सिर्फ EMI भरने को नौकरी बदल रहे हैं क्‍या? एक्‍सपर्ट ने चेताया, सटीक कारण बता दिया फंसने का

Emi Burden Making Job Change A Compulsion Expert Warning Amid Rising Expenses
सिर्फ EMI भरने को नौकरी बदल रहे हैं क्‍या? एक्‍सपर्ट ने चेताया, सटीक कारण बता दिया फंसने का
शहरी भारत में लोगों की जीवनशैली में तेजी से बदलाव आया है। इससे क्रेडिट कार्ड और ईएमआई का चलन बढ़ा है। अब लोग अपनी सैलरी का 50% तक ईएमआई भरने में खर्च कर रहे हैं। इससे वे गुजारा करने के लिए नौकरी बदलने को मजबूर हैं। बढ़ती महंगाई और कम वेतन बढ़ोतरी के कारण आर्थिक स्थिति खराब हो गई है।
नई दिल्‍ली: पिछले कुछ समय में लोगों की लाइफस्‍टाइल तेजी से बदली है। शहरों में खासतौर से इसमें बहुत बड़ा बदलाव हुआ है। धड़ल्‍ले से क्रेडिट कार्ड और ईएमआई पर कुछ भी खरीद लेने का ट्रेंड बढ़ गया है। लेकिन, इसकी अंदर से चोट इतनी गहरी हुई है कि आज लोग अपनी सैलरी का करीब 50% तक ईएमआई भरने में खत्‍म कर देते हैं। कई तो सिर्फ ईएमआई भरने के लिए नौकरी बदल रहे हैं। रेनबो मनी के संस्थापक सिद्धार्थ मुकुंद ने इसी को लेकर एक पोस्‍ट शेयर किया है।

मुकुंद ने यह पोस्‍ट लिंक्‍डइन पर शेयर की। इस पोस्ट में उन्होंने भारत के शहरों में काम करने वाले लोगों के बारे में चिंता जताई हुए कहा कि भारत के बड़े शहरों में कुछ डरावना चल रहा है। मुकुंद ने बताया कि अब नौकरी बदलने का कारण बदल गया है। पहले लोग ज्यादा पैसे को नौकरी बदलते थे। लेकिन, अब वे सिर्फ गुजारा करने को नौकरी बदल रहे हैं। लोगों की कमाई कम हो रही है। खर्च बढ़ रहा है। इसलिए वे परेशान हैं।

अब कंपन‍ियों में बदल गया है सीन

मुकुंद ने कहा कि पहले नौकरी बदलने पर अच्छी सैलरी मिलती थी और लोग आसानी से EMI भर पाते थे। लेकिन, अब कंपनियां लोगों को नौकरी से निकाल रही हैं और सैलरी भी कम बढ़ रही है। बड़ी टेक कंपनियों में सैलरी 5% से भी कम बढ़ रही है। इससे लोगों को बहुत मुश्किल हो रही है।

मुकुंद ने बताया कि लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। पहले लोग अपनी सैलरी का 25-30% EMI और बीमा में देते थे। लेकिन, अब 40-50% दे रहे हैं। लोगों को बच्चों की स्कूल फीस, हेल्थकेयर और जरूरी चीजों में भी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। लोगों के खरीदे घर अब बोझ बन गए हैं। लोग अब अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि मजबूरी में नौकरी बदल रहे हैं। वे 25-30% ज्यादा सैलरी मांग रहे हैं ताकि वे अपना गुजारा कर सकें।

नौकरी बदलना शौक नहीं, बन गई है मजबूरी
मुकुंद ने चेतावनी दी कि पिछले 10-15 सालों में नौकरी करने वालों की जो उम्मीदें थीं, वे अब पूरी नहीं हो रही हैं। उन्होंने लोगों और कंपनियों दोनों को यह बदलाव समझने को कहा।

इस पोस्ट पर लोगों ने बहुत प्रतिक्रिया दी। एक व्यक्ति ने लिखा, ‘अब नौकरी बदलना शौक नहीं, मजबूरी है। परिवार वाले खर्च कम कर रहे हैं और दिखावे की बजाय जरूरी चीजों पर ध्यान दे रहे हैं।’ इसका मतलब है कि लोग अब सिर्फ जरूरत की चीजें खरीद रहे हैं और फिजूलखर्ची नहीं कर रहे हैं।

एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि यह एक बड़ा बदलाव होने वाला है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे कम खर्च करें, ज्यादा बचत करें और अपने परिवार और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

मुकुंद की पोस्ट से पता चलता है कि भारत के शहरों में काम करने वाले लोग आर्थिक रूप से परेशान हैं। उन्हें अपनी नौकरी और भविष्य के बारे में चिंता हो रही है। लोगों को अब अपनी जीवनशैली बदलने और समझदारी से खर्च करने की जरूरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *