कौन हैं हरिद्वार के गौतम खट्टर जिनके कथन से ठेस पहुंची कांग्रेस और गोवा के ईसाईयों को
goapanajiGoa Police Registered Fir Against Youtuber Gautam Khattar For Derogatory Remarks Against St Francis Xavier In Vasco Event Know All
सेंट फ्रांसिस जेवियर पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद यूट्यूबर गौतम खट्टर के खिलाफ गोवा में FIR दर्ज
गोवा में भगवान परशुराम की जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर यूट्यूबर गौतम खट्टर विवादों में आ गए हैं। ईसाई समुदाय की भावनाएं आहत करने की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा लिखा है। इस विषय पर गोवा में राजनीति भी गरमा गई है।
- पणजी 21 अप्रैल 2026 : गोवा पुलिस ने सेंट फ्रांसिस जेवियर के खिलाफ आपत्तिनजनक टिप्पणी करने पर यूट्यूबर गौतम खट्टर के खिलाफ मुकदमा किया है। गौतम खट्टर सनातन महासंघ के संस्थापक हैं। गौतम खट्टर अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर खुद को एक युवा सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर, सनातन महासंघ के संस्थापक और आध्यात्मिक पत्रकार बताते हैं। गोवा में गौतम खट्टर की टिप्पणी के बाद रोष भड़का तो पुलिस ने एक्शन लिया, दूसरी तरफ सनातन धर्म रक्षा समिति ने क्षमायाचना की है।
यूट्यूबर गौतम खट्टर के खिलाफ गोवा में मुकदमा।
- ‘भगवान परशुराम जन्मोत्सव’ में की टिप्पणी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने गौतम खट्टर पर सेंट फ्रांसिस ज़ेवियर के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में मुकदमा किया है। इस घटना से राजनीतिक विरोध शुरू हुआ और कार्यक्रम आयोजकों को क्षमायाचना करनी पड़ीख। गोवा पुलिस ने रविवार रात यूट्यूबर गौतम खट्टर पर कथित तौर पर सेंट फ्रांसिस जेवियर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में मुकदमा किया। सेंट फ्रांसिस जेवियर को गोवा का संरक्षक संत माना जाता है। गौतम खट्टर ने यह अपमानजनक टिप्पणी शनिवार को वास्को में आयोजित ‘भगवान परशुराम जन्मोत्सव’ कार्यक्रम में की।
ईसाईयों की भावनाएं हुईं आहत
सनातन महासंघ संस्थापक खट्टर ने सेंट फ्रांसिस जेवियर पर कुछ कथित आपत्तिजनक कमेंट किए। कार्यक्रम आयोजन सनातन धर्म रक्षा समिति मोरमुगाओ का था। कार्यक्रम में राज्य के परिवहन मंत्री मौविन गोडिन्हो और BJP विधायक संकल्प अमोनकर और कृष्णा सालकर भी थे। कोर्तालिन ब्लॉक कांग्रेस समिति अध्यक्ष पीटर डिसूजा ने वास्को पुलिस स्टेशन में खट्टर के खिलाफ शिकायत की । शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस घटना से ईसाई समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और गोवा में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ा है।
हिंदू कार्यकर्ता ने ईसाई मिशनरी को ‘आतताई’ कहा तो गोवा में हो गया मुकदमा: जानें- सेंट जेवियर ने कैसे स्थानीय जनों पर ढाए थे जुल्म, क्यों हिंदुओं का इस पर बोलना जरूरी (ऑपइंडिया)
‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर के खिलाफ टिप्पणी करने पर हिंदू कार्यकर्ता गौतम खट्टर के खिलाफ मुकदमा हो गया, लेकिन उसने हिंदुओं पर जो अत्याचार किए उस पर बोलना जरूरी है।
