तलाक बाद ढोल-नगाड़ों के साथ मायके आई जज की बेटी
तलाक के बाद बेटी को ढोल-नगाड़ों के साथ घर लाए रिटायर्ड जज, बोले- उसका सम्मान सबसे पहले
मेरठ:I Love My Bitiya’… तलाक बाद ढोल-नगाड़ों पै नाचे परिजन, रिटायर्ड जज पिता बोले- बोझ नही मेरी बेटी
रिटायर्ड जज पिता ने बेटी का तलाक होने पर नया रिवाज बना दिया. उन्होंने तलाक होने पर न सिर्फ मिठाइयां बांटी,बल्कि बेटी का स्वागत फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़े के साथ किया. इसे स्मरणीय बनाने को पिता और परिवार ने ‘I Lover My Dughter’ और बेटी का फोटो छपी काली चमकती टी-शर्ट भी पहनीं.
ऐसी खबरें भी आती हैं, जिन पर विश्वास मुश्किल होता है कि क्या वाकई समाज में ऐसे लोग भी हैं. मेरठ की एक अलग और सोच बदलने वाली तस्वीर सामने है. यहां एक पिता बड़ी खुशी-खुशी मिठाई बांट रहा है, ढोल नगाड़े बजवा रहा… यह मिठाई किसी परीक्षा में सफलता की नहीं, बल्कि बेटी की नई शुरुआत की खुशी में बंटी है. रिटायर्ड जज पिता ने सामाजिक रूढी को अंगूठा दिखा बेटी का तलाक बाद फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया.
शास्त्रीनगर एल ब्लाक निवासी रिटायर्ड जज डाॅअंक्टर ज्ञानेंद्र शर्मा ने बेटी प्रणिता शर्मा की शादी 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर के कोना याकूबपुर निवासी गौरव अग्निहोत्री से की थीं। गौरव अग्निहोत्री सेना में मेजर हैं, उनकी तैनाती जालंधर में हैं।
गौरव के पिता श्याम किशोर अग्निहोत्री सेना में मेजर सूबेदार पद से रिटायर्ड हैं। आरोप है कि शादी के बाद से ससुराल पक्ष के लोग प्रणिता शर्मा का उत्पीड़न कर रहे थे। सात सालों से प्रणिता ससुराल में उत्पीड़न झेल रही थी।
इसी बीच प्रणिता ने एक बेटे को भी जन्म दिया। उसके बाद भी ससुराल पक्ष के लोगों को उत्पीड़न जारी रहा। तब प्रणिता ने गौरव से तलाक लेने का निर्णय लिया और फैमिली कोर्ट में अर्जी लगाई। शनिवार को कोर्ट ने प्रणिता और गौरव का तलाक मंजूर कर लिया।
थोड़े दिन सब कुछ सही रहा, लेकिन फिर ससुराल में उन्हें प्रताड़ना मिलने लगी.उन्होंने सोचा समय के साथ सब सही हो जाएगा,लेकिन ऐसा नहीं हुआ.समय के साथ प्रताड़ना बढती गई.लंबे समय बाद प्रणिता ने तलाक लेने का फैसला लिया.
प्रणिता का स्वागत करते लोग फोटो वीडियोग्रेप
परिवार ने लोग तलाक के बाद गले में माला डालकर ढोल की थाप पर कोर्ट से प्रणिता को घर लेकर आए। घर की चौखट पर भी बेटी का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। प्रणिता शर्मा शास्त्री नगर स्थित प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं। उन्होंने मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने पिता की वह इकलौती बेटी हैं।
प्रणिता के भाई की साल 2022 में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उसके बाद भी परिवार ने ससुराल में उत्पीड़न का शिकार हुई प्रणिता को संभाला। प्रणिता का कहना है कि मेरा यह निर्णय उन महिलाओं के लिए है, जो शादी के बाद ससुराल में उत्पीड़न झेलती है। उन्हें चाहिए कि खुद को मजबूत कर यह निर्णय लें।
ससुराल में बेटी का उत्पीड़न नहीं होने देंगे
डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा कि बेटी शादी के बाद उत्पीड़न झेल रही हैं, तब पिता का दायित्व बनता है कि उसने अपने घर सम्मान से लेकर आए। हम सिर्फ बेटी को लेकर आए, शादी में दिया गया सामान ससुराल में ही छोड़ दिया। साथ ही समाज को संदेश दे रहे है कि बेटी को भी बेटे की तरह परिवार का सदस्य मानते है। उन्होंने कहा कि बेटी को उत्पीड़न के बाद ससुराल में रहने के लिए मजबूर करना गलत है।
बेटे की मौत पर खोल चुके है लीगल क्लीनिक
डा. ज्ञानेंद्र शर्मा उत्तराखंड के कई जिलों में जज रहे चुके हैं। उनके इकलौते बेटे प्रणव वशिष्ठ ने नेशनल ला यूनिवर्सिटी से ला किया था। एक केस के सिलसिले में चंडीगढ़ हाईकोर्ट गए तो वहां सीढ़ियों से फिसलकर चोट के कारण कोमा में पहुंच गए।
