6000 किमी दूर फ्रांस, इटली, स्पेन में बवाल, लेकिन कांप रहे निर्यात निर्भर भारत के व्यवसायी 

फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल में अराजकता है. यूरोप में फैली हिंसा से भारत के व्यवसायी टेंशन में हैं. क्‍योंक‍ि एक्सपोर्ट पर मार पड़ रही है. व्यवसायियों को एक्सपोर्ट में 20% गिरावट की आशंका है. प्री-क्रिसमस ऑर्डर में करीब 70% तक की गिरावट आ सकती है. व्यवसायियों का कहना है क‍ि इसके लक्षण अभी द‍िखने लगे हैं. वहां से कम्‍युन‍िकेशन में कमी आई है.

द‍िल्‍ली से तकरीबन 6000 KM दूर फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल में इन द‍िनों आग लगी हुई है. व‍िरोध प्रदर्शनों की वजह से तनाव है. बाजारों में ताला लग रहा है. यह सब देखकर भारत में बैठे तमाम कारोबारी कांप रहे हैं. उन्‍हें डर लग रहा है, क्‍योंक‍ि यही वह वक्‍त है, जब वे अपना माल यूरोप के बाजारों में खपाते हैं. वहां से मोटी आमदनी करते हैं. इन्‍हीं द‍िनों के ल‍िए वे द‍िनरात एक करके मेहनत करते हैं. लेकिन अब यूरोप में बिगड़ते हालात का असर उन पर पड़ने लगा है. खासकर उन एक्सपोर्टर्स की चिंता बढ़ गई है, जो यूरोप और अमेरिका में फर्नीचर, होम फर्निशिंग, हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम जैसे सामान बेचते हैं. कारोबारियों का कहना है कि इस बार क्रिसमस के लिए मिलने वाले ऑर्डर कम हो गए हैं. इससे उनकी कमाई पर असर पड़ने का डर है.

यूरोप में ह‍िंसा की वजह से भारत में असर पड़ने की आशंका.

अक्टूबर का महीना एक्सपोर्ट के लिहाज से काफी अहम होता है. इस दौरान विदेशी खरीदारों से मुलाकात होती है और आने वाले महीनों के लिए ऑर्डर मिलते हैं. लेकिन इस बार यूरोप के कुछ देशों में विरोध-प्रदर्शन और बिगड़ते हालात के बीच कारोबारी परेशान हैं. उन्हें डर है कि अगर ऑर्डर नहीं बढ़े, तो कारोबार को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.
एक्सपोर्ट आर्डर 40% घटे

सीएनबीसी आवाज के साथ बातचीत में नोएडा के एक एक्सपोर्ट हाउस में अलग-अलग कारोबार से जुड़े एक्सपोर्टर्स ने अपनी परेशानियां बताईं. फर्नीचर और दूसरे सामान का एक्सपोर्ट करने वाले एक कारोबारी के मुताबिक, उनके ऑर्डर में करीब 30 से 40 फीसदी की कमी आई है.
यानी पहले जितने ऑर्डर मिलते थे, अब उसके मुकाबले काफी कम ऑर्डर मिल रहे हैं. दूसरी तरफ, सामान भेजने में इस्तेमाल होने वाले कंटेनर और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बढ़ गया है. भारत में कारोबार करने की लागत बढ़ने से एक्सपोर्टर्स के लिए मुनाफा कमाना और मुश्किल हो रहा है. कारोबारियों का कहना है कि एक तरफ विदेशी खरीदार कम ऑर्डर दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सामान बनाने और विदेश भेजने का खर्च बढ़ रहा है. ऐसे में उनके सामने कारोबार चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

क्रिसमस के ऑर्डर पर क्यों टिकी हैं नजरें?

क्रिसमस का मौसम भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बहुत अहम होता है. यूरोप और अमेरिका में इस दौरान घर सजाने, फर्नीचर, कपड़े, हैंडीक्राफ्ट और दूसरे सामान की मांग बढ़ती है. विदेशी कंपनियां पहले से ही इन सामानों के ऑर्डर देती हैं, ताकि त्योहार से पहले उनकी डिलीवरी हो सके.

होम फर्निशिंग और हैंडीक्राफ्ट से जुड़े एक एक्सपोर्टर ने बताया कि अक्टूबर में होने वाले बड़े व्यापार मेलों में यूरोप और अमेरिका के खरीदार आते हैं. इन मेलों के जरिए भारतीय कारोबारियों को नए ग्राहक मिलते हैं और बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद रहती है.
कारोबारियों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में होम फर्निशिंग से जुड़े कारोबार में करीब 92,000 करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट का आंकड़ा रहा. लेकिन इस बार विदेशी खरीदारों की कम दिलचस्पी से चिंता बढ़ गई है. एक कारोबारी ने बताया कि पहले जहां कई विदेशी खरीदार ऑर्डर देने में रुचि दिखाते थे, वहीं इस बार खरीदार कम आ रहे हैं और पूछताछ भी घट गई है.

अमेरिकी टैरिफ से दोहरी मार
भारतीय एक्सपोर्टर्स की परेशानी सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है. अमेरिका में टैरिफ यानी आयात पर लगने वाले शुल्क को लेकर भी कारोबारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. कुछ खरीदारों ने पहले ही अपने ऑर्डर रोक रखे हैं. अब यूरोप से मांग कमजोर होने की चिंता भी बढ़ रही है.
कारोबारियों का कहना है कि अगर विदेशी बाजारों में मांग घटती है, तो इसका सीधा असर भारत से होने वाले एक्सपोर्ट पर पड़ेगा. ऑर्डर कम होने का मतलब है कि फैक्ट्रियों में काम घट सकता है, कारोबार की कमाई कम हो सकती है और कर्मचारियों के काम पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि, हर कारोबारी और हर सेक्टर पर इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है. असली नुकसान इस बात पर निर्भर करेगा कि विदेशी खरीदार कितने ऑर्डर रद्द करते हैं या कितने समय तक रोककर रखते हैं.
सरकार से क्या मदद चाहते हैं एक्सपोर्टर्स?
कारोबारियों ने सरकार से विदेशी बाजारों में भारतीय सामान की मांग बढ़ाने में मदद मांगी है. उनका कहना है कि पहले एक्सपोर्टर्स को विदेशी बाजारों में ग्राहक तलाशने के लिए कुछ सरकारी सहायता मिल जाती थी. इससे वे व्यापार मेलों में हिस्सा ले सकते थे, खरीदारों से मिल सकते थे और नए कारोबार के मौके खोज सकते थे.
अब विदेश में बाजार तलाशने और ग्राहकों से मिलने का खर्च काफी बढ़ गया है. एक कारोबारी के मुताबिक, नए बाजार में संपर्क बनाने और कारोबार बढ़ाने के लिए एक व्यक्ति को ही करीब पांच से छह लाख रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. एक्सपोर्टर्स का कहना है कि जब ऑर्डर कम मिल रहे हैं, तब इतना खर्च करना आसान नहीं है. इसके अलावा, भुगतान मिलने में देरी की समस्या भी कारोबारियों की परेशानी बढ़ा रही है.

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