गोवा में ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर पर दिए गए बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
यहाँ हिंदू कार्यकर्ता गौतम खट्टर ने जेवियर को ‘आतंकवादी’ और ‘बर्बर’ शासक बताया। इस बयान पर गोवा में विपक्षी पार्टी, खासकर कॉन्ग्रेस को आपत्ति है। कार्यकर्ता के खिलाफ धार्मिक भावनाएँ आहत करने को मुकदमा हो गया।
हिंदू कार्यकर्ता का ‘सेंट’ जेवियर को लेकर बयान
दरअसल, हिंदू संगठन सनातन महासंघ के संस्थापक गौतम खट्टर ने ‘सेंट’ जेवियर को लेकर यह बातें गोवा के वास्को डा गामा शहर में 18 अप्रैल 2026 को परशुराम जयंती के अवसर पर आयोजित एक समारोह में की हैं। 
गौतम खट्टर ने कहा, “आतंकवादी और बर्बर क्रूर शासक सेंट जेवियर को जहाँ दफनाया गया, उसके शरीर को कीड़े लग गए, न आत्मा बची और न शरीर बचा। उसकी हड्डियों को कीड़ों ने खाकर चूरा-चूरा कर दिया। उसके बाद भी उसका कोई त्योहार होता है, जिसमें लाखों सनातनी वहाँ हाथ जोड़ते हैं। जिसने पूरा जीवन लाखों सनातनियों को धर्मांतरण कराने में लगाया, वही सनातनी आज उसके त्योहार पर हाथ जोड़ने जाते हैं।”
वीडियो पर कॉन्ग्रेस की आपत्ति, FIR की कार्रवाई
इस बयान का वीडियो भी इंटरनेट पर वायरल हुआ। इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बयान बताया गया और इसे ‘हेट स्पीच’ कहा। कॉन्ग्रेस ने भी गौतम खट्टर के ‘सेंट’ जेवियर के बयान पर आपत्ति जताई।
गोवा कॉन्ग्रेस ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर गौतम खट्टर के बयान का वीडियो शेयर किया और लिखा, “हम सेंट फ्रांसिस जेवियर के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हैं। ऐसे बयान ईसाई समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाते हैं और गोवा की उस सामाजिक एकता को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिसके लिए राज्य हमेशा जाना जाता रहा है। हम प्रशासन से अपील करते हैं कि इस मामले में जल्द और जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई की जाए।”
इसके बाद कॉन्ग्रेस के विधायक पीटर डिसूजा ने वास्को पुलिस थाने गौतम खट्टर के खिलाफ शिकायत की। साउथ गोवा पुलिस अधीक्षक संतोष देसाई के मुताबिक, खट्टर के विरुद्ध धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मुकदमा लिखा गया है।
अब यहाँ जानना जरूरी है कि जिस फ्रांसिस जेवियर को ‘बर्बर शासक’ बताने पर कॉन्ग्रेस इसे धार्मिक भावनाओं की आहत होना बता रही है, उस फ्रांसिस जेवियर के कारनामे क्या हैं? कैसे वो भारत आया और उसने हिंदुओं के धर्मांतरण का मिशन शुरू किया और जिसने इन्कार किया तो उसको बद से बदतर सजा दी गई। और जिस गोवा को आज ईसाई के नाम से जाना जाता है, यह पहचान जेवियर ने ही थोपी थी।
‘सेंट’ जेवियर का धर्मांतरण मिशन
फ्रांसिस जेवियर 06 मई 1542 को भारत के गोवा पहुँचा। वह अकेला नहीं आया, बल्कि पुर्तगाली राजा जॉन III के समर्थन और आदेश से आया था। उस समय गोवा पूरी तरह पुर्तगाल के कब्जे में था और वहीं से पूरे एशिया में ईसाई मिशन चलाने की योजना बनाई गई थी।