पांच महीने अस्पताल में रहने के बाद मौत हो गई। बेटे के सपने को पूरा करने के लिए सितंबर 2022 में लीगल क्लीनिक खोला गया। ताकि समाज को निशुल्क विधिक सलाह मिले। टूटते परिवारों को बचाने के लिए युवाओं की प्री मैरिज काउंसिलिंग और सेना के रिटायर जवानों को सलाह दें।
अब जाकर जब तलाक मिल गया तो रिटायर्ड जज पिता ने एक जश्न मनाया. बेटी का फूल माला से स्वागत किया. कचहरी परिसर में ढोल नगाड़ों की छाप पर परिवार के लोगों ने जमकर डांस भी किया. मिठाइयां बांटी. रिटायर्ड पिता ने अपनी बेटी का हौसला बढ़ाने के लिए यह सब किया. उन्होंने कहा कि अगर रिश्ता खुशियां न दे, तो उससे बाहर आना ही सही है. पिता का सबसे बड़ा कर्तव्य है अपनी बेटी की मुस्कान.
उन्होंने कहा कि हमें कोई पैसा नहीं चाहिए था. बस अपनी बेटी सुरक्षित चाहिए थी और खुश. बिना किसी एल्युमनी, बिना किसी सामान के लिए दावा ठोका. केवल बेटी को घर वापस लाया गया है. मेरठ के कचहरी परिसर में इस परिवार की अनोखी खुशी देखकर लोगों ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए.
मेरठ में सेवानिवृत्त जिला जज डॉक्टर ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी बेटी के तलाक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे कोर्ट से ढोल-नगाड़ों के साथ घर लेकर आए। उन्होंने सामाजिक रिवाज तोड़ दिया। पिता ने कहा कि सिर्फ अपनी बेटी को सम्मान के साथ वापस लाया हूं।
Retired Judge Brings Daughter Home with Drums and Trumpets After Her Divorce
बेटी को ढोल-नगाड़ों के साथ घर लाए सेवानिवृत्त जज
शास्त्रीनगर निवासी उत्तराखंड कैडर के सेवानिवृत्त जिला जज डॉक्टर ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा की चर्चा पूरे शहर में है। अपनी बेटी प्रणिता वशिष्ठ के तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर डॉक्टर ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा उसे ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ कोर्ट से घर लेकर आए।
डॉक्टर शर्मा ने बेटी की घर वापसी को स्वाभिमान उत्सव में बदल दिया। कोर्ट से घर तक के रास्ते में ढोल बजाए गए नाच-गाना हुआ और बेटी को फूल-मालाएं पहनाकर उसका स्वागत हुआ। डॉक्टर शर्मा ने कहा कि बेटी का सम्मान ससुराल की प्रताड़ना सहने में नहीं बल्कि सिर उठाकर वापस अपने आंगन में आने में है। डॉक्टर शर्मा ने स्पष्ट कहा कि मैंने कोई एलिमनी या धन-दौलत नहीं मांगी मैं सिर्फ अपनी बेटी वापस लाया हूं। बेटी कोई सामान नहीं है कि उसे कहीं भी छोड़ आए, उसका सम्मान सबसे पहले है।
सक्षम है बेटी प्रणिता
मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट प्रणिता वशिष्ठ वर्तमान में तेजगढ़ी चौराहे स्थित प्रणव वशिष्ठ जुडिशल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। वर्ष 2022 में उनके भाई सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रणव वशिष्ठ का चंडीगढ़ में एक दुर्घटना में सिर में गंभीर चोट लगने से निधन हो गया। भाई की स्मृति में ही अकादमी स्थापित की गई। यह शिक्षा और न्याय क्षेत्र में शहर के जरूरतमंद लोगों को सुगम केंद्र है।
सामाजिक नई प्रेरणा
रिटायर्ड जज डॉक्टर ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा का निर्णय विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सराहा है। शहर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि नारी सशक्तिकरण केवल भाषणों में नहीं, बल्कि ऐसे ही ठोस कदमों से आता है। डॉक्टर शर्मा की इस पहल ने उन अभिभावकों को नई राह दिखाई है जो सामाजिक लोक-लाज के डर से अपनी बेटियों को नरकीय जीवन जीने को मजबूर छोड़ देते हैं।
कानपुर:पिता हो तो ऐसा, ससुरालियों ने तंग की बेटी तो ढोल-नगाड़े बजवाकर धूमधाम से ले आए घर वापस
उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक पिता ने जिस तरह धूम-धाम से अपनी बेटी को विदा किया था, ठीक उसी तरह उसे वापस घर लेकर आए. बेटी के घर लौटने पर पिता ने धूमधाम से जश्न भी मनाया.
