सुप्रीम कोर्ट में टुकड़े-टुकड़े गैंग,
भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचूड़ के खिलाफ पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज राकेश कुमार ने 10 नवंबर 2024 को सेवानिवृत होने से पहले ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को 8 नवंबर 2024 को चिट्ठी लिखकर तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने के मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी 🤔 अभी हाल ही में एक अखबार से बातचीत करते हुए राकेश कुमार ने इस बात की पुष्टि की और खबर ये भी है की राष्ट्रपति ने आगे की कार्यवाही को कार्मिक विभाग को आदेश दे दिया है l राकेश कुमार का डी वाई चंद्रचूड़ पर मुख्य आरोप ये है कि तब के मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कथित तौर पर तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने के मामले को सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध करने को अति सक्रियता क्यों दिखाई ❓
जानिए, पूरा मामला क्या है ❓
गुजरात दंगों में मोदी को फंसाने, बदनाम करने को फर्जी सबूत गढ़ने, फर्जी प्रपत्र बनाने और फर्जी गवाह खड़े करने के षड्यंत्र के आरोप में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने तीस्ता सीतलवाड, पूर्व IPS संजीव भट्ट और DGP आर बी शिव कुमार पर मुकदमा लिख बंदी किया था 🤔
सभी आरोप साबित होने के बाद 1 जुलाई 2023 को दोपहर 1 बजे गुजरात हाईकोर्ट ने तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने से इनकार करते हुए तीस्ता सीतलवाड़ को तुरंत आत्मसमर्पण करने को कहा था और गिरफ्तार करने का आदेश दिया था 🤔
तीस्ता सीतलवाड अपनी गिरफ्तारी पर रोक और जमानत के लिए उसी दिन 1 जुलाई 2023 को ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई l उन दिनों सुप्रीम कोर्ट के सभी जज 1 जुलाई तक ग्रीष्मकालीन अवकाश पर थे l सुप्रीम कोर्ट में कामकाज बंद था और केवल दो दिन बाद ही 3 जुलाई से सुप्रीम कोर्ट की नियमित कार्यवाही और कामकाज प्रारंभ होने वाला था l भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचूड़ साहब 1 जुलाई को ही दिल्ली के इस्लामिक सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी बेटी का भरत नाट्यम नृत्य देख रहे थे l क्योंकि अवकाश के दिन थे इसीलिए और भी कई जज वकील कपिल सिब्बल जैसे कोर्ट फिक्सर काले कौए भी उस कार्यक्रम में उपस्थित थे
तभी डी वाई चंद्रचूड़ साहब के पास किसी का फोन आया और अपनी बेटी का नृत्य देखना बीच में ही छोड़कर डी वाई चंद्रचूड़ साहब ने सभागृह से बाहर आकर फोन पर बात की l उस फोन के बाद चंद्रचूड़ साहब ने कोर्ट का अवकाश होने के बाबजूद तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत की याचिका को सुनने के लिए 2 जजों जस्टिस अभय ओका और जस्टिस प्रशांत मिश्रा की एक बेंच (विशेष पीठ) गठित कर दी 🤔 बैंच ने शाम 6 बजे सुनवाई शुरू भी कर दी जबकि आम तौर पर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही शाम 4 बजे तक ही चलती है 🤔उन दो जजों में से एक जस्टिस अभय ओका तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने के पक्ष ने थे और दूसरे जज प्रशांत मिश्रा जमानत देने के विरोध में थे l इस प्रकार एक : एक से मामला टाई हो गया तो दोनो जजों ने फोन करके डी वाई चंद्रचूड़ को कहा की जमानत देने पर हम दोनो के बीच असहमति है इसीलिए CJI से अनुरोध है की किसी बड़ी बेंच को ये मामला सौंप दे 🤔 इस स्थिति में तो तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी हो जानी थी 🤔 ये सब होते होते रात के 8 बज गए थे
अब देखिए डी वाई चंद्रचूड़ साहब ने क्या किया 🤔
तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत की याचिका पर सुनवाई के लिए डी वाई चंद्रचूड़ ने फिर से तुरंत 3 जजों की एक नई बेंच गठित कर दी जिसमे जस्टिस बी आर गवई (ये भारत के नए CJI बनने वाले है) जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता शामिल थे l इस बेंच ने रात 9:15 बजे फिर से तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी पर रोक और जमानत की अर्जी पर सुनवाई प्रारंभ की और इस बार इन तीन जजों की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट का तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत न देने का फैसला यह कहकर खारिज कर दिया कि गुजरात हाईकोर्ट का तर्क गलत है l एक हफ्ते के लिए जमानत देने से कोई आसमान नही टूट पड़ेगा 🤔 1 जुलाई को ही तीस्ता सीतलवाड़ को अंतरिम जमानत मिल गई और 19 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को इन शर्तो पर स्थाई ज़मानत दे दी की तीस्ता सीतलवाड़ अपना पासपोर्ट कोर्ट में जमा करे, विदेश भागने की कोशिश ना करे और जांच में सहयोग करें 🤔
इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व मुख्य न्यायधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ की अति सक्रियता कई गंभीर सवाल खड़े करती है की आखिर डी वाई चंद्रचूड़ साहब को गुजरात हाईकोर्ट द्वारा घोषित अपराधी तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी पर रोक लगाने और जमानत देने की इतनी जल्दी क्यों थी ❓
क्या डी वाई चंद्रचूड़ साहब किसी दवाब में थे या फिर तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने पर उतारू होने का कोई और कारण था ❓ किसका फोन आया था डी वाई चंद्रचूड़ साहब के पास की जिसके बाद डी वाई चंद्रचूड़ साहब अचानक आश्चर्यजनक रूप से अति सक्रिय हो गए ❓
क्या तीस्ता सीतलवाड़ इतनी महत्वपूर्ण महिला है की डी वाई चंद्रचूड़ साहब केवल 2 दिन और नही रुक सकते थे क्योंकि 3 जुलाई से तो सुप्रीम कोर्ट का कामकाज शुरू ही होने वाला था ❓
या फिर जैसा साबित हुआ की तीस्ता सीतलवाड़ तो सोनिया गांधी और अहमद पटेल की एजेंट थी और इन दोनो के कहने पर ही ये तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जी को गुजरात दंगो में फंसाने के लिए और बदनाम करने की साजिश कर रही थी ❓
बेटी के नृत्य कार्यक्रम में तो काला कौआ कोर्ट फिक्सर कपिल सिब्बल भी उपस्थित था तो वो तीस्ता सीतलवाड़ का वकील बनकर कोर्ट के सामने कैसे पहुंच गया ❓
ज़मानत देते हुए 3 में से एक जज ने कहा की एक हफ्ते के लिये जमानत देने से कोई आसमान नही टूट पड़ेगा तो जज साहब को ये भी बताना चाहिए की 2 दिन और मामले की सुनवाई न करने से कौन सा आसमान टूट पड़ता ❓
शाम चार बजे के बाद तो सुप्रीम कोर्ट नहीं चलता और 1 जुलाई को तो सुप्रीम कोर्ट का अवकाश चल रहा है l देश पर अचानक आई कोई आपदा या कोई अति आवश्यक मामले या विशेष परिस्थिति के समय या सत्यापित मामलों के अलावा सुप्रीम कोर्ट तो और किसी मामले की सुनवाई नहीं करता 🤔
शनिवार और रविवार को सुप्रीम कोर्ट कोई सुनवाई नहीं करता फिर तीस्ता सीतलवाड़ पर इतनी मेहरबानी क्यों? चंद्रचूड़ ने तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने को एक ही दिन में केवल 4 घंटो के अंदर दो बार जजों की विशेष पीठ (Special Bench) गठित कर दी।
इसकी जांच तो निसंदेह होनी ही चाहिए 🤔
क्योंकि एक आम नागरिक को तो अवकाश के दिनों में न तो कोई कोर्ट खुलती है ना सुनवाई के लिए जज बैठते है ना जजों की बेंच गठित होती है और ना फैसले होते है 🤔 आम नागरिक तो अपना घर-बार जेवर बचत पूंजी सब कुछ बेचकर भी न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काटता रहता है वकीलों के हाथ की कठपुतली बन घनचक्कर सा घूमता रहता है लेकिन ना तो उसको न्याय मिलता है और ना ही राहत 😢
मिलती है तो बस
तारि…………ख

