चारधाम यात्रा में दो दिन में चार श्रद्धालुओं की मौत
केदारनाथ में पहले ही दिन एक श्रद्धालु की मौत, मदद को भटकता रहा परिवार, अव्यवस्थाओं की खुली पोल
केदारनाथ में श्रद्धालु की मौत ने खोली सिस्टम की परतें, हार्ट अटैक के बाद मदद को तरसा परिवार,2 घंटे तक धूप में पड़ा रहा शव
KEDARNATH DHAM
केदारनाथ धाम
रुद्रप्रयाग 22 अप्रैल 2026 : केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही जहां एक ओर देशभर से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, तो वहीं दूसरी ओर व्यवस्थाओं के यथार्थ ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है. गुजरात से आए एक श्रद्धालु की हृदयाघात से मौत के बाद उनके परिजनों को जैसे परेशानी और संवेदनहीनता झेलनी पड़ी, उसने पूरी यात्रा व्यवस्था पर प्रश्न खड़े कर दिये हैं.
केदारनाथ में एक श्रद्धालु की मौत: दरअसल, केदारनाथ यात्रा 2026 के पहले ही दिन एक श्रद्धालु की मौत हुई है. गुजरात के बड़ौदा निवासी श्रद्धालु सपरिवार केदारनाथ दर्शन को पहुंचे थे. जहां हृदयाघात से श्रद्धालु दिलीप भाई मनु माली की जान चल गई. परिजनों ने समय पर मेडिकल से लेकर अन्य सुविधा न मिलने का आरोप लगाया है.
पीड़ित श्रद्धालु ने सुनाई अपनी पीड़ा (वीडियो सोर्स- Pilgrims)
“अचानक मेरे पिता की तबीयत बिगड़ी और वे जमीन पर गिर पड़े. हमने तुरंत 100 नंबर पर कॉल किया. हमें कहा गया कि 5-10 मिनट में मदद पहुंच जाएगी, लेकिन डेढ़ घंटे तक कोई नहीं आया. ऐसे में 2 घंटे तक डेड बॉडी खुले और धूप में पड़ी रही. हालात से मजबूर होकर मैंने अपने पिता को खुद पिठू पर लादकर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.”- हेमंत माली, मृतक श्रद्धालु के बेटे
करीब दो घंटे तक हेलीपैड पर पड़ा रहा शव: इतना ही नहीं इसके बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं. आरोप है कि मृतक का शव करीब दो घंटे तक हेलीपैड पर चिलचिलाती धूप में पड़ा रहा. परिजन हेलीकॉप्टर से शव को नीचे भेजने की मांग करते रहे, लेकिन तत्काल कोई व्यवस्था नहीं की गई. अंकुर ने सवाल उठाया कि ‘अगर वीआईपी मूवमेंट के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध हो सकता है, तो एक श्रद्धालु के शव के लिए क्यों नहीं?’
दिल्ली पहुंचाने के लिए मांगे 16 हजार रुपए: हेमंत माली के मुताबिक, मदद मांगने पर परिजनों को एंबुलेंस का नंबर दिया गया, लेकिन आरोप है कि एंबुलेंस संचालक ने शव को दिल्ली एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए 16,000 रुपए की मांग की. शोक में डूबे बेटे ने सवाल किया कि ‘क्या श्रद्धालुओं की मौत के बाद उनके सम्मानजनक अंतिम सफर की कोई व्यवस्था नहीं है?
