हत्यारी बन रही हैं महिलायें? आंकड़े बताते हैं कुछ और ही परिदृश्य
सिया, सोनम, मुस्कान…हत्यारी पत्नियों की ख़बर से इतर आंकड़े दिखाते हैं बिल्कुल अलग दृश्य!
सिया, सोनम, मुस्कान…क़ातिल पत्नियों की ख़बर से इतर डेटा दिखाता है बिल्कुल अलग पिक्चर!हाल ही में कुछ मामले आए हैं, जिनके बाद महिलाओं को ‘विलेन’ के तौर पर पेश किया जा रहा है. लेकिन कुछ आंकड़े हैं जो पुरुषों की ‘पशुता’ बयां बताते हैं।
महिलाओं की हत्या के 60% मामलों में आरोपित पति/प्रेमी/मित्र या सम्बंधी होता है.
नई दिल्ली:
अतुल सुभाष… सौरभ राजपूत… राजा रघुवंशी… और अब केतन अग्रवाल… साल-डेढ़ साल में सामने आए ये कुछ मामले हैं, जिनमें इनकी मौत का कारण पत्नी या मंगेतर थी. अतुल सुभाष ने पत्नी निकिता पर आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली थी. सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान ने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या कर दी थी और ड्रम में भर दिया था. इंदौर के राजा रघुवंशी को पत्नी सोनम ने कथित तौर पर दोस्तों के साथ मिलकर मार डाला. वहीं, अब केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप मंगेतर सिया गोयल पर लगा है.
ये कुछ ऐसे मामले हैं, जिनके सामने आने के बाद महिलाओं को आम चर्चाओं में ‘विलेन’ बना दिया गया. सोशल मीडिया से लेकर गली-चौबारों तक लोग इन मामलों की चर्चा कर रहे हैं. लेकिन ये चर्चाएं तस्वीर के सिर्फ एक पहलू तक ही सीमित रह जाती हैं. असल आंकड़े पूरी कहानी बताते हैं. निकिता, मुस्कान, सोनम और सिया को लेकर हो रही इन चर्चाओं के बीच लोग उस खालिद नबी की चर्चा नहीं कर रहे हैं, जिसे 18 जून को ही पुलिस ने मुंबई से इसलिए पकड़ा, क्योंकि उस पर अपनी पत्नी रुखसार की हत्या का आरोप है. खालिद ने रुखसार को सिर्फ इसलिए मार डाला, क्योंकि उसे संदेह था कि उसकी पत्नी का किसी और के साथ चक्कर है और इसे लेकर आए दिन दोनों में झगड़ा होता रहता था.
केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप मंगेतर सिया पर लगा है.
पति या पार्टनर कितने खतरनाक?
कुछ आंकड़े हैं जो पति या अंतरंग मित्र की पशुता बताते हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि 2024 में 1,21,166 महिलाएं ऐसी थीं, जो पति या ससुराल वालों की क्रूरता का शिकार हुई थीं.इतना ही नहीं, देशभर में 5,811 महिलाओं की दहेज को हत्या कर दी गई थी. इसका मतलब हुआ कि देश में हर दिन औसतन 16 महिलाओं की हत्या हुई.
NCRB की ही रिपोर्ट बताती है कि 2024 में देशभर में बलात्कार के 29,536 मामले सामने आए थे. इनमें से 13,879 मामले ऐसे थे, जिनमें रेप करने वाला पूर्व पति था या लिव-इन पार्टनर था या शादी का वादा किया हुए था.
मर्डर के आंकड़े भी चौंकाते हैं?
अक्सर कहा जाता है कि धोखा अपने ही देते हैं. और अगर आप महिला हैं तो आपको अपनों से धोखा मिलना लगभग-लगभग तय है.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि महिलाओं के परिचित ही सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं. पिछले साल संयुक्त राष्ट्र की ‘FEMICIDES IN 2024’ रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 2024 में दुनियाभर में 83 हजार महिलाओं की हत्या हुई थी, जिनमें से 50 हजार महिलाओं की हत्या उनके साथी या किसी संबंधी ने की थी.
