PACL:दूधिये भंगू ने ठगे 5.5 करोड़ लोगों से 60000 करोड़,चलाया P7चैनल,मरा जेल में
दूधिये ने की 60000 करोड़ की ठगी! सहारा की तरह मिडिल क्लास बनाया निशाना
दूध वाले ने कर डाली 600000000000 ₹ की ठगी! सहारा की तरह मिडिल क्लास बनायी निशाना, क्या लोगों को वापस मिलेगा पैसा?
चंडीगढ़ 23 मार्च 2026। भारत में बड़े-बड़े घोटालों की सूची में एक नाम जरूर सुनाई देता है निर्मल सिंह भंगू और उनका PACL (पर्ल एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड) ठगी. एक साधारण दूध विक्रेता , (पंजाब के छोटे से गांव बेला), कैसे करोड़ों लोगों की जमा-पूंजी लूट राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था हिला सकता है? यह लोभ, धोखे और करोड़ों परिवारों की टूटी आशा का मामला है. अब फिर यह मामला चर्चा में आया जब 20 मार्च 2026 को ED ने बड़ी कार्रवाई की. ED ने कुल 22,656.91 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की है. ED के अनुसार यह एक ही मामले में अब तक की सबसे बड़ी जब्ती और एजेंसी के इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई है.
एक दूधिया जिसने 60,000 करोड़ का घोटाला कर पूरे देश की इकोनॉमी ही हिला कर रख दी, जब भी देश में बड़े-बड़े घोटालों की बात आयैगी तो इस व्यक्ति और स्कैम का नाम भी जरूर आता है. करोड़ों रुपये घोटाले ने निवेशकों की नींद उठा दी. पीएसीएल (PACL) यानी पर्ल एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड स्कैम दूध विक्रेता निर्मल सिंह भंगू ने किया था. मामला एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि 20 मार्च 2026 को ED ने बड़ी कार्रवाई की. ED ने पंजाब और दिल्ली में PACL से जुड़ी 5,046.91 करोड़ की 126 अचल संपत्तियां जब्त की. इस एक्शन से केस में कुल जब्त संपत्तियों का मूल्य बढ़कर 22,656.91 करोड़ रुपये हो गया है. ED के अनुसार यह एक ही मामले में अब तक की सबसे बड़ी अटैचमेंट है और ये एजेंसी के इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई.
दूध वाले ने की 60000 करोड़ की ठगी सहारा की तरह मिडिल क्लास को बनाया निशाना
पीएसीएल PACL यानी पर्ल एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड स्कैम दूधिये निर्मल सिंह भंगू ने किया था.
घोटले की शुरुआत पंजाब के रूपनगर जिले के बेला गांव के निर्मल सिंह भंगू ने की. वह दूध व्यवसाई था. 1990 के दशक में उसने PACL लिमिटेड शुरू की. कंपनी ने खुद को कृषि भूमि बेचने और विकसित करने वाली फर्म बताया. लोग छोटी-छोटी किस्तों में या कैश में पैसे देते थे, और बदले में कृषि जमीन का प्लॉट मिलने का वादा किया जाता था. कंपनी जिस जमीन में निवेश का दावा करती थी, उसके कोई पुख्ता कागज या सेल डीड निवेशकों को नहीं दिखाए जाते थे. लोगों को सिर्फ एक साधारण रिसीट दी जाती थी, जो ज्यादा भरोसेमंद नहीं होती थी.
10 साल में पैसा 4 गुना करने का वादा
कंपनी कहती थी कि वह देश के किसी भी हिस्से में जमीन खरीदेगी, लेकिन निवेशकों को इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि उन्हें फिक्स रिटर्न का लालच मिलता था. कंपनी का दावा था कि 5 साल बाद निवेशक चाहें तो पैसा ले सकते हैं या जमीन ले सकते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग सिर्फ रिटर्न पर ही ध्यान देते थे. इतना ही नहीं, 10 साल में पैसा 4 गुना करने का वादा भी था, जिसने लोगों को तेजी से आकर्षित किया.
पोंजी स्कीम से निवेशकों को लुभाया
यह एक पोंजी स्कीम थी और इसे वैसे ही चलाया गया. शुरुआत में कंपनी ने कुछ निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा और वे दूसरों को भी जोड़ने लगे.नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान हो रहा था. ज्यादा रिटर्न देखकर और लोग इसमें पैसा लगाने लगे. स्कीम फैलाने को कंपनी ने पिरामिड मॉडल अपनाया, जिसमें हर व्यक्ति को अपने नीचे नए लोग जोड़ने होते थे. एजेंट्स को मोटा कमीशन मिलता था, जिससे वे अपने परीचितों को इसमें शामिल करते गए. लोग आकर्षित करने को कंपनी बड़े-बड़े सेमिनार भी करती थी, जहां निवेश के फायदे गिनाए जाते थे.
कंपनी का दावा था कि वह 1983 से काम कर रही है, जबकि इसकी शुरुआत 1996 में हुई थी. 1983 में पर्ल्स ग्रुप की एक दूसरी कंपनी PGF शुरू हुई थी, जिसका सहारा लेकर लोगों का भरोसा जीता गया. निवेशकों को यह भी कहा जाता था कि कंपनी बंद हो जाए तो वे अपनी रसीद लेकर कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री (MCA) जा सकते हैं, क्योंकि कंपनी वहां रजिस्टर्ड है. लेकिन सच्चाई यह थी कि वह रसीद किसी कानूनी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती थी और निवेशकों के लिए बेकार सिद्ध हुई.