केदारनाथ में श्रद्धालु की मौत-
दिलीप भाई मनु माली पुत्र नन्नू भाई माली (उम्र 69 वर्ष), निवासी- निकट जीएच बोर्ड, गोरवा सिटी, बड़ोदरा, गुजरात
“आज 22 अप्रैल को श्रद्धालु दिलीप भाई मनु माली की स्वास्थ्य खराब होने के कारण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केदारनाथ में मौत हो गई. ऐसे में मृतक को हेली के माध्यम से पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग भेजा जाना था, लेकिन आज केदारनाथ के लिए हेली सेवाओं की सुरक्षा के मद्देनजर डीजीसीए की ओर से निरीक्षण किया गया. जिससे देरी हुई.”- रुद्रप्रयाग पुलिस
“वहीं, हेली सेवाओं को एनओसी (NOC) दिए जाने के केदारनाथ के लिए हेली सेवाएं सुचारू की गई, जिसके बाद शव को दोपहर 12:30 बजे थंबी हेली से जामू (गुप्तकाशी) भिजवाया गया. वर्तमान में शव को जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में लाकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. केदारनाथ के लिए डीजीसीए की ओर से निरीक्षण किए जाने के बाद ही हेली कंपनियों को उड़ान भरने की अनुमति दी जाती है.”- रुद्रप्रयाग पुलिस
दूसरी ओर उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के सीईओ आशीष चौहान का कहना है कि ‘कंट्रोल रूम को हेलीपैड पर शव होने की शुरुआती जानकारी नहीं थी.’ उनके मुताबिक ‘जैसे ही दोपहर करीब 12 बजे सूचना मिली, 10-15 मिनट के भीतर हेलीकॉप्टर की व्यवस्था कर शव को नीचे पहुंचा दिया गया.’ उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान मेडिकल सुविधाएं और लॉजिस्टिक्स की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होती है.
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब चारधाम यात्रा को लेकर प्रशासन बड़े-बड़े दावे कर रहा है. हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन परिस्थितियों के बीच केदारनाथ पहुंचते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी और समन्वय की विफलता बार-बार उजागर हो रही है. केदारनाथ केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है.
यह परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए सबक: ऐसे में यह घटना सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है कि आस्था के इस मार्ग पर व्यवस्थाओं को भी उतना ही मजबूत बनाना होगा. ताकि, भविष्य में कोई श्रद्धालु या उसका परिवार इस तरह की बेबसी का सामना न करना पड़े.
Rahul Chaudhary
सोनप्रयाग में राहुल चौधरी की मौत (फोटो सोर्स- Family Members)
सोनप्रयाग में भी यूपी के एक श्रद्धालु की हार्ट अटैक से मौत: वहीं, दूसरी ओर यात्रा पड़ाव के सोनप्रयाग में मथुरा निवासी राहुल चौधरी पुत्र भूपाल सिंह उम्र 32 वर्ष की हार्ट अटैक से मौत हो गई. यात्री राहुल कपाट खुलने के मौके पर केदारनाथ धाम दर्शन को आया था.
अचानक से उसकी तबीयत सोनप्रयाग में बिगड़ गई और साथ में आए चाचा बॉबी चौधरी उसे लेकर अस्पताल पहुंचे. यहां डॉक्टरों ने राहुल को मृत घोषित किया. शव का पंचायत नामा भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां कार्रवाई होने के बाद शव को परिजनों को सौंपा गया.
उत्तराखंड चारधाम यात्रा के पहले दिन 2 श्रद्धालुओं की मौत, दूसरे दिन कड़े इंतजामों के बीच हालात रहे काबू
यात्रा के पहले ही दिन यमुनोत्री रूट पर दो तीर्थयात्रियों की मौत, नासिक और इंदौर से आए थे दर्शन करने
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उत्तराखंड में 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा 2026 का हो चुका आगाज,पहले दिन 2 यात्रियों की गई जान, सबक लेकर प्रशासन ने कड़े किए इंतजाम
Gangotri Dham
कितनी सुधरी व्यवस्थाएं (फोटो सोर्स- Information Department)
उत्तराखंड के लिए आर्थिक और धार्मिक रूप से बेहद अहम मानी जाने वाली चारधाम यात्रा 2026 का आगाज हो चुका है. अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए गए. यात्रा के पहले ही दिन से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देवभूमि की ओर उमड़ पड़ी. इस बार यात्रा को लेकर गजब उत्साह देखने को मिल रहा है. जिसकी तस्दीक रजिस्ट्रेशन के आंकड़े कर रहे हैं.
अभी तक 19 लाख से ज्यादा श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं. जो इस यात्रा की व्यापक भक्ति और धार्मिक महत्ता को दर्शा रहा है. धामों के बाहर लंबी कतारें, पहाड़ी रास्तों पर लगातार बढ़ता दबाव और प्रमुख पड़ावों पर यात्रियों का सैलाब, ये संकेत दे रहा है कि इस बार यात्रा अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है.