गोवा पहुँचते ही जेवियर ने सबसे पहले बच्चों और गरीब वर्ग को निशाना बनाकर ईसाई का प्रचार शुरू किया। 1542 से 1545 के बीच उसने तटीय इलाकों, खासकर फिशरमैन समुदाय में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण अभियान चलाया। कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि पुर्तगाली शासन के दबाव और लालच में आकर स्थानीय हिंदू लोगों को अपना धर्म छोड़ने को मजबूर होना पड़ा।
1545 के बाद जेवियर ने गोवा को अपना बेस बनाकर मिशन और फैलाया। उसने बार-बार पुर्तगाल के शासकों को पत्र लिखकर यहाँ ” कड़े धार्मिक कानून’ लागू करने की माँग की, ताकि जो लोग धर्मांतरण नहीं कर रहें उन पर दबाव बनाया जा सके। यही वह समय था जब गोवा में संगठित कनवर्जन प्रक्रिया तेज हुई और चर्च का प्रभाव लगातार बढ़ता चला गया।
‘सेंट’ जेवियर की हिंदू-घृणा और हिंदुओं पर अत्याचार
‘सेंट’ जेवियर पर मौजूदा लेख बताते हैं कि उन्हें हिंदू से इतनी घृणा थी कि वह उन्हें विधर्मी, काफिर तक कहकर संबोधित करते थे। वहीं ब्राह्मणों से उन्हें इतनी दिक्कत थी कि उन्हें वो ‘धोखेबाज और झूठा’ बताकर पेश करते थे ताकि समाज का विश्वास उन पर से उठ जाए। इसके अलावा वो ईसाई धर्म में लोगों को लाने को ईसाई धर्म की खूबियों के अलावा ये बताते थे कि कैसे हिंदू और उनके देवी-देवता बुरे होते हैं।
फ्रांसिस के बारे में कहा जाता है कि उनके होते गोवा में इतनी तेजी से कनवर्जन बढ़ा था कि वो कई बार पूरे के पूरे गाँव को ईसाई बनवा देते थे। फिर हिंदू बच्चों को मंदिर में ले जाते थे और उनसे देवी-देवताओं को गाली देने को कहते थे, मूर्तियाँ तोड़ने, उन पर थूकने और उन्हें रौंदने को कहते थे। साथ ही उन कलाकारों को भी धमकी दी जाती थी जो मूर्तियाँ बनाते थे।
‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर ने गोवा पर जब पूरा कब्जा किया तो गैर इसाइयों के लिए स्थिति और बद्तर हो गई क्योंकि तब सत्ता ईसाई पादरियों के हाथ आ गई और हिंदू विरोधी कानून बनने शुरू हुए। कनवर्जन को नृशंस यातनाएँ दी जाने लगी। हिंदू माता पिता के सामने बच्चों के अंग काटे जाने लगे। वहीं जो कनवर्जन नहीं मानता था उसे सूली पर लटकाकर जलाना शुरू कर दिया गया।
इस तरह जेवियर के काल में कन्वर्जन किया गया और आगे चल कर जब इतिहासकारों ने सच्चाई लिखनी चाही तो उन्हें भी असहनीय यातनाएँ दी गईं। गोवा में एक ‘हाथकाटरो’ खंभ भी है। बताया जाता है कि ये हिंदुओं पर पुर्तगाली शासकों के बर्बरता का जीवंत साक्ष्य है। ईसाई हिंदुओं को इससे बाँधकर उनके अंग तोड़ते थे।
अब ‘सेंट’ जेवियर का काल बीते कई सदी हो चुकी हैं। आज ईसाई समुदाय जो हमें उनके बारे में बताता है हम उसी को जानते हैं लेकिन अगर लोगों की सुनी सुनाई बातों से हटकर खुद समझना चाहते हैं कि ‘सेंट’ जेवियर हिंदुओं के लिए सोच क्या रखते थे तो एक पत्र में लिखी बात पढ़िए जो उन्होंने 1545 में कोचीन से लिखी थी।
https://x.com/INCGoa/status/2045906222981743034?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2045906222981743034%7Ctwgr%5Ed12bab15b64257d809b80280945aa2e5cbf21fc5%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fm.dailyhunt.in%2Fnews%2Findia%2Fhindi%2Fopindiahindi-epaper-opindhi%2Fhindukaryakartaneisaimishanarikoaatataikahatogovamedarjhogayakesjanesentjeviyarnekaisesthaniylogopardhaethejulmkyohinduokaaisokekhilaphbolanajaruri-newsid-n709178404
कौन हैं गौतम खट्टर ?
