मुरूडेश्वर मंदिरजिन लोगों ने दुनिया मे सिर्फ 7 अजूबे घोषित किये थे शायद उन्होंने कभी भारत के मंदिरों के दर्शन करने का सौभाग्य ही नहीं होगा!

गर्व से कहिये हम सनातनी हिन्दू है हमारी संस्कृति हमारी विरासत पर गर्व कीजिये ,दर्शन कीजिये
245 फीट ऊंचा महान मुरूडेश्वर मंदिर का जिक्र रामायण काल से है, इसकी प्राचीनता का कोई अनुमान नही की यह वास्तव में कितने वर्ष प्राचीन है, शायद हजारो वर्ष या इससे भी प्राचीन ….

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है ….
मुरुदेश्वर (कन्नड : ಮುರುಡೇಶ್ವರ) दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में उत्तर कन्नड जिले के भटकल तहसील स्थित एक कस्बा है। ‘मुरुदेश्वर’ भगवान शिव का एक नाम है। यहाँ भगवान शंकर की विश्व की दूसरी सबसे ऊँची मूर्ति स्थित है। यह कस्बा अरब सागर के तट पर स्थित है और मंगलुरु से १६५ किलोमीटर दूर अरब सागर के किनारे बहुत ही सुन्दर एवं शांत स्थान पर बना हुआ है। मुरुदेश्वर सागरतट, कर्णाटक के सब से सुन्दर तटों में से एक है। पर्यटकों के लिए यहाँ आना दोगुना लाभप्रद रहता है, जहां एक ओर इस धार्मिक स्थल के दर्शन होते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राकृतिक सुन्दरता का आनन्द भी मिलता है।

मुरुदेश्वर मंगलुरु-मुम्बई रेलपथ पर स्थित एक रेलवे स्टेशन भी है।

मुरुदेश्वर मन्दिर परिसर के पीछे एक दुर्ग है जो विजयनगर साम्राज्य के काल का है।

यकीनन जिन लोगों ने दुनिया मे सिर्फ 7 अजूबे घोषित किये थे शायद उन्होंने कभी भारत के मंदिरों के दर्शन करने का सौभाग्य ही नहीं होगा!

राजगोपुरम श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर,
श्रीरंगम तिरुच्चिरापल्ली, तमिलनाडु|
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हर हर महादेव 🙏🔱🙏

हमारे पूर्वजों ने 1,200 साल पहले हथौड़ों और छेनी से थोड़ा अधिक कठोर बेसाल्ट पत्थरों में खड़ी नक्काशी की और दुनिया के सबसे बड़े प्राचीन धार्मिक गुफा परिसरों में से एक का निर्माण किया।

सुंदर कैलासा मंदिर एक अखंड संरचना है जो लंबवत रूप से नीचे की ओर बनाई गई थी और इस प्रक्रिया में लगभग 2,00,000 टन चट्टान की खुदाई की गई थी। यह सुंदर मंदिर एलोरा गुफाओं की गुफा संख्या 16 में स्थित है।

Har Har Mahadev 🙏🔱🙏

Our Ancestors carved vertically into the tough basalt stones with little more than hammers and chisels, more than 1,200 years ago and created the one of the largest ancient religious cave complexes in the world.

Beautiful Kailasa temple a monolithic structure which was built vertically downwards & in the process roughly 2,00,000 tonnes of rock were excavated .This beautiful temple is located in the cave no 16 of Ellora caves. Maharashtra
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जय सनातन संस्कृति 🚩🚩

कभी सोचा है कि उन प्राचीन काल में उन्होंने इतनी ऊंचाइयों पर कैसे काम किया?

इस मंदिर के शिखर पर पूरी रामायण की नक्काशी है। जरा सोचिए हम जिन मूर्तियों की संख्या को कागजों पर नोट किये बिना गिन नहीं सकते उन्हें आधुनिक मशीनों की गैरमौजूदगी में बनाने वाले कितने महान रहे होंगे ।

(रामास्वामी मंदिर, आन्ध्रप्रदेश)
Ever wondered how he worked at such heights in those ancient times?

There is a carving of the entire Ramayana on the top of this temple. Just imagine how great it must have been to have made the sculptures in the absence of modern machines, the number of which we cannot count without noting on paper.

(Ramaswamy Temple, Andhra Pradesh)
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Divine Colors of Eternal Devotion…..

Shri Ranganathaswamy Mandir, Srirangam.
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