उत्तर प्रदेश के कानपुर से दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है. कानपुर के एक पिता ने समाज की परंपराओं की बेड़ियों को तोड़कर ऐसा काम कर दिखाया जो किसी ने कभी सोचा भी नहीं होगा. आमतौर पर शादी के बाद दुल्हन की विदाई बड़े धूम-धाम से होती है, लेकिन यहां एक पिता ने अपनी 36 साल की बेटी की तलाक के बाद घर वापसी पर ढोल बजाकर उसका स्वागत किया. आए दिन ऐसी खबरें आती हैं कि बेटी ने ससुराल वालों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली, फांसी लगा ली, आदि. पर आज एक पिता ने ऐसा काम कर दिखाया कि अगर हर पिता इस तरह से सोचने लगे तो कल को कोई भी बेटी आत्महत्या को मजबूर नहीं होगी. 


ढोल बजाकर किया बेटी का स्वागत
कानपुर के अनिल कुमार बीएसएनएल कंपनी में हैं. आजकल जहां बेटियों को पराया धन माना जाता है, वहां उन्होंने अपनी बेटी ऊर्वी के तलाक के बाद घर वापसी को उत्सव बना दिया. वह ढोल बजाते बेटी मायके लेकर आए. पिता ने कहा कि जिस बेटी को बहू बनाकर उसके ससुराल भेजा था, अब उसे फिर बेटी बनाकर घर लाए हैं. अब बेटी और पांच साल की नातिन की जिम्मेदारी वह खुद उठाएंगे. दरअसल, ऊर्वी के ससुराल वाले उसे परेशान करते थे, जिसके बाद उसके पिता धूम-धाम से नाचते हुए अपनी बेटी वापस अपने घर ले आए।
कानपुर में पिता अपनी बेटी ढोल नगाड़े के साथ ससुराल से मायके लेकर आया। जैसे बेटी की विदाई की थी उसी शान से उसे वापस अपने घर ले आया, युवती जो चुनरी पहन कर ससुराल गई थी उसे ससुराल के गेट पर बांध दिया। दहेज को लेकर युवती को प्रताड़ित कर रहे थे ससुराली। @Aloktripath410 pic.twitter.com/iSCyWTijwJ — Shyam Tiwari (@Shyamtiwariknp) April 29, 2024
पति ने बेटी होने पर दिया तलाक
लोग बेटी को पराया धन समझते हैं. शादी होने पर बेटी के ससुराल को ही उसका असली घर समझा जाता है. लेकिन इन सबके बीच कानपुर के अनिल कुमार ने इन सभी बातों को अमान्य कर दिया. उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि समाज में संदेश जाए और लोग अपनी बेटियों की शादी के बाद आंख बंद करने के बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें. जब शादी के कुछ समय बाद ऊर्वी ने बेटी को जन्म दिया तो उसके पति ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया. जहां एक पिता ने बेटी होने पर ऐसा बर्ताव किया, वहीं ऊर्वी के पिता ने एक अनुकरणीय उदाहरण बना दिया. इस प्यार भरे स्वागत का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रहा है. वीडियो में ऊर्वी की घर वापसी की रस्में पूरा होते देखी जा सकती हैं, ढोल की धमाकेदार आवाज पूरे मोहल्ले में गूंज रही है. ऐसा ही एक प्रकरण रांची से आया था जहां पिता प्रेम गुप्ता ने भी अपनी बेटी को ससुराल में प्रताड़ित किए पर धूमधाम से बैंड-बाजे से अपने घर स्वागत किया था.
अगर हर बेटी के पिता ऐसा सोचने लगें और अपनी बेटियों की परेशानियों को समझकर उनका साथ देंगें, तो दुनियाभर में कोई भी लड़की ससुराल में प्रताड़ित होने या किसी भी दूसरी परेशानी से परेशान होकर आत्महत्या की बजाए अपने घर अपनी हालत बताएगी. एक कदम चलने से ही बदलाव लिखा जाता है. देश को ऐसे ही पिताओं की जरूरत है जो बेटी को पराया धन मानकर उन्हें ससुराल में मरने न छोड़े, बल्कि उनके हालत को समझ इज्जत से वापस घर ले आयें।

