाॅक्टर  मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि अगर किसी देश की आर्थिक सफलता सिर्फ आय से आंकें, तो कल्याणकारी जैसा महत्वपूर्ण लक्ष्य पीछे छूट जाता है. हालांकि, डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी ने ये बात भी जोर देकर कही कि मैं हिंदू दृष्टिकोण आध्यात्मिकता समझने, विकसित करने और चुनौती देने को एक एकीकृत आधार के रूप में पसंद करता हूं.

बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों के बात कर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुरली मनोहर जोशी की समझाइश का सपोर्ट करते हुए कहा, ‘जोशी जी ने सब कुछ कह दिया है.’

और, ध्यान देने वाली बात है संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले का स्पष्टीकरण. दत्तात्रेय होसबले ने बैठक के प्रतिनिधियों को स्पष्ट किया कि प्रस्तुतीकरण और बैठक की चर्चायें सरकार की आलोचना के रूप में न देखी जाएं । उन्होंने कहा कि विमर्श का उद्देश्य नीतियों की समीक्षा करना या कोई निर्णय लेना नहीं है.

अमर्त्य सेन के साथ-साथ डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय की एकात्म मानववाद अवधारणा के संदर्भ में सावधान किया कि दूसरे देशों पर ज्यादा निर्भरता देश हित में नहीं है. डाॅक्टर जोशी ने कहा कि हम योजना बनाते हैं कि जो हमारे पास नहीं है उसे पायें, लेकिन जो हमारे पास है उसके संरक्षण को कोई योजना नही बनाते.

डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी ने अपनी पीड़ा भी कही कि, ‘हमने कृषि और स्वदेशी उद्योगों पर ध्यान नहीं दिया बल्कि विदेशी सहयोग का स्वागत किया, जो हमारे हित और प्रतिष्ठा कमजोर करते हैं.

भले ही दत्तात्रेय होसबले ने बैठक की बातों और उठाए गए मुद्दों पर सरकार से न जोड़ने को अस्वीकरण दिया हो, लेकिन हाल फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में स्वदेशी पर ज्यादा जोर दिख रहा है – और बहुत कुछ समझने को ये काफी है.
डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी के आर्थिक विमर्श पर संघ की मंजूरी
जोशी जी ने सब कुछ कह दिया है.– मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

मुरली मनोहर जोशी के आर्थिक विमर्श पर संघ की सफाई
प्रजेंटेशन और बैठक में हुई चर्चाओं को सरकार की आलोचना के रूप में न देखा जाए… इसका उद्देश्य नीतियों की समीक्षा करना या कोई निर्णय लेना नहीं है. दत्तात्रेय होसबले, सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

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