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दुनियाभर में जितनी हत्याएं होती हैं, उनमें से 80% विक्टिम पुरुष और 20% महिलाएं होती हैं. लेकिन ज्यादातर पुरुषों की हत्या में आरोपित कोई बाहरी ही होता है. लेकिन महिलाओं के साथ ऐसा नहीं है. ज्यादातर महिलाओं की हत्या गृह परिसर में और परिचित लोग ही करते हैं.
UN की रिपोर्ट बताती है कि 2024 में जितनी महिलाओं की हत्या हुई, उनमें से 50 हजार यानी लगभग 60% में आरोपी उनका पार्टनर या रिश्तेदार था. इसका मतलब हुआ कि हर दिन 137 या हर 10 मिनट में एक महिला की हत्या उसके पार्टनर या किसी रिश्तेदार ने कर दी.
रिपोर्ट कहती है कि कुल मिलाकर, 2024 में 60% महिलाओं की हत्या में उनके पार्टनर या करीबी का हाथ था. जबकि सिर्फ 11% पुरुषों की हत्या उनकी पार्टनर या किसी रिश्तेदार ने की थी.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पार्टनर या किसी रिश्तेदार के हाथों सबसे ज्यादा महिलाओं की मौत अफ्रीका में होती है. दूसरे नंबर पर एशिया है. 2024 में अफ्रीका में 22,600 और एशिया में 17,400 महिलाओं की हत्या उनके पार्टनर या किसी रिश्तेदार ने की थी.
और हिंसा का तो जवाब नहीं!
NCRB के मुताबिक, 2024 में देशभर में घरेलू हिंसा कानून के तहत 625 मामले दर्ज किए गए थे. ये मामले तो दर्ज हो गए, लेकिन बहुत से मामले ऐसे होते हैं जो दर्ज ही नहीं होते.
आंकड़े बताते हैं कि घरों में ज्यादातर महिलाएं हिंसा को झेलती रहती हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़े बताते हैं कि 18 से 49 साल की उम्र की 32 फीसदी शादीशुदा महिलाओं ने कभी न कभी पति की शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा या फिर भावनात्मक हिंसा को झेला है.
सर्वे के दौरान 82% महिलाओं ने बताया था कि उन्होंने कभी न कभी अपने पति की यौन हिंसा का सामना किया है.
अंतरराष्ट्रीय आंकड़े बताते हैं कि भारतीय महिलाएं पति की हिंसा बहुत झेलती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 2023 तक के आंकड़े बताते हैं कि 15 से 49 वर्ष आयु की 30% महिलाएं कभी न कभी अपने पति या पार्टनर की हिंसा की शिकार हुई थीं. इस मामले में भारतीय महिलाओं की हालत पाकिस्तानी महिलाओं से भी ज्यादा खराब है. WHO की रिपोर्ट के अनुसार इसी आयु की 25 प्रतिशत पाकिस्तानी महिलाओं ने पति या पार्टनर की हिंसा झेली . जबकि, बांग्लादेश में 50 प्रतिशत महिलाओं को ये सब झेलना पड़ा.
आंकड़े पुरुषों की ‘पशुता’ बताते हैं । सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में महिलाओं को अपने पति, संगी या किसी संबंधी की हिंसा का शिकार होना पड़ता है.
घरों में कितनी ‘चिरैया’, 100 में 6 महिलाएं झेलती हैं पति की यौन हिंसा
हाल ही में रिलीज ‘चिरैया’ वेब सीरीज चर्चा में है. सीरीज में मैरिटल रेप का मुद्दा उठाया गया है. ऐसे में जानते हैं कि भारत में मैरिटल रेप को लेकर आंकड़े क्या कहते हैं?
अगर किसी लड़की की शादी हो गई है तो क्या उसकी ‘न’ की कोई कीमत नहीं रह जाती? इसी सवाल पर वेब सीरीज है- ‘चिरैया’. सीरीज समाज के उस घिनौने सच ‘मैरिटल रेप’ की बात करती है, जिसके बारे में लोग बात भी नहीं करते. क्योंकि बहुतों को लगता है कि ‘मैरिटल रेप’ जैसी कोई चीज होती ही नहीं है. इस सीरीज में दिखाया गया है कि लड़की की अरेंज मैरिज है. शादी बाद उसका पति उसकी इच्छा या फिर सहमति बिना बार-बार उससे शारीरिक संबंध बनाता है. वह उसे छोड़कर जाना तो चाहती है लेकिन घर-परिवार उसे ऐसा करने नहीं देता. वह उसे जेल भी भेजना चाहती है लेकिन कानून इसकी अनुमति नहीं देता.
6 एपिसोड वाली ‘चिरैया’ वेबसीरीज में दिखाये गये को आज भी समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग भले ही न माने लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ये न मानी जाने वाली ‘चीज’ समाज में मौजूद है.आंकड़े और किसी के नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) के हैं.
सर्वे 2019-21 में हुआ सर्वे बताता है कि 18 से 49 वर्ष आयु की 32 प्रतिशत विवाहित महिलाओं ने कभी न कभी अपने पति की शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा या फिर भावनात्मक हिंसा झेली है. सर्वे के अनुसार,इस आयु की 28% महिलाओं पर शारीरिक हिंसा तो 14% पर भावनात्मक हिंसा पीड़ित हैं, जबकि 6% महिलाओं ने यौन हिंसा झेली है.
NFHS-5 का सर्वे में पति की हिंसा पर विभिन्न आंकड़े हैं. सर्वे में 18 से 49 वर्ष आयु की 6.3% विवाहित महिलाओं पर कभी न कभी पति की यौन हिंसा हुई है. इन्हीं में से 5.2% महिलाएं अक्सर या कभी-कभी यौन हिंसा से गुजरती हैं.
सर्वे में 5% महिलाओं के पति ने उनसे मारपीट करके जबरदस्ती यौन संबंध बनाए,जबकि 4% महिलाओं को डरा-धमकाकर जबरन यौन कृत्य को मजबूर किया. वहीं, 2% से ज्यादा महिलाओं से पति ने उनकी मर्जी के बगैर यौन कृत्य को मजबूर किया.
सर्वे के अनुसार अलपायु पत्नी से यौन हिंसा ज्यादा होती है. 18 से 19 वर्ष आयु की 7.1% विवाहित महिलाओं ने अपने साथ यौन हिंसा मानी.
शहरों की तुलना में ग्रामीण महिलाओं से यौन हिंसा ज्यादा होती हैं. शहरों में 4.8% तो गांव में 6.9% महिलाओं को यौन हिंसा झेलनी पड़ती है.
शराबी पति के अपनी पत्नी से यौन हिंसा के अवसर ज्यादा हैं. सर्वे के अनुसार, यौन हिंसा पीड़ित 25.5% महिलाओं ने बताया कि उनका पति अक्सर शराब पीता है. 11 प्रतिशत महिलाओं के पति कभी-कभी शराब पीते है. इतना ही नहीं, अशिक्षित पति भी पत्नी से यौन हिंसा करते हैं. यौन हिंसा की शिकार 9.3% महिलाओं के पति अशिक्षित निकले.
सर्वे में 82% महिलाओं से पति ने ही यौन हिंसा की थी. 14 प्रतिशत महिलाओं से उनके पूर्व पति ने यौन हिंसा की थी.
