SC ने दिल्ली NCR के सभी आवारा कुत्तों को डॉग शेल्टर भेजने के दिये निर्देश, रोका तो कानूनी कार्रवाई
सुपीम कोर्ट ने दिल्ली NCR के सभी… सुपीम कोर्ट ने दिल्ली NCR के सभी अवारा कुत्तों को डॉग शेल्टर में भेजने का निर्देश दिया, रोकने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 अगस्त) को एक महत्वपूर्ण आदेश में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अधिकारियों को सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को डॉग शेल्टर में पहुंचाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन आवारा कुत्तों को उठाने से अधिकारियों को रोकता है, तो उसे कानूनी परिणाम भुगतने होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर आवारा कुत्तों को उठाना ज़रूरी हुआ, तो अधिकारी बल प्रयोग भी कर सकते हैं।
कोर्ट ने निर्णय में कुत्तों के काटने और रेबीज़ के खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों को शेल्टर में ही रखा जाना चाहिए और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने आवारा कुत्तों द्वारा बच्चों पर हमला करने से संबंधित एक समाचार रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए ये निर्देश जारी किए। कोर्ट ने आदेश में कहा, “शिशुओं और बच्चों को किसी भी कीमत पर रेबीज़ का शिकार नहीं होना चाहिए। इस कार्रवाई से उनमें यह विश्वास पैदा होना चाहिए कि वे आवारा कुत्तों के भय के बिना स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं। इसमें किसी भी तरह की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई जानी चाहिए।”
सुनवाई के बीच, जस्टिस पारदीवाला ने नसबंदी किए गए कुत्ते को उसी इलाके में वापस छोड़ने के औचित्य पर सवाल उठाया, जहां से उसे उठाया गया था। उन्होंने पूछा,कि “चाहे नसबंदी की गई हो या नहीं,समाज आवारा कुत्तों से मुक्त होना चाहिए। आपको शहर के किसी भी इलाके या बाहरी इलाके में एक भी आवारा कुत्ता घूमता हुआ नहीं दिखना चाहिए। यह पहला कदम है। हमने एक बहुत ही बेतुका और अनुचित नियम देखा है,अगर आप किसी आवारा कुत्ते को एक इलाके से उठाते हैं,तो आप उसकी नसबंदी करके उसे उसी जगह पर छोड़ देते हैं,यह बिल्कुल बेतुका है और इसका कोई मतलब नहीं है। वह आवारा कुत्ता उस इलाके में वापस क्यों आए और किस लिए?”
क्या है पशु जन्म नियंत्रण नियम? जिसे आवारा कुत्तों के मामले में SC ने कहा-बेतुका
न्यायमूर्ति जे.बी.पारदीवाला और आर.महादेवन की पीठ ने कहा कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियम 2023,बेतुका है। इन नियमों के अनुसार, एक आवारा कुत्ते को किसी इलाके से उठाया जाता है,नसबंदी की जाती है और
क्या है पशु जन्म नियंत्रण नियम? जिसे आवारा कुत्तों के मामले में SC ने कहा-बेतुका
सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली के आवारा कुत्तों पर बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें 8 हफ्तों के भीतर सभी इलाकों से उठाकर डॉग शेल्टर में डालने को कहा है। कोर्ट ने इस प्रोसेस में बाधा बनने वालों को भी सख्त चेतावनी देते हुए कार्रवाई करने को कहा है। सोमवार हुई सुनवाई के दौरान पशु नियंत्रण कानून का भी जिक्र आया पर कोर्ट ने उसे बेतुका बता दिया।
पशु जन्म नियंत्रण कानून पर सवाल
न्यायमूर्ति जे.बी.पारदीवाला और आर.महादेवन की पीठ ने कहा कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियम 2023,बेतुका है। इन नियमों के अनुसार, एक आवारा कुत्ते को किसी इलाके से उठाया जाता है,नसबंदी की जाती है और उसी इलाके में वापस छोड़ दिया जाता है। पीठ ने कहा,”सभी इलाकों से कुत्तों को उठाएं और उन्हें शेल्टर होम में भेजें। फिलहाल,इन नियमों को भूल जाएं।” उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है। पीठ ने कहा,”कुत्तों के काटने से रेबीज जैसी बीमारी के खतरे को खत्म करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है।” शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी कीमत पर बच्चों को आवारा कुत्तों के काटने और रेबीज का शिकार नहीं होना चाहिए। “हम इन निर्देशों को बड़े जनहित को ध्यान में रखते हुए जारी कर रहे हैं।”
क्या है पशु जन्म नियंत्रण कानून?
पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियम, 2023 केंद्र की ओर से आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों का एक समूह है। ये नियम कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने और रेबीज के प्रसार को रोकने के लिए उनकी नसबंदी और टीकाकरण पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इनका गठन मानव-कुत्ते के संघर्ष को संबोधित करने और पशु कल्याण को बढ़ावा देने के लिए किया गया था।
सरकार ने पेश किए थे आंकड़े
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लगभग 5000 आवारा कुत्तों को रखने के लिए डॉग शेल्टर बनाए जाने चाहिए और कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण करने के लिए पर्याप्त कर्मियों को वहां तैनात किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने आठ हफ्तों के भीतर शेल्टर होम बनाने पर अधिकारियों से जवाब भी मांगा। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन अधिकारियों की ओर से आवारा कुत्तों को उठाने के काम में बाधा डालता है,तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर एक हेल्पलाइन बनाने का भी निर्देश दिया ताकि कुत्ते के काटने के सभी मामलों की तुरंत सूचना दी जा सके।
केंद्र ने पिछले महीने कहा था कि भारत में 2024 में 37 लाख से अधिक कुत्ते के काटने के मामले और रेबीज से 54 संदिग्ध मौतें हुईं। केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल की ओर से 22 जुलाई को संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार,पिछले साल कुत्ते के काटने के कुल मामलों की संख्या 37,17,336 थी,जबकि ‘संदिग्ध मानव रेबीज से हुई मौतों’ की कुल संख्या 54 थी।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने न्यायालय से स्थिति को सुधारने को कठोर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि “स्थिति बेहद गंभीर है।” पीठ ने कहा, कि”कुत्ता काटने से रेबीज़ की समस्या से निपटने को तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।” एसजी मेहता ने दलील दी कि नसबंदी से केवल कुत्तों की संख्या में वृद्धि रुकती है,लेकिन इससे कुत्तों की रेबीज़ फैलाने की क्षमता खत्म नहीं होती।
मेहता ने कहा,कि “हमने यूट्यूब पर देखा है कि बच्चे मर रहे हैं और माता-पिता बेबस होकर रो रहे हैं क्योंकि डॉक्टर भी कहते हैं कि हमारे पास कोई इलाज नहीं है।”
जस्टिस पारदीवाला ने जवाब दिया कि इसीलिए पहला निर्देश यह होना चाहिए, कि “सभी आवारा कुत्तों को जल्द से जल्द हर संभव तरीके से उठाना शुरू करें और उन्हें किसी दूर स्थान पर स्थानांतरित करें।”
वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र गौरव अग्रवाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की सिफारिशों को सुनने के बाद,पीठ ने निम्नलिखित निर्देश पारित किए, जारी किए गए निर्देश
1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली राज्य, एमसीडी और नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) को निर्देश दिया जाता है कि वे तुरंत कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाएं और 8 सप्ताह के भीतर पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली राज्य में बुनियादी ढांचे के निर्माण के बारे में रिपोर्ट करें। कुत्ता आश्रय स्थलों में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए पर्याप्त कर्मचारी होंगे, और उन आवारा कुत्तों की देखभाल के लिए भी जिन्हें वहां हिरासत में लिया जाएगा और सार्वजनिक स्थानों पर नहीं छोड़ा जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई कुत्ता बाहर न ले जाया जाए, सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी।
2. चूंकि यह प्रगति पर है, इसलिए समय के साथ कुत्ता आश्रय स्थलों को बढ़ाना होगा। राज्य/एमसीडी/एनडीएमसी को अगले 6/8 सप्ताह में 5,000 कुत्तों के लिए शुरुआत करनी चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, एमसीडी और एनडीएमसी को जल्द से जल्द सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को उठाना शुरू करना चाहिए, विशेष रूप से कमजोर इलाकों और शहरों के साथ-साथ बाहरी इलाकों से भी। किसी भी कार्य में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति या संस्था आवारा कुत्तों को पकड़ने या उन्हें पकड़ने में बाधा डालती है, तो हम ऐसे किसी भी प्रतिरोध के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे। शिशुओं और छोटे बच्चों को किसी भी कीमत पर रेबीज़ का शिकार नहीं होना चाहिए। इस कार्रवाई से उनमें यह विश्वास पैदा होना चाहिए कि वे आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने के डर के बिना स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं। किसी भी प्रकार की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।
