ढाबे खतरे में डाल रहे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे यात्रियों को

Delhi-Dehradun Expressway Safety Breach: Guard Rails Cut by Dhabas, Viral Video Warns of High-Speed Risks
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा से खिलवाड़: ढाबों ने काटी लोहे की रेलिंग, हाई-स्पीड ट्रैफिक के लिए खतरा
नई दिल्ली 10 मई 2026। एक कार यात्री के वीडियो  दावा किया गया है कि ढाबों के बनाए  अवैध गैप के कारण दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है।
Delhi-Dehradun Expressway Gaps Created By Dhabas – फोटो : Instagram/@Sudev Barar

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे ने 14 अप्रैल, 2026 को उद्घाटन के बाद से दोनों शहरों के बीच की यात्रा को बेहद सुगम बना दिया है। जहां पहले इस सफर में 6 घंटे से अधिक का समय लगता था, वहीं अब यह दूरी मात्र 2.5 घंटे में पूरी हो रही है। लेकिन, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने इस हाई-स्पीड मार्ग पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा से क्या समझौता हो रहा है?
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक्सप्रेसवे के किनारे लगी लोहे की ‘गार्ड रेल्स’ में खतरनाक दरारें या गैप दिखाई दे रहे हैं:

ढाबों की मनमानी: आरोप है कि एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित ढाबा संचालकों ने ग्राहकों की सीधी एंट्री- एग्जिट को इन गार्ड रेल्स को अवैध रूप से काट दिया है।

खतरनाक गैप: वीडियो में मात्र कुछ सौ मीटर की दूरी पर ऐसे दो अवैध कट दिख रहे हैं।

बैरियर का अभाव: गार्ड रेल्स का मुख्य काम वाहनों को सड़क से नीचे उतरने या पलटने से रोकना है। उन्हे काटकर अब दुर्घटनाओं से बचाव  पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

ये अवैध कट यात्रियों के लिए जानलेवा क्यों साबित हो सकते हैं?
तेज रफ्तार वाले इस एक्सप्रेसवे पर अचानक किसी वाहन का सामने आना बड़े हादसे को न्योता देता है:

प्रतिक्रिया का समय: एक्सप्रेसवे पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटा गति से चलते हैं। ऐसे में अचानक किसी ढाबे से निकलने वाले वाहन को देखकर ड्राइवर को संभलने का मौका नहीं मिलता।

अचानक ब्रेक और टक्कर: ढाबे के ग्राहकों या डिलीवरी वाहनों से तेज रफ्तार गाड़ियों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है या मुड़ना पड़ता है जिससे पीछे से टक्कर या नियंत्रण खोने का खतरा बढ़ जाता है।

विजिबिलिटी की समस्या: रात के समय या पीक ऑवर्स में ये अवैध कट और भी घातक हो जाते हैं। क्योंकि कम दृश्यता में अचानक घुसपैठ करने वाले वाहन ‘चेन-रिएक्शन’ दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बारे में महत्वपूर्ण बातें
यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत की एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना है:

निर्माण लागत: यह एक्सप्रेसवे लगभग 12,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार किया गया है।

मार्ग और दूरी: यह 213 किलोमीटर लंबा मार्ग दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर से शुरू होकर देहरादून तक जाता है।

प्रमुख शहर: यह उत्तर प्रदेश के बागपत, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर जैसे शहरों से होकर गुजरता है।

गति सीमा: इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम रफ्तार सीमा 120 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है।

एक्सप्रेसवे का निर्माण समय बचाने और सफर को सुरक्षित बनाने को किया गया है। लेकिन निजी लाभ को सुरक्षा उपकरणों (गार्ड रेल्स) से की जा रही यह छेड़छाड़ किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। यात्रियों ने अधिकारियों से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है।

एक्सप्रेसवे मौत का गलियारा ना बने’ सड़क दुर्घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट से कठोर नई गाइडलाइन बनाने को आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों को ‘मौत का गलियारा’ (corridor of peril) बनने से रोकने को नई कठोर गाइडलाइन जारी की हैं, जिसमें 60 दिनों में अवैध ढाबे और अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया गया है। 34 मौतों वाली दुर्घटनाओं के बाद कोर्ट ने कहा है कि सुरक्षित यात्रा नागरिकों का संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21) है।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य गाइडलाइन और निर्देश (अप्रैल 2026):
अवैध अतिक्रमण पर रोक: हाईवे और एक्सप्रेसवे के राइट ऑफ वे (Right of Way) से अवैध ढाबों, भोजनालयों और अन्य निर्माणों को 60 दिनों में हटाने का आदेश।
अवैध पार्किंग पर कठोर प्रतिबंध : भारी या व्यावसायिक वाहनों को नेशनल हाईवे के कैरेज वे (main road) या पक्के शोल्डर पर रोकने की मनाही।
60 दिनों की समयसीमा: जिला मजिस्ट्रेटों को 60 दिनों के भीतर इन आदेशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
सुरक्षा टास्क फोर्स: जिन जिलों से नेशनल हाईवे गुजरता है, वहां जिला मजिस्ट्रेट 15 दिनों के अंदर सुरक्षा टास्क फोर्स बनाएंगे।
ब्लैक स्पॉट की पहचान: NHAI और सड़क परिवहन मंत्रालय 45 दिनों में दुर्घटना संभावित ‘ब्लैक स्पॉट’ की सूची जारी कर उसे सुधारेंगे।
सुविधाएं: हर 75 किलोमीटर पर एम्बुलेंस और क्रेन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?
अदालत ने कहा कि देश के कुल सड़क नेटवर्क में नेशनल हाईवे केवल 2% हैं, लेकिन उन पर 30% से अधिक सड़क  दुर्घटनाएं  होती हैं। राजस्थान और तेलंगाना में नवंबर 2025 में हुई घातक दुर्घटनाओं के बाद कोर्ट ने यह स्वतः संज्ञान (suo motu) कार्यवाही की।

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