मदद भी नहीं मांग पातीं महिलाएं
‘चिरैया’ सीरीज में लड़की अपने साथ हुए ‘मैरिटल रेप’ की शिकायत अपनी जेठानी से करती है तो वह उसे जोरदार थप्पड़ मारती है.लड़की अपने घर जाती है तो मां उसे वापस ससुराल भेज धमकी देती है कि अगर वह ससुराल नहीं गई तो वह अपनी नस काट लेगी. यह दिखाता है कि लड़की अपने साथ दुर्व्यवहार में मदद मांगती भी है तो कोई मदद करता नहीं है.
आंकड़े भी बताते हैं कि बहुत कम महिलाएं ही ऐसी हैं जो अपने साथ ज्यादती में किसी से मदद मांगती हैं. यौन हिंसा की शिकार सिर्फ 14 प्रतिशत महिलाएं ने ही कभी किसी से मदद मांगी है.
सर्वे के अनुसार, यौन हिंसा झेलने वालीं 58% महिलाओं ने अपने परिवार से मदद मांगी जबकि,14 प्रतिशत महिलाओं ने अपने ससुराल वालों से मदद मांगी. हैरानी यह है कि अपने साथ यौन हिंसा में वकील या सामाजिक संगठन से मदद मांगने वालीं महिलाओं का प्रतिशत 0 है.
चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े…!
सर्वे के आंकड़े चिंता भी बढ़ाते हैं और डराते भी हैं. 82 प्रतिशत महिलायें ही अपने पति को यौन संबंध बनाने से मना कर सकती हैं. 11 प्रतिशत महिलाएं मानती हैं कि अगर वह अपने पति को यौन संबंध बनाने से मना करती हैं तो उनका पति उन्है पीट सकता है.जबकि 10 प्रतिशत पुरुष यौन संबंध बनाने से मना करने पर पत्नी की पिटाई उचित ठहराते हैं.
और तो और, सर्वे में शामिल 12.2% पुरुषों के अनुसार पत्नी यौन संबंधों से मना करे तो वह उससे जबरदस्ती संबंध बना सकते हैं.12.6% पुरुषों का मानना है कि पत्नी मना करे तो वह दूसरी महिला से यौन संबंध बना सकते हैं. 19 प्रतिशत से ज्यादा पुरुष मानते हैं कि पत्नी मना करे तो वह उस पर गुस्सा हो सकते हैं और उसे डांट-फटकार लगा सकते हैं.
वैवाहिक बलात्कार पर कोई कानून नहीं
वैवाहिकी बलात्कार सीधी सी परिभाषा है कि कोई पति पत्नी की सहमति या इच्छा बिना यौन संबंध बनाता है तो उसे ‘वैवाहिक बलात्कार” माना जाएगा.
किसी महिला से कोई दूसरा पुरुष जबरदस्ती करे तो इसके खिलाफ तो कानून है लेकिन अपना पति ही जबरदस्ती करे तो इसे लेकर कोई कानून नहीं है.वैवाहिक बलात्कार के खिलाफ कानून की मांग बहुत पहले से हो रही है. लेकिन केंद्र सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में साफ कर चुकी है कि वैवाहिक बलात्कार पर कानून शादी जैसी ‘पवित्र संस्था’ अस्थिर कर देगा.
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 में बलात्कार और उसको सजा का प्रावधान है. लेकिन इसी धारा में एक अपवाद भी है जो वैवाहिक बलात्कार को अपराध नहीं बनाता.अपवाद है- ‘अगर पत्नी की उम्र 18 साल से कम नहीं है तो पति का अपनी ही पत्नी के साथ किया गया यौन संबंध या यौन कृत्य बलात्कार नहीं माना जा सकता.’
कोई कानून नहीं होने से बहुत सी महिलाएं चाहकर भी कुछ नहीं कर पातीं. ‘चिरैया’ सीरीज में ही इसकी मुख्य चरित्र कहती है कि ‘मेरे साथ जो हुआ है न, उसके खिलाफ कानून बनने तक मैं इंतजार करूंगी…’