3. एमसीडी/एनडीएमसी और नोएडा व गुरुग्राम के संबंधित प्राधिकारी, सभी प्राधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे प्रतिदिन पकड़े गए और हिरासत में लिए गए आवारा कुत्तों का रिकॉर्ड रखें। हालांकि, जो महत्वपूर्ण है, और जिसके बिना पूरी प्रक्रिया निरर्थक हो जाएगी, वह यह है कि एक भी आवारा कुत्ते को नहीं छोड़ा जाना चाहिए, और यदि हमें पता चलता है कि ऐसा हुआ है, तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे।
4. एक सप्ताह के भीतर हेल्पलाइन बनाएं ताकि कुत्तों के काटने और रेबीज़ के सभी मामलों की सूचना दी जा सके। शिकायत प्राप्त होने के 4 घंटे के भीतर कुत्ते को उठाने के लिए कार्रवाई की जानी चाहिए और किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा बाधा डालने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उक्त कुत्ते की नसबंदी की जाएगी और उसे छोड़ा नहीं जाएगा। इस संबंध में रिपोर्ट अगली सुनवाई में हमारे समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
5. टीके की उपलब्धता एक प्रमुख चिंता का विषय है – संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे उपलब्ध टीकों, टीकों के स्टॉक और इसे मांगने वाले व्यक्तियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएं। जब वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने हस्तक्षेप करने और पीपल फॉर एनिमल्स के ट्रस्टी, एक हस्तक्षेपकर्ता की ओर से बोलने की कोशिश की, तो न्यायमूर्ति पारदीवाला ने अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और कहा कि न्यायालय व्यापक जनहित में इस मामले में किसी भी हस्तक्षेप आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मुकदमे में किसी भी प्रकार की भावनाओं को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। एमिकस अग्रवाल ने कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाने सहित कुछ सुझाव दिए। इस पर, एसजी मेहता ने बताया कि कुत्तों के आश्रय स्थल और इसी तरह के अन्य उद्देश्यों के लिए ज़मीन आवंटित की गई थी, लेकिन एक महिला ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और उस पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने न्यायालय से इस पर विचार करने का अनुरोध किया। एमिकस द्वारा दिया गया एक अन्य सुझाव यह था कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को गोद लिया जा सकता है। हालांकि, न्यायालय ने इस सुझाव को अस्वीकार कर दिया और कहा कि आवारा कुत्तों को रातोंरात पालतू कुत्ते नहीं बना देना चाहिए। न्यायालय ने व्यक्तियों और संगठनों को इस मामले में हस्तक्षेप करने से भी सावधान किया।
Supreme Court Pulls Up A Noida Man For Feeding Stray Dogs On The Street Why Dont You Feed Them At Home
‘अपने घर में क्यों नहीं खिलाते’..आवारा कुत्तों को सड़क पर खिलाने को लेकर नोएडा के जन को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, बताया क्या है खतरा
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के मुद्दे पर एक याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि सड़कों पर सिर्फ ‘बड़े दिल वालों’ के लिए जगह नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि याचिकाकर्ता कुत्तों को अपने घर पर क्यों नहीं खिलाता।
इसके पहले आवारा कुत्ते से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता को जोरदार फटकार लगाई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे नोएडा में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर परेशान किया जा रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने उससे पूछा कि वह अपने घर पर जानवरों को खाना क्यों नहीं खिला सकता। बेंच ने कहा, ‘आप उन्हें अपने घर में क्यों नहीं खिलाते? आपको कोई नहीं रोक रहा है।’ इसका मतलब है, कोई मना नहीं कर रहा है,लोग अपने घरों में इन कुत्तों को खिला सकते हैं।
‘जानवरों के लिए जगह है, इंसानों के लिए नहीं ‘
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आगे एक बहुत बड़ी बात कही, ‘क्या हर गली और हर सड़क सिर्फ ‘बड़े दिल वाले’ लोगों के लिए खुली रखी जानी चाहिए? जानवरों के लिए जगह है, लेकिन इंसानों के लिए जगह नहीं है।’ कोर्ट का कहना था कि क्या सिर्फ इसलिए कि कुछ लोग जानवरों को खाना खिलाना चाहते हैं, सड़कों पर इंसानों के लिए जगह कम कर दी जाए? याचिकाकर्ता के वकील की दलील थी कि उनका क्लाइंट एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 का पालन कर रहा है। रूल 20 के अनुसार, स्थानीय निवासियों की संस्था या नगरपालिका को सामुदायिक जानवरों के लिए भोजन स्थल निर्धारित करने की जिम्मेदारी है। वकील ने कहा कि नोएडा अथॉरिटी ऐसा नहीं कर रही है, जबकि ग्रेटर नोएडा में ऐसा हो रहा है। मतलब, नियम के अनुसार कुत्तों को खाना खिलाने की जगह तय करना सरकार का काम है, लेकिन नोएडा में ऐसा नहीं हो रहा है।