एग्रीकल्चरल इनकम का लालच
कंपनी ने देशभर में 70 लाख एजेंट्स बनाये. ये एजेंट ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में घूम-घूम लोगों को लुभाते थे. टैक्स-फ्री “एग्रीकल्चरल इनकम” का लालच देते थे. कुल मिलाकर कंपनी ने 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए, जिसमें से 48,000 करोड़ रुपये निवेशकों को आज तक नहीं लौटाए गए. घोटाला प्रभावित 5.5 करोड़ में ज्यादातर ग्रामीण और मिडिल क्लास हैं, जिन्होंने अपनी सारी जमा-पूंजी इसमें लगा दी.
सुप्रीम कोर्ट ने लिया महत्वपूर्ण फैसला
1998-99 में ऐसी कई स्कीमों की शिकायतों के बाद सेबी ने “कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम (CIS) रेगुलेशन” लागू किया. इसमें कंपनियों को निवेशकों से जुटाए पैसे का सही इस्तेमाल कर उससे मिला रिटर्न ट्रांसपरेंट तरीके से देना होता है. जांच में सेबी ने पाया कि PACL और PGF इन नियमों का पालन नहीं कर रही थीं।तब सेबी ने दोनों कंपनियां बंद कर निवेशकों का पैसा लौटाने का निर्देश दिया.
मामला आगे बढ़ने पर सेबी सुप्रीम कोर्ट पहुंची और 25 फरवरी 2013 को कोर्ट ने साफ कहा कि यह कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम (CIS) है, इसलिए सेबी को जांच और कार्रवाई का अधिकार है. इस बीच PACL के प्रमोटर्स निवेशकों के पैसों से अपनी संपत्तियां बढ़ाते रहे. कंपनी ने न्यूज चैनल P7 भी शुरू किया, जिससे लोगों का भरोसा बना रहे. इतना ही नहीं, कंपनी आईपीएल टीम किंग्स इलेवन पंजाब की स्पॉन्सर भी बनी और क्रिकेटर ब्रेट ली को ब्रांड एंबेसडर बनाया गया. लंबे समय तक मामला कोर्ट में चलता रहा, इसी बीच कंपनी ने तेजी से पैसे जुटा 5.5 करोड़ लोग इस घोटाले का शिकार बनाए, जिनमें पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के लोग बड़ी संख्या में शामिल थे.
निर्मल सिंह भंगू गिरफ्तार
22 अगस्त 2014 को सेबी ने जांच बाद कंपनी को निवेशकों का पैसा लौटाने का आदेश दिया, लेकिन PACL ने इसका पालन नहीं किया. मामला ED के पास गया, जिसने कंपनी प्रमुख निर्मल सिंह भंगू से पूछताछ कर उनकी संपत्तियां अटैच करनी शुरू की. जांच में ऑस्ट्रेलिया में 500 करोड़ रुपये की संपत्ति समेत कई अन्य असेट्स का पता चला, तब रिफंड प्रक्रिया हुई. 2016 में CBI ने निर्मल सिंह भंगू गिरफ्तार किया. जांच में 1300 संदिग्ध बैंक खाते मिले और 280 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त हुईं. साथ ही 108 करोड़ रुपये दिल्ली हाईकोर्ट में जमा कराए गए. एजेंसी को 20 हजार करोड़ रुपये से जुड़े डॉक्यूमेंट्स भी मिले, जिनकी वैल्यू 5000 करोड़ रुपये आंकी गई.
सहारा ग्रुप जैसा मामला
यह स्कीम सहारा ग्रुप के घोटाले से मिलती-जुलती है. सहारा ने भी छोटी रकम इकट्ठी कर रिटर्न या जमीन का वादा किया था. PACL ने भी मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) स्टाइल काम किया, लेकिन निवेशकों को जमीन कभी नहीं मिली. पता चला कि निवेशकों के पैसे से कंपनी ने खुद की संपत्तियां खरीदीं. भारत में जमीनें, इमारतें और विदेश में भी खरीद डाली. ED का कहना है कि ये सभी संपत्तियां “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” हैं, यानी ठगी के पैसों से बनी हैं.
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो आदेश पर CBI ने FIR दर्ज की. CBI ने PACL, निर्मल सिंह भंगू और अन्य के खिलाफ केस किया. ED ने 2016 में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का केस शुरू किया. भंगू 2016 में पकड़ तिहाड़ जेल में डाला गया. स्वास्थ्य बिगड़ा तो पश्चिमी दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल लाया गया, जहां 26 अगस्त 2024 को उसकी मौत हो गई. ED ने अब तक पांच चार्जशीट की हैं. स्पेशल PMLA कोर्ट ने इन्हें संज्ञान लिया है.
लोगों को मिली उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में पूर्व CJI जस्टिस आरएम लोधा की अध्यक्षता में कमिटी बनाई जिसका काम PACL की संपत्तियां बेचकर निवेशकों को पैसे लौटाना था, लेकिन जांच में आया कि कंपनी ने कई संपत्तियां गुप्त तरीके से बेचने की कोशिश की. ED की रेड में ब्लैंक सेल डीड, साइन चेक बुक और आईडी प्रूफ जैसे सिस्टेमैटिक फ्रॉड का पता चला.
अब ED की 20 मार्च 2026 की कार्रवाई निवेशकों को बड़ी उम्मीद लेकर सामने आई. 22,656.91 करोड़ की संपत्तियां जब्त होना ईडी के लिए नया इतिहास है. लेकिन सवाल वही है कि क्या पैसे वापस मिलेंगे? सहारा केस की तरह यहां भी रिकवरी लंबी प्रक्रिया हो सकती है. फिलहाल, सरकार और ED सख्त कार्रवाई कर रही है. छोटे निवेशक अक्सर ऐसी लुभावनी स्कीम में आसानी से फंस जाते हैं, ED की रेड में इतनी बड़ी संपत्ति जब्त होने से उम्मीद है कि पैसा जल्द ही लोगों को मिल सकता है।
