बिहार में पहला भाजपाई मुख्यमंत्री: सम्राट चौधरी ही क्यों?

Samrat Chaudhary Has Passed Every Test Set By Bjp Leadership With Flying Colors
यूं ही नहीं सम्राट चौधरी के सिर पर सजा ताज, बीजेपी नेतृत्व की हर परीक्षा पर उतरे खरे
भारतीय जनता पार्टी शीर्ष नेतृत्व की ओर से सम्राट चौधरी को बिहार में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व ने काफी मंथन के बाद सम्राट चौधरी पर विश्वास किया। इसके पीछे कई कारण हैं।

पटनाः तो अंततः बीजेपी को बिहार से पहला मुख्यमंत्री बनाना का सौभाग्य मिल ही गया। यह जिम्मेदारी बहुप्रतीक्षित सम्राट चौधरी के कंधे पर सवार हो कर आई। सम्राट चौधरी के इस युग की शुरुआत के साथ ही बीजेपी ने इशारों-इशारों में यह साफ कर दिया कि बीजेपी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद एक बड़ा वोट बैंक लव कुश को साधने की पूरी तैयारी कर ली है। चलिए जानते हैं कि वो कौन सी वजहें हैं जो सम्राट चौधरी को बिहार के नए सम्राट का सेहरा पहना डाला।

बीजेपी नेतृत्व की हर परीक्षा पर खरे उतरे सम्राट चौधरी

सम्राट चौधरी के भीतर लीडरशिप की पूरी पड़ताल

बीजेपी ने यूं ही नहीं सम्राट चौधरी को बिहार का ‘सम्राट’ नहीं बनाया। इसके पहले बीजेपी नेतृत्व ने सम्राट चौधरी के भीतर लीडरशिप की पूरी पड़ताल की। इसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन 3 वजह अहम हैं।

सम्राट चौधरी ने कांग्रेस विधायक मुरारी गौतम और सिद्धार्थ सौरव को NDA में जॉइन कराया वहीं राजद खेमे से संगीता देवी ने पाला बदलकर भाजपा की सदस्यता ली। इसके अलावा प्रहलाद यादव को भी बीजेपी में शामिल कराया।
हाल ही में राज्य सभा की 5 सीटों पर हुए चुनाव के दौरान सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी विधायक एकजुट रहे। विपक्ष की तमाम अटकलों पर विराम लगाया। इसके साथ ही सम्राट चौधरी के नेतृत्व में न तो क्रॉस वोटिंग की गई और न ही किसी ने बीमारी का बहाना बनाकर वोटिंग से खुद को अलग रखा। बीजेपी के किसी विधायक ने सेकंड प्रिफरेंस का वोट भी दूसरे दल के उम्मीदवार को नहीं डाला। इस स्ट्रिक्ट बंधन में बाधने का श्रेय भी सम्राट चौधरी को मिला।
पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव में पांचवीं सीट निकाल लेने का श्रेय भी सम्राट को जाता है। इन्होंने राजद के एक और कांग्रेस के तीन विधायकों को वोटिंग से अनुपस्थित कराने की रणनीति को अंजाम दिलाते असंभव लग रहे पांचवे उम्मीदवार को भी राज्यसभा भेजने का काम किया।

केंद्रीय नेतृत्व के स्क्रिप्ट को हूबहू उतारा

राजनीतिक गलियारों की मानें तो सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद का रिवॉर्ड देने के पीछे की खास वजह यह रही कि राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक्जिट प्लान का जो स्क्रिप्ट केंद्रीय नेतृत्व ने तैयार किया था, उसे अक्षरशः सम्राट चौधरी ने जमीन पर उतारा। राज्यसभा के लिए नीतीश कुमार को राजी करना। राज्यसभा की सदस्यता का शपथ लेना, एमएलसी पद से इस्तीफा और फिर मुख्यमंत्री पद के इस्तीफा तक साये की तरह लगे रहने का यह अवार्ड मुख्यमंत्री पद के रूप में मिला।

सही रणनीति के हकदार

अब इसे महज संयोग तो नहीं कहा जा सकता है कि वह सारी प्रक्रिया जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति से दूर करता है,उसके समापन के बाद खरमास खत्म हो जाता है। यह एक वेल कैलकुलेटेड टास्क को कर लेने का भी अवार्ड है।

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