सोफ्टवेयर का मशीनी भाषांतरण: मतदाता सूची में RAMHIT YADAV बना “राम ने यादव को हिट किया”
वोटर लिस्ट में Ramhit Yadav की जगह ‘राम ने यादव को मारा’ कैसे हुआ, चुनाव आयोग ने खुद दी सफाई
उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में नामों की अजीबोगरीब गलतियों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने सफाई दी है. पहली बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के दौरान अंग्रेजी नामों को हिंदी में अनुवाद किए जाने से गड़बड़ियां हुईं. आयोग के अनुसार, 14 लाख प्रविष्टियों में से 158 में गलतियां हुईं. वहीं, पीलीभीत में 10,470 वोटर एंट्री में अनियमितताएं मिलने पर दो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए और कंप्यूटर ऑपरेटर को बर्खास्त कर दिया गया.
वोटर लिस्ट में नामों में गड़बड़ी पर चुनाव आयोग ने खुद बताई वजह
- लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026,उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में नामों की अजीबोगरीब गलतियों को लेकर चुनाव आयोग ने सफाई दी है. कहीं रामहित यादव का नाम सॉफ्टवेयर की गलती से ‘राम ने यादव को मारा’ बन गया, तो कहीं मतदाता के पिता के नाम की जगह ‘B Com’ लिखा है. यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में पहली बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू की गई थी. इसी दौरान अंग्रेजी में लिखे नामों को हिंदी में बदलने की प्रक्रिया में कुछ गलतियां सामने आईं.
आयोग ने कुल 14,81,310 प्रविष्टियों में से 158 में ऐसी गड़बड़ियां मिलने की बात कही है. उधर, पीलीभीत में मतदाता सूची की 10,470 प्रविष्टियों में गड़बड़ी के मामले में दो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और एक कंप्यूटर ऑपरेटर की बर्खास्तगी की गई है. उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मतदाता सूची में नामों की गलतियों के पीछे की वजह बताई है. कार्यालय के मुताबिक, प्रदेश में विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए पहली बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू की गई थी.
नई प्रक्रिया के दौरान कुछ तकनीकी और मानवीय गलतियां सामने आईं. आयोग के मुताबिक, अंग्रेजी में टाइप किए गए नामों को हिंदी में अनुवाद करते समय सॉफ्टवेयर ने गलती कर दी. इसी का उदाहरण देते हुए आयोग ने बताया कि यदि ‘Ramhit Yadav’ को अंग्रेजी में सही नाम के रूप में दर्ज करने के बजाय ‘Ram hit Yadav’ टाइप कर दिया गया, तो सॉफ्टवेयर ने इसका अर्थ ‘राम ने यादव को मारा’ कर दिया. यानी नाम को उसकी वास्तविक ध्वनि के आधार पर हिंदी में लिखने के बजाय शब्दों के अर्थ के आधार पर बदल दिया गया.
सुधार की व्यवस्था थी, फिर भी कैसे रह गई गलती
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, सॉफ्टवेयर से हुई ऐसी गलतियों को ठीक करने की व्यवस्था मौजूद थी. इसके बावजूद सतर्कता नहीं बरते जाने के कारण कुछ गलतियां मतदाता सूची में बनी रह गईं. आयोग ने यह भी बताया कि एक मतदाता के पिता के नाम की जगह ‘B Com’ दर्ज होना मानवीय भूल या लापरवाही का मामला है.
मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी तय करते हुए आयोग ने बताया कि निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) की जिम्मेदारी मंडलायुक्त की है, जबकि संबंधित जिले के जिलाधिकारी सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (AERO) हैं. मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की है. इस मामले में संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. साथ ही, जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन गलतियों की वजह से किसी मतदाता को परेशानी न हो और आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जाएं.
पीलीभीत में 10,470 वोटर एंट्री में मिली अनियमितताएं
नामों की गलतियों के बीच पीलीभीत की मतदाता सूची में भी गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है. पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के विवरण में बदलाव से संबंधित 10,470 प्रविष्टियों में गड़बड़ी मिलने के बाद चुनाव अधिकारियों ने दो मौजूदा और पूर्व निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. वहीं, कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मतदाता पंजीकरण केंद्र में तैनात कंप्यूटर सहायक ने 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच फॉर्म-8 के कुल 13,779 आवेदन दर्ज किए थे. इनमें से 10,470 आवेदन स्वीकृत किए गए, जबकि 3,309 आवेदन खारिज कर दिए गए. जांच के दौरान इन प्रविष्टियों से संबंधित आवेदन फॉर्म और सहायक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले. इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर सहायक की भूमिका की जांच की गई.
दो एसडीएम के खिलाफ विभागीय जांच, कानूनी कार्रवाई के आदेश
पीलीभीत के जिलाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है. जांच के दायरे में आने वाली अवधि के दौरान दोनों अधिकारी मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. फिलहाल, दोनों को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है. निर्वाचन अधिकारियों ने संबंधित कंप्यूटर सहायक और दोनों ERO के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 तथा भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
एक जैसे EPIC नंबर को लेकर भी उठा था सवाल
पीलीभीत में विवाद तब बढ़ा, जब शिकायतें सामने आईं कि कुछ मतदाताओं के निर्वाचन फोटो पहचान पत्र यानी EPIC नंबर पर दूसरे मतदाताओं का विवरण दिखाई दे रहा था. कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर समान थे, जबकि उनके नाम और पिता के नाम अलग-अलग थे. समाजवादी पार्टी ने भी इस मामले में सवाल उठाए थे. इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को मतदाता सूची से जुड़े कार्यों से तत्काल हटाने और कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए. चुनाव अधिकारियों ने कंप्यूटर सहायक की ओर से 10 अप्रैल से 21 अक्टूबर के बीच दर्ज किए गए सभी फॉर्म-6 और फॉर्म-7 आवेदनों की विस्तृत जांच करने को भी कहा है. इसकी रिपोर्ट एक दिन के भीतर मांगी गई है. फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए, जबकि फॉर्म-7 का इस्तेमाल सूची से नाम हटाने के लिए किया जाता है. वहीं, फॉर्म-8 के तहत की गई अनियमित प्रविष्टियों को निर्धारित नियमों के अनुसार ठीक करने की प्रक्रिया जारी है.