गौतम खट्टर सनातन महासंघ के संस्थापक हैं। वह यूट्यूब के साथ सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। उनकी अधिक सक्रियता उत्तराखंड के हरिद्वार में रहती है। वह अपने यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया से सनातन धर्म,वेदों,भगवद्गीता और साधु-संतों से संबंधित वीडियो प्रसारित करते हैं। पिछले कुछ समय में वह इंटरनेट पर एक स्पिरिचुअल बीट जर्नलिस्ट और मोटिवेशनल स्पीकर बनकर उभरे हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार वह भारतीय संस्कृति का प्रचार करते हैं और उन्होंने हरिद्वार कुंभ 2021 में साधुओं के साक्षात्कार लिए थे। उनकी सनातन धर्म प्रचारक की पहचान हैं।
क्यों है सेंट फ्रांसिस जेवियर इतना विवादित 
सेंट फ्रांसिस जेवियर (St. Francis Xavier) के साथ मुख्य रूप से ‘गोवा इनक्विजिशन’ (Goa Inquisition) और धर्म परिवर्तन से जुड़े ऐतिहासिक विवाद जुड़े हुए हैं। जहाँ ईसाई समुदाय उन्हें एक महान प्रचारक और ‘गोवा का संरक्षक संत’ (Patron Saint of Goa) मानता है, वहीं कई इतिहासकार और विचारक उनके कार्यों की आलोचना करते हैं।
इन विवादों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. गोवा इनक्विजिशन (Goa Inquisition) की मांग
सेंट फ्रांसिस जेवियर के साथ सबसे बड़ा विवाद यह है कि उन्होंने ही पुर्तगाल के राजा जॉन III को पत्र लिखकर गोवा में इनक्विजिशन (मजहबी अदालत) स्थापित करने का अनुरोध किया था।
उद्देश्य: इसका प्राथमिक उद्देश्य उन लोगों को दंडित करना था जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था, लेकिन वे अभी भी गुप्त रूप से अपने पुराने रीति-रिवाजों (हिंदू या मुस्लिम) का पालन कर रहे थे।
परिणाम: हालांकि इनक्विजिशन उनके निधन (1552) के कुछ वर्षों बाद 1560 में औपचारिक रूप से शुरू हुआ, लेकिन इसकी नींव डालने का श्रेय उनकी मांग को दिया जाता है। इसके तहत हजारों लोगों पर मुकदमे चलाए गए और क्रूर यातनाएं दी गईं।
2. जबरन धर्म परिवर्तन और मंदिरों का विध्वंस
इतिहासकारों का एक वर्ग उन पर स्थानीय आबादी के सांस्कृतिक दमन का आरोप लगाता है:
मंदिरों का विनाश: पुर्तगाली शासन के दौरान कई हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया और उनकी जगह चर्च बनाए गए। आलोचकों का कहना है कि जेवियर ने इन गतिविधियों का समर्थन किया।
भाषा पर प्रतिबंध: कोंकणी और स्थानीय रीति-रिवाजों पर पाबंदी लगाई गई ताकि लोग पूरी तरह पुर्तगाली संस्कृति में ढल सकें।
कठोर दृष्टिकोण: उनके पत्रों से पता चलता है कि वे गैर-ईसाई धर्मों (विशेषकर हिंदू और इस्लाम) के प्रति बहुत सख्त और नकारात्मक दृष्टिकोण रखते थे, जिन्हें वे “अंधविश्वास” मानते थे।
’गोयंचो साहिब’ बनाम ‘आक्रमणकारी’: गोवा का एक बड़ा वर्ग (ईसाई और कई हिंदू भी) उन्हें ‘गोयंचो साहिब’ (गोवा का स्वामी) मानकर सम्मान देता है, जबकि अन्य उन्हें पुर्तगाली उपनिवेशवाद और धार्मिक अत्याचार का प्रतीक मानते हैं।
निष्कर्ष: सेंट फ्रांसिस जेवियर का इतिहास दो विपरीत पहलुओं में बँटा हुआ है। एक ओर वे शिक्षा और सेवा के लिए याद किए जाते हैं, तो दूसरी ओर धार्मिक असहिष्णुता और औपनिवेशिक क्रूरता के शुरुआती समर्थकों के रूप में उनकी आलोचना की जाती है।