आवारा कुत्तों के खतरे से सुप्रीम कोर्ट भी अवगत
इसके जवाब में कोर्ट ने आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के लिए घर पर ही एक आश्रय खोलने का सुझाव दिया। कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को भी उठाया। कोर्ट ने कहा कि सुबह घूमने वाले और दोपहिया वाहन चलाने वाले अक्सर आवारा कुत्तों के कारण खतरे में रहते हैं। कोर्ट ने कहा, ‘सुबह साइकिल चलाने की कोशिश करें और देखें कि क्या होता है।’ मतलब, कोर्ट का कहना था कि आवारा कुत्ते लोगों को काट सकते हैं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट भी जता चुका है चिंता
यह याचिका मार्च 2025 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश से संबंधित है। इसमें याचिकाकर्ता ने नियमों की उचित तामील और उत्पीड़न से सुरक्षा का अनुरोध किया था। हाई कोर्ट ने जानवरों और इंसान दोनों की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जहां आवारा कुत्तों को कानून के तहत सुरक्षित किया जाना चाहिए, वहीं सार्वजनिक सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कुत्तों द्वारा किए गए हालिया हमलों का हवाला दिया, जिसके कारण गंभीर चोटें आईं और यहां तक कि मौतें भी हुईं।
जानवर और इंसान दोनों की सुरक्षा पर जोर
हाई कोर्ट ने अधिकारियों से याचिकाकर्ता और आम जनता दोनों की चिंताओं के प्रति संवेदनशील होने को कहा था। कोर्ट ने उन्हें यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि आवारा कुत्तों और पैदल चलने वालों दोनों की सुरक्षा के लिए उचित उपाय किए जाएं। हाई कोर्ट ने कहा था कि सरकार को दोनों तरफ ध्यान देना चाहिए – जानवरों को भी बचाना है और लोगों को भी सुरक्षित रखना है।
Maneka Gandhi Questions Supreme Courts Order To Catch Stray Dogs Calls 15000 Crore Expenditure Impractical
48 घंटे में आ जाएंगे तीन लाख कुत्ते? .. मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं पर स्वतः संज्ञान ले दिल्ली सरकार को सभी इलाकों से आवारा कुत्ते पकड़ने का आदेश दिया है। मेनका गांधी ने इस आदेश की आलोचना करते हुए फैसले की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आदेश को गुस्से में दिया गया, अव्यावहारिक, वित्तीय लिहाज से अनुपयुक्त और क्षेत्र के पारिस्थितिकी संतुलन को संभावित रूप से हानिकारक करार दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की समस्या को बेहद गंभीर बताते हुए दिल्ली सरकार और नगर निकायों को सभी इलाकों से आवारा कुत्ते जल्द से जल्द उठा कर आश्रय स्थलों में रखने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस अभियान में बाधा डालने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
क्या दिल्ली सरकार के पास 15,000 करोड़ रुपये?
पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका ने कहा कि इस काम की जटिलता इसे ‘अव्यावहारिक’ बनती है। उन्होंने कहा, ‘दिल्ली में तीन लाख आवारा कुत्ते हैं। उन सभी को सड़कों से हटाने को आपको 3,000 ‘पाउंड’ (पालतू जानवरों के आश्रय स्थल) बनाने होंगे, जिनमें से प्रत्येक में जल निकासी, पानी, शेड, रसोई, कार्मिक और चौकीदारी व्यवस्था हो। इस पर लगभग 15,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। क्या दिल्ली के पास इसकौ 15,000 करोड़ रुपये हैं?’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सड़कों से उठाए गए आवारा कुत्तों के लिए खाने की व्यवस्था पर हर हफ्ते पांच करोड़ रुपये लगेंगें। उन्होंने चेताया कि आवारा कुत्ते हटाने से नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं और इससे जनाक्रोश भी फैल सकता है।
फैसले पर उठाए सवाल
मेनका ने कहा, कि’48 घंटों में गाजियाबाद और फरीदाबाद से तीन लाख कुत्ते आ जाएंगे, क्योंकि दिल्ली में खाना उपलब्ध है और जैसे ही आप कुत्ते हटाएंगे, बंदर सड़क पर आ जाएंगे… मैंने अपने घर में ऐसा होते देखा है। 1880 के दशक में पेरिस में कुत्ते और बिल्लियां हटायी गयी, तो शहर चूहों से भर गया था।’
दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट कठोर है. अदालत ने आदेश दिया है कि कुत्ते शेल्टर होम भेजे जाए. सड़क पर कुत्ते दिखने नहीं चाहिए. वहीं अगर कोई पशु प्रेमी इस फैसले के बीच आया तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी. अदालत के फैसले के बाद आवारा कुत्तों पर मेनका गांधी का दर्द (Maneka Gandhi On Stray Dogs) छलक उठा है. पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को अदालत का ये फैसला बिल्कुल भी पसंद नहीं आया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कड़ी आलोचना करते हुए इसे आर्थिक रूप से अव्यावहारिक और क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को संभावित रूप से हानिकारक बताया है.