जहां यह राज्य की आर्थिकी को मजबूती देने वाला कारक है, तो वहीं इतनी विशाल भीड़ की सुरक्षा और व्यवस्थापन प्रशासन के लिए एक कठिन परीक्षा बन चुका है. पहले ही दिन हुई दो मौत ने भी इस यात्रा को चर्चा में ला दिया है.
पहले दिन की दो यात्रियों की मौत, चिंता और संवेदनशीलता बढ़ी: यात्रा के पहले ही दिन यमुनोत्री मार्ग पर सामने आई दो दुखद घटनाओं ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया और व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया. मध्यप्रदेश के इंदौर से आई एक महिला श्रद्धालु की मौत हुई. जबकि, महाराष्ट्र से आए एक बुजुर्ग यात्री ने पैदल मार्ग पर सांस लेने में दिक्कत के चलते दम तोड़ दिया.
ये घटनाएं केवल दुर्घटनाएं भर नहीं हैं, बल्कि इस कठिन और चुनौतीपूर्ण यात्रा के जोखिमों को सामने लाया है. ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी, थकान, बदलता मौसम और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ऐसे कारक हैं, जो थोड़ी सी चूक को भी गंभीर बना सकते हैं. इन हादसों ने ये सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या मौके पर पर्याप्त और त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध थी या नहीं?
Yamunotri Dham
यमुनोत्री धाम (फोटो सोर्स- Information Department)
स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों पर उठे गंभीर सवाल: उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की मानें तो चारधाम यात्रा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 1,350 डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती, 25 मेडिकल रिलीफ पोस्ट, 33 हेल्थ स्क्रीनिंग केंद्र और 177 एंबुलेंस सेवाओं को तैनात किया है. इसके बावजूद पहले ही दिन हुई दो मौतों ने इन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पहाड़ी इलाकों में समय पर चिकित्सा सहायता न मिलना अक्सर जानलेवा साबित होता है. ऐसा पहली बार नहीं है, जब यमुनोत्री मे मौत हुई हो. इससे पहले भी पिछले साल यात्रा के शुरुआत में ही ये धाम मौत और भीड़ की वजह से चर्चाओं में था.
यही स्थिति इस बार इन मामलों में भी देखने को मिली. हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हृदय संबंधी समस्याएं और श्वसन संबंधी आपात स्थितियों से निपटने के लिए ज्यादा विशेषज्ञ डॉक्टरों और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती आवश्यक है. ताकि, जरूरत के समय तत्काल इलाज उपलब्ध कराया जा सके.
प्रशासन का त्वरित एक्शन और सख्त निगरानी व्यवस्था: पहले दिन की घटनाओं के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया और तत्काल प्रभाव से कई सख्त कदम उठाए गए. उत्तरकाशी जिला अधिकारी प्रशांत आर्य की मानें तो पहले दिन यात्रा में ज्यादा भक्त आए हैं और दोनों ही केस में सांस लेने की दिक्कत हुई है.
उन्होंने कहा कि होटल एसोसिएसन के साथ मिलकर बैठक की गई है. जिसमें ये सुनिश्चित किया गया है कि होटल वाले भी देखेंगे कि कौन यात्री स्वास्थ्य जांच के बाद सही है या नहीं. उनसे संवाद किया जाएगा. इसके लिए जानकीचट्टी से अन्य जगहों पर भक्तों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं. डॉक्टरों की टीम को खासकर यमुनोत्री में तैनात किया गया है.
पिछले साल भी हुई थी ऐसी घटना: बता दें कि पिछले साल भी अचानक यमुनोत्री धाम में शुरुआती दिनों में भक्तों का हुजूम उमड़ पता था. जिससे एकाएक व्यवस्थाएं प्रभावित हो गई थी. हालांकि, इसके बाद प्रशासन ने कई तरह की व्यवस्था की थी, लेकिन पिछले साल यमुनोत्री धाम में 6,45,000 श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन कर पूजा अर्चना किए थे.