3 लाख कुत्तों को कहां डालेंगे, पहले 3000 पाउंड बनाने पड़ेंगे
मेनका गांधी ने पीटीआई-भाषा’ से कहा, “दिल्ली में तीन लाख आवारा कुत्ते हैं. उन सभी को पकड़कर शेल्टर होम भिजवाया जाएगा. उन्हे सड़कों से हटाने को दिल्ली सरकार को 1 हजार या 2 हजार शेल्टर होम बनाने होंगे.क्यों कि ज्यादा कुत्तों को एक साथ नहीं रखा जा सकता. सबसे पहले तो उसके लिए जमीन तलाशनी होगी. इस पर 4-5 करोड़ रुपए खर्च आएगा. क्यों कि हर सेंटर में केयरटेकर, खाना बनाने वाले और खिलाने वाले, और चौकीदार की व्यवस्था करनी होगी.”
दिल्ली को 10 हजार करोड़ देने पड़ेंगे
मान लीजिए 100 कुत्ते डिफेंस कॉलोनी में लोगों के बीच छोड़ दें तो सोचिए क्या होगा. इसीलिए 3 हजार ऐसी जगहें देखनी होंगी, जहां कोई रहता न हो. मेनका ने कहा कि कुत्तों के आश्रय स्थल बनाने, रख-रखाव और उनकी देखभाल पर लगभग 10,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. क्या दिल्ली के पास इतना धन हैं?”
कुत्तों को खिलाने को हर हफ्ते 5 करोड़ रुपये लगेंगें
मेनका ने आगे कहा कि पकड़े गए कुत्तों को खिलाने को हर हफ्ते कम से कम 5 करोड़ रुपये और खर्च आएगा, इसके बाद ऐसे लोग चाहिए होंगे जो उनको खाना खिला सकें. उन्होंने कहा कि यह मामला “बिल्कुल अकारण” उठाया गया था, जो एक फर्जी अखबारी रिपोर्ट पर आधारित था, जिसमें कुत्तों के एक लड़की पर हमला करने की बात कही गई थी, उनके माता-पिता के अनुसार, बाद में “दुर्भाग्य से उसकी मेनिन्जाइटिस से मौत हो गई”.
मेनका ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल
मेनका गांधी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश गुस्से में और व्यवहार्यता पर विचार किए बिना दिया गया हो सकता है. उन्होंने इस फैसले की वैधता पर भी सवाल उठाया और कहा कि एक महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य बेंच ने इसी विषय पर एक “संतुलित फैसला” सुनाया था. अब, एक महीने बाद, दो सदस्यीय बेंच ने एक और फैसला सुनाया है जिसमें कहा गया है कि ‘सबको पकड़ो’. कौन सा फैसला सही है? ज़ाहिर है, पहला वाला, क्योंकि वह एक स्थापित फैसला है.
कुत्ते हटाए तो बंदर जमीन पर आ जाएंगे
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अनपेक्षित परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा कि आवारा कुत्तों को हटाने से अन्य पर्यावरणीय समस्याएं पैदा हो सकती हैं.उन्होंने कहा कि 48 घंटों के भीतर,गाजियाबाद और फरीदाबाद से 3 लाख कुत्ते आ जाएंगे क्योंकि दिल्ली में भोजन उपलब्ध है.और जैसे ही आप कुत्तों को हटाएंगे,बंदर ज़मीन
पर आतंक मचा देंगे. मैंने अपने घर में भी ऐसा होते देखा है. 1880 के दशक में पेरिस में,जब कुत्ते और बिल्लियां हटायी गयी, तो शहर चूहों से भर गया था,” उन्होंने कुत्तों को “कृंतक नियंत्रण जानवर” कहा.