इससे यमुनोत्री मंदिर समिति को 50 लाख रुपए की आय हुई थी, लेकिन इसके साथ ही 29 लोगों की मौत भी हुई थी. वहीं,. गंगोत्री धाम में 23 लोगों की जान गई थी. जबकि, केदारनाथ में करीब 90 लोगों की मौत और 46 लोगों ने बदरीनाथ की यात्रा में दम तोड़ा. अमूमन सभी मामलों में सांस की समस्या के कारण ही मौत हुई थी.
ये भी हुआ बदलाव: उत्तरकाशी डीएम प्रशांत कुमार आर्य की मानें तो यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में संवेदनशील एवं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पुलिस व आपदा प्रबंधन टीमों की तैनाती बढ़ा दी गई है. यमुनोत्री और गंगोत्री मार्ग पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. साथ ही जोखिम वाले स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है.
घोड़ा-खच्चर संचालन पर नियंत्रण कड़ा किया गया है और उनकी हेल्थ जांच अनिवार्य पहले से ही थी, लेकिन इस पर और निगरानी रखी जा रही है. ताकि, दुर्घटनायें रोकी जा सकें. इसके अलावा यात्रियों की हेल्थ स्क्रीनिंग और कठोर की गई है. भीड़ नियंत्रण को नए ट्रैफिक प्लान लागू किए गए हैं, जिससे यात्रा सुचारु और सुरक्षित बनायी जा सके.
Gangotri Dham
गंगोत्री धाम (फोटो सोर्स- Information Department)
ये भी हैं चुनोती: इसके अलावा गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्गों पर अभी भी कई ऐसे हिस्से हैं, जहां यात्रा अनिश्चित बनी हुई है. यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड जैसे संकरे और खतरनाक मोड़ों पर पत्थर गिरने का खतरा लगातार बना रहता है.
कई स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण काम अधूरा है, जिससे वाहनों और पैदल यात्रियों दोनों को कठिनाई होती है. वहीं, गंगोत्री मार्ग पर धरासू से नालूपानी के बीच भूस्खलन की आशंका बनी है और कुछ हिस्सों में मलबा गिरने से रास्ता बाधित हो जाता है.
दूसरे दिन बेहतर प्रबंधन, नहीं हुई कोई अप्रिय घटना: प्रशासन के कदमों का असर दूसरे ही दिन स्पष्ट दिखा. यात्रा मार्गों पर स्थिति काफी कुछ नियंत्रण में रही और किसी भी प्रकार की दुर्घटना या मौत की सूचना सामने नहीं आई.
श्रद्धालुओं ने भी बेहतर व्यवस्थाओं से राहत महसूस की और यात्रा अपेक्षाकृत सुचारु ढंग से आगे बढ़ती दिखाई दी. हालांकि, भीड़ का दबाव अब भी बना हुआ है, खासकर यमुनोत्री धाम में, लेकिन प्रशासन का मानना है कि भक्तों की सीमा हटाने से भी भीड़ अचानक आई है. फिलहाल, सभी व्यवस्थाएं सही है और सुरक्षा एवं चिकित्सा सुविधाओं में सुधार लगातार हो रहे हैं.
श्रद्धालुओं के लिए सरकार की महत्वपूर्ण सलाह: प्रशासन और सरकार ने अलग-अलग माध्यम से यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को सतर्क रहने एवं आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है. पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि यात्रा से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराना, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में धीरे-धीरे चढ़ाई करना, पर्याप्त पानी और जरूरी दवाइयां साथ रखना अत्यंत आवश्यक है.
इसके साथ ही बदलते मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रा की योजना बनाना भी जरूरी है. विशेष रूप से वृद्ध और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. इसके साथ ही मंत्री ने सफाई व्यवस्था पर भी भक्तों से अपील की है कि वो धामों में साफ सफाई का ध्यान रखें.
अब तक केदारनाथ धाम में 6 लाख 80 हजार 092 श्रद्धालुओं ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है. साथ ही 19 लाख 52 हजार 809 श्रद्धालुओं ने चारों धामों में पंजीकरण करवाया है. बदरीनाथ धाम में 5,75,997, यमुनोत्री धाम में 3,33,689, गंगोत्री धाम में 3,43,359 श्रद्धालुओं ने अपना पंजीकरण करवाया है.
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